बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने को लेकर तीखा बयान दिया है। चौधरी ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी आवास किसी की बपौती नहीं है और सरकारी संपत्ति पर किसी एक व्यक्ति या परिवार का स्थायी अधिकार नहीं हो सकता। उनके इस बयान को सीधे तौर पर राबड़ी देवी की ओर इशारा माना जा रहा है, जो लंबे समय से सरकारी आवास में रह रही हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद पीरो समेत पूरे भोजपुर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार शाम करीब 4:00 बजे से ही पीरो क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर गरमा गया है। विपक्षी दलों के कार्यकर्ता इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के समर्थक इसे नियम और कानून का पालन करार दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चाय दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जहाँ कुछ लोग इसे 'सिस्टम की सफाई' मान रहे हैं तो कुछ इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह बयान केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नई जंग की शुरुआत बनता दिख रहा है।
बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने को लेकर तीखा बयान दिया है। चौधरी ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी आवास किसी की बपौती नहीं है और सरकारी संपत्ति पर किसी एक व्यक्ति या परिवार का स्थायी अधिकार नहीं हो सकता। उनके इस बयान को सीधे तौर पर राबड़ी देवी की ओर इशारा माना जा रहा है, जो लंबे समय से सरकारी आवास में रह रही हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद पीरो समेत पूरे भोजपुर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार शाम करीब 4:00 बजे से ही पीरो क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर गरमा गया है। विपक्षी दलों के कार्यकर्ता इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के समर्थक इसे नियम और कानून का पालन करार दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चाय दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जहाँ कुछ लोग इसे 'सिस्टम की सफाई' मान रहे हैं तो कुछ इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह बयान केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नई जंग की शुरुआत बनता दिख रहा है।
- बिहार की राजनीति में एक बार फिर गर्माहट आ गई है, जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी बंगला खाली करने को लेकर तीखा बयान दिया है। चौधरी ने साफ शब्दों में कहा है कि सरकारी आवास किसी की बपौती नहीं है और सरकारी संपत्ति पर किसी एक व्यक्ति या परिवार का स्थायी अधिकार नहीं हो सकता। उनके इस बयान को सीधे तौर पर राबड़ी देवी की ओर इशारा माना जा रहा है, जो लंबे समय से सरकारी आवास में रह रही हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इस बयान के बाद पीरो समेत पूरे भोजपुर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। गुरुवार शाम करीब 4:00 बजे से ही पीरो क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाओं का दौर गरमा गया है। विपक्षी दलों के कार्यकर्ता इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बता रहे हैं, वहीं सत्तापक्ष के समर्थक इसे नियम और कानून का पालन करार दे रहे हैं। स्थानीय स्तर पर चाय दुकानों से लेकर चौक-चौराहों तक इस मुद्दे पर तीखी बहस छिड़ी हुई है, जहाँ कुछ लोग इसे 'सिस्टम की सफाई' मान रहे हैं तो कुछ इसे 'राजनीतिक प्रतिशोध' बता रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार में पहले से ही गर्म राजनीतिक माहौल के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि यह बयान केवल एक टिप्पणी नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति में एक नई जंग की शुरुआत बनता दिख रहा है।1
- सालों से चले आ रहे टेंडर प्रबंधन और 40% कमीशन दिए जाने की वजह से पुलों का गिरना एक निश्चित परिणाम बताया गया है। इस गंभीर स्थिति पर सवाल उठाया गया है कि आखिर यह सिलसिला कब बंद होगा।1
- lk raja1
- Post by CHANDAN KUMAR1
- भोजपुर जिले में पैक्स चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। यह चुनाव प्रशासन की चुस्त और कड़ी निगरानी के कारण बिना किसी बाधा के सफलतापूर्वक पूरा हो सका।1
- बढ़ती गर्मी और तेज़ धूप के मद्देनजर जेनरल प्रैक्टिशनर डॉ. जाकिर हुसैन ने आम जनता से अपने स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। आरा/बिरमपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी भी लापरवाही कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है। डॉ. हुसैन ने विशेष रूप से लू लगना (हीट स्ट्रोक), डिहाइड्रेशन, दस्त, उल्टी, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड और त्वचा संबंधी रोगों के बढ़ने वाले खतरों के प्रति आगाह किया। उन्होंने सलाह दी कि लोग अनावश्यक रूप से तेज़ धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पिएँ और केवल ताज़ा व स्वच्छ भोजन का सेवन करें। डॉ. जाकिर हुसैन ने बच्चों और बुजुर्गों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की बात कही, जिसमें घर से बाहर निकलते समय सिर को कपड़े या टोपी से ढकना और ओआरएस, नींबू पानी तथा अन्य तरल पदार्थों का सेवन करना शामिल है। उन्होंने बासी भोजन और खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से दूर रहने की भी हिदायत दी। डॉ. हुसैन ने यह भी बताया कि यदि किसी व्यक्ति को चक्कर आना, तेज़ बुखार, अत्यधिक प्यास, कमज़ोरी या लगातार उल्टी-दस्त जैसी शिकायतें महसूस हों, तो उन्हें तुरंत नज़दीकी चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। अपने संदेश में डॉ. जाकिर हुसैन ने कहा कि गर्मी के मौसम में थोड़ी सी सावधानी आपको कई गंभीर बीमारियों से बचा सकती है; स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और अपने परिवार का भी ख्याल रखें।1
- रोहतास में सोन नदी के बालू का अवैध तरीके से दोहन कर राजस्व को भारी क्षति पहुँचाई जा रही है, जिसे 'रोहतास का सोना' कहा जाता है। बताया गया है कि बालू माफिया एक ही चालान पर कई गाड़ियों को पास करवाते हैं और उनसे कई चक्कर भी लगवा लिए जाते हैं। इस अवैध कारोबार पर नकेल कसते हुए, बिक्रमगंज के एसडीएम प्रभात कुमार ने जाँच के दौरान कई वाहनों और ट्रकों को पकड़ा है जो बालू के इस अवैध धंधे में संलिप्त थे।1
- भोजपुर जिले के चरपोखरी क्षेत्र में गड़हनी रजवाहा नहर में पानी न आने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ रही है। धान की खेती का समय नजदीक है, लेकिन नहर सूखी पड़ी है, जिससे किसानों के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने धान की बीज बुवाई के लिए बीज, खाद और खेत तैयार कर लिए हैं, लेकिन पानी के अभाव में उनकी सारी मेहनत बेकार होती दिख रही है। इस स्थिति से किसानों के चेहरों पर मायूसी साफ झलक रही है। पानी की गंभीर कमी के कारण कई किसानों को मजबूरी में हैंडपंप और निजी साधनों से सिंचाई करनी पड़ रही है, जिससे उनकी लागत काफी बढ़ गई है। गरीब और छोटे किसानों के लिए यह अतिरिक्त खर्च उठाना बेहद मुश्किल हो रहा है। किसानों ने गुरुवार शाम करीब 4:00 बजे बताया कि नहर में समय पर पानी न छोड़े जाने की समस्या हर साल बनी रहती है, लेकिन इस बार स्थिति और भी खराब है। यदि जल्द ही नहर में पानी नहीं आया, तो धान की खेती पर भारी असर पड़ सकता है और उत्पादन में गिरावट तय मानी जा रही है। किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ रहा है। वे मांग कर रहे हैं कि प्रशासन और सिंचाई विभाग को समय रहते इस समस्या का समाधान करना चाहिए, अन्यथा किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। फिलहाल, सभी की निगाहें नहर में पानी छोड़े जाने पर टिकी हैं, ताकि किसानों को इस संकट से राहत मिल सके।1