logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

*हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।* *वह ईश्वर जो पूरे सृष्टि को रचा वह सब के अंदर विराजमान है, मनीष साह।* *हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।* मनीष साह सन ऑफ इंडिया अनुमंडल ब्यूरो चीफ दैनिक सिरहा टाइम्स शाखा मोतिहारी पूर्वी चंपारण। मोतिहारी 13 अक्टूबर 2026-दैनिक सिरहा टाइम्स के अनुमंडल ब्यूरो चीफ सन ऑफ इंडिया मनीष शाह ने आज जगदंबा धाम मोतिहारी स्थित कचहरी चौक में आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वीडियो क्लिप के माध्यम से अपील किया है कि आप अपने बच्चों के साथ आ रहे हैं तो सबसे पहले अपने आप में सतर्कता रखें और बच्चों का उंगली पड़कर के कहीं भी चले। ताकि आप सुरक्षित रहेंगे बच्चे सुरक्षित रहेंगे तब जाकर के आपकी भक्ति में आपका मन लगेगा। मनीष शाह ने आगे बताया कि ऐसे तो माता की कृपा और गुरु की कृपा से दो-चार शब्द मैं रखता हूं वॉइस मैसेज भेज रहा हूं। सारी बात हर शब्द में है। क्योंकि भगवान कृष्ण और राम और गुरु सब बता दिए की सारी सृष्टि तुम्हारे अंदर है। केवल अपने को जानो,अपने को देखो,अपने को परखो, अपने में अनुभव करो। इसलिए आप तो अनुभवी भी हैं माता के भक्त है संपादक हमारे रवि कुमार भार्गव सर।आज तृतीय छुट्टी होता है। 9 दिन साल में मौका मिलता है। 9 दिन पूरे गांव से, शहर से, मोतिहारी नगर में लोग आते हैं। कतारबद्ध होकर माता का दर्शन करते हैं, स्तुति करते हैं, मेला में घूमते हैं,अपने बच्चों को घुमाते हैं, परिवार को घुमाते हैं। हम सब जहां भी रहे खुश रहे हंसते रहे मुस्कुराते रहे और कतारबद्ध होकर कहीं जाए, बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिख कर रख दे,और बच्चे का हाथ पकड़े रहें, ताकि बच्चे इधर-उधर नहीं जाए। क्योंकि बच्चे अगर आपके साथ है तो आप स्वयं मग्न रहेंगे, गदगद रहेंगे। बच्चे परिवार से अलग होंगे तो आप दुखी हो जाएंगे। आपको भक्ति करने में मन नहीं लगेगा। इसलिए सन ऑफ इंडिया दैनिक सिरहा टाइम्स अनुमंडल ब्यूरो चीफ आप सभी से अपील करते हैं माता जगदंबे दुर्गा भवानी का नवरात्र व्रत का तीसरा दिन है आज माता चंद्रघंटा का आगमन है जो मनुष्य माता चंद्रघंटा का व्रत करता है उसके जीवन में कभी विपत्ति नहीं आती उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

1 hr ago
user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
1 hr ago

*हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।* *वह ईश्वर जो पूरे सृष्टि को रचा वह सब के अंदर विराजमान है, मनीष साह।* *हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।* मनीष साह सन ऑफ इंडिया अनुमंडल ब्यूरो चीफ दैनिक सिरहा टाइम्स शाखा मोतिहारी पूर्वी चंपारण। मोतिहारी 13 अक्टूबर 2026-दैनिक सिरहा टाइम्स के अनुमंडल ब्यूरो चीफ सन ऑफ इंडिया मनीष शाह ने आज जगदंबा धाम मोतिहारी स्थित कचहरी चौक में आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वीडियो क्लिप के माध्यम से अपील किया है कि आप अपने बच्चों के साथ आ रहे हैं तो सबसे पहले अपने आप में सतर्कता रखें और बच्चों का उंगली पड़कर के कहीं भी चले। ताकि आप सुरक्षित रहेंगे बच्चे सुरक्षित रहेंगे तब जाकर के आपकी भक्ति में आपका मन लगेगा। मनीष शाह ने आगे बताया कि ऐसे तो माता की कृपा और गुरु की कृपा से दो-चार शब्द मैं रखता हूं वॉइस मैसेज भेज रहा हूं। सारी बात हर शब्द में है। क्योंकि भगवान कृष्ण और राम और गुरु सब बता दिए की सारी सृष्टि तुम्हारे अंदर है। केवल अपने को जानो,अपने को देखो,अपने को परखो, अपने में अनुभव करो। इसलिए आप तो अनुभवी भी हैं माता के भक्त है संपादक हमारे रवि कुमार भार्गव सर।आज तृतीय छुट्टी होता है। 9 दिन साल में मौका मिलता है। 9 दिन पूरे गांव से, शहर से, मोतिहारी नगर में लोग आते हैं। कतारबद्ध होकर माता का दर्शन करते हैं, स्तुति करते हैं, मेला में घूमते हैं,अपने बच्चों को घुमाते हैं, परिवार को घुमाते हैं। हम सब जहां भी रहे खुश रहे हंसते रहे मुस्कुराते रहे और कतारबद्ध होकर कहीं जाए, बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिख कर रख दे,और बच्चे का हाथ पकड़े रहें, ताकि बच्चे इधर-उधर नहीं जाए। क्योंकि बच्चे अगर आपके साथ है तो आप स्वयं मग्न रहेंगे, गदगद रहेंगे। बच्चे परिवार से अलग होंगे तो आप दुखी हो जाएंगे। आपको भक्ति करने में मन नहीं लगेगा। इसलिए सन ऑफ इंडिया दैनिक सिरहा टाइम्स अनुमंडल ब्यूरो चीफ आप सभी से अपील करते हैं माता जगदंबे दुर्गा भवानी का नवरात्र व्रत का तीसरा दिन है आज माता चंद्रघंटा का आगमन है जो मनुष्य माता चंद्रघंटा का व्रत करता है उसके जीवन में कभी विपत्ति नहीं आती उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है।

More news from Purbi Champaran and nearby areas
  • कारतूस और 27 लाख रुपये कैश बरामद! जमीन के 65 से अधिक रजिस्ट्री कागजात भी जब्त, राकेश कारतूस और 27 लाख रुपये कैश बरामद! जमीन के 65 से अधिक रजिस्ट्री कागजात भी जब्त, राकेश शर्मा का बेटा साहिल गिरफ्तार। आखिर इस पूरे मामले में पुलिस की जांच क्या खुलासा करेगी?”एसपी स्वर्ण प्रभात का बड़ा एक्शन।#Motihari #MotihariNews #EastChamparan #BiharNews #BreakingNews #BigBreaking #MotihariPolice #BiharPolice #SPSwarnPrabhat #Chhatauni थाना #PoliceRaid #RaidNews #ArmsRecovery #CashRecovery #CrimeNews #BiharCrime #EastChamparanNews #रक्साकांड #मोतिहारी #पूर्वीचंपारण #छतौनी #पुलिसछापेमारी #हथियारबरामद #27लाखकैश #बिहारपुलिस #ताजा_खबर #वायरलन्यूज #KhabarOfPoint #RajuMukhiya
    1
    कारतूस और 27 लाख रुपये कैश बरामद! जमीन के 65 से अधिक रजिस्ट्री कागजात भी जब्त, राकेश
कारतूस और 27 लाख रुपये कैश बरामद! जमीन के 65 से अधिक रजिस्ट्री कागजात भी जब्त, राकेश शर्मा का बेटा साहिल गिरफ्तार। आखिर इस पूरे मामले में पुलिस की जांच क्या खुलासा करेगी?”एसपी स्वर्ण प्रभात का बड़ा एक्शन।#Motihari #MotihariNews #EastChamparan #BiharNews #BreakingNews #BigBreaking #MotihariPolice #BiharPolice #SPSwarnPrabhat #Chhatauni थाना #PoliceRaid #RaidNews #ArmsRecovery #CashRecovery #CrimeNews #BiharCrime #EastChamparanNews #रक्साकांड #मोतिहारी #पूर्वीचंपारण #छतौनी #पुलिसछापेमारी #हथियारबरामद #27लाखकैश #बिहारपुलिस #ताजा_खबर #वायरलन्यूज #KhabarOfPoint #RajuMukhiya
    user_Khabar Of Point
    Khabar Of Point
    प्रेस रिर्पोटर Pakri Dayal, Purbi Champaran•
    12 min ago
