श्रीराम कथा के बीच जीव सेवा की मिसाल, घायल बंदर का इलाज कर चर्चा में आए डॉ. आलोक करंट लगने से बुरी तरह झुलस गए थे बंदर के दोनों पिछले पैर, पवन मिश्रा ने भी की थी बचाने की कोशिश शाहगंज जौनपुर। सेवा, संवेदना और करुणा का भाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेजुबान जीवों की पीड़ा को समझना भी मानवता का महत्वपूर्ण धर्म है। इसका उदाहरण बीआरपी इंटर कॉलेज जौनपुर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान देखने को मिला, जहां पूर्वांचल के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने घायल बंदर का उपचार कर जीव सेवा की मिसाल पेश की। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले बंदर को विद्युत करंट लग गया था, जिससे उसके दोनों पिछले पैर बुरी तरह झुलस गए थे। बंदर की हालत देखकर पवन मिश्रा नामक युवक ने अपने स्तर से उसका घरेलू उपचार कर उसे राहत पहुंचाने की कोशिश की। इसके बाद बीआरपी इंटर कॉलेज जौनपुर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान उस को पता चला कि शाहगंज के पशु चिकित्सक डाक्टर आलोक सिंह पालीवाल आए हुए हैं तो वह घायल बंदर के उपचार के लिए वहां चला आया। उन्होंने बंदर की स्थिति को देखते हुए तुरंत उसका उपचार कर जरूरी सलाह दी। धार्मिक आयोजन के बीच बेजुबान जीव के प्रति दिखाई गई यह संवेदनशीलता लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी। एक ओर श्रीराम कथा में करुणा, सेवा और मानवता का संदेश दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर घायल बंदर की मदद कर इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने का उदाहरण भी सामने आया। इस अवसर पर डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने कहा, “एक चिकित्सक का दायित्व केवल अपने क्लीनिक या अस्पताल तक सीमित नहीं होता। उसे हर जगह और हर समय अपने दायित्व का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। बेजुबान पशु अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे में उनकी तकलीफ को समझना, समय पर उपचार करना और उनकी जान बचाने का प्रयास करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि पशु-पक्षी भी प्रकृति का अभिन्न अंग हैं। उनके प्रति दया और संवेदनशीलता रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। किसी घायल पशु को देखकर उसकी उपेक्षा करने के बजाय उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। डॉ. आलोक सिंह पालीवाल की पहल के साथ पवन मिश्रा द्वारा पहले की गई मदद भी बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना का उदाहरण है। दोनों प्रयासों से यह संदेश मिलता है कि सच्ची सेवा वही है, जो किसी जरूरतमंद की पीड़ा को समझकर बिना किसी स्वार्थ के उसकी मदद के लिए आगे आए।
श्रीराम कथा के बीच जीव सेवा की मिसाल, घायल बंदर का इलाज कर चर्चा में आए डॉ. आलोक करंट लगने से बुरी तरह झुलस गए थे बंदर के दोनों पिछले पैर, पवन मिश्रा ने भी की थी बचाने की कोशिश शाहगंज जौनपुर। सेवा, संवेदना और करुणा का भाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेजुबान जीवों की पीड़ा को समझना भी मानवता का महत्वपूर्ण धर्म है। इसका उदाहरण बीआरपी इंटर कॉलेज जौनपुर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान देखने को मिला, जहां पूर्वांचल के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने घायल बंदर का उपचार कर जीव सेवा की मिसाल पेश की। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले बंदर को विद्युत करंट लग गया था, जिससे उसके दोनों पिछले पैर बुरी तरह झुलस गए थे। बंदर की हालत देखकर पवन मिश्रा नामक युवक ने अपने स्तर से उसका घरेलू उपचार कर उसे राहत पहुंचाने की कोशिश की। इसके बाद बीआरपी इंटर कॉलेज जौनपुर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान उस को पता चला कि शाहगंज के पशु चिकित्सक डाक्टर आलोक सिंह पालीवाल आए हुए हैं तो वह घायल बंदर के उपचार के लिए वहां चला आया। उन्होंने बंदर की स्थिति को देखते हुए तुरंत उसका उपचार कर जरूरी सलाह दी। धार्मिक आयोजन के बीच बेजुबान जीव के प्रति