सिंगरौली जिले के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है, जहाँ अब जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (DMF) की पूरी राशि जिले के विकास कार्यों पर ही खर्च की जाएगी। पहले इस निधि का एक बड़ा हिस्सा अन्य जिलों या राज्य स्तर पर उपयोग के लिए चला जाता था, लेकिन अब यह राशि सिंगरौली की जनता की आवश्यकताओं और विकास योजनाओं पर केंद्रित होगी। मिली जानकारी के अनुसार, सिंगरौली को प्रतिवर्ष लगभग 950 करोड़ रुपये की डीएमएफ राशि मिलती है। पहले इसमें से केवल लगभग 50 करोड़ रुपये ही जिले में खर्च हो पाते थे, जबकि बाकी राशि अन्य मदों में चली जाती थी। इस नए प्रावधान से अब पूरी राशि जिले के लिए उपलब्ध रहेगी, जिससे विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले सिंगरौली में कोयला खनन और औद्योगिक गतिविधियों से भारी राजस्व उत्पन्न होता है, और लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि खनिज संपदा से होने वाली आय का लाभ सबसे पहले खनन प्रभावित लोगों को मिले। इस डीएमएफ राशि का उपयोग यदि पारदर्शी और दूरदर्शी तरीके से किया जाता है, तो जिले में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा। इससे आधुनिक अस्पताल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थान, बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, खेल सुविधाएं और प्रभावी पर्यावरण संरक्षण योजनाएँ विकसित की जा सकती हैं। खासकर ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने की अपार संभावनाएँ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने विकास योजनाओं की रूपरेखा बनाना शुरू कर दिया है। यह पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। इतनी बड़ी राशि का प्रबंधन अपने आप में एक चुनौती है, और अतीत में कई जिलों में डीएमएफ फंड के उपयोग पर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि प्राथमिकताएं स्पष्ट हों, परियोजनाएं जनहित पर आधारित हों और प्रत्येक खर्च की सार्वजनिक निगरानी सुनिश्चित की जाए। डीएमएफ की पूरी राशि जिले में खर्च होने का यह निर्णय सिंगरौली के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जो स्थानीय विकास की अवधारणा को मजबूत करेगा। अब यह देखना होगा कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर इस निधि को एक ऐसे विकास मॉडल में बदल पाते हैं या नहीं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन सके।
सिंगरौली जिले के विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक खबर सामने आई है, जहाँ अब जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि (DMF) की पूरी राशि जिले के विकास कार्यों पर ही खर्च की जाएगी। पहले इस निधि का एक बड़ा हिस्सा अन्य जिलों या राज्य स्तर पर उपयोग के लिए चला जाता था, लेकिन अब यह राशि सिंगरौली की जनता की आवश्यकताओं और विकास योजनाओं पर केंद्रित होगी। मिली जानकारी के अनुसार, सिंगरौली को प्रतिवर्ष लगभग 950 करोड़ रुपये की डीएमएफ राशि मिलती है। पहले इसमें से केवल लगभग 50 करोड़ रुपये ही जिले में खर्च हो पाते थे, जबकि बाकी राशि अन्य मदों में चली जाती थी। इस नए प्रावधान से अब पूरी राशि जिले के लिए उपलब्ध रहेगी, जिससे विकास कार्यों की गति और गुणवत्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में पहचान रखने वाले सिंगरौली में कोयला खनन और औद्योगिक गतिविधियों से भारी राजस्व उत्पन्न होता है, और लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि खनिज संपदा से होने वाली आय का लाभ सबसे पहले खनन प्रभावित लोगों को मिले। इस डीएमएफ राशि का उपयोग यदि पारदर्शी और दूरदर्शी तरीके से किया जाता है, तो जिले
में शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा सकेगा। इससे आधुनिक अस्पताल, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थान, बेहतर सड़कें, स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, खेल सुविधाएं और प्रभावी पर्यावरण संरक्षण योजनाएँ विकसित की जा सकती हैं। खासकर ग्रामीण और खनन प्रभावित क्षेत्रों में जीवन स्तर सुधारने की अपार संभावनाएँ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने विकास योजनाओं की रूपरेखा बनाना शुरू कर दिया है। यह पहल स्वागतयोग्य है, लेकिन इसकी वास्तविक सफलता जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगी। इतनी बड़ी राशि का प्रबंधन अपने आप में एक चुनौती है, और अतीत में कई जिलों में डीएमएफ फंड के उपयोग पर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए यह आवश्यक है कि प्राथमिकताएं स्पष्ट हों, परियोजनाएं जनहित पर आधारित हों और प्रत्येक खर्च की सार्वजनिक निगरानी सुनिश्चित की जाए। डीएमएफ की पूरी राशि जिले में खर्च होने का यह निर्णय सिंगरौली के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है, जो स्थानीय विकास की अवधारणा को मजबूत करेगा। अब यह देखना होगा कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और समाज मिलकर इस निधि को एक ऐसे विकास मॉडल में बदल पाते हैं या नहीं, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मिसाल बन सके।
- सिंगरौली जिले में अवैध खनिज उत्खनन और परिवहन पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन ने अपना शिकंजा और कस दिया है। कलेक्टर गौरव बैनल के निर्देश और खनिज अधिकारी सुश्री आकांक्षा पटेल के मार्गदर्शन में खनिज विभाग ने लगातार दूसरे दिन बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध खनिज परिवहन में संलिप्त पाँच वाहनों को जब्त किया है। इस सख्त कार्रवाई से खनिज माफियाओं में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। जानकारी के अनुसार, 30 मई 2026 को सहायक खनि अधिकारी रामसुशील चौरसिया ने जांच के दौरान चार वाहनों को अवैध खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा। इनमें ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक एमपी 66A4891 को बिना वैध अभिवहन पास के रेत परिवहन करते पाए जाने पर जब्त कर माड़ा थाना में खड़ा कराया गया। इसी प्रकार, ग्राम जैतपुर से बिना नंबर की एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को बिना वैध दस्तावेजों के बोल्डर परिवहन करते पकड़ा गया, तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली क्रमांक एमपी 66A1557 को भी अवैध रूप से रेत परिवहन करते हुए जब्त कर जयंत पुलिस चौकी में सुरक्षार्थ खड़ा किया गया। इसके अतिरिक्त, बिना नंबर के एक डंपर को अवैध रेत परिवहन करते हुए पकड़ा गया, जिसे नवानगर थाना में सुरक्षित रखा गया है। इन सभी मामलों में खनिज नियमों के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। खनिज विभाग की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 29 मई 2026 को भी विभाग ने अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की थी। खनिज अधिकारी आकांक्षा पटेल के मार्गदर्शन में अशोक मिश्रा द्वारा की गई जांच के दौरान वाहन क्रमांक एमपी 66ZD0758 को बिना वैध अभिवहन पास के गिट्टी परिवहन करते हुए पकड़ा गया था। उक्त डंपर को जब्त कर चितरंगी थाना में खड़ा कराया गया और नियमानुसार कार्रवाई शुरू की गई। लगातार दो दिनों में पाँच वाहनों की जब्ती यह स्पष्ट संकेत देती है कि जिला प्रशासन अवैध खनिज कारोबार के प्रति किसी भी प्रकार की नरमी बरतने के मूड में नहीं है। खनिज संसाधनों की चोरी और राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों पर कार्रवाई का यह अभियान आने वाले दिनों में और तेज हो सकता है। खनिज विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में अवैध उत्खनन एवं परिवहन के विरुद्ध निगरानी लगातार जारी रहेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन की इस सक्रियता को खनिज माफियाओं के खिलाफ चल रहे अभियान का एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।1
