स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को लोकनाथ चौराहा स्थित प्रयागराज चौक देशभक्ति के रंग में डूब गया। प्रयाग सर्राफा मंडल के तत्वावधान में ‘एक शाम शहीदों #तिरंगे की रोशनी में नहाया, ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब __________________________ प्रयागराज। 15 अगस्त 2026/ #स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को लोकनाथ चौराहा स्थित प्रयागराज चौक देशभक्ति के रंग में डूब गया। प्रयाग सर्राफा मंडल के तत्वावधान में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। #हाथों में तिरंगा लिए सैकड़ों लोगों ने श्रद्धांजलि रैली निकाली। रैली में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हुए। तिरंगे से सजी सड़कों पर ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के नारों से माहौल गूंज उठा। #शहीदों की याद में मोमबत्तियां जलाकर दो मिनट का मौन रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि आज हम जो आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वह शहीदों के त्याग का परिणाम है। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को बलिदान की गाथाओं से जोड़ना और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना है। #कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष संजय वर्मा, महामंत्री विजय सोनी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह ‘लाली सरदार’, मंत्री हसीन अहमद, इंद्रनाथ वर्मा, हरीश वर्मा सहित व्यापारी और बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। #प्रयाग सर्राफा मंडल की इस पहल ने स्वतंत्रता दिवस की शाम को शहीदों के सम्मान से यादगार बना दिया...!! रंजीत कुमार सोनकर (प्रधान संपादक) क्राइम एक्सपर्ट न्यूज़
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को लोकनाथ चौराहा स्थित प्रयागराज चौक देशभक्ति के रंग में डूब गया। प्रयाग सर्राफा मंडल के तत्वावधान में ‘एक शाम शहीदों #तिरंगे की रोशनी में नहाया, ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम में उमड़ा जनसैलाब __________________________ प्रयागराज। 15 अगस्त 2026/ #स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शनिवार को लोकनाथ चौराहा स्थित प्रयागराज चौक देशभक्ति के रंग में डूब गया। प्रयाग सर्राफा मंडल के तत्वावधान में ‘एक शाम शहीदों के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। #हाथों में तिरंगा लिए सैकड़ों लोगों ने श्रद्धांजलि रैली निकाली। रैली में बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी शामिल हुए। तिरंगे से सजी सड़कों पर ‘भारत माता की जय’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘जय हिंद’ के नारों से माहौल गूंज उठा। #शहीदों की याद में मोमबत्तियां जलाकर दो मिनट का मौन रखा गया। वक्ताओं ने कहा कि आज हम जो आजाद भारत में सांस ले रहे हैं, वह शहीदों के त्याग का परिणाम है। इस आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को बलिदान की गाथाओं से जोड़ना और राष्ट्रप्रेम की भावना को मजबूत करना है। #कार्यक्रम में मंडल अध्यक्ष संजय वर्मा, महामंत्री विजय सोनी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष हरेंद्र सिंह ‘लाली सरदार’, मंत्री हसीन अहमद, इंद्रनाथ वर्मा, हरीश वर्मा सहित व्यापारी और बड़ी संख्या में शहरवासी मौजूद रहे। #प्रयाग सर्राफा मंडल की इस पहल ने स्वतंत्रता दिवस की शाम को शहीदों के सम्मान से यादगार बना दिया...!! रंजीत कुमार सोनकर (प्रधान संपादक) क्राइम एक्सपर्ट न्यूज़
- भाजपा मंडल चक कार्यकर्ताओं ने जनता मे दिया शांति भाईचारे का संदेश1
