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बारां जिले के छबड़ा में स्टेशन रोड स्थित धाकड़ छात्रावास में चल रहा अवैध कब्जों का विवाद माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार सुलझ गया है। अदालती आदेश और निर्धारित समयावधि का पालन करते हुए, छात्रावास की दुकानों पर काबिज समाज के 10 लोगों ने अपने अवैध कब्जे हटा लिए हैं। इसके साथ ही, धाकड़ समाज सेवा समिति ने न्यायालय के निर्देशानुसार, इन सभी 10 दुकानदारों को उनकी 1-1 लाख रुपये की धरोहर (सहयोग) राशि भी ससम्मान वापस लौटा दी है। इस महत्वपूर्ण कदम के बाद अब छात्रावास के सुचारु संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिसकी समाज के वरिष्ठ जनों ने अध्यक्ष सहित उनकी कार्यकारिणी के सदस्यों का पुरजोर स्वागत किया है। दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ था जब धाकड़ छात्रावास के निर्माण के समय समाज के 10 लोगों ने ₹1-1 लाख की धरोहर सहयोग राशि जमा की थी। बाद में, राज्य सरकार की शर्तों के तहत धाकड़ समाज सेवा समिति के अधीन छात्रावास का निर्माण हुआ और आय के स्रोत के रूप में आगे के कमरों को दुकानों का रूप देकर इन्हीं 10 सहयोगकर्ताओं को व्यवसाय के लिए सौंपा गया। हालांकि, जब समाज ने उनसे धरोहर राशि वापस लेकर छात्रावास खाली करने को कहा, तो काबिज लोगों ने दुकानें खाली करने से इनकार कर दिया। राजनीतिक प्रभाव और रसूख के कारण यह कब्जा लंबे समय तक बना रहा, जिससे छात्रावास का संचालन बाधित रहा। इस दौरान कई बैठकों में यह मुद्दा उठा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। शुरुआती कार्यकारी अध्यक्षों के बाद कई अध्यक्षों ने समाज को आय-व्यय का ब्यौरा भी नहीं दिया। राधेश्याम धाकड़ के निधन के बाद रामेश्वर धाकड़ अध्यक्ष बने, लेकिन वे भी कब्जा मुक्त नहीं करा सके। इसके पश्चात्, धर्मा धाकड़ को छात्रावास खाली कराने की शर्त पर कमान सौंपी गई, जिन्होंने कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। तत्पश्चात, भुवाखेड़ी के पटेल श्री लाल धाकड़ को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। पदभार संभालते ही श्री लाल धाकड़ ने सख्त कदम उठाते हुए सभी 10 दुकानदारों को नोटिस जारी कर अपनी राशि लेने और दुकानें खाली करने का निर्देश दिया। इस कार्रवाई से बौखलाए काबिज लोगों ने एक सुनियोजित योजना के तहत समाज की बैठक में अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ और उनकी कार्यकारिणी सहित मौजूद समाज के लोगों पर जानलेवा हमला किया और मारपीट की। इस घटना के संबंध में दोनों पक्षों की ओर से छबड़ा थाने में मुकदमे भी दर्ज हैं। कब्जे की नीयत से खुद को समाज हितैषी बताने वाले कुछ लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 'दूध का दूध और पानी का पानी' कर दिया। न्यायालय ने राजीनामे के अनुसार काबिज लोगों को 27 मई तक छात्रावास खाली करने के सख्त आदेश जारी किए थे। इसी आदेश के अनुपालन में, 27 मई को कार्यकारी अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ की अध्यक्षता में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जहाँ सभी 10 लोगों से सादा प्राप्ति रसीद पर हस्ताक्षर करवाकर उनकी मूल धरोहर राशि वापस कर दी गई और छात्रावास को पूर्णतः कब्जा मुक्त करा लिया गया। छात्रावास के कब्जा मुक्त होने से समाज में खुशी की लहर है, वहीं तथाकथित 'कर्णधारों' के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश और दुःख भी है, जिन्होंने वाद दायर कर और अध्यक्ष पर हमला कर समाज को गलत संदेश दिया। यह मुद्दा आज पूरे धाकड़ समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। न्यायालय के फैसले से अब छात्रावास संचालन