गंगा ने दिखाया रौद्र रूप — 60 श्रद्धालु बीच धारा में कैद, जल पुलिस ने मौत के मुंह से छीनी जिंदगियां गंगा ने दिखाया रौद्र रूप — 60 श्रद्धालु बीच धारा में कैद, जल पुलिस ने मौत के मुंह से छीनी जिंदगियां “मौत की धार में फंसी आस्था!” भूपतवाला में गंगा ने दिखाया रौद्र रूप — 60 श्रद्धालु बीच धारा में कैद, जल पुलिस ने मौत के मुंह से छीनी जिंदगियां “ना जंजीर, ना चेतावनी… प्रशासन गायब!” — हादसे को खुला निमंत्रण देते असुरक्षित घाट हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार में आस्था और अव्यवस्था की खतरनाक तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। यात्रा सीजन और बैसाखी पर्व के बीच उमड़ी भीड़ के बीच भूपतवाला क्षेत्र में आज ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। परमार्थ निकेतन घाट से आगे एक पूरी तरह असुरक्षित और प्रतिबंधित स्थान टूटे पड़े स्नान घाट पर करीब 50 से 60 श्रद्धालु गंगा में स्नान कर रहे थे, तभी अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ा और तेज बहाव ने लोगों को चारों तरफ से घेर लिया। देखते ही देखते करीब 30 श्रद्धालु गंगा की बीच धारा में फंस गए — एक कदम इधर-उधर और सीधा मौत का सामना! “कुछ ही मिनट में बदल सकता था सब कुछ…” घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि 👉 किनारे खड़े लोग भी घबरा गए 👉 परिवार एक-दूसरे से बिछड़ने लगे 👉 बच्चे चीखने लगे, महिलाएं रोने लगीं यह मंजर किसी त्रासदी से कम नहीं था। अगर कुछ मिनट और देरी होती, तो आज हरिद्वार में एक बड़ा सामूहिक हादसा इतिहास बन सकता था। “देवदूत बनकर पहुंचे जल पुलिस के जवान” सूचना मिलते ही उत्तराखंड जल पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन 👉 गंगा का तेज बहाव रेस्क्यू में सबसे बड़ी बाधा बना 👉 तीन बार जवानों ने बीच धारा तक पहुंचने की कोशिश की 👉 तीसरी बार नाव पलट गई, जवानों की जान खतरे में पड़ गई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 👉 दोबारा प्रयास कर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला 👉 छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता से बचाया गया यह सिर्फ रेस्क्यू नहीं, बल्कि मौत के जबड़े से जिंदगी छीनने का जज्बा था। “मासूमों की चीखें… माता-पिता की बेबसी” सबसे हृदयविदारक दृश्य तब सामने आया जब 👉 2 से 3 साल की बच्चियां 👉 मां की गोद में रोते मासूम 👉 एक ही परिवार के 7 सदस्य बीच धारा में फंसे हुए थे। दिल्ली, जयपुर और राजस्थान से आए ये श्रद्धालु जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। “108 नंबर भी फेल — एंबुलेंस का कहीं पता नहीं!” इस भयावह घटना के दौरान 👉 100 और 108 नंबर पर कॉल किए गए 👉 लेकिन कोई एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची यह सवाल खड़ा करता है — क्या आपातकालीन व्यवस्था सिर्फ कागजों में ही है? “प्रतिबंधित घाट पर खुला खेल — कौन जिम्मेदार?” सबसे बड़ा सवाल यही है: 👉 जब घाट खतरनाक है तो वहां लोग क्यों पहुंच रहे हैं? 👉 क्यों नहीं है कोई बैरिकेडिंग? 👉 क्यों नहीं लगाए गए चेतावनी बोर्ड? 