सपनों की दौड़ में हार गया एक बेटा… 👉आखिरी चिट्ठी में लिख गया – ‘दबाव मत लेना, जिंदगी सबसे बड़ी है’” शाहजहांपुर। प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के दबाव के बीच एक होनहार युवक की दर्दनाक मौत ने पूरे जिले को गहरे सदमे में डाल दिया। आईआईटी से पढ़ाई पूरी कर उज्ज्वल भविष्य की राह पर आगे बढ़ रहे अभिमन्यु वर्मा ने सुसाइड नोट लिखकर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। मिली जानकारी के अनुसार, अभिमन्यु ने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी का अवसर छोड़कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी का रास्ता चुना था। वह शाहजहांपुर में रहकर पढ़ाई कर रहे थे और परिवार को उन पर गर्व था। लेकिन भीतर ही भीतर बढ़ता दबाव उन्हें तोड़ता चला गया। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने बेहद भावुक संदेश लिखा— “जिंदगी से बड़ा कुछ नहीं होता। पढ़ाई या दुनिया की बातों का दबाव मत लेना। वही करो जिसमें मन को शांति मिले और माता-पिता का सम्मान करना।” उनके शब्द अब युवाओं के लिए एक चेतावनी बन गए हैं। घटना से कुछ देर पहले उन्होंने छोटे भाई से फोन पर बात की और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। इसके बाद वह घर से निकले और फिर वापस नहीं लौटे। दोपहर में माता-पिता के घर पहुंचने पर उनका फोन और पर्स घर में ही मिला। बाद में उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता ग्राम पंचायत अधिकारी हैं और मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या युवा सपनों की दौड़ में मानसिक दबाव के बोझ तले दबते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में परिवार का साथ, खुलकर बातचीत और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग बेहद जरूरी है। यह हादसा एक कड़वा सच छोड़ गया— सफलता की दौड़ में सबसे पहले अपनी जिंदगी और मानसिक शांति को बचाना जरूरी है।
सपनों की दौड़ में हार गया एक बेटा… 👉आखिरी चिट्ठी में लिख गया – ‘दबाव मत लेना, जिंदगी सबसे बड़ी है’” शाहजहांपुर। प्रतियोगी परीक्षाओं और करियर के दबाव के बीच एक होनहार युवक की दर्दनाक मौत ने पूरे जिले को गहरे सदमे में डाल दिया। आईआईटी से पढ़ाई पूरी कर उज्ज्वल भविष्य की राह पर आगे बढ़ रहे अभिमन्यु वर्मा ने सुसाइड नोट लिखकर अपनी जिंदगी समाप्त कर ली, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। मिली जानकारी के अनुसार, अभिमन्यु ने मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी का अवसर छोड़कर प्रशासनिक सेवा की तैयारी का रास्ता चुना था। वह शाहजहांपुर में रहकर पढ़ाई कर रहे थे और परिवार को उन पर गर्व था। लेकिन भीतर ही भीतर बढ़ता दबाव उन्हें तोड़ता चला गया। अपने सुसाइड नोट में उन्होंने बेहद भावुक संदेश लिखा— “जिंदगी से बड़ा कुछ नहीं होता। पढ़ाई या दुनिया की बातों का दबाव मत लेना। वही करो जिसमें मन को शांति मिले और माता-पिता का सम्मान करना।” उनके शब्द अब युवाओं के लिए एक चेतावनी बन गए हैं। घटना से कुछ देर पहले उन्होंने छोटे भाई से फोन पर बात की और पढ़ाई पर ध्यान देने की सलाह दी। इसके बाद वह घर से निकले और फिर वापस नहीं लौटे। दोपहर में माता-पिता के घर पहुंचने पर उनका फोन और पर्स घर में ही मिला। बाद में उनके निधन की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिता ग्राम पंचायत अधिकारी हैं और मां सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या युवा सपनों की दौड़ में मानसिक दबाव के बोझ तले दबते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे समय में परिवार का साथ, खुलकर बातचीत और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग बेहद जरूरी है। यह हादसा एक कड़वा सच छोड़ गया— सफलता की दौड़ में सबसे पहले अपनी जिंदगी और मानसिक शांति को बचाना जरूरी है।
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- Post by विवेक मिश्र1
- पुलिस मुठभेड़ में 3 बदमाश गिरफ्तार, एक घायल शाहजहाँपुर, जनपद के थाना पुवायाँ क्षेत्र में पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान एक बदमाश घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है।1
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- Post by Asha Rani1
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- Post by Ashish Awasthi Ljp R प्रदेश सच1