के लिए सामाजिक गतिविधियों पर प्रतिबंध से आय के स्रोत खत्म हो गए हैं। भविष्य में धाकड़ छात्रावास का उपयोग केवल समाज के पढ़ने वाले बालक-बालिकाओं के लिए ही किया जाएगा, और इसे शादी-विवाह या किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं दिया जाएगा। अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि वर्तमान में छात्रावास के पास कोई सरकारी या निजी आय का संसाधन नहीं है, इसलिए दानदाता आगे आएं, ताकि प्राप्त दान का उपयोग गरीब और मध्यम आय वर्ग के बालक-बालिकाओं की शिक्षा के लिए किया जा सके। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से छात्रावास की मदद की है, और उनसे समाज हित में निडर होकर आगे आने का आग्रह किया, ताकि छात्रावास संचालन को नई दिशा मिल सके। धाकड़ समाज ने स्टेशन रोड छबड़ा स्थित छात्रावास से अवैध कब्जे हटवाने पर अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ को 'समाज का सर्वश्रेष्ठ सिपाही' बताया है।

14 hrs ago
user_Alakh Jyoti Yog Present
Alakh Jyoti Yog Present
Yoga instructor Chhabra, Baran•
14 hrs ago
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बारां जिले के छबड़ा में स्टेशन रोड स्थित धाकड़ छात्रावास में चल रहा अवैध कब्जों का विवाद माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार सुलझ गया है। अदालती आदेश और निर्धारित समयावधि का पालन करते हुए, छात्रावास की दुकानों पर काबिज समाज के 10 लोगों ने अपने अवैध कब्जे हटा लिए हैं। इसके साथ ही, धाकड़ समाज सेवा समिति ने न्यायालय के निर्देशानुसार, इन सभी 10 दुकानदारों को उनकी 1-1 लाख रुपये की धरोहर (सहयोग) राशि भी ससम्मान वापस लौटा दी है। इस महत्वपूर्ण कदम के बाद अब छात्रावास के सुचारु संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिसकी समाज के वरिष्ठ जनों ने अध्यक्ष सहित उनकी कार्यकारिणी के सदस्यों का पुरजोर स्वागत किया है। दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ था जब धाकड़ छात्रावास के निर्माण के समय समाज के 10 लोगों ने ₹1-1 लाख की धरोहर सहयोग राशि जमा की थी। बाद में, राज्य सरकार की शर्तों के तहत धाकड़ समाज सेवा समिति के अधीन छात्रावास का निर्माण हुआ और आय के स्रोत के रूप में आगे के कमरों को दुकानों का रूप देकर इन्हीं 10

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सहयोगकर्ताओं को व्यवसाय के लिए सौंपा गया। हालांकि, जब समाज ने उनसे धरोहर राशि वापस लेकर छात्रावास खाली करने को कहा, तो काबिज लोगों ने दुकानें खाली करने से इनकार कर दिया। राजनीतिक प्रभाव और रसूख के कारण यह कब्जा लंबे समय तक बना रहा, जिससे छात्रावास का संचालन बाधित रहा। इस दौरान कई बैठकों में यह मुद्दा उठा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। शुरुआती कार्यकारी अध्यक्षों के बाद कई अध्यक्षों ने समाज को आय-व्यय का ब्यौरा भी नहीं दिया। राधेश्याम धाकड़ के निधन के बाद रामेश्वर धाकड़ अध्यक्ष बने, लेकिन वे भी कब्जा मुक्त नहीं करा सके। इसके पश्चात्, धर्मा धाकड़ को छात्रावास खाली कराने की शर्त पर कमान सौंपी गई, जिन्होंने कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। तत्पश्चात, भुवाखेड़ी के पटेल श्री लाल धाकड़ को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। पदभार संभालते ही श्री लाल धाकड़ ने सख्त कदम उठाते हुए सभी 10 दुकानदारों को नोटिस जारी कर अपनी राशि लेने और दुकानें खाली करने का निर्देश दिया। इस कार्रवाई से बौखलाए काबिज लोगों ने एक सुनियोजित योजना के तहत समाज की बैठक में अध्यक्ष श्री लाल