👉 क्यों नहीं तैनात हैं सुरक्षा कर्मी? यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि 👉 सीधी-सीधी प्रशासनिक लापरवाही 👉 और हादसे को खुला निमंत्रण है। “पहले भी गई जान… फिर भी नहीं जागा सिस्टम” हाल ही में 👉 दो श्रद्धालुओं की मौत 👉 एक व्यक्ति आज तक लापता इसके बावजूद भी सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकता ही नजर आ रही है। “अगर आज 60 जानें चली जातीं…?” सोचिए अगर आज 👉 ये 50–60 लोग नहीं बचते 👉 कितने घर उजड़ जाते 👉 कितनी मांओं की गोद सूनी हो जाती 👉 कितने बच्चे अनाथ हो जाते सरकार मुआवजा देती, पुलिस शव ढूंढती… लेकिन क्या किसी की जिंदगी वापस आ सकती थी? जल पुलिस के जांबाजों को सलाम इस रेस्क्यू ऑपरेशन में 👉 एडीशनल अतुल सिंह 👉 हेड कांस्टेबल प्रीतम हेड कांस्टेबल नरेंद्र 👉 हेड कांस्टेबल कुलतार किशन 👉 गोताखोर गौरव, विक्रांत, मनोज बहुखंडी, चिराग ने जिस साहस का परिचय दिया, वह शब्दों से परे है। ये जवान ही आज सच्चे अर्थों में “जीवित देवदूत” साबित हुए। “अब भी नहीं चेते तो अगला हादसा तय है!” बैसाखी पर्व और चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचने वाले हैं। अगर अभी भी 👉 घाटों पर जंजीर नहीं लगी 👉 सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए 👉 एंबुलेंस और रेस्क्यू अलर्ट नहीं हुआ तो अगली बार किस्मत नहीं, हादसा इतिहास लिखेगा। “मां गंगा ने बचाया… लेकिन कब तक?” आज यह साफ है कि 👉 मां गंगा की कृपा 👉 और जल पुलिस के साहस ने इस त्रासदी को टाल दिया। लेकिन सवाल वही है — क्या प्रशासन हर बार भगवान भरोसे ही रहेगा? ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़, हरिद्वार
गंगा ने दिखाया रौद्र रूप — 60 श्रद्धालु बीच धारा में कैद, जल पुलिस ने मौत के मुंह से छीनी जिंदगियां गंगा ने दिखाया रौद्र रूप — 60 श्रद्धालु बीच धारा में कैद, जल पुलिस ने मौत के मुंह से छीनी जिंदगियां “मौत की धार में फंसी आस्था!” भूपतवाला में गंगा ने दिखाया रौद्र रूप — 60 श्रद्धालु बीच धारा में कैद, जल पुलिस ने मौत के मुंह से छीनी जिंदगियां “ना जंजीर, ना चेतावनी… प्रशासन गायब!” — हादसे को खुला निमंत्रण देते असुरक्षित घाट हरिद्वार। तीर्थ नगरी हरिद्वार में आस्था और अव्यवस्था की खतरनाक तस्वीर एक बार फिर सामने आई है। यात्रा सीजन और बैसाखी पर्व के बीच उमड़ी भीड़ के बीच भूपतवाला क्षेत्र में आज ऐसा खौफनाक मंजर देखने को मिला, जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। परमार्थ निकेतन घाट से आगे एक पूरी तरह असुरक्षित और प्रतिबंधित स्थान टूटे पड़े स्नान घाट पर करीब 50 से 60 श्रद्धालु गंगा में स्नान कर रहे थे, तभी अचानक गंगा का जलस्तर बढ़ा और तेज बहाव ने लोगों को चारों तरफ से घेर लिया। देखते
ही देखते करीब 30 श्रद्धालु गंगा की बीच धारा में फंस गए — एक कदम इधर-उधर और सीधा मौत का सामना! “कुछ ही मिनट में बदल सकता था सब कुछ…” घटनास्थल पर मौजूद लोगों के अनुसार पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि 👉 किनारे खड़े लोग भी घबरा गए 👉 परिवार एक-दूसरे से बिछड़ने लगे 👉 बच्चे चीखने लगे, महिलाएं रोने लगीं यह मंजर किसी त्रासदी से कम नहीं था। अगर कुछ मिनट और देरी होती, तो आज हरिद्वार में एक बड़ा सामूहिक हादसा इतिहास बन सकता था। “देवदूत बनकर पहुंचे जल पुलिस के जवान” सूचना मिलते ही उत्तराखंड जल पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन 👉 गंगा का तेज बहाव रेस्क्यू में सबसे बड़ी बाधा बना 👉 तीन बार जवानों ने बीच धारा तक पहुंचने की कोशिश की 👉 तीसरी बार नाव पलट गई, जवानों की जान खतरे में पड़ गई लेकिन हिम्मत नहीं हारी। 👉 दोबारा प्रयास कर सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाला 👉 छोटे-छोटे बच्चों और महिलाओं को प्राथमिकता से बचाया गया यह सिर्फ रेस्क्यू नहीं, बल्कि मौत के जबड़े से जिंदगी छीनने का जज्बा था। “मासूमों की चीखें… माता-पिता की बेबसी” सबसे हृदयविदारक