- सिंगरौली जिले की गढ़वा पुलिस ने नशीली कफ सिरप की एक फरार महिला सप्लायर को एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक श्री षियाज़ के.एम. के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री सर्वप्रिय सिन्हा और एसडीओपी चितरंगी श्री राहुल सैयाम के मार्गदर्शन में की गई। थाना गढ़वा में दर्ज अपराध क्रमांक 63/2026 धारा 8/21 एनडीपीएस एक्ट की विवेचना के दौरान आरोपिया उर्मिला उर्फ रसियन गुप्ता, जो भरहरी, जिला सोनभद्र (उत्तर प्रदेश) की निवासी है, की तलाश की जा रही थी। मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपिया को गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से 19 नग कोडीन फास्फेट युक्त ESCODYL कफ सिरप बरामद की गई, जिसकी कीमत लगभग ₹3,230 बताई गई है। गिरफ्तारी के बाद आरोपिया को माननीय न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से उसे जिला जेल पचौर भेज दिया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यवाही में थाना प्रभारी गढ़वा निरीक्षक विद्यावारिधि तिवारी सहित पुलिस टीम की अहम भूमिका रही।1
- सोनभद्र जिले के बालू टोला के ग्रामीण पिछले 17 दिनों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं। 13 मई को आई आंधी के कारण ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभे गिरने के बाद से बालू टोला के दर्जनों परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जिससे भीषण गर्मी में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ग्रामीणों ने विभागीय लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए हैं, क्योंकि नया ट्रांसफार्मर पहुंच जाने के बावजूद उसकी स्थापना नहीं की गई है और न ही क्षतिग्रस्त बिजली के खंभों को बदला गया है। इस गंभीर मुद्दे पर ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर तत्काल बिजली बहाली की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली आपूर्ति बहाल नहीं की गई तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे।1
- सोनभद्र के रामपुर बरकोनिया थाना क्षेत्र के धर्मदासपुर गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई जब शीतला माता मंदिर परिसर में स्थापित हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में मिली। अराजक तत्वों ने प्रतिमा को तोड़कर नाले में फेंक दिया और मंदिर के शिखर, घंटे तथा धार्मिक ध्वज को भी क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया। जानकारी के अनुसार, गांव के समीप स्थित दुर्गा माता मंदिर में चल रहे यज्ञ कार्यक्रम के बाद शनिवार सुबह जब श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में पूजा के लिए पहुँचे तो मंदिर की बदहाली देखकर स्तब्ध रह गए। हनुमान जी की प्रतिमा खंडित अवस्था में थी, जबकि मंदिर के घंटे और झंडे पास के खेत में पड़े मिले। इस घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण तत्काल मंदिर परिसर में जमा हो गए। पुलिस प्रशासन भी तुरंत मौके पर पहुँचा और मामले की जाँच शुरू कर दी। पुलिस ने घटना के संबंध में चार लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ भी प्रारंभ कर दी है। क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अराजक तत्वों ने देर रात करीब 12 बजे के बाद लाठी-डंडों का प्रयोग कर हनुमान प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया और मंदिर परिसर में तोड़फोड़ की। सूचना मिलने पर विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा दल के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुँचे। विश्व हिंदू परिषद के धर्म रक्षा कार्यकर्ता धर्मेंद्र पाण्डेय ने इस घटना को धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बताते हुए प्रशासन से दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस प्रकार की घटनाएँ समाज में अशांति फैलाने का प्रयास हैं, जिन्हें किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं से घटना की जाँच कर रही है, और क्षेत्र में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में बताई जा रही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द मामले का खुलासा कर दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की है।4