दिखाई गई यह संवेदनशीलता लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी। एक ओर श्रीराम कथा में करुणा, सेवा और मानवता का संदेश दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर घायल बंदर की मदद कर इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने का उदाहरण भी सामने आया। इस अवसर पर डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने कहा, “एक चिकित्सक का दायित्व केवल अपने क्लीनिक या अस्पताल तक सीमित नहीं होता। उसे हर जगह और हर समय अपने दायित्व का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। बेजुबान पशु अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे में उनकी तकलीफ को समझना, समय पर उपचार करना और उनकी जान बचाने का प्रयास करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि पशु-पक्षी भी प्रकृति का अभिन्न अंग हैं। उनके प्रति दया और संवेदनशीलता रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। किसी घायल पशु को देखकर उसकी उपेक्षा करने के बजाय उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। डॉ. आलोक सिंह पालीवाल की पहल के साथ पवन मिश्रा द्वारा पहले की गई मदद भी बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना का उदाहरण है। दोनों प्रयासों से यह संदेश मिलता है कि सच्ची सेवा वही है, जो किसी जरूरतमंद की पीड़ा को समझकर बिना किसी स्वार्थ के उसकी मदद के लिए आगे आए।
- अर्बन तूफान का असर: किसानों के अरमानों पर फिरा पानी, खेत में पड़ी धान की फसल सड़ने लगी अर्बन तूफान का असर: किसानों के अरमानों पर फिरा पानी, खेत में पड़ी धान की फसल सड़ने लगी जौनपुर में अर्बन तूफान के चलते पिछले दो दिनों से खराब मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार हो रही बरसात के कारण किसानों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। क्षेत्र के कई किसानों की धान की फसल कटकर खेतों में ही पड़ी हुई है। भंडारण और उठान की उचित व्यवस्था न होने के कारण खेतों में पड़ा धान पानी में भीगकर अंकुरित हो रहा है और सड़ने लगा है, जिससे किसानों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि इस फसल में उनकी पूरी साल भर की लागत और मेहनत लगी हुई है, जो अब डूबती नजर आ रही है। हालांकि मौसम विभाग की चेतावनी के बाद कई समझदार किसानों ने अपनी फसल को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर रख लिया था और कई किसानों ने कटाई रोक दी थी, लेकिन जिन किसानों ने पहले ही फसल काट ली थी, उनकी फसल अब बर्बाद होने की कगार पर है।2
- श्रीराम कथा के बीच जीव सेवा की मिसाल, घायल बंदर का इलाज कर चर्चा में आए डॉ. आलोक करंट लगने से बुरी तरह झुलस गए थे बंदर के दोनों पिछले पैर, पवन मिश्रा ने भी की थी बचाने की कोशिश शाहगंज जौनपुर। सेवा, संवेदना और करुणा का भाव केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि बेजुबान जीवों की पीड़ा को समझना भी मानवता का महत्वपूर्ण धर्म है। इसका उदाहरण बीआरपी इंटर कॉलेज जौनपुर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान देखने को मिला, जहां पूर्वांचल के प्रसिद्ध पशु चिकित्सक डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने घायल बंदर का उपचार कर जीव सेवा की मिसाल पेश की। जानकारी के अनुसार, कुछ समय पहले बंदर को विद्युत करंट लग गया था, जिससे उसके दोनों पिछले पैर बुरी तरह झुलस गए थे। बंदर की हालत देखकर पवन मिश्रा नामक युवक ने अपने स्तर से उसका घरेलू उपचार कर उसे राहत पहुंचाने की कोशिश की। इसके बाद बीआरपी इंटर कॉलेज जौनपुर में चल रही श्रीराम कथा के दौरान उस को पता चला कि शाहगंज के पशु चिकित्सक डाक्टर आलोक सिंह पालीवाल आए हुए हैं तो वह घायल बंदर के उपचार के लिए वहां चला आया। उन्होंने बंदर की स्थिति को देखते हुए तुरंत उसका उपचार कर जरूरी सलाह दी। धार्मिक आयोजन के बीच बेजुबान जीव के प्रति दिखाई गई यह संवेदनशीलता लोगों के लिए चर्चा का विषय बनी। एक ओर श्रीराम कथा में करुणा, सेवा और मानवता का संदेश दिया जा रहा था, वहीं दूसरी ओर घायल बंदर की मदद कर इन मूल्यों को व्यवहार में उतारने का