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धाकड़ और उनकी कार्यकारिणी सहित मौजूद समाज के लोगों पर जानलेवा हमला किया और मारपीट की। इस घटना के संबंध में दोनों पक्षों की ओर से छबड़ा थाने में मुकदमे भी दर्ज हैं। कब्जे की नीयत से खुद को समाज हितैषी बताने वाले कुछ लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 'दूध का दूध और पानी का पानी' कर दिया। न्यायालय ने राजीनामे के अनुसार काबिज लोगों को 27 मई तक छात्रावास खाली करने के सख्त आदेश जारी किए थे। इसी आदेश के अनुपालन में, 27 मई को कार्यकारी अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ की अध्यक्षता में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जहाँ सभी 10 लोगों से सादा प्राप्ति रसीद पर हस्ताक्षर करवाकर उनकी मूल धरोहर राशि वापस कर दी गई और छात्रावास को पूर्णतः कब्जा मुक्त करा लिया गया। छात्रावास के कब्जा मुक्त होने से समाज में खुशी की लहर है, वहीं तथाकथित 'कर्णधारों' के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश और दुःख भी है, जिन्होंने वाद दायर कर और अध्यक्ष पर हमला कर समाज को गलत संदेश दिया।

यह मुद्दा आज पूरे धाकड़ समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। न्यायालय के फैसले से अब छात्रावास संचालन के लिए सामाजिक गतिविधियों पर प्रतिबंध से आय के स्रोत खत्म हो गए हैं। भविष्य में धाकड़ छात्रावास का उपयोग केवल समाज के पढ़ने वाले बालक-बालिकाओं के लिए ही किया जाएगा, और इसे शादी-विवाह या किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं दिया जाएगा। अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि वर्तमान में छात्रावास के पास कोई सरकारी या निजी आय का संसाधन नहीं है, इसलिए दानदाता आगे आएं, ताकि प्राप्त दान का उपयोग गरीब और मध्यम आय वर्ग के बालक-बालिकाओं की शिक्षा के लिए किया जा सके। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से छात्रावास की मदद की है, और उनसे समाज हित में निडर होकर आगे आने का आग्रह किया, ताकि छात्रावास संचालन को नई दिशा मिल सके। धाकड़ समाज ने स्टेशन रोड छबड़ा स्थित छात्रावास से अवैध कब्जे हटवाने पर अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ को 'समाज का सर्वश्रेष्ठ सिपाही' बताया है।

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  • छबड़ा कस्बे से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित भुवाखेड़ी ग्राम के ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र पर वीर सावरकर जयंती अत्यंत उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर देश के शहीदों की स्मृति में विभिन्न प्रजातियों के कुल 51 छायादार और फलदार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में केंद्र से जुड़े अनेक श्रद्धालु और ग्रामीणजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर एस.एल. नागर ने की, जबकि स्वामी ध्यान गगन मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने इस अवसर पर आमजन को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है और भारत के कई राज्य भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। स्वामी ध्यान गगन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज का युवा वर्ग 'खाओ, पियो और मौज करो' की मानसिकता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने लोगों को उन शहीदों को याद करने का आह्वान किया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई। मुख्य वक्ता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में देश को बाहरी खतरों से कहीं अधिक बढ़ते तापमान और पर्यावरण संकट से गंभीर खतरा है। स्वामी ध्यान गगन ने सभी से यह भी आह्वान किया कि प्रत्येक तीज-त्योहार, उत्सव, जयंती, जन्म एवं पुण्यतिथि पर पौधरोपण अवश्य करें, क्योंकि उनके अनुसार "धरती का वास्तविक श्रृंगार पेड़ ही हैं।"
