एक हाईवा के ताला-पनपथा मार्ग पर ब्रेक डाउन होने से घंटों बाधित हुआ आवागमन, भीषड़ गर्मी में वनमार्ग में फंसे लोग परेशान। *ताला–पनपथा मार्ग पर 4 घंटे से ठप रफ्तार: हाइवा ब्रेकडाउन बना वजह, लापरवाही ने बढ़ाया संकट* *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी-उमरिया)* ताला–पनपथा मार्ग पर रविवार सुबह 8 बजे से लगा जाम दोपहर 12:30 बजे तक भी नहीं खुल पाया। एक हाइवा के बीच सड़क खराब होने से शुरू हुई समस्या, सिंगल रोड और अधूरी पटरी के कारण विकराल रूप लेती गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक उदासीनता पर खड़ा हो रहा है। मौके पर न तो पुलिस की सक्रिय मौजूदगी दिखी, न ही वन विभाग का कोई अमला। नतीजा—हजारों की संख्या में फंसे लोग 42 डिग्री की झुलसाती गर्मी में बेहाल रहे। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं पानी के लिए तरसते नजर आए, कई लोग मजबूरी में जंगल की ओर भटकते दिखे और पेड़ों की छांव में बैठकर राहत तलाशते रहे। स्थिति और चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि यह पूरा इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में जाम में फंसे लोगों का जंगल की ओर जाना, जंगली जानवरों के खतरे को भी बढ़ा रहा है। इसके बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे तीखा सवाल यहीं से उठता है—चार घंटे से ज्यादा समय तक जाम लगा रहा, लेकिन जिम्मेदार महकमा मौके से गायब क्यों रहा? क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई पूर्व योजना नहीं? एक सामान्य ब्रेकडाउन ने पूरे सिस्टम की तैयारी की पोल खोल दी। यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। जब हालात इतने बिगड़ जाएं कि लोग पानी के लिए जंगल की ओर भटकने लगें, और फिर भी प्रशासन हरकत में न आए—तो यह सीधे-सीधे जवाबदेही का मुद्दा बनता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
एक हाईवा के ताला-पनपथा मार्ग पर ब्रेक डाउन होने से घंटों बाधित हुआ आवागमन, भीषड़ गर्मी में वनमार्ग में फंसे लोग परेशान। *ताला–पनपथा मार्ग पर 4 घंटे से ठप रफ्तार: हाइवा ब्रेकडाउन बना वजह, लापरवाही ने बढ़ाया संकट* *(आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी-उमरिया)* ताला–पनपथा मार्ग पर रविवार सुबह 8 बजे से लगा जाम दोपहर 12:30 बजे तक भी नहीं खुल पाया। एक हाइवा के बीच सड़क खराब होने से शुरू हुई समस्या, सिंगल रोड और अधूरी पटरी के कारण विकराल रूप लेती गई। लेकिन सबसे बड़ा सवाल प्रशासनिक उदासीनता पर खड़ा हो रहा है। मौके पर न तो पुलिस की सक्रिय मौजूदगी दिखी, न ही वन विभाग का कोई अमला। नतीजा—हजारों की संख्या में फंसे लोग 42 डिग्री की झुलसाती गर्मी में बेहाल रहे। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं पानी के लिए तरसते नजर आए, कई लोग मजबूरी में जंगल की ओर भटकते दिखे और पेड़ों की छांव में बैठकर राहत तलाशते रहे। स्थिति और चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि यह पूरा इलाका वन क्षेत्र से सटा हुआ है। ऐसे में जाम में फंसे लोगों का जंगल की ओर जाना, जंगली जानवरों के खतरे को भी बढ़ा रहा है। इसके बावजूद वन विभाग की निष्क्रियता गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे तीखा सवाल यहीं से उठता है—चार घंटे से ज्यादा समय तक जाम लगा रहा, लेकिन जिम्मेदार महकमा मौके से गायब क्यों रहा? क्या आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई पूर्व योजना नहीं? एक सामान्य ब्रेकडाउन ने पूरे सिस्टम की तैयारी की पोल खोल दी। यह सिर्फ चूक नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। जब हालात इतने बिगड़ जाएं कि लोग पानी के लिए जंगल की ओर भटकने लगें, और फिर भी प्रशासन हरकत में न आए—तो यह सीधे-सीधे जवाबदेही का मुद्दा बनता है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग इस लापरवाही पर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर हर बार की तरह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
- सर्विस रिवाल्वर लूटकर फरार हुए थे बदमाश, पुलिस ने कसा शिकंजा अनूपपुर जिले की सरई चौकी क्षेत्र में हुए सनसनीखेज हमले के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। चौकी प्रभारी मंगला दुबे और प्रधान आरक्षक रामप्रसाद मरावी पर प्राणघातक हमला कर उनकी सर्विस रिवाल्वर लूटकर फरार हुए अज्ञात बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया था। पुलिस ने तत्काल टीम गठित कर आरोपियों की तलाश शुरू की और लगातार दबिश के बाद सभी आरोपियों को पकड़ लिया गया। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया था, लेकिन पुलिस की सक्रियता के आगे उनकी एक नहीं चली। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ जारी है और मामले में अन्य खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। 🔺 पुलिस की त्वरित कार्रवाई से बड़ा संदेश—अपराधियों की अब खैर नहीं!1
- Post by मीडिया1
- सतना - रील बनाने के दौरान होते होते टल गया बड़ा हादसा सफारी गाड़ी में स्टंट कर रहे थे चार नाबालिग, अचानक अनियंत्रित होकर ब्रिज में लटकी सफारी गाड़ी, नागौद के वसुधा मन्दिर के पास स्थित ब्रिज पुल की घटना।1
- Post by Sharda Shrivastava1
- super1
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- 12लोग गंभीर रूप से घायल, जिला अस्पताल में इलाज जारी1
- Post by Sumit Singh Chandel1
- सतना में एंबुलेंस मरीजों के लिए खतरे से खाली नहीं, एंबुलेंस मेंटिनेंस के नाम पर प्रशासन को ठेंगा सतना। एंबुलेंस संविदाकार का आतंक जारी है। इन्हें सिर्फ अपनी कमाई से मतलब है। मरीजों की जान से इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। शुक्रवार की शाम एक एंबुलेंस में कुपोषण से गंभीर बीमारी से ग्रसित बच्चे को रीवा रेफर किया गया। और जिस एंबुलेंस से मासूम को रेफर किया गया उसमें गेट नहीं बंद होता सकता था। एंबुलेंस में तारबाड़ी करके गेट को बंद किया गया। इसके साथ ही एंबुलेंस के अंदर लाइट भी बंद थी। यानी अंधेरे में मासूम को रीवा ले जाया गया। मेंटीनेंस के नाम पर एंबुलेंस संविदाकार केवल अपना कोरम पूरा कर रहे हैं। वही दूसरी ओर मरीजों के जान से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके पूर्व में रामनगर से रेफर मरीज को जिला अस्पताल जिस एंबुलेंस से लाया गया था। उसका भी गेट खोलने के लिए चालक को खिड़की से अंदर जाना पड़ा था। स्वास्थ्य विभाग की ये बड़ी लापरवाही किसी दिन बड़ा हादसा बनकर सामने आएगी।1