उदाहरण भी सामने आया। इस अवसर पर डॉ. आलोक सिंह पालीवाल ने कहा, “एक चिकित्सक का दायित्व केवल अपने क्लीनिक या अस्पताल तक सीमित नहीं होता। उसे हर जगह और हर समय अपने दायित्व का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए। बेजुबान पशु अपनी पीड़ा शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते। ऐसे में उनकी तकलीफ को समझना, समय पर उपचार करना और उनकी जान बचाने का प्रयास करना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।” उन्होंने कहा कि पशु-पक्षी भी प्रकृति का अभिन्न अंग हैं। उनके प्रति दया और संवेदनशीलता रखना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है। किसी घायल पशु को देखकर उसकी उपेक्षा करने के बजाय उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। डॉ. आलोक सिंह पालीवाल की पहल के साथ पवन मिश्रा द्वारा पहले की गई मदद भी बेजुबान जीवों के प्रति संवेदना का उदाहरण है। दोनों प्रयासों से यह संदेश मिलता है कि सच्ची सेवा वही है, जो किसी जरूरतमंद की पीड़ा को समझकर बिना किसी स्वार्थ के उसकी मदद के लिए आगे आए।1
- करवा चौथ के दिन टावर पर चढ़ी नाराज महिला, इलाके में मचा हड़कंप! करवा चौथ व्रत को लेकर नाराजगी की बात सामने आ रही है। करवा चौथ के दिन टावर पर चढ़ी नाराज महिला, इलाके में मचा हड़कंप! करवा चौथ व्रत को लेकर नाराजगी की बात सामने आ रही है। मौके पर लोगों की जुटी भीड़, महिला को नीचे उतारने की कोशिश जारी। मामला सिकरारा थाना क्षेत्र के डमरुआ गांव का।1
- उत्तराखंड प्रदेश में गौ तस्करों को बचाने में सरकारी अधिकारी हरिद्वार।आपको बता दें कि ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन सम्पूर्ण भारत देश में निस्वार्थ भाव से चौबीसों घंटे गौ माताओ और सनातन धर्म की सेवा उत्तराखंड प्रदेश में गौ तस्करों को बचाने में सरकारी अधिकारी हरिद्वार।आपको बता दें कि ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन सम्पूर्ण भारत देश में निस्वार्थ भाव से चौबीसों घंटे गौ माताओ और सनातन धर्म की सेवा और रक्षा करने व कराने में लगा हुआ है आज दिनांक 29 अक्टूबर को सुबह दस बजे ब्रजवासी गौ रक्षक सेना भारत संगठन के राष्ट्रीय ब्रज प्रांत संगठन मंत्री गौ पुत्र रणवीर सिंह अपनी टीम को लेकर हरिद्वार जिले के मंगलौर थाने पहुंचे वह देखा कि पुलिस प्रशासन गौ तस्करों को बचाने में लगा हुआ है तथा जिन लोगो ने गौ माता को काटा व बेचा वो लोगों को उत्तराखंड सरकार की पुलिस बचा रही है सभी कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी से निवेदन किया यह ग़लत है लेकिन पुलिस प्रशासन ने कोई जवाब नही दिया। सारी जानकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष गौ पुत्र धर्म दास महाराज को दी उन्होंने तुरंत उत्तराखंड सरकार को ज्ञापन भेजने का आदेश राष्ट्रीय सचिव गौ पुत्र प्रेम किशोर गंगवार को दिया और कहा कि जो पुलिस प्रशासन गौ तस्करों के साथ है उसे पद मुक्त कर घर भेजे उत्तराखंड सरकार1
- थानागद्दी बाजार में सड़क किनारे कूड़े का अंबार, बारिश से बढ़ी दुर्गंध और बीमारियों की आशंका थानागद्दी बाजार में सड़क किनारे कूड़े का अंबार, बारिश से बढ़ी दुर्गंध और बीमारियों की आशंका केराकत (जौनपुर)। केराकत तहसील क्षेत्र के थानागद्दी बाजार में सड़क के किनारे जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा हुआ है। बारिश होने के बाद कूड़े से उठने वाली दुर्गंध और गंदगी ने स्थानीय निवासियों की चिंता बढ़ा दी है। गंदगी के कारण आसपास का वातावरण दूषित हो रहा है और संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बाजार में कूड़ा फेंकने और उसके निस्तारण की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण लोग सड़क किनारे ही कूड़ा फेंकने को मजबूर हैं। लंबे समय से जमा कूड़े पर बारिश का पानी पड़ने से स्थिति और भी खराब हो गई है। इससे बाजार से गुजरने वाले राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कूड़े का निस्तारण नहीं कराया गया तो बारिश के मौसम में गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा और बढ़ सकता है। स्थानीय निवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि सड़क किनारे लगे कूड़े के ढेर को तत्काल हटवाया जाए तथा बाजार में नियमित सफाई और कूड़ा निस्तारण की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि लोगों को गंदगी और बीमारियों की आशंका से राहत मिल सके।1