  • *हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।* *वह ईश्वर जो पूरे सृष्टि को रचा वह सब के अंदर विराजमान है, मनीष साह।* *हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।* मनीष साह सन ऑफ इंडिया अनुमंडल ब्यूरो चीफ दैनिक सिरहा टाइम्स शाखा मोतिहारी पूर्वी चंपारण। मोतिहारी 13 अक्टूबर 2026-दैनिक सिरहा टाइम्स के अनुमंडल ब्यूरो चीफ सन ऑफ इंडिया मनीष शाह ने आज जगदंबा धाम मोतिहारी स्थित कचहरी चौक में आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वीडियो क्लिप के माध्यम से अपील किया है कि आप अपने बच्चों के साथ आ रहे हैं तो सबसे पहले अपने आप में सतर्कता रखें और बच्चों का उंगली पड़कर के कहीं भी चले। ताकि आप सुरक्षित रहेंगे बच्चे सुरक्षित रहेंगे तब जाकर के आपकी भक्ति में आपका मन लगेगा। मनीष शाह ने आगे बताया कि ऐसे तो माता की कृपा और गुरु की कृपा से दो-चार शब्द मैं रखता हूं वॉइस मैसेज भेज रहा हूं। सारी बात हर शब्द में है। क्योंकि भगवान कृष्ण और राम और गुरु सब बता दिए की सारी सृष्टि तुम्हारे अंदर है। केवल अपने को जानो,अपने को देखो,अपने को परखो, अपने में अनुभव करो। इसलिए आप तो अनुभवी भी हैं माता के भक्त है संपादक हमारे रवि कुमार भार्गव सर।आज तृतीय छुट्टी होता है। 9 दिन साल में मौका मिलता है। 9 दिन पूरे गांव से, शहर से, मोतिहारी नगर में लोग आते हैं। कतारबद्ध होकर माता का दर्शन करते हैं, स्तुति करते हैं, मेला में घूमते हैं,अपने बच्चों को घुमाते हैं, परिवार को घुमाते हैं। हम सब जहां भी रहे खुश रहे हंसते रहे मुस्कुराते रहे और कतारबद्ध होकर कहीं जाए, बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिख कर रख दे,और बच्चे का हाथ पकड़े रहें, ताकि बच्चे इधर-उधर नहीं जाए। क्योंकि बच्चे अगर आपके साथ है तो आप स्वयं मग्न रहेंगे, गदगद रहेंगे। बच्चे परिवार से अलग होंगे तो आप दुखी हो जाएंगे। आपको भक्ति करने में मन नहीं लगेगा। इसलिए सन ऑफ इंडिया दैनिक सिरहा टाइम्स अनुमंडल ब्यूरो चीफ आप सभी से अपील करते हैं माता जगदंबे दुर्गा भवानी का नवरात्र व्रत का तीसरा दिन है आज माता चंद्रघंटा का आगमन है जो मनुष्य माता चंद्रघंटा का व्रत करता है उसके जीवन में कभी विपत्ति नहीं आती उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है।
    1
    *हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।*
*वह ईश्वर जो पूरे सृष्टि को रचा वह सब के अंदर विराजमान है, मनीष साह।*
*हर व्यक्ति को अपने स्वास्थ्य को देखना चाहिए अपना कर्तव्य को देखना चाहिए अपना मजदूरी का भरोसा रखना चाहिए, जो भी लोग हमारे जगदंबा धाम आ रहे हैं पूरे परिवार के साथ उन्हें अपने बच्चों पर पूरा-पूरा ध्यान रखना चाहिए-मनीष साह।*
मनीष साह सन ऑफ इंडिया अनुमंडल ब्यूरो चीफ दैनिक सिरहा टाइम्स शाखा मोतिहारी पूर्वी चंपारण।
मोतिहारी 13 अक्टूबर 2026-दैनिक सिरहा टाइम्स के अनुमंडल ब्यूरो चीफ सन ऑफ इंडिया मनीष शाह ने आज जगदंबा धाम मोतिहारी स्थित कचहरी चौक में आने वाले श्रद्धालुओं को अपने वीडियो क्लिप के माध्यम से अपील किया है कि आप अपने बच्चों के साथ आ रहे हैं तो सबसे पहले अपने आप में सतर्कता रखें और बच्चों का उंगली पड़कर के कहीं भी चले। ताकि आप सुरक्षित रहेंगे बच्चे सुरक्षित रहेंगे तब जाकर के आपकी भक्ति में आपका मन लगेगा। मनीष शाह ने आगे बताया कि ऐसे तो माता की कृपा और गुरु की कृपा से दो-चार शब्द मैं रखता हूं वॉइस मैसेज भेज रहा हूं। सारी बात हर शब्द में है। क्योंकि भगवान कृष्ण और राम और गुरु सब बता दिए की सारी सृष्टि तुम्हारे अंदर है। केवल अपने को जानो,अपने को देखो,अपने को परखो, अपने में अनुभव करो। इसलिए आप तो अनुभवी भी हैं माता के भक्त है संपादक हमारे रवि कुमार भार्गव सर।आज तृतीय छुट्टी होता है। 9 दिन साल में मौका मिलता है। 9 दिन पूरे गांव से, शहर से, मोतिहारी नगर में लोग आते हैं। कतारबद्ध होकर माता का दर्शन करते हैं, स्तुति करते हैं, मेला में घूमते हैं,अपने बच्चों को घुमाते हैं, परिवार को घुमाते हैं। हम सब जहां भी रहे खुश रहे हंसते रहे मुस्कुराते रहे और कतारबद्ध होकर कहीं जाए, बच्चों के पॉकेट में मोबाइल नंबर लिख कर रख दे,और बच्चे का हाथ पकड़े रहें, ताकि बच्चे इधर-उधर नहीं जाए। क्योंकि बच्चे अगर आपके साथ है तो आप स्वयं मग्न रहेंगे, गदगद रहेंगे। बच्चे परिवार से अलग होंगे तो आप दुखी हो जाएंगे। आपको भक्ति करने में मन नहीं लगेगा। इसलिए सन ऑफ इंडिया दैनिक सिरहा टाइम्स अनुमंडल ब्यूरो चीफ आप सभी से अपील करते हैं माता जगदंबे दुर्गा भवानी का नवरात्र व्रत का तीसरा दिन है आज माता चंद्रघंटा का आगमन है जो मनुष्य माता चंद्रघंटा का व्रत करता है उसके जीवन में कभी विपत्ति नहीं आती उनकी हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
  • कृषि एप डाउनलोड में सारण को तीसरा स्थान, हासिल किया है। सीतामढ़ी से महज़ 471 किसान पीछे, सीवान सबसे आगे, रिपोर्ट:- छपरा सारण के किसान हाईटेक हो रहें हैं। नई तकनीक अपनाने विभागीय जानकारी हासिल करने और कृषि सेवाओं के जरिये डिजिटल रूप में जुड़ने की दिशा में यहां के किसानों ने क़दम बढ़ाया है और बिहार कृषि एप डाउनलोड करने के मामले में सूबे में तीसरा स्थान हासिल कर नया आयाम गढ़ा है। #Aima#Media#news#viral
    1
    कृषि एप डाउनलोड में सारण को तीसरा स्थान, हासिल किया है। सीतामढ़ी से महज़ 471 किसान पीछे,
सीवान सबसे आगे,
रिपोर्ट:- छपरा सारण के किसान हाईटेक हो रहें हैं। नई तकनीक अपनाने विभागीय जानकारी हासिल करने और कृषि सेवाओं के जरिये डिजिटल रूप में जुड़ने की दिशा में यहां के किसानों ने क़दम बढ़ाया है और बिहार कृषि एप डाउनलोड करने के मामले में सूबे में तीसरा स्थान हासिल कर नया आयाम गढ़ा है।
#Aima#Media#news#viral
    user_Rupak kumar jha
    Rupak kumar jha
    Court reporter पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    3 hrs ago
  • शिवहर में शराब तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार! 1014 लीटर विदेशी शराब बरामद, पिकअप वाहन जब्त #Sheohar #Tariyani #शराब_बरामद शिवहर में शराब तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार! 1014 लीटर विदेशी शराब बरामद, पिकअप वाहन जब्त #Sheohar #Tariyani #शराब_बरामद
    1
    शिवहर में शराब तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार! 1014 लीटर विदेशी शराब बरामद, पिकअप वाहन जब्त
 #Sheohar #Tariyani  #शराब_बरामद
शिवहर में शराब तस्करों पर पुलिस का बड़ा प्रहार! 1014 लीटर विदेशी शराब बरामद, पिकअप वाहन जब्त
#Sheohar #Tariyani  #शराब_बरामद
    user_Bihar ke Janta ki Awaaz
    Bihar ke Janta ki Awaaz
    शिवहर, शिवहर, बिहार•
    6 hrs ago
  • शिवहर/तरियानी पुलिस की बड़ी कार्रवाई,
    1
    शिवहर/तरियानी पुलिस की बड़ी कार्रवाई,
    user_Vinod Singh Rajput, shivhar News
    Vinod Singh Rajput, shivhar News
    Newspaper publisher तरियानी चौक, शिवहर, बिहार•
    3 hrs ago
  • एचपीसीएल एचबीएल ने पहली बार एचबीएल प्रीमियर लीग मैच का एकदिवसीय फैंसी क्रिकेट मैच का आयोजन। मैच का आयोजन सुगौली के एमजेके स्टेडियम में किया गया। इस रंगारंग मैच में सुगौली ने लौरिया को हराया।
    1
    एचपीसीएल एचबीएल ने पहली बार एचबीएल प्रीमियर लीग मैच का एकदिवसीय फैंसी क्रिकेट मैच का आयोजन। मैच का आयोजन सुगौली के एमजेके स्टेडियम में किया गया। इस रंगारंग मैच में सुगौली ने लौरिया को हराया।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    22 hrs ago
  • कांटी नगर परिषद वार्ड 23+20 सहित कांटी नगर,शहर, गांव को जोड़ने वाली कांटी पुर्वी रेलवे गुमटी के पास का अंडरग्राउंड पुल में पानी जमा होने से आवागमन में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। ख़ास कर जब रेलवे गुमटी बंद रहने पर, कई आदमी का एंबुलेंस हॉस्पिटल जाने आने के बकत ही मौत हो जाता है। और कई बार शव,अर्थी, को शमशान ले जाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या कोई सत्ताधारी नेता इस का श्रेय लेना नहीं चाहता। क्या नेता कपरपुरा स्टेशन के बंद घूमती चालू होने के बाद जैसा श्रेय लेने का होड़ लगाएंगे। वैसे ही घटना घटने या समस्या का समाधान होने पर चुप्पी तोड़ेंगे सांसद विधायक, नगर अध्यक्ष, *यह बातें काॅंटी विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष पिनाकी झा कहीं* कांटी नगर परिषद वार्ड 23+20 सहित कांटी नगर,शहर, गांव को जोड़ने वाली कांटी पुर्वी रेलवे गुमटी के पास का अंडरग्राउंड पुल में पानी जमा होने से आवागमन में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। ख़ास कर जब रेलवे गुमटी बंद रहने पर, कई आदमी का एंबुलेंस हॉस्पिटल जाने आने के बकत ही मौत हो जाता है। और कई बार शव,अर्थी, को शमशान ले जाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या कोई सत्ताधारी नेता इस का श्रेय लेना नहीं चाहता। क्या नेता कपरपुरा स्टेशन के बंद घूमती चालू होने के बाद जैसा श्रेय लेने का होड़ लगाएंगे। वैसे ही घटना घटने या समस्या का समाधान होने पर चुप्पी तोड़ेंगे सांसद विधायक, नगर अध्यक्ष, *यह बातें काॅंटी विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष पिनाकी झा कहीं*
