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फतुहा के किरण देवी घाट पर रविवार को वैदिक अनुष्ठान और गंगा महाआरती । पटना जिले के फतुहा नगर के सोरा कोठी, महारानी गली स्थित किरण देवी घाट पर रविवार को भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत संध्या 3 बजे से वैदिक अनुष्ठान तथा शाम 5 बजे से भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर सभी हिंदू परिवारों को सादर आमंत्रित किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर गंगा आरती में शामिल हों और पुण्य के भागी बनें। आरएसएस व्यवस्था प्रमुख दिनेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
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फतुहा के किरण देवी घाट पर रविवार को वैदिक अनुष्ठान और गंगा महाआरती । पटना जिले के फतुहा नगर के सोरा कोठी, महारानी गली स्थित किरण देवी घाट पर रविवार को भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत संध्या 3 बजे से वैदिक अनुष्ठान तथा शाम 5 बजे से भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर सभी हिंदू परिवारों को सादर आमंत्रित किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर गंगा आरती में शामिल हों और पुण्य के भागी बनें। आरएसएस व्यवस्था प्रमुख दिनेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।
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- पटना जिले के फतुहा नगर के सोरा कोठी, महारानी गली स्थित किरण देवी घाट पर रविवार को भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के तहत संध्या 3 बजे से वैदिक अनुष्ठान तथा शाम 5 बजे से भव्य गंगा महाआरती का आयोजन किया जाएगा। इस पावन अवसर पर सभी हिंदू परिवारों को सादर आमंत्रित किया गया है कि वे अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर गंगा आरती में शामिल हों और पुण्य के भागी बनें। आरएसएस व्यवस्था प्रमुख दिनेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।1
- पटना: मीठापुर स्थित कबीरपंथी परिसर में कबीर मिशन ट्रस्ट के तत्वावधान में महंत बृजेश मुनि महाराज के नेतृत्व में साप्ताहिक कबीर सत्संग समारोह का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और पूरा परिसर भक्ति व आध्यात्मिक माहौल से सराबोर हो गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि संजय झा (एनजीओ गुरु) ने संत कबीर की वाणी “मोको कहाँ ढूंढे बंदे, मैं तो तेरे पास में” का उल्लेख करते हुए कहा कि परमात्मा को बाहर ढूंढने के बजाय मनुष्य को अपने भीतर झांकना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति सच्चे विश्वास और समर्पण के साथ यह मान लेता है कि ईश्वर हर जीव में निवास करते हैं, तब उसे हर जगह ईश्वर का अनुभव होने लगता है। सत्संग को संबोधित करते हुए महंत बृजेश मुनि महाराज ने मंदिर परिसर की स्थापना और अब तक हुए निर्माण कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अगर मनुष्य दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास करे तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। वर्षों पहले जिस स्थिति में यह पावन मठ था, आज वह श्रद्धालुओं की उपस्थिति और सहयोग से एक भव्य आध्यात्मिक केंद्र बन चुका है। कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर सज्जन कुमार, अधिवक्ता रंजीत कुमार, पत्रकार अमरेश सिंह, डॉ. इंद्रजीत कुमार, सोनू राज, सुनील कुमार, संत करसन मुनी सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने चैती गीत प्रस्तुत कर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। अंत में सद्गुरु कबीर साईं की भव्य आरती के साथ सत्संग का समापन हुआ और श्रद्धालुओं के बीच भंडारा महाप्रसाद वितरित किया गया।1
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- सहरसा की सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। सभा के दौरान जब कुछ लोग उठकर जाने लगे तो नीतीश कुमार ने मंच से कहा – “अरे भाग मतिए… चुपचाप यहीं रहिए।” उनका यह अंदाज देखकर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुराने लगे। अब इस पल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है।1
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- बिहार के एक गांव में लोगों ने रसोई गैस की बढ़ती कीमतों और ईंधन की समस्या का अनोखा समाधान खोज लिया है। यहां अधिकांश परिवार खाना बनाने के लिए घरेलू एलपीजी गैस का इस्तेमाल नहीं करते, बल्कि बायोगैस से चूल्हा जलाते हैं। गांव के लोगों ने पशुओं के गोबर और जैविक कचरे से बायोगैस बनाने का प्लांट तैयार किया है। इस गैस का इस्तेमाल रोज़मर्रा के खाना बनाने में किया जाता है। इससे न केवल एलपीजी गैस का खर्च बचता है, बल्कि पर्यावरण भी स्वच्छ रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बायोगैस से खाना बनाने में किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती और यह सस्ता व टिकाऊ विकल्प है। गांव में बने इस जुगाड़ को देखने के लिए आसपास के लोग भी पहुंच रहे हैं और इसकी काफी सराहना कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अन्य गांव भी इस मॉडल को अपनाएं तो इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।1