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राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 के दौरान सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा की महानिदेशक (DGAFMS) सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन को परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। रक्षा मंत्रालय से हुई विशेष बातचीत में, सर्जन वाइस एडमिरल सरीन ने इस सम्मान का श्रेय अपने साथियों, सहयोगियों और परिवार के सामूहिक समर्पण एवं अटूट प्रतिबद्धता को दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके परिवार की राष्ट्र के प्रति लगभग 200 वर्षों की सेवा और कर्तव्यनिष्ठा ही उनकी प्रेरणा का स्रोत रही है। देश के युवाओं को संदेश देते हुए, उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ सशस्त्र बलों से जुड़कर राष्ट्रसेवा करने और एक अनुशासित, समर्पित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया।

3 hrs ago
user_फौजी जय सिंह यादव
फौजी जय सिंह यादव
Lawyer Rae Bareli, Uttar Pradesh•
3 hrs ago

राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 के दौरान सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा की महानिदेशक (DGAFMS) सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन को परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। रक्षा मंत्रालय से हुई विशेष बातचीत में, सर्जन वाइस एडमिरल सरीन ने इस सम्मान का श्रेय अपने साथियों, सहयोगियों और परिवार के सामूहिक समर्पण एवं अटूट प्रतिबद्धता को दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके परिवार की राष्ट्र के प्रति लगभग 200 वर्षों की सेवा और कर्तव्यनिष्ठा ही उनकी प्रेरणा का स्रोत रही है। देश के युवाओं को संदेश देते हुए, उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ सशस्त्र बलों से जुड़कर राष्ट्रसेवा करने और एक अनुशासित, समर्पित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया।

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  • प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 1 जुलाई को लखनऊ स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मिडिकल साइंसेस के एकेडमिक ब्लॉक से संचारी रोग अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश में इंसेफलाइटिस पर लगभग 99 प्रतिशत तक नियंत्रण पाया जा चुका है, और डेंगू व मलेरिया के मामलों में भी काफी कमी आई है, लेकिन इन बीमारियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए आम जनता की सक्रिय भागीदारी अभी भी सबसे आवश्यक है। उनके अनुसार, केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं; जब तक लोग अपने घर और आसपास साफ-सफाई नहीं रखेंगे तथा मच्छरों के पनपने की स्थितियों को समाप्त नहीं करेंगे, तब तक इन रोगों को पूरी तरह नियंत्रित करना कठिन होगा। डिप्टी सीएम ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, सीलन, गंदगी और धूल से दूरी बनाए रखें। उन्होंने भोजन करने से पहले साबुन से हाथ धोने, साफ और सुरक्षित पानी पीने, बाजार में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों व कोल्ड ड्रिंक के अत्यधिक सेवन से बचने तथा नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया। पाठक ने विशेष रूप से बताया कि डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घट सकती हैं, जिससे मरीज की जान को खतरा होता है, इसलिए बीमारी का इंतजार करने के बजाय मच्छरों के लार्वा को पनपने से रोकना ही डेंगू, मलेरिया, इंसेफलाइटिस और चिकनगुनिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीमारियों के इलाज के बजाय उनकी रोकथाम और बचाव पर आधारित जागरूकता अभियान से लोगों को जोड़ना महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान, डिप्टी सीएम ने लोहिया संस्थान के एमबीबीएस प्रथम वर्ष और बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों से भी संवाद किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, हॉस्टल और भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली, साथ ही उनसे यह भी पूछा कि उन्हें घर की याद तो नहीं आ रही या हॉस्टल में कोई असुविधा तो नहीं है। छात्रों ने भोजन और हॉस्टल व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। पाठक ने छात्रों को अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने उनसे बड़ी उम्मीदें रखी हैं, और ईमानदारी से मेहनत करने पर वे जीवन की हर चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह को छात्रों के भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने और संतुलित आहार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, यह बताते हुए कि वे स्वयं किसी दिन छात्रों के साथ भोजन करने आएंगे। इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अमित कुमार घोष, स्वास्थ्य महानिदेशक पवन कुमार अरूण, सीएमओ डॉ. एनबी सिंह, लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
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    प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने 1 जुलाई को लखनऊ स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मिडिकल साइंसेस के एकेडमिक ब्लॉक से संचारी रोग अभियान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रदेश में इंसेफलाइटिस पर लगभग 99 प्रतिशत तक नियंत्रण पाया जा चुका है, और डेंगू व मलेरिया के मामलों में भी काफी कमी आई है, लेकिन इन बीमारियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए आम जनता की सक्रिय भागीदारी अभी भी सबसे आवश्यक है। उनके अनुसार, केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं; जब तक लोग अपने घर और आसपास साफ-सफाई नहीं रखेंगे तथा मच्छरों के पनपने की स्थितियों को समाप्त नहीं करेंगे, तब तक इन रोगों को पूरी तरह नियंत्रित करना कठिन होगा।