    1
    कांटी नगर परिषद वार्ड 23+20 सहित कांटी नगर,शहर, गांव को जोड़ने वाली कांटी  पुर्वी रेलवे गुमटी के पास का अंडरग्राउंड पुल में पानी जमा होने से आवागमन में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। ख़ास कर जब रेलवे गुमटी बंद रहने पर, कई आदमी का एंबुलेंस हॉस्पिटल जाने आने के बकत ही मौत हो जाता है। और कई बार शव,अर्थी, को शमशान ले जाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या कोई सत्ताधारी नेता इस का श्रेय लेना नहीं चाहता। क्या नेता कपरपुरा स्टेशन के बंद घूमती चालू होने के बाद जैसा श्रेय लेने का होड़ लगाएंगे। वैसे ही घटना घटने या समस्या का समाधान होने पर चुप्पी तोड़ेंगे सांसद विधायक, नगर अध्यक्ष, *यह बातें काॅंटी विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष पिनाकी झा कहीं*
कांटी नगर परिषद वार्ड 23+20 सहित कांटी नगर,शहर, गांव को जोड़ने वाली कांटी  पुर्वी रेलवे गुमटी के पास का अंडरग्राउंड पुल में पानी जमा होने से आवागमन में बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है। ख़ास कर जब रेलवे गुमटी बंद रहने पर, कई आदमी का एंबुलेंस हॉस्पिटल जाने आने के बकत ही मौत हो जाता है। और कई बार शव,अर्थी, को शमशान ले जाने में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्या कोई सत्ताधारी नेता इस का श्रेय लेना नहीं चाहता। क्या नेता कपरपुरा स्टेशन के बंद घूमती चालू होने के बाद जैसा श्रेय लेने का होड़ लगाएंगे। वैसे ही घटना घटने या समस्या का समाधान होने पर चुप्पी तोड़ेंगे सांसद विधायक, नगर अध्यक्ष, *यह बातें काॅंटी विकास संघर्ष समिति अध्यक्ष पिनाकी झा कहीं*
    user_पिनाकी झा
    पिनाकी झा
    कांति, मुजफ्फरपुर, बिहार•
    19 min ago
  • आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के दूसरे रूप माता ब्रह्मचारिणी का आज पूजा अर्चना रवि कुमार भार्गव के द्वारा हुई संपन्न। ----रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक सिरहा टाइम्स ने आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी के संबंध में विस्तार पूर्वक उनकी गाथा को दर्शाया।। आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के दूसरे रूप माता ब्रह्मचारिणी का आज पूजा अर्चना रवि कुमार भार्गव के द्वारा हुई संपन्न। ----रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक सिरहा टाइम्स ने आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी के संबंध में विस्तार पूर्वक उनकी गाथा को दर्शाया।। दैनिक सिरहा टाइम्स सिरहाकोठी 12 अक्टूबर 2026-दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक श्री रवि कुमार भार्गव ने अपने परिजन के साथ अपने भार्गव भवन में आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के आज द्वितीय रूप माता ब्रह्मचारिणी का पूजा अर्चना और हमने यज्ञ कार्यक्रम आयोजित किया। आज के हवन यज्ञ में श्री रवि कुमार भार्गव एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती प्रियंका भार्गव बड़े पुत्र राजकुमार शैलेंद्र कुमार भार्गव छोटे पुत्र हार्षित कुमार भार्गव पुत्री मोनिका कुमारी हार्षिता कुमारी,नतिनी लक्ष्मी कुमारी कुशवाहा, संयोगिता सुमन उर्फ लई कुमारी, श्रीमती अर्चना सिंह रानी, आज की पूजा में भाग लिया। इस अवसर पर माता दुर्गा के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी के बारे में रवि कुमार भार्गव ने विस्तार पूर्व के बताया जो इस प्रकार से है:-मैं आपको बताता चलूं की आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजन करने से मनुष्य जीवन को जो लाभ मिलता है वह इस प्रकार है:-या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में शक्ति की उपासना केवल श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने की प्रेरणा है। सनातन संस्कृति में नवरात्र के नौ दिन साधक को आत्मचिंतन और आत्मिक विकास की ओर अग्रसर करते हैं। मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप में किसी विशिष्ट मानवीय मूल्य की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसी क्रम में, दूसरे दिन पूजी जाने वाली मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या, त्याग, धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मानुशासन का साक्षात प्रतीक है। जब तप और अदम्य संकल्प की पराकाष्ठा की बात आती है, तो मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण मन में अलौकिक ऊर्जा भर देता है। श्वेत वस्त्र धारण किए, एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कमंडल थामे देवी यह संदेश देती हैं कि साधना और संयम के बिना किसी बड़ी सिद्धि को प्राप्त नहीं किया जा सकता। नवरात्र का दूसरा दिन हमारे अंतःकरण में उसी पावन अग्नि को प्रज्वलित करने का अवसर है, जो हर कठिन लक्ष्य को संभव बनाती है। मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण रेखांकित करता है कि वास्तविक सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों या सामाजिक प्रतिष्ठा से नहीं मिलती। इसके लिए अपनी दुर्बलताओं को पहचानना, इच्छाओं पर विवेकपूर्ण नियंत्रण रखना और लक्ष्य के प्रति निष्ठावान रहना आवश्यक है। जिस प्रकार एक पौधे को वृक्ष बनने के लिए धैर्य और निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार व्यक्तित्व का निर्माण भी नियमित प्रयास और आत्मसंयम से होता है। संक्षेप में, मां ब्रह्मचारिणी की उपासना केवल आशीर्वाद की कामना तक सीमित नहीं है; यह भक्त को अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाने और जीवन में सद्गुणों को उतारने का मार्ग दिखाती है। आइए, उनके अचल तप और अविचल विश्वास को अपने भीतर अपनाने का संकल्प लें।मां ब्रह्मचारिणी के नाम का आध्यात्मिक अर्थ-‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द अपने भीतर गहरा आध्यात्मिक अर्थ समेटे हुए है। सामान्य रूप से इसका संबंध ब्रह्मचर्य, तपस्या और संयमपूर्ण जीवन से जोड़ा जाता है। व्यापक आध्यात्मिक दृष्टि से ब्रह्मचर्य का आशय केवल इंद्रियों पर नियंत्रण रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा, विचारों, भावनाओं और व्यवहार को किसी श्रेष्ठ उद्देश्य की दिशा में नियोजित करना भी है। इसका अर्थ है कि मनुष्य अपनी क्षमताओं को अनावश्यक इच्छाओं और क्षणिक आकर्षणों में बिखेरने के बजाय उन्हें ज्ञान, साधना, सेवा और आत्म विकास में लगाए। भारतीय दर्शन में ब्रह्म को परम सत्य और सर्वोच्च चेतना के रूप में समझा जाता है। इस दृष्टि से ब्रह्म के मार्ग पर चलने का अर्थ सत्य, विवेक और आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ना है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप साधक को इसी मार्ग की ओर प्रेरित करता है। वह सिखाता है कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए मन की चंचलता को समझना, विचारों को परिष्कृत करना और अपने आचरण में स्थिरता लाना आवश्यक है। आज के संदर्भ में भी इस आदर्श का विशेष महत्व है। मनुष्य अनेक प्रकार के आकर्षणों, अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धाओं के बीच जीवन व्यतीत करता है। ऐसे में अपनी प्राथमिकताओं को पहचानना और अनावश्यक विचलनों से बचना व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण शर्त है। मां ब्रह्मचारिणी का संदेश है कि जब मनुष्य अपने उद्देश्य के प्रति स्पष्ट होता है, तब उसका समय, श्रम और ऊर्जा अधिक सार्थक दिशा में प्रयुक्त होते हैं।मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप शांत, सौम्य और तपोमय माना जाता है। धार्मिक चित्रणों में उन्हें प्रायः श्वेत वस्त्र धारण किए हुए दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उनका यह स्वरूप सादगी, पवित्रता, साधना और आत्मसंयम के आदर्शों को प्रकट करता है। उनके हाथ में सुशोभित जपमाला निरंतर साधना और एकाग्रता का प्रतीक है। मंत्र-जप के माध्यम से साधक अपने मन को एकाग्र करने और विचारों की चंचलता को कम करने का प्रयास करता है। जपमाला यह भी संकेत देती है कि किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है। जिस प्रकार एक-एक मनका आगे बढ़ाते हुए जप पूरा किया जाता है, उसी प्रकार जीवन में भी छोटी-छोटी सतत कोशिशें मिलकर बड़ी उपलब्धियों का आधार बनती हैं। कमंडल सादगी, संयम और सीमित आवश्यकताओं के साथ जीवन जीने की भावना का प्रतीक माना जा सकता है। यह मनुष्य को याद दिलाता है कि जीवन की सार्थकता केवल अधिक से अधिक साधन जुटाने में नहीं, बल्कि उपलब्ध साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने में भी है। आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच अंतर समझना आंतरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। मां का शांत स्वरूप एक अन्य गहरा संदेश देता है। वास्तविक शक्ति हमेशा उग्रता या बाहरी प्रदर्शन में दिखाई नहीं देती। कई बार धैर्यपूर्वक परिस्थितियों का सामना करना, कठिन समय में विवेक बनाए रखना और आवेगों पर नियंत्रण रखना अधिक बड़ी शक्ति का परिचय होता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप इसी आंतरिक सामर्थ्य का प्रतीक है।<br>देवी पार्वती की तपस्या और दृढ़ संकल्प की कथा-पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती के उस तपस्विनी स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। देवी पार्वती का यह संकल्प उनके धैर्य, निष्ठा और साधना की दृढ़ता को दर्शाता है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्य से विमुख हुए बिना तप का मार्ग अपनाया। देवी की तपस्या की कथा का आध्यात्मिक महत्व उसके बाहरी घटनाक्रम से आगे बढ़कर समझा जा सकता है। यह कथा मनुष्य को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है। जीवन में अनेक अवसरों पर परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं। कभी संसाधनों की कमी सामने आती है, कभी असफलता निराश करती है और कभी दूसरों की आलोचना मनोबल को कमजोर करने लगती है। ऐसे समय में अपने उद्देश्य पर विश्वास बनाए रखना और विवेकपूर्ण ढंग से प्रयास जारी रखना अत्यंत आवश्यक होता है। मां ब्रह्मचारिणी का आदर्श बताता है कि दृढ़ संकल्प का अर्थ केवल किसी इच्छा को मन में बनाए रखना नहीं, बल्कि उसके अनुरूप निरंतर प्रयास करना है। संकल्प तभी सार्थक होता है, जब वह धैर्य, अनुशासन और कर्म से जुड़ता है। देवी पार्वती की तपस्या इसी एकनिष्ठ साधना का प्रतीक है। इस कथा को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से जोड़कर देखा जा सकता है। ज्ञान प्राप्त करने वाला विद्यार्थी, समाज की सेवा में लगा व्यक्ति, अपने कार्य के प्रति समर्पित कर्मयोगी और कठिन परिस्थितियों से जूझता परिवार सभी के लिए धैर्य तथा निरंतर प्रयास महत्वपूर्ण हैं। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप यह विश्वास जगाता है कि कठिनाइयों के बीच भी अपने मूल्यों और उद्देश्य के प्रति निष्ठावान रहा जा सकता है।भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में तपस्या को आत्मशुद्धि और आत्मपरिष्कार का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। सामान्य अर्थ में तप का संबंध कठिन साधना से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका व्यापक आशय अपनी दुर्बलताओं को पहचान कर उन्हें दूर करने और जीवन में अनुशासन स्थापित करने से है। तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने या सुविधाओं का त्याग करने का नाम नहीं है। उसका वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर विवेक, धैर्य, करुणा और आत्मबल का विकास करना है। मनुष्य के भीतर अनेक इच्छाएं, आकांक्षाएं और भावनाएं जन्म लेती हैं। इनमें से कुछ उसके विकास में सहायक होती हैं, जबकि कुछ उसे लक्ष्य से भटका सकती हैं। जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं का मूल्यांकन विवेक के आधार पर करता है और उचित-अनुचित के बीच अंतर समझकर निर्णय लेता है, तब वह आत्मसंयम की दिशा में आगे बढ़ता है। <br>यही तपस्या का व्यावहारिक पक्ष है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना इस बात की प्रेरणा देती है कि आत्म विकास के लिए नियमित प्रयास आवश्यक हैं। क्रोध पर नियंत्रण रखना, कटु वचन बोलने से बचना, कठिन समय में धैर्य बनाए रखना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वाह करना और दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना भी आत्मानुशासन के रूप हैं।तपस्या का एक महत्वपूर्ण पक्ष अहंकार का परिष्कार भी है। यदि साधना से व्यक्ति में विनम्रता और करुणा विकसित नहीं होती, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति मनुष्य को दूसरों से श्रेष्ठ होने का भाव नहीं देती, बल्कि उसे अधिक संवेदनशील, सहनशील और जिम्मेदार बनाती है। इस दृष्टि से मां ब्रह्मचारिणी का संदेश आत्मबल के साथ विनम्रता को भी महत्व देता है।<br>संयम और आत्मानुशासन का महत्व-संयम जीवन को संतुलित बनाने का आधार है। इसका अर्थ इच्छाओं का पूर्ण निषेध नहीं, बल्कि उनके प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना है। मनुष्य के लिए भोजन, विश्राम, मनोरंजन, कार्य और सामाजिक संबंध सभी आवश्यक हैं। लेकिन जब इनमें से कोई भी पक्ष असंतुलित हो जाता है, तो जीवन की सहजता प्रभावित होने लगती है। आत्मानुशासन व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता करता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप सिखाता है कि मनुष्य को अपनी वाणी, विचार और कर्म के प्रति सजग रहना चाहिए। बोलने से पहले विचार करना, प्रतिक्रिया देने से पहले परिस्थिति को समझना और निर्णय लेने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना परिपक्व व्यक्तित्व के लक्षण हैं। इसी प्रकार समय का सदुपयोग, नियमित दिनचर्या और अपने दायित्वों के प्रति ईमानदारी भी अनुशासन की अभिव्यक्तियां हैं। आत्मसंयम का अर्थ अपनी भावनाओं को दबाना भी नहीं है। क्रोध, दुख, भय और प्रसन्नता मनुष्य की स्वाभाविक भावनाएं हैं। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति उन्हें समझे और उनके प्रभाव में आकर ऐसा व्यवहार न करे, जिससे स्वयं या दूसरों को अनावश्यक नुकसान पहुंचे। इस प्रकार संयम भावनात्मक संतुलन और विवेकपूर्ण व्यवहार का मार्ग प्रशस्त करता है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा इस आदर्श को अपने जीवन में उतारने का अवसर प्रदान करती है। पूजा के साथ यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प भी ले, तो धार्मिक साधना का प्रभाव उसके दैनिक जीवन में दिखाई दे सकता है।धैर्य और दृढ़ता : सफलता के आधार-जीवन में प्रत्येक महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे समय, श्रम और निरंतरता का योगदान होता है। