चेहराकलां प्रखंड में स्थित हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर इस वर्ष भी वार्षिक चादरपोशी का कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। हर साल की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई। इस अवसर पर एक दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया, जहाँ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद रहीं। मजार के गद्दीनीश अनुल शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 70 सालों से इस मजार पर चादरपोशी की परंपरा चली आ रही है। उनका कहना है कि जो लोग सच्चे मन से दुख की घड़ी में मकदुम शाह जलालुद्दीन को याद करते हैं, उनकी सभी मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। इस मजार पर सभी समुदायों के लोग चादरपोशी करने आते हैं। अनुल शाह ने आगे बताया कि पूर्वजों के अनुसार, मकदुम शाह जलालुद्दीन दीन-दुखियों की सेवा करते थे, और आज भी लोगों में उनके प्रति अटूट आस्था बनी हुई है, यही कारण है कि सभी समुदाय के लोग यहाँ चादरपोशी करने आते हैं। यहाँ तक कि तालसेहान, भरोखड़ा, सेहान, और मुजफ्फरपुर जिले के पैतरापुर सहित अन्य कई स्थानों से भी लोग गाजे-बाजे के साथ चादर चढ़ाने आते हैं। इस पूरे आयोजन में मजार कमेटी के सामाजिक कार्यकर्ता बेहद सक्रिय रहे, जबकि स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था ने भी भीड़ नियंत्रण में अपनी चाक-चौबंद भूमिका निभाई। कुल मिलाकर, हज़ारों लोगों ने हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर चादरपोशी की, जिनकी मान्यता है कि उनकी मन मुरादें पूरी हुई हैं।
चेहराकलां प्रखंड में स्थित हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर इस वर्ष भी वार्षिक चादरपोशी का कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। हर साल की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई। इस अवसर पर एक दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया, जहाँ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद रहीं। मजार के गद्दीनीश अनुल शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 70 सालों से इस मजार पर चादरपोशी की परंपरा चली आ रही है। उनका कहना है कि जो लोग सच्चे मन से दुख की घड़ी में मकदुम शाह जलालुद्दीन को याद करते हैं, उनकी सभी मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। इस मजार पर सभी समुदायों के लोग चादरपोशी करने आते हैं। अनुल शाह ने आगे बताया कि पूर्वजों के अनुसार, मकदुम शाह जलालुद्दीन दीन-दुखियों की सेवा करते थे, और आज भी लोगों में उनके प्रति अटूट आस्था बनी हुई है, यही कारण है कि सभी समुदाय के लोग यहाँ चादरपोशी करने आते हैं। यहाँ तक कि तालसेहान, भरोखड़ा, सेहान, और मुजफ्फरपुर जिले के पैतरापुर सहित अन्य कई स्थानों से भी लोग गाजे-बाजे के साथ चादर चढ़ाने आते हैं। इस पूरे आयोजन में मजार कमेटी के सामाजिक कार्यकर्ता बेहद सक्रिय रहे, जबकि स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था ने भी भीड़ नियंत्रण में अपनी चाक-चौबंद भूमिका निभाई। कुल मिलाकर, हज़ारों लोगों ने हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर चादरपोशी की, जिनकी मान्यता है कि उनकी मन मुरादें पूरी हुई हैं।
- BPSC शिक्षिका पति और बच्चे को छोड़कर प्रेमी के संग रहने को तैयार है देखिए पति ने क्या बोला BPSC शिक्षिका पति और बच्चे को छोड़कर प्रेमी के संग रहने को तैयार है देखिए पति ने क्या बोला हाजीपुर वैशाली1