डिप्टी सीएम ने लोगों से अपील की कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, सीलन, गंदगी और धूल से दूरी बनाए रखें। उन्होंने भोजन करने से पहले साबुन से हाथ धोने, साफ और सुरक्षित पानी पीने, बाजार में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों व कोल्ड ड्रिंक के अत्यधिक सेवन से बचने तथा नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का आग्रह किया। पाठक ने विशेष रूप से बताया कि डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से घट सकती हैं, जिससे मरीज की जान को खतरा होता है, इसलिए बीमारी का इंतजार करने के बजाय मच्छरों के लार्वा को पनपने से रोकना ही डेंगू, मलेरिया, इंसेफलाइटिस और चिकनगुनिया से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीमारियों के इलाज के बजाय उनकी रोकथाम और बचाव पर आधारित जागरूकता अभियान से लोगों को जोड़ना महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम के दौरान, डिप्टी सीएम ने लोहिया संस्थान के एमबीबीएस प्रथम वर्ष और बीएससी नर्सिंग के विद्यार्थियों से भी संवाद किया। उन्होंने छात्रों से उनकी पढ़ाई, हॉस्टल और भोजन की गुणवत्ता के बारे में जानकारी ली, साथ ही उनसे यह भी पूछा कि उन्हें घर की याद तो नहीं आ रही या हॉस्टल में कोई असुविधा तो नहीं है। छात्रों ने भोजन और हॉस्टल व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया। पाठक ने छात्रों को अनुशासन, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ पढ़ाई करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि उनके माता-पिता ने उनसे बड़ी उम्मीदें रखी हैं, और ईमानदारी से मेहनत करने पर वे जीवन की हर चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह को छात्रों के भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने और संतुलित आहार उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, यह बताते हुए कि वे स्वयं किसी दिन छात्रों के साथ भोजन करने आएंगे।

इस अवसर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव अमित कुमार घोष, स्वास्थ्य महानिदेशक पवन कुमार अरूण, सीएमओ डॉ. एनबी सिंह, लोहिया संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
    user_पवन कुमार गुप्ता
    पवन कुमार गुप्ता
    Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र में इन दिनों कथित अवैध गतिविधियों को लेकर व्यापक चर्चा है। क्षेत्र में कोतवाल का पद रिक्त होने के कारण कानून-व्यवस्था और अवैध कार्यों पर प्रभावी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि जब से कोतवाली की कमान किसी स्थायी अधिकारी के हाथ में नहीं है, तब से अवैध कटान और मिट्टी खनन जैसी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। इसी क्रम में, कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कल्याणी में बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बेखौफ खनन माफिया दिन-रात जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग करके मिट्टी का अवैध खनन कर रहे हैं। इस अवैध खनन से न केवल कृषि भूमि और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व की भी क्षति होने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्ती की होती, तो खुलेआम इस तरह का खनन संभव नहीं होता। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहे इन कथित खनन कार्यों की जानकारी जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं है, या यदि है तो अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। खनन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि लगातार शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद खनन अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने या कार्रवाई करने में सक्रिय नहीं दिखे। लोगों का सवाल है कि यदि नियमों के विपरीत खनन हो रहा है, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? यह सवाल अब आम जनता के बीच गहन चर्चा का विषय बन चुका है। इस पूरे मामले में, खनन अधिकारी ने केवल नाम मात्र की कार्यवाही किए जाने का उल्लेख किया है, जिससे यह प्रश्न और गहरा हो गया है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध खेल चल रहा है।
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    उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार कोतवाली क्षेत्र में इन दिनों कथित अवैध गतिविधियों को लेकर व्यापक चर्चा है। क्षेत्र में कोतवाल का पद रिक्त होने के कारण कानून-व्यवस्था और अवैध कार्यों पर प्रभावी निगरानी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का स्पष्ट आरोप है कि जब से कोतवाली की कमान किसी स्थायी अधिकारी के हाथ में नहीं है, तब से अवैध कटान और मिट्टी खनन जैसी गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं।