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने की यात्रा में बाधाएं आना स्वाभाविक है। कई बार अपेक्षित परिणाम मिलने में देर होती है और कई बार किए गए प्रयास तत्काल सफलता नहीं दिला पाते। ऐसी परिस्थितियों में अधीर होकर प्रयास छोड़ देना आसान होता है, लेकिन धैर्य बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। मां ब्रह्मचारिणी का तपस्विनी स्वरूप यही संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प को समय की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है। धैर्य का अर्थ निष्क्रिय होकर परिस्थितियों की प्रतीक्षा करना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है कि व्यक्ति परिस्थितियों का आकलन करे, आवश्यक सुधार करे और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील रहे। धैर्य मनुष्य को असफलता से सीखने की क्षमता भी देता है। असफलता को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय यदि उसे अपनी कमियों को समझने का अवसर माना जाए, तो आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। इसी प्रकार आलोचना को विवेकपूर्वक स्वीकार करना और सफलता मिलने पर भी विनम्र बने रहना मानसिक परिपक्वता के संकेत हैं। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से जुड़ा यह संदेश विद्यार्थियों, युवाओं, कर्मियों और समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगी है। जीवन में स्थायी उपलब्धियां केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि नियमित अभ्यास, आत्मविश्वास और कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता से भी निर्मित होती हैं।भक्ति, श्रद्धा और समर्पण की साधना-सनातन परंपरा में भक्ति को ईश्वर के प्रति प्रेम, विश्वास और समर्पण की अभिव्यक्ति माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना में भी श्रद्धा और साधना का विशेष महत्व है। हालांकि भक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। उसका प्रभाव व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवन-मूल्यों में भी दिखाई देना चाहिए। सच्ची श्रद्धा मनुष्य को विनम्र बनाती है। वह अपने सामर्थ्य पर विश्वास रखते हुए भी यह स्वीकार करता है कि जीवन में अनेक परिस्थितियां उसके नियंत्रण से बाहर होती हैं। समर्पण उसे निराशा से उबरने और अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते रहने की प्रेरणा दे सकता है। इसके साथ विवेक और कर्मशीलता बनाए रखना भी आवश्यक है। जप, ध्यान, प्रार्थना और आत्मचिंतन साधना के ऐसे माध्यम हैं, जिनसे व्यक्ति अपने मन को समझने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का प्रयास कर सकता है। नियमित साधना से व्यक्ति को अपने विचारों तथा प्रतिक्रियाओं का निरीक्षण करने का अवसर मिलता है। वह यह समझने लगता है कि किन प्रवृत्तियों को विकसित करना है और किन आदतों में परिवर्तन की आवश्यकता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का व्यापक संदेश यह है कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा और जीवन के प्रति जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सच्ची भक्ति व्यक्ति को अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं करती, बल्कि उन्हें अधिक निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ निभाने की प्रेरणा देती है।<br>आधुनिक जीवन में मां ब्रह्मचारिणी की प्रासंगिकता-वर्तमान समय में जीवन की गति तेज हुई है। तकनीक और संचार के साधनों ने अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, लेकिन साथ ही ध्यान भटकने, निरंतर तुलना करने और तत्काल परिणाम प्राप्त करने की इच्छा जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। सामाजिक माध्यमों पर दूसरों की उपलब्धियों को देखकर व्यक्ति कई बार अपने जीवन का मूल्यांकन करने लगता है। इससे असंतोष, अधीरता और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न हो सकती है। ऐसे वातावरण में मां ब्रह्मचारिणी का संदेश विशेष प्रासंगिकता रखता है। उनका आदर्श बताता है कि आत्म विकास के लिए बाहरी दुनिया की गति से अधिक अपने भीतर की दिशा को समझना आवश्यक है। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य स्पष्ट रखे, समय का विवेकपूर्ण उपयोग करे और नियमित अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाए, तो वह अधिक संतुलित ढंग से आगे बढ़ सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह संदेश एकाग्रता, अध्ययन-अनुशासन और निरंतर अभ्यास के महत्व को रेखांकित करता है। युवाओं के लिए यह अपने लक्ष्य निर्धारित करने और कठिनाइयों के बावजूद प्रयास जारी रखने की प्रेरणा है। कार्यक्षेत्र में यह जिम्मेदारी, ईमानदारी और समयबद्धता के महत्व को सामने लाता है। पारिवारिक जीवन में संयम, संवाद और धैर्य संबंधों को स्वस्थ बनाए रखने में सहायता करते हैं। आधुनिक जीवन में तपस्या का अर्थ जंगलों या एकांत में जाकर साधना करना ही नहीं है। अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वाह करना, अनुचित लाभ से बचना, कठिन परिस्थिति में भी सत्य का साथ देना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना भी नैतिक साधना के रूप हैं। इस प्रकार मां ब्रह्मचारिणी का आध्यात्मिक आदर्श दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है।पूजा, मंत्र-जप और आंतरिक साधना-नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा श्रद्धा और पवित्र भाव से की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना, मंत्र-जप, ध्यान और प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर मां के तपस्विनी स्वरूप का स्मरण करते हुए धैर्य, संयम और सद्बुद्धि की कामना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का प्रचलित मंत्र है “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥” इस मंत्र का भाव मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप के प्रति श्रद्धापूर्वक नमन करना है। भक्त मंत्र-जप को मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक चिंतन का माध्यम मानते हैं। पूजा के समय शांत मन से प्रार्थना करना और अपने जीवन के व्यवहार पर विचार करना साधना को अधिक अर्थपूर्ण बना सकता है। धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य केवल बाहरी विधि पूरी करना नहीं, बल्कि अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन की भावना जगाना भी है। यदि मां की पूजा करने वाला व्यक्ति सत्य बोलने, क्रोध पर नियंत्रण रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वाह करने का प्रयास करे, तो वह देवी के आदर्शों को जीवन में उतारने की दिशा में आगे बढ़ता है। इस प्रकार पूजा और आचरण के बीच संबंध स्थापित होता है। श्रद्धा व्यक्ति को प्रेरणा देती है, जबकि नियमित कर्म उस प्रेरणा को व्यवहार में बदलते हैं। यही धार्मिक साधना का व्यावहारिक और आध्यात्मिक पक्ष है।