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    छबड़ा कस्बे से लगभग सात किलोमीटर दूर स्थित भुवाखेड़ी ग्राम के ओशो आशीष ध्यान योग केंद्र पर वीर सावरकर जयंती अत्यंत उत्साहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर देश के शहीदों की स्मृति में विभिन्न प्रजातियों के कुल 51 छायादार और फलदार पौधों का रोपण किया गया। कार्यक्रम में केंद्र से जुड़े अनेक श्रद्धालु और ग्रामीणजन उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉक्टर एस.एल. नागर ने की, जबकि स्वामी ध्यान गगन मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने इस अवसर पर आमजन को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि वर्तमान में पूरा विश्व एक संक्रमण काल से गुजर रहा है और भारत के कई राज्य भीषण गर्मी का सामना कर रहे हैं। स्वामी ध्यान गगन ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि आज का युवा वर्ग 'खाओ, पियो और मौज करो' की मानसिकता की ओर बढ़ रहा है।

उन्होंने लोगों को उन शहीदों को याद करने का आह्वान किया, जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को आजादी दिलाई। मुख्य वक्ता ने जोर देकर कहा कि वर्तमान समय में देश को बाहरी खतरों से कहीं अधिक बढ़ते तापमान और पर्यावरण संकट से गंभीर खतरा है। स्वामी ध्यान गगन ने सभी से यह भी आह्वान किया कि प्रत्येक तीज-त्योहार, उत्सव, जयंती, जन्म एवं पुण्यतिथि पर पौधरोपण अवश्य करें, क्योंकि उनके अनुसार "धरती का वास्तविक श्रृंगार पेड़ ही हैं।"
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    12 hrs ago
  • अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के तहत छीपाबड़ौद के स्टेडियम में पूर्ण शरीर को मजबूत करने वाले आसनों का अभ्यास किया गया।
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    अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के तहत छीपाबड़ौद के स्टेडियम में पूर्ण शरीर को मजबूत करने वाले आसनों का अभ्यास किया गया।
    user_Jagdish Chandra Sharma
    Jagdish Chandra Sharma
    Video Creator छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    16 hrs ago
  • गुना जिले के कुंभराज में इस्लाम धर्म का प्रमुख पर्व ईद-उल-अजहा पूरे उत्साह, आस्था और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ईदगाह में सुबह से ही नमाज अदा करने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मुस्लिम समाज के लोगों ने विशेष नमाज अदा की, जिसके बाद आलिम माजिद नदवी ने ईद का खुत्बा पढ़ाया और देश तथा समाज में अमन-चैन, खुशहाली एवं तरक्की की दुआ मांगी। नमाज के उपरांत लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, लोगों ने अपने मरहूम (स्वर्गीय) रिश्तेदारों की कब्रों पर पहुंचकर फातिहा पढ़ी और उनकी मगफिरत के लिए दुआ की। परंपरा अनुसार, घरों में कुर्बानी की रस्म भी अदा की गई। यह पर्व हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की अल्लाह के प्रति अटूट निष्ठा, सब्र और कुर्बानी की याद दिलाता है, जो त्याग, प्रेम, भाईचारे और मानवता के उच्च मूल्यों का प्रतीक है। कुर्बानी का वास्तविक संदेश यह है कि हम अपने दिलों से नफ़रत, घमंड और स्वार्थ को दूर करें और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं। साथ ही, सब्र हमें कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ते पर बने रहने की प्रेरणा देता है, जबकि भाईचारे का जज़्बा समाज में एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान को मजबूत करता है।