इसी क्रम में, कोतवाली क्षेत्र के ग्राम कल्याणी में बड़े पैमाने पर अवैध मिट्टी खनन किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि बेखौफ खनन माफिया दिन-रात जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का उपयोग करके मिट्टी का अवैध खनन कर रहे हैं। इस अवैध खनन से न केवल कृषि भूमि और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुँच रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व की भी क्षति होने की आशंका जताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते सख्ती की होती, तो खुलेआम इस तरह का खनन संभव नहीं होता। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि आखिर इतने बड़े स्तर पर चल रहे इन कथित खनन कार्यों की जानकारी जिम्मेदार विभागों को क्यों नहीं है, या यदि है तो अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। खनन विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि लगातार शिकायतों और चर्चाओं के बावजूद खनन अधिकारी मौके पर निरीक्षण करने या कार्रवाई करने में सक्रिय नहीं दिखे। लोगों का सवाल है कि यदि नियमों के विपरीत खनन हो रहा है, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? यह सवाल अब आम जनता के बीच गहन चर्चा का विषय बन चुका है। इस पूरे मामले में, खनन अधिकारी ने केवल नाम मात्र की कार्यवाही किए जाने का उल्लेख किया है, जिससे यह प्रश्न और गहरा हो गया है कि आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध खेल चल रहा है।
    user_Shivdeep Chaurasiya
    Shivdeep Chaurasiya
    Local News Reporter Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    2 hrs ago
  • राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 के दौरान सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा की महानिदेशक (DGAFMS) सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन को परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। रक्षा मंत्रालय से हुई विशेष बातचीत में, सर्जन वाइस एडमिरल सरीन ने इस सम्मान का श्रेय अपने साथियों, सहयोगियों और परिवार के सामूहिक समर्पण एवं अटूट प्रतिबद्धता को दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके परिवार की राष्ट्र के प्रति लगभग 200 वर्षों की सेवा और कर्तव्यनिष्ठा ही उनकी प्रेरणा का स्रोत रही है। देश के युवाओं को संदेश देते हुए, उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ सशस्त्र बलों से जुड़कर राष्ट्रसेवा करने और एक अनुशासित, समर्पित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया।
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    राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 के दौरान सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा की महानिदेशक (DGAFMS) सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन को परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया।

रक्षा मंत्रालय से हुई विशेष बातचीत में, सर्जन वाइस एडमिरल सरीन ने इस सम्मान का श्रेय अपने साथियों, सहयोगियों और परिवार के सामूहिक समर्पण एवं अटूट प्रतिबद्धता को दिया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उनके परिवार की राष्ट्र के प्रति लगभग 200 वर्षों की सेवा और कर्तव्यनिष्ठा ही उनकी प्रेरणा का स्रोत रही है।

देश के युवाओं को संदेश देते हुए, उन्होंने 'राष्ट्र प्रथम' की भावना के साथ सशस्त्र बलों से जुड़कर राष्ट्रसेवा करने और एक अनुशासित, समर्पित एवं उद्देश्यपूर्ण जीवन अपनाने का आह्वान किया।
    user_फौजी जय सिंह यादव
    फौजी जय सिंह यादव
    Lawyer Rae Bareli, Uttar Pradesh•
    3 hrs ago
  • आज रायबरेली से अमरनाथ जी के पहले जत्थे की रवानगी हुई। इस संबंध में जानकारी राजेंद अवस्थी द्वारा दी गई है।
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    आज रायबरेली से अमरनाथ जी के पहले जत्थे की रवानगी हुई। इस संबंध में जानकारी राजेंद अवस्थी द्वारा दी गई है।
    user_Yash kumar
    Yash kumar
    सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिला अस्पताल की इमरजेंसी से एक कथित वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें एक महिला सफाईकर्मी द्वारा एक बीमार और असहाय व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाना दिख रहा है। यह घटना अस्पताल परिसर में हुई, जहाँ वीडियो में कथित दुर्व्यवहार को कैद किया गया है। इस वीडियो की सत्यता को रेखांकित करते हुए, कहा गया है कि यदि यह सही पाया जाता है, तो यह केवल एक कर्मचारी की बदसलूकी नहीं, बल्कि उस संवेदनहीन व्यवस्था का प्रतिबिंब है जो गरीब और लाचार मरीजों के सम्मान को भी कुचल देती है। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मांग की गई है कि दोषियों पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि अस्पताल इलाज के लिए होते हैं, अपमान और हिंसा के लिए नहीं, तथा इंसानियत से बड़ा कोई पद नहीं होता और सरकारी नौकरी सेवा के लिए होती है, अकड़ दिखाने के लिए नहीं।
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    उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिला अस्पताल की इमरजेंसी से एक कथित वायरल वीडियो सामने आया है, जिसमें एक महिला सफाईकर्मी द्वारा एक बीमार और असहाय व्यक्ति के साथ अमानवीय व्यवहार किया जाना दिख रहा है। यह घटना अस्पताल परिसर में हुई, जहाँ वीडियो में कथित दुर्व्यवहार को कैद किया गया है।

इस वीडियो की सत्यता को रेखांकित करते हुए, कहा गया है कि यदि यह सही पाया जाता है, तो यह केवल एक कर्मचारी की बदसलूकी नहीं, बल्कि उस संवेदनहीन व्यवस्था का प्रतिबिंब है जो गरीब और लाचार मरीजों के सम्मान को भी कुचल देती है। इस पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, मांग की गई है कि दोषियों पर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। पोस्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि अस्पताल इलाज के लिए होते हैं, अपमान और हिंसा के लिए नहीं, तथा इंसानियत से बड़ा कोई पद नहीं होता और सरकारी नौकरी सेवा के लिए होती है, अकड़ दिखाने के लिए नहीं।
    user_Gaurav Srivastava
    Gaurav Srivastava
    News Anchor सलोन, रायबरेली, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
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