- ई रिक्शा चालकों ने चंदा कर भरा सड़क का गड्ढा,निर्माण की मांग प्रयागराज: शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के शिवराजपुर-शंकरगढ़ मार्ग पर शिवराजपुर पुलिया के बगल सड़क पर काफी दिनों से बड़े बड़े गड्ढे बन गए थे जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। गड्ढे की चपेट में आकर आए दिन दोपहिया और तीनपहिया वाहन चालक गिरकर चुटहिल हो रहे थे। स्थानीय लोगों के मुताबिक,कई बार ऑटो के पलटने की घटनाएं भी हो चुकी हैं। सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों और वाहन चालकों ने कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से शिकायत की,लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका। विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से नाराज होकर स्थानीय आकाश, राज सोनी, सत्येंद्र दुबे, शेखर दुबे, लाला, राममिलन, राजा, आसिफ खान, शिवम आदि ई रिक्शा चालकों ने चंदा करके खुद ही सड़क के गड्ढों को भरने का बीड़ा उठाया। ई-रिक्शा चालकों ने पत्थर और मिट्टी डालकर गड्ढों को भर दिया, जिससे मार्ग पर आवागमन कुछ हद तक सुगम हो गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यस्त मार्ग होने के बावजूद सड़क की मरम्मत को लेकर विभाग द्वारा गंभीरता नहीं दिखाई गई। ई-रिक्शा चालकों की इस पहल की क्षेत्रीय लोगों ने सराहना की है। साथ ही लोगों ने लोक निर्माण विभाग से मार्ग की स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की स्थिति उत्पन्न न हो।1
- *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल* *स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है?* भिलोर/बारा, प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?1
- धूमनगंज में 8 साल पहले भी एक वीडियो वायरल हुई थी जिसमें हिस्ट्रीशीटर नविल अहमद गाड़ी के प्रयागराज। 16 अगस्त 2026/ धूमनगंज में 8 साल पहले भी एक वीडियो वायरल हुई थी जिसमें हिस्ट्रीशीटर नविल अहमद गाड़ी के बोनट पर पिस्टल लहराते हुए नजर आ रहा है वीडियो वायरल होने के बाद धूमनगंज पुलिस ने कार्यवाही करते हुए गिरफ्तार कर लिया था। हिस्ट्रीशीटर नविल अहमद का इतिहास बहुत पुराना है अपने साथियों के साथ किसी को भी जान से मारने की धमकी देना और जानलेवा हमला करना पुरानी आदत है। नए वीडियो जो 13 अगस्त 2026 का है जान से मारने के इरादे से गोली चलाते हुए नजर आ रहा है। आइए आपको 8 साल पुरानी वायरल वीडियो को दिखलाते हैं और 8 साल पहले पुलिस ने क्या कार्रवाई करी थी वो भी आपको सुनाते हैं...!! रंजीत कुमार सोनकर (प्रधान संपादक) क्राइम एक्सपर्ट न्यूज़1
- इस खतरनाक टईलैंड का बहुत बड़ा कल कहां जाता है देखने के लिए लोग काफी संख्या में नजर आ रहे हैं2
- दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल दो किलोमीटर की सड़क, गिट्टी सिर्फ तीन सौ मीटर! बाकी हिस्से में डामरीकरण की तैयारी, भिलोर में निर्माण कार्य ने खड़े किए बड़े सवाल स्वीकृत धनराशि से लेकर तकनीकी मानक तक सवालों के घेरे में—ग्रामीण बोले, पहले पूरी सड़क की गिट्टी बिछे, फिर हो डामरीकरण; जिम्मेदार विभाग बताए आखिर बाकी सड़क का हिसाब क्या है? प्रयागराज। लालापुर से प्रतापपुर मार्ग से भिलोर गांव की ओर जाने वाली करीब दो किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण को लेकर मौके की स्थिति ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शनिवार को मीडिया की पड़ताल में जो तस्वीर सामने आई, उसके मुताबिक करीब दो किलोमीटर की सड़क में आधार तैयार करने के लिए बड़ी गिट्टी का कार्य महज लगभग तीन सौ मीटर के आसपास ही दिखाई दे रहा है, जबकि शेष हिस्से में पूरी सड़क पर एकसमान गिट्टी बिछी नजर नहीं आती। कहीं गड्ढों में थोड़ी-थोड़ी गिट्टी डाली गई है तो कहीं पुरानी डामर की परत को उखाड़कर उसी सतह पर नया डामरीकरण कराने की तैयारी दिखाई दे रही है। यही अंतर अब सड़क निर्माण की गुणवत्ता से आगे बढ़कर स्वीकृत प्राक्कलन, कार्य की वास्तविक मात्रा और सरकारी धनराशि के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा कर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि करीब दो किलोमीटर सड़क का निर्माण स्वीकृत है और निर्माण में गिट्टी की निर्धारित परत का प्रावधान है तो फिर गिट्टी का काम केवल लगभग तीन सौ मीटर तक सीमित क्यों दिखाई दे रहा है? बाकी लगभग एक किलोमीटर सात सौ मीटर सड़क के लिए निर्धारित निर्माण प्रक्रिया कहां है? क्या उस हिस्से में पहले से मौजूद सड़क की सतह को ही आधार मानकर सीधे डामरीकरण कराया जाएगा? यदि ऐसा है तो क्या यह तकनीकी रूप से स्वीकृत है? और यदि स्वीकृति में पूरी सड़क को निर्धारित स्तर तक तैयार करने का प्रावधान है तो फिर मौके पर उसका पालन क्यों नहीं दिख रहा? ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने ठेकेदार से स्पष्ट रूप से कहा कि पहले पूरी सड़क पर आवश्यक गिट्टी डलवाई जाए और उसके बाद डामरीकरण कराया जाए, लेकिन उनकी आपत्ति के बावजूद निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल उस सूचना-पट्ट का भी है, जिससे जनता को यह पता चल सके कि सड़क किस योजना से स्वीकृत हुई, इसकी कुल लागत कितनी है, लंबाई कितनी स्वीकृत है, कार्यदायी संस्था कौन है, ठेकेदार कौन है, कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तिथि क्या है तथा इसकी निगरानी किस तकनीकी अधिकारी के जिम्मे है। मौके पर यदि ऐसा बोर्ड नहीं है तो इसकी पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क फरवरी महीने में स्वीकृत होने की बात सामने आई थी, लेकिन लगभग छह महीने तक निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब जब काम शुरू हुआ है तो करीब दो किलोमीटर की सड़क में महज लगभग तीन सौ मीटर हिस्से में गिट्टी बिछाने और शेष हिस्से में पुराने आधार पर काम बढ़ाने की स्थिति ने ग्रामीणों की नाराजगी बढ़ा दी है। ऐसे में अब सवाल केवल ठेकेदार की कार्यशैली का नहीं, बल्कि कार्यदायी संस्था, संबंधित अवर अभियंता, सहायक अभियंता, अधिशासी अभियंता और निगरानी करने वाले अधिकारियों की जिम्मेदारी का भी है। यदि कार्य की माप पुस्तिका में पूरी सड़क का काम दर्ज होता है तो मौके पर उसकी भौतिक स्थिति से मिलान होना चाहिए। यदि अभी भुगतान नहीं हुआ है तो भुगतान से पहले तकनीकी जांच और माप सत्यापन होना चाहिए, और यदि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है तो स्वीकृत प्राक्कलन के प्रत्येक मद का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाना चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा, मुख्य विकास अधिकारी हर्षिका सिंह, उप जिलाधिकारी बारा, तहसीलदार बारा, संबंधित खंड विकास अधिकारी तथा संबंधित निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और तकनीकी अधिकारियों के स्तर से स्थलीय जांच कराया जाना आवश्यक है। जांच में सड़क की वास्तविक लंबाई, चौड़ाई, गिट्टी की मोटाई, गिट्टी की मात्रा, डामर की मोटाई, प्रयुक्त सामग्री, स्वीकृत लागत, कार्य की माप पुस्तिका और मौके पर हुए निर्माण का मिलान कराया जाए तो स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है। यदि दो किलोमीटर की सड़क के लिए पूरा बजट और पूरा निर्माण स्वीकृत है तो लगभग तीन सौ मीटर में ही आधार सामग्री का काम दिखाई देने और बाकी हिस्से में सीधे डामरीकरण की तैयारी का कारण क्या है—इसका जवाब अब ग्रामीण ही नहीं, संबंधित विभाग से भी मांगा जा रहा है। यदि निर्माण नियम और स्वीकृत मानक के अनुसार हो रहा है तो विभाग को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, लेकिन यदि स्वीकृत कार्य और जमीन पर हुए कार्य में अंतर पाया जाता है तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई भी होनी चाहिए। भिलोर की सड़क अब सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं रह गई है, बल्कि यह सवाल बन गई है कि सरकारी निर्माण में कागज पर दर्ज मात्रा और जमीन पर दिखाई देने वाले काम के बीच आखिर कितना फासला है?1
- *नन्हे-मुन्नों के हुनर ने जीता दिल प्रगति बल विद्यालय प्रयागराज में धूमधाम से मनाया गया स्वतंत्रता दिवस* प्रयागराज। 15 अगस्त के अवसर पर प्रगति बल विद्यालय प्रयागराज के परिसर में देशभक्ति का अनूठा उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपनी अद्भुत प्रतिभा और कला का प्रदर्शन किया।1
- नाबालिग लड़की को भगा ले जाने वाला आरोपी युवक हुआ गिरफ्तार प्रयागराज: थाना फूलपुर पुलिस टीम द्वारा 01 वांछित अभियुक्त गिरफ्तार,उल्लेखनीय है कि,गिरफ्तार अभियुक्त उपरोक्त द्वारा मुकदमा वादी की नाबालिक पुत्री को बहला फूसला कर घर से भगा ले जाने के सम्बंध में दी गयी तहरीर के आधार पर थाना फूलपुर पर मु0अ0सं0-220/2026 उपरोक्त पंजीकृत किया गया था। गिरफ्तार अभियुक्त का विवरण- गोविन्द कुमार गौतम पुत्र राकुमार गौतम निवासी कलीमुरादपुर थाना फतनपुर जनपद प्रतापगढ़,उम्र करीब 22 वर्ष।1