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    गुना जिले के कुंभराज में इस्लाम धर्म का प्रमुख पर्व ईद-उल-अजहा पूरे उत्साह, आस्था और भाईचारे के साथ मनाया गया। इस अवसर पर स्थानीय ईदगाह में सुबह से ही नमाज अदा करने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मुस्लिम समाज के लोगों ने विशेष नमाज अदा की, जिसके बाद आलिम माजिद नदवी ने ईद का खुत्बा पढ़ाया और देश तथा समाज में अमन-चैन, खुशहाली एवं तरक्की की दुआ मांगी। नमाज के उपरांत लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद दी और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त, लोगों ने अपने मरहूम (स्वर्गीय) रिश्तेदारों की कब्रों पर पहुंचकर फातिहा पढ़ी और उनकी मगफिरत के लिए दुआ की। परंपरा अनुसार, घरों में कुर्बानी की रस्म भी अदा की गई।

यह पर्व हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की अल्लाह के प्रति अटूट निष्ठा, सब्र और कुर्बानी की याद दिलाता है, जो त्याग, प्रेम, भाईचारे और मानवता के उच्च मूल्यों का प्रतीक है। कुर्बानी का वास्तविक संदेश यह है कि हम अपने दिलों से नफ़रत, घमंड और स्वार्थ को दूर करें और ज़रूरतमंदों की मदद के लिए आगे आएं। साथ ही, सब्र हमें कठिन परिस्थितियों में भी सही रास्ते पर बने रहने की प्रेरणा देता है, जबकि भाईचारे का जज़्बा समाज में एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान को मजबूत करता है।
    user_Idris Mansoori TNP News
    Idris Mansoori TNP News
    Tent House Supplier कुंभराज, गुना, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के गुना जिले का भैसाना गांव इन दिनों एक अनूठी गाथा लिख रहा है, जहाँ आयोजित महायज्ञ केवल धर्म-कर्म का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में 'सतयुगी' दौर की वापसी बन गया है। इस महायज्ञ में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुँचे हैं, और आज इसका अंतिम दिन है, जिससे पूरा भैसाना 'राममय' हो गया है। यह आयोजन आधुनिक दौर के वीआईपी कल्चर और राजनीतिक प्रचार से हटकर पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुका है। आयोजकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बिना किसी सरकारी मदद या राजनीतिक संरक्षण के भी, यदि नीयत साफ हो और संगठन में अनुशासन हो, तो ऐसे विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किए जा सकते हैं। यह महायज्ञ गुना जिले की पहचान बन गया है और संदेश दे रहा है कि 'धर्म' का अर्थ दिखावा नहीं, बल्कि 'सेवा' और 'समानता' है। यज्ञ स्थल को प्राचीन भारतीय वास्तुशैली के अनुरूप तैयार किया गया है, जहाँ मिट्टी की सुगंध, वैदिक मंत्रों का गुंजन और पारंपरिक वेशभूषा में स्वयंसेवक ऋषियों की कुटिया जैसा आभास कराते हैं, जो मन को असीम शांति प्रदान करता है। इस महायज्ञ की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता 'समानता' का मंत्र है, जहाँ वीआईपी कल्चर का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया है। बड़े से बड़े रसूखदार, प्रशासनिक अधिकारी या नेता—सभी को आम श्रद्धालुओं की तरह ही लाइन में लगकर दर्शन करने पड़ रहे हैं। भोजन व्यवस्था में भी वीआईपी के लिए कोई अलग कमरा या व्यवस्था नहीं है; हर कोई एक साथ जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहा है, जो समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटा रहा है। पूरे यज्ञ परिसर में किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा, नेता का पोस्टर या फोटो नहीं दिखाई देता, केवल भगवान की भक्ति और सेवा भाव का ही बोलबाला है। श्रद्धालुओं के लिए विशाल और व्यवस्थित निशुल्क पार्किंग, दिन-रात चलने वाला 'अन्नपूर्णा सेवा' का विशाल भंडारा जहाँ गर्म और सात्विक भोजन उपलब्ध है, और भीषण गर्मी में शीतल पेयजल की निरंतर व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम, निजी सुरक्षा गार्ड और हजारों की संख्या में समर्पित स्वयंसेवक दिन-रात निस्वार्थ भाव से सुरक्षा और सेवा में तत्पर हैं, जो साबित करता है कि आज भी समाज में इंसानियत जिंदा है।