- जौनपुर अर्नब तूफान के असर से जौनपुर में बारिश गुरुवार सुबह से लगातार हो रही है तापमान गिरने से मौसम में ठंडा हो गई है जौनपुरअर्नब तूफान के असर से जौनपुर में मौसम ने करवट ले ली है। गुरुवार सुबह से ही जिले में रुक-रुककर बूंदाबांदी हो रही है। बारिश के कारण तापमान में करीब 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। जौनपुर अर्नब तूफान के असर से जौनपुर में बारिश गुरुवार सुबह से लगातार हो रही है तापमान गिरने से मौसम में ठंडा हो गई है जौनपुरअर्नब तूफान के असर से जौनपुर में मौसम ने करवट ले ली है। गुरुवार सुबह से ही जिले में रुक-रुककर बूंदाबांदी हो रही है। बारिश के कारण तापमान में करीब 2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई है। लगातार हो रही हल्की बारिश से ग्रामीण इलाकों में कीचड़ और जलजमाव की स्थिति बन गई है। खेतों में खड़ी फसलों का भी नुकसान होने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों तक इसी तरह बूंदाबांदी जारी रहने की संभावना है।1
- केराकत में सुबह से झमाझम बारिश, आवागमन बाधित - मौसम में ठंडक। केराकत में सुबह से झमाझम बारिश, आवागमन बाधित - मौसम में ठंडक। जनपद जौनपुर तहसील केराकत में, सुबह से झमाझम बारिश, आवागमन बाधित - मौसम में ठंडक।आप लोगों को बता दें कि तहसील केराकत में आज सुबह से बादल छाए हुए हैं और लगातार बारिश हो रही है। बारिश के चलते केराकत बाजार और आसपास के इलाकों में आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है।वहीं मौसम में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है, बारिश के बाद ठंड में बढ़ोतरी हुई है। स्थानीय लोगों को आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।2
- *दो युवाओं ने रक्तदान कर बचाई मरीज की जान, पेश की इंसानियत की मिसाल अल-फलाह फाउंडेशन और मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रयास से जरूरतमंद मरीज को मिला रक्त शाहगंज, जौनपुर। जरूरतमंद मरीज की जान बचाने के लिए शाहगंज और बड़ागांव के दो युवाओं ने रक्तदान कर मानवता की मिसाल पेश की। अप्लास्टिक एनीमिया जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक मरीज को तत्काल रक्त की आवश्यकता थी। इसकी जानकारी मिलने पर अल-फलाह फाउंडेशन और मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट भारत के पदाधिकारियों ने रक्तदाताओं से संपर्क किया। इसके बाद दो युवाओं ने आगे आकर रक्तदान किया। बड़ागांव निवासी मोहम्मद अकीब खान, जो पेशे से कार चालक हैं, ने मरीज की मदद के लिए रक्तदान किया। बताया गया कि इस वर्ष वह चौथी बार रक्तदान कर चुके हैं। वहीं, शाहगंज निवासी मोहम्मद शाकिब मंसूरी ने पहली बार रक्तदान किया। वह विदेश जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन मरीज को रक्त की जरूरत की जानकारी मिलते ही अनीता ब्लड बैंक पहुंचकर रक्तदान किया। डॉ. तय्यब खान के नेतृत्व में दोनों युवाओं ने रक्तदान की प्रक्रिया पूरी की। इस दौरान अल-फलाह फाउंडेशन के अध्यक्ष शेख इस्माइल और मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष हुसैन हैदर खान अपनी टीम के साथ मौजूद रहे। दोनों संस्थाओं के पदाधिकारियों ने रक्तदाताओं का आभार जताते हुए उनके प्रयास की सराहना की। अल-फलाह फाउंडेशन के संस्थापक जाकिर हुसैन के नेतृत्व में संस्था जरूरतमंद मरीजों को रक्त उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रही है। संस्था की ओर से अब तक एक हजार यूनिट से अधिक रक्त उपलब्ध कराने का दावा किया गया है। वहीं, मानव सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट भी जरूरतमंदों की सहायता के लिए सक्रिय है। दोनों युवाओं के इस प्रयास की क्षेत्र में सराहना हो रही है। उनका रक्तदान यह संदेश देता है कि जरूरत के समय किसी अनजान की मदद करके भी अनमोल जिंदगी बचाई जा सकती है।1