आत्मबल और आत्मशुद्धि की प्रेरणा-मां ब्रह्मचारिणी का दिव्य स्वरूप भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प के महत्व को उजागर करता है। देवी पार्वती की तपस्या की पौराणिक कथा मनुष्य को अपने उद्देश्य के प्रति निष्ठावान रहने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देती है। उनका शांत स्वरूप यह संदेश देता है कि वास्तविक शक्ति केवल बाहरी सामर्थ्य में नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, विचारों की पवित्रता और विवेकपूर्ण आचरण में भी निहित है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना आत्मनिरीक्षण का अवसर है। यह हमें अपनी इच्छाओं, आदतों और व्यवहार का मूल्यांकन करने तथा जीवन को अधिक संतुलित बनाने की प्रेरणा देती है। तपस्या का सार स्वयं को कष्ट देना नहीं, बल्कि अपनी दुर्बलताओं को पहचान कर उनमें सुधार करना है। संयम का उद्देश्य जीवन को सीमित करना नहीं, बल्कि उसे उचित दिशा देना है। धैर्य का अर्थ निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है। आज जब व्यक्ति अनेक प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं और अपेक्षाओं के बीच अपने लिए संतुलन खोज रहा है, तब मां ब्रह्मचारिणी का संदेश विशेष अर्थ रखता है। उनकी उपासना हमें स्मरण कराती है कि आत्म विकास के लिए नियमित साधना, नैतिक आचरण और सकारात्मक संकल्प आवश्यक हैं। जब श्रद्धा के साथ अनुशासन, भक्ति के साथ कर्म और संकल्प के साथ धैर्य जुड़ते हैं, तभी जीवन अधिक सार्थक बनता है। इस दृष्टि से मां ब्रह्मचारिणी की महिमा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली प्रेरणा भी है। उनका आदर्श मनुष्य को भीतर से मजबूत, व्यवहार में विनम्र और अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग बनने का मार्ग दिखाता है। यही उनकी आराधना का व्यापक आध्यात्मिक संदेश है।
    1
    आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के दूसरे रूप माता ब्रह्मचारिणी का आज पूजा अर्चना रवि कुमार भार्गव के द्वारा हुई संपन्न।                                                             ----रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक सिरहा टाइम्स ने आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी के संबंध में विस्तार पूर्वक उनकी गाथा को दर्शाया।।                    
आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के दूसरे रूप माता ब्रह्मचारिणी का आज पूजा अर्चना रवि कुमार भार्गव के द्वारा हुई संपन्न।                                                             ----रवि कुमार भार्गव संपादक दैनिक सिरहा टाइम्स ने आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी के संबंध में विस्तार पूर्वक उनकी गाथा को दर्शाया।।                                                                                                  दैनिक सिरहा टाइम्स
सिरहाकोठी 12 अक्टूबर 2026-दैनिक सिरहा टाइम्स के संपादक श्री रवि कुमार भार्गव ने अपने परिजन के साथ अपने भार्गव भवन में आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के आज द्वितीय रूप माता ब्रह्मचारिणी का पूजा अर्चना और हमने यज्ञ कार्यक्रम आयोजित किया। आज के हवन यज्ञ में श्री रवि कुमार भार्गव एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती प्रियंका भार्गव बड़े पुत्र राजकुमार शैलेंद्र कुमार भार्गव छोटे पुत्र हार्षित कुमार भार्गव पुत्री मोनिका कुमारी हार्षिता कुमारी,नतिनी लक्ष्मी कुमारी कुशवाहा, संयोगिता सुमन उर्फ लई कुमारी, श्रीमती अर्चना सिंह रानी, आज की पूजा में भाग लिया। इस अवसर पर माता दुर्गा के द्वितीय रूप ब्रह्मचारिणी के बारे में रवि कुमार भार्गव ने विस्तार पूर्व के बताया जो इस प्रकार से है:-मैं आपको बताता चलूं की आदिशक्ति जगदंबे दुर्गा भवानी के ब्रह्मचारिणी रूप की पूजन करने से मनुष्य जीवन को जो लाभ मिलता है वह इस प्रकार है:-या देवी सर्वभू‍तेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥” भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में शक्ति की उपासना केवल श्रद्धा व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि जीवन को अनुशासित, संतुलित और उद्देश्यपूर्ण बनाने की प्रेरणा है। सनातन संस्कृति में नवरात्र के नौ दिन साधक को आत्मचिंतन और आत्मिक विकास की ओर अग्रसर करते हैं। मां दुर्गा के प्रत्येक स्वरूप में किसी विशिष्ट मानवीय मूल्य की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। इसी क्रम में, दूसरे दिन पूजी जाने वाली मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप तपस्या, त्याग, धैर्य, दृढ़ संकल्प और आत्मानुशासन का साक्षात प्रतीक है। जब तप और अदम्य संकल्प की पराकाष्ठा की बात आती है, तो मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण मन में अलौकिक ऊर्जा भर देता है। श्वेत वस्त्र धारण किए, एक हाथ में अष्टदल की माला और दूसरे हाथ में कमंडल थामे देवी यह संदेश देती हैं कि साधना और संयम के बिना किसी बड़ी सिद्धि को प्राप्त नहीं किया जा सकता। नवरात्र का दूसरा दिन हमारे अंतःकरण में उसी पावन अग्नि को प्रज्वलित करने का अवसर है, जो हर कठिन लक्ष्य को संभव बनाती है। मां ब्रह्मचारिणी का स्मरण रेखांकित करता है कि वास्तविक सफलता केवल भौतिक उपलब्धियों या सामाजिक प्रतिष्ठा से नहीं मिलती। इसके लिए अपनी दुर्बलताओं को पहचानना, इच्छाओं पर विवेकपूर्ण नियंत्रण रखना और लक्ष्य के प्रति निष्ठावान रहना आवश्यक है। जिस प्रकार एक पौधे को वृक्ष बनने के लिए धैर्य और निरंतर देखभाल की आवश्यकता होती है, उसी प्रकार व्यक्तित्व का निर्माण भी नियमित प्रयास और आत्मसंयम से होता है। संक्षेप में, मां ब्रह्मचारिणी की उपासना केवल आशीर्वाद की कामना तक सीमित नहीं है; यह भक्त को अपने आचरण को श्रेष्ठ बनाने और जीवन में सद्गुणों को उतारने का मार्ग दिखाती है। आइए, उनके अचल तप और अविचल विश्वास को अपने भीतर अपनाने का संकल्प लें।मां ब्रह्मचारिणी के नाम का आध्यात्मिक अर्थ-‘ब्रह्मचारिणी’ शब्द अपने भीतर गहरा आध्यात्मिक अर्थ समेटे हुए है। सामान्य रूप से इसका संबंध ब्रह्मचर्य, तपस्या और संयमपूर्ण जीवन से जोड़ा जाता है। व्यापक आध्यात्मिक दृष्टि से ब्रह्मचर्य का आशय केवल इंद्रियों पर नियंत्रण रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी ऊर्जा, विचारों, भावनाओं और व्यवहार को किसी श्रेष्ठ उद्देश्य की दिशा में नियोजित करना भी है। इसका अर्थ है कि मनुष्य अपनी क्षमताओं को अनावश्यक इच्छाओं और क्षणिक आकर्षणों में बिखेरने के बजाय उन्हें ज्ञान, साधना, सेवा और आत्म विकास में लगाए। भारतीय दर्शन में ब्रह्म को परम सत्य और सर्वोच्च चेतना के रूप में समझा जाता है। इस दृष्टि से ब्रह्म के मार्ग पर चलने का अर्थ सत्य, विवेक और आत्मबोध की दिशा में आगे बढ़ना है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप साधक को इसी मार्ग की ओर प्रेरित करता है। वह सिखाता है कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए मन की चंचलता को समझना, विचारों को परिष्कृत करना और अपने आचरण में स्थिरता लाना आवश्यक है। आज के संदर्भ में भी इस आदर्श का विशेष महत्व है। मनुष्य अनेक प्रकार के आकर्षणों, अपेक्षाओं और प्रतिस्पर्धाओं के बीच जीवन व्यतीत करता है। ऐसे में अपनी प्राथमिकताओं को पहचानना और अनावश्यक विचलनों से बचना व्यक्तित्व निर्माण की महत्वपूर्ण शर्त है। मां ब्रह्मचारिणी का संदेश है कि जब मनुष्य अपने उद्देश्य के प्रति स्पष्ट होता है, तब उसका समय, श्रम और ऊर्जा अधिक सार्थक दिशा में प्रयुक्त होते हैं।मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप शांत, सौम्य और तपोमय माना जाता है। धार्मिक चित्रणों में उन्हें प्रायः श्वेत वस्त्र धारण किए हुए दिखाया जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। उनका यह स्वरूप सादगी, पवित्रता, साधना और आत्मसंयम के आदर्शों को प्रकट करता है। उनके हाथ में सुशोभित जपमाला निरंतर साधना और एकाग्रता का प्रतीक है। मंत्र-जप के माध्यम से साधक अपने मन को एकाग्र करने और विचारों की चंचलता को कम करने का प्रयास करता है। जपमाला यह भी संकेत देती है कि किसी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए नियमित अभ्यास आवश्यक है। जिस प्रकार एक-एक मनका आगे बढ़ाते हुए जप पूरा किया जाता है, उसी प्रकार जीवन में भी छोटी-छोटी सतत कोशिशें मिलकर बड़ी उपलब्धियों का आधार बनती हैं। कमंडल सादगी, संयम और सीमित आवश्यकताओं के साथ जीवन जीने की भावना का प्रतीक माना जा सकता है। यह मनुष्य को याद दिलाता है कि जीवन की सार्थकता केवल अधिक से अधिक साधन जुटाने में नहीं, बल्कि उपलब्ध साधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने में भी है। आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच अंतर समझना आंतरिक संतुलन के लिए महत्वपूर्ण है। मां का शांत स्वरूप एक अन्य गहरा संदेश देता है। वास्तविक शक्ति हमेशा उग्रता या बाहरी प्रदर्शन में दिखाई नहीं देती। कई बार धैर्यपूर्वक परिस्थितियों का सामना करना, कठिन समय में विवेक बनाए रखना और आवेगों पर नियंत्रण रखना अधिक बड़ी शक्ति का परिचय होता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप इसी आंतरिक सामर्थ्य का प्रतीक है।<br>देवी पार्वती की तपस्या और दृढ़ संकल्प की कथा-पौराणिक मान्यता के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी देवी पार्वती के उस तपस्विनी स्वरूप का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसमें उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। देवी पार्वती का यह संकल्प उनके धैर्य, निष्ठा और साधना की दृढ़ता को दर्शाता है। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्य से विमुख हुए बिना तप का मार्ग अपनाया। देवी की तपस्या की कथा का आध्यात्मिक महत्व उसके बाहरी घटनाक्रम से आगे बढ़कर समझा जा सकता है। यह कथा मनुष्य को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने की प्रेरणा देती है। जीवन में अनेक अवसरों पर परिस्थितियां अनुकूल नहीं होतीं। कभी संसाधनों की कमी सामने आती है, कभी असफलता निराश करती है और कभी दूसरों की आलोचना मनोबल को कमजोर करने लगती है। ऐसे समय में अपने उद्देश्य पर विश्वास बनाए रखना और विवेकपूर्ण ढंग से प्रयास जारी रखना अत्यंत आवश्यक होता है। मां ब्रह्मचारिणी का आदर्श बताता है कि दृढ़ संकल्प का अर्थ केवल किसी इच्छा को मन में बनाए रखना नहीं, बल्कि उसके अनुरूप निरंतर प्रयास करना है। संकल्प तभी सार्थक होता है, जब वह धैर्य, अनुशासन और कर्म से जुड़ता है। देवी पार्वती की तपस्या इसी एकनिष्ठ साधना का प्रतीक है। इस कथा को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र से जोड़कर देखा जा सकता है। ज्ञान प्राप्त करने वाला विद्यार्थी, समाज की सेवा में लगा व्यक्ति, अपने कार्य के प्रति समर्पित कर्मयोगी और कठिन परिस्थितियों से जूझता परिवार सभी के लिए धैर्य तथा निरंतर प्रयास महत्वपूर्ण हैं।    मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप यह विश्वास जगाता है कि कठिनाइयों के बीच भी अपने मूल्यों और उद्देश्य के प्रति निष्ठावान रहा जा सकता है।भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में तपस्या को आत्मशुद्धि और आत्मपरिष्कार का महत्वपूर्ण साधन माना गया है। सामान्य अर्थ में तप का संबंध कठिन साधना से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका व्यापक आशय अपनी दुर्बलताओं को पहचान कर उन्हें दूर करने और जीवन में अनुशासन स्थापित करने से है। तपस्या केवल शरीर को कष्ट देने या सुविधाओं का त्याग करने का नाम नहीं है। उसका वास्तविक उद्देश्य मनुष्य के भीतर विवेक, धैर्य, करुणा और आत्मबल का विकास करना है। मनुष्य के भीतर अनेक इच्छाएं, आकांक्षाएं और भावनाएं जन्म लेती हैं। इनमें से कुछ उसके विकास में सहायक होती हैं, जबकि कुछ उसे लक्ष्य से भटका सकती हैं। जब व्यक्ति अपनी इच्छाओं का मूल्यांकन विवेक के आधार पर करता है और उचित-अनुचित के बीच अंतर समझकर निर्णय लेता है, तब वह आत्मसंयम की दिशा में आगे बढ़ता है। <br>यही तपस्या का व्यावहारिक पक्ष है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना इस बात की प्रेरणा देती है कि आत्म विकास के लिए नियमित प्रयास आवश्यक हैं। क्रोध पर नियंत्रण रखना, कटु वचन बोलने से बचना, कठिन समय में धैर्य बनाए रखना, अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वाह करना और दूसरों के प्रति संवेदनशील रहना भी आत्मानुशासन के रूप हैं।तपस्या का एक महत्वपूर्ण पक्ष अहंकार का परिष्कार भी है। यदि साधना से व्यक्ति में विनम्रता और करुणा विकसित नहीं होती, तो उसका उद्देश्य अधूरा रह जाता है। वास्तविक आध्यात्मिक प्रगति मनुष्य को दूसरों से श्रेष्ठ होने का भाव नहीं देती, बल्कि उसे अधिक संवेदनशील, सहनशील और जिम्मेदार बनाती है। इस दृष्टि से मां ब्रह्मचारिणी का संदेश आत्मबल के साथ विनम्रता को भी महत्व देता है।<br>संयम और आत्मानुशासन का महत्व-संयम जीवन को संतुलित बनाने का आधार है। इसका अर्थ इच्छाओं का पूर्ण निषेध नहीं, बल्कि उनके प्रति विवेकपूर्ण दृष्टिकोण अपनाना है। मनुष्य के लिए भोजन, विश्राम, मनोरंजन, कार्य और सामाजिक संबंध सभी आवश्यक हैं। लेकिन जब इनमें से कोई भी पक्ष असंतुलित हो जाता है, तो जीवन की सहजता प्रभावित होने लगती है। आत्मानुशासन व्यक्ति को अपनी आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने में सहायता करता है। मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप सिखाता है कि मनुष्य को अपनी वाणी, विचार और कर्म के प्रति सजग रहना चाहिए। बोलने से पहले विचार करना, प्रतिक्रिया देने से पहले परिस्थिति को समझना और निर्णय लेने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना परिपक्व व्यक्तित्व के लक्षण हैं। इसी प्रकार समय का सदुपयोग, नियमित दिनचर्या और अपने दायित्वों के प्रति ईमानदारी भी अनुशासन की अभिव्यक्तियां हैं। आत्मसंयम का अर्थ अपनी भावनाओं को दबाना भी नहीं है। क्रोध, दुख, भय और प्रसन्नता मनुष्य की स्वाभाविक भावनाएं हैं। महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति उन्हें समझे और उनके प्रभाव में आकर ऐसा व्यवहार न करे, जिससे स्वयं या दूसरों को अनावश्यक नुकसान पहुंचे। इस प्रकार संयम भावनात्मक संतुलन और विवेकपूर्ण व्यवहार का मार्ग प्रशस्त करता है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा इस आदर्श को अपने जीवन में उतारने का अवसर प्रदान करती है। पूजा के साथ यदि व्यक्ति अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का संकल्प भी ले, तो धार्मिक साधना का प्रभाव उसके दैनिक जीवन में दिखाई दे सकता है।धैर्य और दृढ़ता : सफलता के आधार-जीवन में प्रत्येक महत्वपूर्ण उपलब्धि के पीछे समय, श्रम और निरंतरता का योगदान होता है। किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने की यात्रा में बाधाएं आना स्वाभाविक है। कई बार अपेक्षित परिणाम मिलने में देर होती है और कई बार किए गए प्रयास तत्काल सफलता नहीं दिला पाते। ऐसी परिस्थितियों में अधीर होकर प्रयास छोड़ देना आसान होता है, लेकिन धैर्य बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण है। मां ब्रह्मचारिणी का तपस्विनी स्वरूप यही संदेश देता है कि दृढ़ संकल्प को समय की कसौटी पर खरा उतरना पड़ता है। धैर्य का अर्थ निष्क्रिय होकर परिस्थितियों की प्रतीक्षा करना नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ है कि व्यक्ति परिस्थितियों का आकलन करे, आवश्यक सुधार करे और अपने लक्ष्य की दिशा में निरंतर प्रयत्नशील रहे। धैर्य मनुष्य को असफलता से सीखने की क्षमता भी देता है। असफलता को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय यदि उसे अपनी कमियों को समझने का अवसर माना जाए, तो आगे बढ़ने के नए रास्ते खुल सकते हैं। इसी प्रकार आलोचना को विवेकपूर्वक स्वीकार करना और सफलता मिलने पर भी विनम्र बने रहना मानसिक परिपक्वता के संकेत हैं। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना से जुड़ा यह संदेश विद्यार्थियों, युवाओं, कर्मियों और समाज के सभी वर्गों के लिए उपयोगी है। जीवन में स्थायी उपलब्धियां केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि नियमित अभ्यास, आत्मविश्वास और कठिनाइयों का सामना करने की क्षमता से भी निर्मित होती हैं।भक्ति, श्रद्धा और समर्पण की साधना-सनातन परंपरा में भक्ति को ईश्वर के प्रति प्रेम, विश्वास और समर्पण की अभिव्यक्ति माना जाता है। मां ब्रह्मचारिणी की उपासना में भी श्रद्धा और साधना का विशेष महत्व है। हालांकि भक्ति का वास्तविक अर्थ केवल पूजा-पाठ या धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है। उसका प्रभाव व्यक्ति के विचारों, व्यवहार और जीवन-मूल्यों में भी दिखाई देना चाहिए। सच्ची श्रद्धा मनुष्य को विनम्र बनाती है। वह अपने सामर्थ्य पर विश्वास रखते हुए भी यह स्वीकार करता है कि जीवन में अनेक परिस्थितियां उसके नियंत्रण से बाहर होती हैं। समर्पण उसे निराशा से उबरने और अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते रहने की प्रेरणा दे सकता है। इसके साथ विवेक और कर्मशीलता बनाए रखना भी आवश्यक है। जप, ध्यान, प्रार्थना और आत्मचिंतन साधना के ऐसे माध्यम हैं, जिनसे व्यक्ति अपने मन को समझने और आंतरिक शांति प्राप्त करने का प्रयास कर सकता है। नियमित साधना से व्यक्ति को अपने विचारों तथा प्रतिक्रियाओं का निरीक्षण करने का अवसर मिलता है। वह यह समझने लगता है कि किन प्रवृत्तियों को विकसित करना है और किन आदतों में परिवर्तन की आवश्यकता है। मां ब्रह्मचारिणी की आराधना का व्यापक संदेश यह है कि ईश्वर के प्रति श्रद्धा और जीवन के प्रति जिम्मेदारी एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सच्ची भक्ति व्यक्ति को अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं करती, बल्कि उन्हें अधिक निष्ठा और संवेदनशीलता के साथ निभाने की प्रेरणा देती है।<br>आधुनिक जीवन में मां ब्रह्मचारिणी की प्रासंगिकता-वर्तमान समय में जीवन की गति तेज हुई है। तकनीक और संचार के साधनों ने अनेक सुविधाएं प्रदान की हैं, लेकिन साथ ही ध्यान भटकने, निरंतर तुलना करने और तत्काल परिणाम प्राप्त करने की इच्छा जैसी चुनौतियां भी बढ़ी हैं। सामाजिक माध्यमों पर दूसरों की उपलब्धियों को देखकर व्यक्ति कई बार अपने जीवन का मूल्यांकन करने लगता है। इससे असंतोष, अधीरता और अनावश्यक प्रतिस्पर्धा की भावना उत्पन्न हो सकती है। ऐसे वातावरण में मां ब्रह्मचारिणी का संदेश विशेष प्रासंगिकता रखता है। उनका आदर्श बताता है कि आत्म विकास के लिए बाहरी दुनिया की गति से अधिक अपने भीतर की दिशा को समझना आवश्यक है। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य स्पष्ट रखे, समय का विवेकपूर्ण उपयोग करे और नियमित अभ्यास को जीवन का हिस्सा बनाए, तो वह अधिक संतुलित ढंग से आगे बढ़ सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह संदेश एकाग्रता, अध्ययन-अनुशासन और निरंतर अभ्यास के महत्व को रेखांकित करता है। युवाओं के लिए यह अपने लक्ष्य निर्धारित करने और कठिनाइयों के बावजूद प्रयास जारी रखने की प्रेरणा है। कार्यक्षेत्र में यह जिम्मेदारी, ईमानदारी और समयबद्धता के महत्व को सामने लाता है। पारिवारिक जीवन में संयम, संवाद और धैर्य संबंधों को स्वस्थ बनाए रखने में सहायता करते हैं। आधुनिक जीवन में तपस्या का अर्थ जंगलों या एकांत में जाकर साधना करना ही नहीं है। अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वाह करना, अनुचित लाभ से बचना, कठिन परिस्थिति में भी सत्य का साथ देना और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना भी नैतिक साधना के रूप हैं। इस प्रकार मां ब्रह्मचारिणी का आध्यात्मिक आदर्श दैनिक जीवन में अपनाया जा सकता है।पूजा, मंत्र-जप और आंतरिक साधना-नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा श्रद्धा और पवित्र भाव से की जाती है। भक्त अपनी पारिवारिक तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना, मंत्र-जप, ध्यान और प्रार्थना करते हैं। इस अवसर पर मां के तपस्विनी स्वरूप का स्मरण करते हुए धैर्य, संयम और सद्बुद्धि की कामना की जाती है। मां ब्रह्मचारिणी का प्रचलित मंत्र है “ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥” इस मंत्र का भाव मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप के प्रति श्रद्धापूर्वक नमन करना है। भक्त मंत्र-जप को मन की एकाग्रता और आध्यात्मिक चिंतन का माध्यम मानते हैं। पूजा के समय शांत मन से प्रार्थना करना और अपने जीवन के व्यवहार पर विचार करना साधना को अधिक अर्थपूर्ण बना सकता है। धार्मिक अनुष्ठान का उद्देश्य केवल बाहरी विधि पूरी करना नहीं, बल्कि अपने भीतर सकारात्मक परिवर्तन की भावना जगाना भी है। यदि मां की पूजा करने वाला व्यक्ति सत्य बोलने, क्रोध पर नियंत्रण रखने, जरूरतमंदों की सहायता करने और अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वाह करने का प्रयास करे, तो वह देवी के आदर्शों को जीवन में उतारने की दिशा में आगे बढ़ता है। इस प्रकार पूजा और आचरण के बीच संबंध स्थापित होता है। श्रद्धा व्यक्ति को प्रेरणा देती है, जबकि नियमित कर्म उस प्रेरणा को व्यवहार में बदलते हैं। यही धार्मिक साधना का व्यावहारिक और आध्यात्मिक पक्ष है।आत्मबल और आत्मशुद्धि की प्रेरणा-मां ब्रह्मचारिणी का दिव्य स्वरूप भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में तप, त्याग, संयम और दृढ़ संकल्प के महत्व को उजागर करता है। देवी पार्वती की तपस्या की पौराणिक कथा मनुष्य को अपने उद्देश्य के प्रति निष्ठावान रहने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की प्रेरणा देती है। उनका शांत स्वरूप यह संदेश देता है कि वास्तविक शक्ति केवल बाहरी सामर्थ्य में नहीं, बल्कि मन की स्थिरता, विचारों की पवित्रता और विवेकपूर्ण आचरण में भी निहित है। नवरात्र के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना आत्मनिरीक्षण का अवसर है। यह हमें अपनी इच्छाओं, आदतों और व्यवहार का मूल्यांकन करने तथा जीवन को अधिक संतुलित बनाने की प्रेरणा देती है। तपस्या का सार स्वयं को कष्ट देना नहीं, बल्कि अपनी दुर्बलताओं को पहचान कर उनमें सुधार करना है। संयम का उद्देश्य जीवन को सीमित करना नहीं, बल्कि उसे उचित दिशा देना है। धैर्य का अर्थ निष्क्रिय प्रतीक्षा नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ना है। आज जब व्यक्ति अनेक प्रकार की प्रतिस्पर्धाओं और अपेक्षाओं के बीच अपने लिए संतुलन खोज रहा है, तब मां ब्रह्मचारिणी का संदेश विशेष अर्थ रखता है। उनकी उपासना हमें स्मरण कराती है कि आत्म विकास के लिए नियमित साधना, नैतिक आचरण और सकारात्मक संकल्प आवश्यक हैं। जब श्रद्धा के साथ अनुशासन, भक्ति के साथ कर्म और संकल्प के साथ धैर्य जुड़ते हैं, तभी जीवन अधिक सार्थक बनता है। इस दृष्टि से मां ब्रह्मचारिणी की महिमा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन को श्रेष्ठ बनाने वाली प्रेरणा भी है। उनका आदर्श मनुष्य को भीतर से मजबूत, व्यवहार में विनम्र और अपने कर्तव्यों के प्रति अधिक सजग बनने का मार्ग दिखाता है। यही उनकी आराधना का व्यापक आध्यात्मिक संदेश है।
    user_दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    दैनिक अयोध्या टाईम्स बिहार
    Newspaper publisher पकड़ी दयाल, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    1 hr ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.