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    मध्य प्रदेश के गुना जिले का भैसाना गांव इन दिनों एक अनूठी गाथा लिख रहा है, जहाँ आयोजित महायज्ञ केवल धर्म-कर्म का केंद्र नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति में 'सतयुगी' दौर की वापसी बन गया है। इस महायज्ञ में दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालु पहुँचे हैं, और आज इसका अंतिम दिन है, जिससे पूरा भैसाना 'राममय' हो गया है। यह आयोजन आधुनिक दौर के वीआईपी कल्चर और राजनीतिक प्रचार से हटकर पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन चुका है।

आयोजकों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बिना किसी सरकारी मदद या राजनीतिक संरक्षण के भी, यदि नीयत साफ हो और संगठन में अनुशासन हो, तो ऐसे विशाल आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किए जा सकते हैं। यह महायज्ञ गुना जिले की पहचान बन गया है और संदेश दे रहा है कि 'धर्म' का अर्थ दिखावा नहीं, बल्कि 'सेवा' और 'समानता' है। यज्ञ स्थल को प्राचीन भारतीय वास्तुशैली के अनुरूप तैयार किया गया है, जहाँ मिट्टी की सुगंध, वैदिक मंत्रों का गुंजन और पारंपरिक वेशभूषा में स्वयंसेवक ऋषियों की कुटिया जैसा आभास कराते हैं, जो मन को असीम शांति प्रदान करता है।

इस महायज्ञ की सबसे बड़ी और क्रांतिकारी विशेषता 'समानता' का मंत्र है, जहाँ वीआईपी कल्चर का पूरी तरह से बहिष्कार किया गया है। बड़े से बड़े रसूखदार, प्रशासनिक अधिकारी या नेता—सभी को आम श्रद्धालुओं की तरह ही लाइन में लगकर दर्शन करने पड़ रहे हैं। भोजन व्यवस्था में भी वीआईपी के लिए कोई अलग कमरा या व्यवस्था नहीं है; हर कोई एक साथ जमीन पर बैठकर प्रसाद ग्रहण कर रहा है, जो समाज में व्याप्त ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटा रहा है। पूरे यज्ञ परिसर में किसी भी राजनीतिक पार्टी का झंडा, नेता का पोस्टर या फोटो नहीं दिखाई देता, केवल भगवान की भक्ति और सेवा भाव का ही बोलबाला है। श्रद्धालुओं के लिए विशाल और व्यवस्थित निशुल्क पार्किंग, दिन-रात चलने वाला 'अन्नपूर्णा सेवा' का विशाल भंडारा जहाँ गर्म और सात्विक भोजन उपलब्ध है, और भीषण गर्मी में शीतल पेयजल की निरंतर व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम, निजी सुरक्षा गार्ड और हजारों की संख्या में समर्पित स्वयंसेवक दिन-रात निस्वार्थ भाव से सुरक्षा और सेवा में तत्पर हैं, जो साबित करता है कि आज भी समाज में इंसानियत जिंदा है।
    user_Shivkumar Jogi
    Shivkumar Jogi
    Customer Service Representative गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • गुना पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के निर्देश पर जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मानसिंह ठाकुर के मार्गदर्शन और एसडीओपी राघौगढ़ श्रीमती दीपा डोडवे के पर्यवेक्षण में, धरनावदा थाना पुलिस ने अवैध गांजा तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए दो गांजा तस्करों को गिरफ्तार करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। गत 28 मई 2026 की शाम को धरनावदा थाना पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक ग्लेमर मोटर साइकिल क्रमांक MP08 MW 8347 पर दो व्यक्ति बोरखेड़ा, बेरखेड़ी गांव के रास्ते