- सोनभद्र के कोन क्षेत्र स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल एंड सर्जिकल सेंटर में प्रसव के दौरान एक आशा बहू की मौत के बाद शनिवार को भारी जनाक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अस्पताल को सील कर दिया है और संचालक समेत संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सिंगा-बागेसोती निवासी लगभग 38 वर्षीय सीमा देवी, जो एक आशा बहू के रूप में कार्यरत थीं, को देर रात प्रसव पीड़ा होने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने बताया कि उनके पहले चार प्रसव सामान्य तरीके से हुए थे, लेकिन इस बार अस्पताल पहुंचते ही ऑपरेशन की सलाह दी गई। आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान सीमा देवी की तबीयत बिगड़ गई और समय पर उचित उपचार न मिलने के कारण उनकी मौत हो गई, हालांकि नवजात शिशु सुरक्षित है। परिजनों का यह भी आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी अस्पताल छोड़कर चले गए, जिससे नाराज ग्रामीण बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे। सूचना मिलने पर प्रभारी निरीक्षक अखिलेश कुमार मिश्रा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। इसी अस्पताल में भर्ती एक अन्य प्रसूता, लौकवाखाड़ी बागेसोती निवासी 35 वर्षीय कुसुमरी देवी की हालत भी गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की मौजूदगी में सरकारी अस्पताल रेफर किया गया। घटना की सूचना मिलते ही उपजिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और उन्होंने संबंधित लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में किसी भी अपंजीकृत अस्पताल को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। उनकी मौजूदगी में ही अस्पताल को सील किया गया। एसीएमओ गुलाब शंकर यादव ने बताया कि इस अस्पताल के खिलाफ पहले भी कार्रवाई की जा चुकी है। फिलहाल अस्पताल संचालक नसीम अंसारी और संबंधित चिकित्सकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच जारी है। इस अवसर पर उप जिलाधिकारी ओबरा विवेक कुमार सिंह, एसीएमओ डॉक्टर गुलाब शंकर यादव, डॉक्टर कृति आजाद बिंद, प्रधान संघ जिलाध्यक्ष लक्ष्मी जायसवाल, विजय शंकर यादव, भाजपा पूर्व ब्लॉक प्रमुख बंशीधर, भाजपा नेता अलख नारायण शुक्ला और जोखन यादव सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है, और ग्रामीण अवैध अस्पतालों के संचालन तथा स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं।4
- सोनभद्र जिले के दुद्धि विकासखंड अंतर्गत केवाल ग्राम पंचायत में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा ठेकेदार के माध्यम से कराए गए सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, लगभग चार महीने पहले बनी यह सड़क अब जगह-जगह से टूटकर बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो चुकी है, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। यह मार्ग दर्जनों गाँवों को जोड़ने वाला एक प्रमुख रास्ता है, जहाँ प्रतिदिन हजारों लोग आवागमन करते हैं। नई सड़क होने के कारण वाहन चालक और राहगीर अक्सर सामान्य गति से गुजरते हैं, लेकिन अचानक बने इन गड्ढों में गिरकर आए दिन कई लोग घायल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि लोग गिरकर हाथ, पैर और घुटनों में चोटिल हो रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। केवाल निवासी विजय कुमार भारती सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण में ठेकेदार और संबंधित विभाग की ओर से घोर लापरवाही बरती गई है। उनका कहना है कि इसी अनदेखी और घटिया गुणवत्ता के कारण सड़क मात्र चार महीने के भीतर ही इतनी खराब हो गई है। इस स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी विभाग और संबंधित अधिकारियों से तत्काल सड़क की गुणवत्ता की गहन जाँच कराने और जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कर आम जनता को राहत प्रदान करने की मांग की है।1
- उत्तर प्रदेश में, योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गरीब व्यक्ति को विस्थापित नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि यदि कोई किसी गरीब को हटाने का प्रयास करता है, तो उसकी संपत्ति जब्त कर ली जाएगी।1