दृश्य तब सामने आया जब 👉 2 से 3 साल की बच्चियां 👉 मां की गोद में रोते मासूम 👉 एक ही परिवार के 7 सदस्य बीच धारा में फंसे हुए थे। दिल्ली, जयपुर और राजस्थान से आए ये श्रद्धालु जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे थे। “108 नंबर भी फेल — एंबुलेंस का कहीं पता नहीं!” इस भयावह घटना के दौरान 👉 100 और 108 नंबर पर कॉल किए गए 👉 लेकिन कोई एंबुलेंस मौके पर नहीं पहुंची यह सवाल खड़ा करता है — क्या आपातकालीन व्यवस्था सिर्फ कागजों में ही है? “प्रतिबंधित घाट पर खुला खेल — कौन जिम्मेदार?” सबसे बड़ा सवाल यही है: 👉 जब घाट खतरनाक है तो वहां लोग क्यों पहुंच रहे हैं? 👉 क्यों नहीं है कोई बैरिकेडिंग? 👉 क्यों नहीं लगाए गए चेतावनी बोर्ड? 👉 क्यों नहीं तैनात हैं सुरक्षा कर्मी? यह कोई छोटी चूक नहीं, बल्कि 👉 सीधी-सीधी प्रशासनिक लापरवाही 👉 और हादसे को खुला निमंत्रण है। “पहले भी गई जान… फिर भी नहीं जागा सिस्टम” हाल ही में 👉 दो श्रद्धालुओं की मौत 👉 एक व्यक्ति आज तक लापता इसके बावजूद भी सुरक्षा के नाम पर केवल औपचारिकता ही नजर आ रही है। “अगर आज 60 जानें
चली जातीं…?” सोचिए अगर आज 👉 ये 50–60 लोग नहीं बचते 👉 कितने घर उजड़ जाते 👉 कितनी मांओं की गोद सूनी हो जाती 👉 कितने बच्चे अनाथ हो जाते सरकार मुआवजा देती, पुलिस शव ढूंढती… लेकिन क्या किसी की जिंदगी वापस आ सकती थी? जल पुलिस के जांबाजों को सलाम इस रेस्क्यू ऑपरेशन में 👉 एडीशनल अतुल सिंह 👉 हेड कांस्टेबल प्रीतम हेड कांस्टेबल नरेंद्र 👉 हेड कांस्टेबल कुलतार किशन 👉 गोताखोर गौरव, विक्रांत, मनोज बहुखंडी, चिराग ने जिस साहस का परिचय दिया, वह शब्दों से परे है। ये जवान ही आज सच्चे अर्थों में “जीवित देवदूत” साबित हुए। “अब भी नहीं चेते तो अगला हादसा तय है!” बैसाखी पर्व और चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचने वाले हैं। अगर अभी भी 👉 घाटों पर जंजीर नहीं लगी 👉 सुरक्षा इंतजाम नहीं हुए 👉 एंबुलेंस और रेस्क्यू अलर्ट नहीं हुआ तो अगली बार किस्मत नहीं, हादसा इतिहास लिखेगा। “मां गंगा ने बचाया… लेकिन कब तक?” आज यह साफ है कि 👉 मां गंगा की कृपा 👉 और जल पुलिस के साहस ने इस त्रासदी को टाल दिया। लेकिन सवाल वही है — क्या प्रशासन हर बार भगवान भरोसे ही रहेगा? ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़, हरिद्वार
- Post by Om tv haridwar1
- मुख्यमंत्री उत्तराखंड के “ड्रग्स फ्री देवभूमि मिशन–2026” के अंतर्गत जनपद को नशा मुक्त बनाने एवं अवैध मादक पदार्थों (शराब/स्मैक/हेरोइन/चरस/गांजा आदि) की तस्करी पर रोक लगाने हेतु हरिद्वार पुलिस द्वारा सघन अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रुड़की द्वारा नशा तस्करों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई हेतु टीमों का गठन किया गया। दिनांक 11.04.2026 को उ0नि0 सुभाष चंद्र जखमोला के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम द्वारा चेकिंग के दौरान 01 तस्कर के हिरासत में लिया जिसके कब्जे से 69.50 ग्राम अवैध चरस बरामद हुई। आरोपी के विरुद्ध मु0अ0सं0 127/26, NDPS Act के तहत अभियोग पंजीकृत कर विधिक कार्यवाही अमल में लायी जा रही है। *नाम पता आरोपित* योगेंद्र पुत्र अमर सिंह, निवासी डंडेरी ख्वाजगीपुर, रुड़की *बरामदगी* 69.50 ग्राम अवैध चरस *पुलिस टीम:* 1. उ0नि0 सुभाष चंद्र जखमोला 2. हे0कानि0 दिनेश गुप्ता 3. कानि0 अमित रावत 4. हे0कानि0 नूर अहमद 5. कांस्टेबल राजेश देवरानी1