से गुना हाईवे होकर शिवपुरी की तरफ गांजा बेचने जा रहे हैं। इस सूचना पर तत्काल झागर चौकी से पुलिस की एक टीम बेरखेड़ी गांव की पुलिया के पास पहुंची और घात लगाकर संदिग्ध मोटर साइकिल और व्यक्तियों का इंतजार किया। कुछ देर बाद, मुखबिर द्वारा बताए हुलिए की मोटर साइकिल पर दोनों व्यक्तियों के आने पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम श्यामबाबू पुत्र रोड़ेलाल भील (उम्र 50 साल, निवासी ग्राम मेरियाखेड़ी थाना चांचौड़ा) और बहादुर सिंह पुत्र नारायण सिंह राजपूत (उम्र 55 साल, निवासी ग्राम बरवटपुरा थाना चांचौड़ा, जिला गुना) बताए। मुखबिर की सूचना के आधार पर विधिवत तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद प्लास्टिक के कट्टे से कुल 2.988 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ। पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से बरामद गांजा, जिसकी कीमत 60 हजार रुपये है, और तस्करी में प्रयुक्त मोटर साइकिल, जिसकी कीमत 50 हजार रुपये है, सहित कुल 1.10 लाख रुपये का मशरूका विधिवत जब्त किया गया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर धरनावदा थाने में अपराध क्रमांक 104/26 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है। नशे के खिलाफ धरनावदा थाना पुलिस की इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक रुहिल शर्मा के नेतृत्व में झागर चौकी प्रभारी सउनि अनिल कदम, प्रधान आरक्षक जोगेश शर्मा, प्रधान आरक्षक अजय कुमार, आरक्षक राघवेन्द्र बुन्देला, आरक्षक राजेश परिहार, आरक्षक रविन्द्र सोलंकी और आरक्षक पवन शर्मा का विशेष योगदान रहा।
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    गुना पुलिस अधीक्षक श्रीमती हितिका वासल के निर्देश पर जिले में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और बिक्री पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री मानसिंह ठाकुर के मार्गदर्शन और एसडीओपी राघौगढ़ श्रीमती दीपा डोडवे के पर्यवेक्षण में, धरनावदा थाना पुलिस ने अवैध गांजा तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करते हुए दो गांजा तस्करों को गिरफ्तार करने में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है।

गत 28 मई 2026 की शाम को धरनावदा थाना पुलिस को एक मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक ग्लेमर मोटर साइकिल क्रमांक MP08 MW 8347 पर दो व्यक्ति बोरखेड़ा, बेरखेड़ी गांव के रास्ते से गुना हाईवे होकर शिवपुरी की तरफ गांजा बेचने जा रहे हैं। इस सूचना पर तत्काल झागर चौकी से पुलिस की एक टीम बेरखेड़ी गांव की पुलिया के पास पहुंची और घात लगाकर संदिग्ध मोटर साइकिल और व्यक्तियों का इंतजार किया। कुछ देर बाद, मुखबिर द्वारा बताए हुलिए की मोटर साइकिल पर दोनों व्यक्तियों के आने पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर उन्हें रोक लिया। पूछताछ में उन्होंने अपने नाम श्यामबाबू पुत्र रोड़ेलाल भील (उम्र 50 साल, निवासी ग्राम मेरियाखेड़ी थाना चांचौड़ा) और बहादुर सिंह पुत्र नारायण सिंह राजपूत (उम्र 55 साल, निवासी ग्राम बरवटपुरा थाना चांचौड़ा, जिला गुना) बताए।

मुखबिर की सूचना के आधार पर विधिवत तलाशी लेने पर उनके पास मौजूद प्लास्टिक के कट्टे से कुल 2.988 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ गांजा बरामद हुआ। पुलिस द्वारा आरोपियों के कब्जे से बरामद गांजा, जिसकी कीमत 60 हजार रुपये है, और तस्करी में प्रयुक्त मोटर साइकिल, जिसकी कीमत 50 हजार रुपये है, सहित कुल 1.10 लाख रुपये का मशरूका विधिवत जब्त किया गया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर धरनावदा थाने में अपराध क्रमांक 104/26 धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।