- 👉बाउंसर -पोलटिक्स 👈 ✍️ अरविंद मिश्रा 🤳 8889463039 " मामा " की राजनैतिक ताकत है "अपनापन" इसीलिए सबसे अलग दिखते हैं शिवराज सिंह चौहान सिंगरौली - राजनीति में ...पद, प्रतिष्ठा और शक्ति ...की चर्चा अक्सर होती है...लेकिन कुछ नेता ऐसे भी होते हैं... जिनकी पहचान केवल उनके पद से नहीं...बल्कि लोगों के साथ उनके भावनात्मक रिश्तों से बनती है। “शिवराज का मोदी पर अपनापन…” दरअसल इसी राजनीतिक और मानवीय संबंध की पड़ताल करता है। यहां केवल... एक पुस्तक ‘अपनापन’ के बहाने शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्तों की चर्चा नहीं है... बल्कि भारतीय राजनीति में उस दुर्लभ तत्व को भी रेखांकित करना है...जिसे आज के दौर में सबसे अधिक संकटग्रस्त माना जाता है ...और वह है व्यक्तिगत आत्मीयता और संगठनात्मक निष्ठा। मूल प्रश्न यह है कि आखिर ऐसा क्या है जो शिवराज सिंह चौहान को भाजपा के अन्य नेताओं से अलग बनाता है? इसका उत्तर... उनके राजनीतिक कौशल में जितना छिपा है, उससे कहीं अधिक उनके व्यवहार और संबंधों में है। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद से ...हटने के बाद भी शिवराज सिंह चौहान का राजनीतिक कद कम नहीं हुआ... इसके पीछे केवल उनका जनाधार नहीं... बल्कि वह विश्वास है जो उन्होंने कार्यकर्ताओं, किसानों और शीर्ष नेतृत्व के बीच... वर्षों में अर्जित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति ...उनकी सार्वजनिक आत्मीयता को कुछ लोग राजनीतिक रणनीति मान सकते हैं, लेकिन यह भी सच है कि भारतीय राजनीति में दीर्घकालिक संबंध केवल औपचारिकता से नहीं चलते। ‘अपनापन’ एक राजनीतिक पूंजी भी है। लोकतंत्र में चुनाव जीतने के लिए संगठन चाहिए, लेकिन संगठन को जीवंत बनाए रखने के लिए... भावनात्मक जुड़ाव भी आवश्यक होता है। शिवराज सिंह चौहान की राजनीति की सबसे बड़ी ताकत यही रही है... कि उन्होंने स्वयं को केवल प्रशासक के रूप में नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में प्रस्तुत किया। “मामा” की छवि कोई राजनीतिक विज्ञापन भर नहीं थी...वह एक सामाजिक संवाद का माध्यम बनी... यही कारण है कि सत्ता परिवर्तन के बाद भी उनकी लोकप्रियता बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों के लिए यह एक महत्वपूर्ण अध्ययन का विषय है कि क्यों कुछ नेता पद छोड़ने के बाद भी प्रभावशाली बने रहते हैं... जबकि कुछ पद के साथ ही अप्रासंगिक हो जाते हैं। शिवराज का उदाहरण बताता है कि... जनता के साथ भावनात्मक निवेश, राजनीतिक निवेश से अधिक टिकाऊ होता है। शिवराज की कार्यशैली अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा की उस संगठनात्मक संस्कृति को भी सामने लाती है... जहां वैचारिक प्रतिबद्धता और नेतृत्व के प्रति सम्मान को महत्व दिया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी और शिवराज सिंह चौहान के संबंधों को ...केवल व्यक्ति-व्यक्ति का संबंध मानना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस राजनीतिक परंपरा का भी संकेत है जिसमें संगठन व्यक्ति से बड़ा माना जाता है, लेकिन व्यक्ति की निष्ठा और योगदान का सम्मान भी किया जाता है। यही कारण है कि मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद भी ...शिवराज राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते हैं। यह प्रसंग केवल भाजपा या शिवराज तक सीमित नहीं है...यह पूरे राजनीतिक वर्ग के लिए एक संदेश है कि जनता केवल भाषणों और घोषणाओं से प्रभावित नहीं होती... वह नेताओं के व्यवहार, रिश्तों और संवेदनशीलता को भी देखती है। आज जब राजनीति में ...कटुता, आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत हमले बढ़ रहे हैं, तब ‘अपनापन’ जैसे शब्द का राजनीतिक विमर्श में आना अपने आप में महत्वपूर्ण है। शिवराज सिंह चौहान और नरेंद्र मोदी के संबंधों पर केंद्रित यह चर्चा अंततः एक बड़े सत्य की ओर संकेत करती है.. कि राजनीति की वास्तविक शक्ति केवल सत्ता नहीं, बल्कि विश्वास है। पद बदलते हैं, सरकारें बदलती हैं, समीकरण बदलते हैं, लेकिन जो नेता लोगों और नेतृत्व के बीच "भरोसे" का पुल बना लेते हैं...वे राजनीतिक परिदृश्य में लंबे समय तक प्रासंगिक बने रहते हैं। शिवराज सिंह चौहान की राजनीति का यही “अपनापन” शायद उनकी सबसे बड़ी पूंजी है...एक ऐसी पूंजी, जिसे न चुनावी आंकड़ों में मापा जा सकता है और न ही केवल राजनीतिक समीकरणों से समझा जा सकता है। यह वह पूंजी है जो व्यक्ति को... नेता और.. नेता को "जननेता" बनाती है। ........1