- यह बात समझने योग्य है कि कोई भी परिवार हो या संगठन, वह एक-दूसरे के सहयोग से चलता है, न कि किसी का इस्तेमाल करने से। इस महत्वपूर्ण सीख को राजनीति से ग्रहण किया जाना चाहिए, क्योंकि राजनीतिक विरोधी हमेशा इस फिराक में रहते हैं कि आपके अपनों को ही माध्यम बनाकर आपको बुलंदी से गिरा दें। जब किसी परिवार, संगठन या नेतृत्व में सहयोग की जगह एक-दूसरे का इस्तेमाल और खींचतान शुरू हो जाती है, तो इसका सीधा और अक्सर बड़ा फायदा विरोधी उठा लेते हैं। देश की राजनीति में ऐसे उदाहरणों की भरमार है, जो इस सच्चाई को प्रमाणित करते हैं। इसलिए, यह समय रहते समझना आवश्यक है कि वास्तविक शक्ति एकता में निहित है, न कि आपसी टकराव में, क्योंकि अपनों की लड़ाई का लाभ अंततः तीसरे पक्ष को ही मिलता है।1
- चेहराकलां प्रखंड में स्थित हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर इस वर्ष भी वार्षिक चादरपोशी का कार्यक्रम शुक्रवार को संपन्न हुआ। हर साल की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में लोगों ने मजार पर चादर चढ़ाई। इस अवसर पर एक दिवसीय मेले का भी आयोजन किया गया, जहाँ भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्थाएँ चाक-चौबंद रहीं। मजार के गद्दीनीश अनुल शाह ने जानकारी देते हुए बताया कि लगभग 70 सालों से इस मजार पर चादरपोशी की परंपरा चली आ रही है। उनका कहना है कि जो लोग सच्चे मन से दुख की घड़ी में मकदुम शाह जलालुद्दीन को याद करते हैं, उनकी सभी मन की मुरादें पूरी हो जाती हैं। इस मजार पर सभी समुदायों के लोग चादरपोशी करने आते हैं। अनुल शाह ने आगे बताया कि पूर्वजों के अनुसार, मकदुम शाह जलालुद्दीन दीन-दुखियों की सेवा करते थे, और आज भी लोगों में उनके प्रति अटूट आस्था बनी हुई है, यही कारण है कि सभी समुदाय के लोग यहाँ चादरपोशी करने आते हैं। यहाँ तक कि तालसेहान, भरोखड़ा, सेहान, और मुजफ्फरपुर जिले के पैतरापुर सहित अन्य कई स्थानों से भी लोग गाजे-बाजे के साथ चादर चढ़ाने आते हैं। इस पूरे आयोजन में मजार कमेटी के सामाजिक कार्यकर्ता बेहद सक्रिय रहे, जबकि स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था ने भी भीड़ नियंत्रण में अपनी चाक-चौबंद भूमिका निभाई। कुल मिलाकर, हज़ारों लोगों ने हज़रत मकदुम शाह जलालुद्दीन खाजेचांद छपड़ा के मजार पर चादरपोशी की, जिनकी मान्यता है कि उनकी मन मुरादें पूरी हुई हैं।1
- 30 मई को सरई बाजार में एक भव्य कलश यात्रा का आयोजन किया गया। इस धार्मिक यात्रा के दौरान, पूरा क्षेत्र ‘भोलेनाथ की जय’ के जयघोष से गूंज उठा, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।1
- संसद में सांसद संजय सिंह ने एक बेहद दमदार और ओजस्वी भाषण दिया है। इस संबोधन को अत्यंत प्रभावी बताया जा रहा है, और विशेष रूप से इसके अंतिम भाग को महत्वपूर्ण करार देते हुए, लोगों से इसे अंत तक देखने का आग्रह किया गया है।1
- कुढ़नी के तुर्की थाना क्षेत्र के दुबियाही में दो युवकों की डूबने से मौत हो गई है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँच गई और मामले की जाँच में जुट गई है। कुढ़नी मुखिया संघ के अशोक राय ने इस दुखद घटना की जानकारी दी।1
- चाँदपुर गाँव के लोग इन दिनों पानी न मिलने की समस्या से बेहद परेशान हैं। ग्रामीण पानी की किल्लत के कारण कई तरह की परेशानियों का सामना कर रहे हैं।1
- Post by Ankesh Thakur1