- हरिद्वार से खबर हैं भगत सिंह चौक के पास कार में लगी भीषण आग,। कार जलकर हुई राख, मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने बमुश्किल आग पर पाया काबू, कोई जनहानि नहीं, आग लगने का कारण नहीं हुआ स्पष्ट1
- केशव भाई को नहीं मिल रहा न्याय पुलिस बचा रही अपने अधिकारियों को यह सब को पता है की सबसे बड़ा भ्रष्टाचार पुलिस के द्वारा किया जा रहा है उत्तराखंड की पुलिस मित्र पुलिस के नाम और एक बड़ा संकट है जनता के ऊपर मित्र पुलिस नहीं भाकसात पुलिस बनी हुई है यह केशव भाई के संघर्ष से पता चल रहा है कहते हैं कि जहां तक चले जाओ न्याय तो दूर की बात मुकदमे लिखते चले जाएंगे यानी के तानाशाही एक अलग अपने चरम पर पहुंच चुकी है परंतु ऐसा नहीं है की आने वाले चुनाव में सरकार को उखाड़ फेंकने की तैयारी तेज हो चुकी है आगे 2027 में जनता जनार्दन बताएगी कि किस क्या कहना है और कैसे सरकार चलेगी खबर जनहित में है1
- Sarkar ko is Vishesh per Dhyan Dena chahie1
- gram jawabi Lala se gaon ke nale ki Safai abhiyan karvate hue main Javed bhajpa adhyaksh like comment support Karen please1
- हरिद्वार में आज बैसाखी स्नान हो रहा है। स्नान के लिए बड़ी संख्या में पंजाब राजस्थान हरियाणा दिल्ली हिमाचल के श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचे हैं।नई फसलों के इस स्नान में प्रायः पंजाब प्रांत के लोग बहुतायत हरिद्वार पहुंचते थे लेकिन अब यह स्नान फीका रहने लगा है हालांकि अगले वर्ष अर्धकुंभ का यह प्रमुख स्नान होगा।आज के स्नान के लिए पूरे मेला क्षेत्र को 10 जोन और 33 सेक्टरों में बांटकर पुलिस प्रशासन ने व्यवस्थाएं की हैं। यातायात प्लान भी लागू किया गया है लेकिन अधिक भीड़भाड़ न होने से स्थिति सामान्य बनी हुई है।1
- The Aman Times 🚨 उद्घाटन से पहले ही देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस-वे पर बड़ा हादसा! 🚨 जहां एक ओर 14 अप्रैल को प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा देहरादून–दिल्ली एक्सप्रेस-वे के भव्य लोकार्पण की तैयारियां जोरों पर हैं, वहीं उद्घाटन से पहले ही इस हाईवे पर दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। दिल्ली–देहरादून हाईवे पर कई वाहन आपस में बुरी तरह टकरा गए। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कुछ गाड़ियां एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गईं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और हाईवे पर लंबा जाम लग गया, जिससे घंटों तक यातायात प्रभावित रहा। 🚑 सूचना मिलते ही पुलिस और राहत टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया और धीरे-धीरे ट्रैफिक को सामान्य करने की कोशिश की गई। ⚠️ सवाल यह है — जिस एक्सप्रेस-वे को विकास की रफ्तार कहा जा रहा है, क्या उस पर सुरक्षा के इंतजाम भी उतने ही मजबूत हैं? 👉 सड़कें तेज़ जरूर हो गई हैं, लेकिन क्या हम सुरक्षित भी हैं?1
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से लोगों को नहीं मिल रहा न्याय सीएम हेल्पलाइन 1905 शिकायत प्रकोष्ठ चलकर न्याय दिलाने की कोशिश हुई नाकाम अधिकारी लोग कर रहे गुमराह नहीं मिल रहा लोगों को न्याय लोगों ने कहा 2027 में बताएंगे1