नशे के खिलाफ धरनावदा थाना पुलिस की इस कार्रवाई में थाना प्रभारी उपनिरीक्षक रुहिल शर्मा के नेतृत्व में झागर चौकी प्रभारी सउनि अनिल कदम, प्रधान आरक्षक जोगेश शर्मा, प्रधान आरक्षक अजय कुमार, आरक्षक राघवेन्द्र बुन्देला, आरक्षक राजेश परिहार, आरक्षक रविन्द्र सोलंकी और आरक्षक पवन शर्मा का विशेष योगदान रहा।
    user_Pradeep Sharma
    Pradeep Sharma
    Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • बारां जिले के छबड़ा में स्टेशन रोड स्थित धाकड़ छात्रावास में चल रहा अवैध कब्जों का विवाद माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार सुलझ गया है। अदालती आदेश और निर्धारित समयावधि का पालन करते हुए, छात्रावास की दुकानों पर काबिज समाज के 10 लोगों ने अपने अवैध कब्जे हटा लिए हैं। इसके साथ ही, धाकड़ समाज सेवा समिति ने न्यायालय के निर्देशानुसार, इन सभी 10 दुकानदारों को उनकी 1-1 लाख रुपये की धरोहर (सहयोग) राशि भी ससम्मान वापस लौटा दी है। इस महत्वपूर्ण कदम के बाद अब छात्रावास के सुचारु संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिसकी समाज के वरिष्ठ जनों ने अध्यक्ष सहित उनकी कार्यकारिणी के सदस्यों का पुरजोर स्वागत किया है। दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ था जब धाकड़ छात्रावास के निर्माण के समय समाज के 10 लोगों ने ₹1-1 लाख की धरोहर सहयोग राशि जमा की थी। बाद में, राज्य सरकार की शर्तों के तहत धाकड़ समाज सेवा समिति के अधीन छात्रावास का निर्माण हुआ और आय के स्रोत के रूप में आगे के कमरों को दुकानों का रूप देकर इन्हीं 10 सहयोगकर्ताओं को व्यवसाय के लिए सौंपा गया। हालांकि, जब समाज ने उनसे धरोहर राशि वापस लेकर छात्रावास खाली करने को कहा, तो काबिज लोगों ने दुकानें खाली करने से इनकार कर दिया। राजनीतिक प्रभाव और रसूख के कारण यह कब्जा लंबे समय तक बना रहा, जिससे छात्रावास का संचालन बाधित रहा। इस दौरान कई बैठकों में यह मुद्दा उठा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। शुरुआती कार्यकारी अध्यक्षों के बाद कई अध्यक्षों ने समाज को आय-व्यय का ब्यौरा भी नहीं दिया। राधेश्याम धाकड़ के निधन के बाद रामेश्वर धाकड़ अध्यक्ष बने, लेकिन वे भी कब्जा मुक्त नहीं करा सके। इसके पश्चात्, धर्मा धाकड़ को छात्रावास खाली कराने की शर्त पर कमान सौंपी गई, जिन्होंने कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। तत्पश्चात, भुवाखेड़ी के पटेल श्री लाल धाकड़ को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। पदभार संभालते ही श्री लाल धाकड़ ने सख्त कदम उठाते हुए सभी 10 दुकानदारों को नोटिस जारी कर अपनी राशि लेने और दुकानें खाली करने का निर्देश दिया। इस कार्रवाई से बौखलाए काबिज लोगों ने एक सुनियोजित योजना के तहत समाज की बैठक में अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ और उनकी कार्यकारिणी सहित मौजूद समाज के लोगों पर जानलेवा हमला किया और मारपीट की। इस घटना के संबंध में दोनों पक्षों की ओर से छबड़ा थाने में मुकदमे भी दर्ज हैं। कब्जे की नीयत से खुद को समाज हितैषी बताने वाले कुछ लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 'दूध का दूध और पानी का पानी' कर दिया। न्यायालय ने राजीनामे के अनुसार काबिज लोगों को 27 मई तक छात्रावास खाली करने के सख्त आदेश जारी किए थे। इसी आदेश के अनुपालन में, 27 मई को कार्यकारी अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ की अध्यक्षता में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जहाँ सभी 10 लोगों से सादा प्राप्ति रसीद पर हस्ताक्षर करवाकर उनकी मूल धरोहर राशि वापस कर दी गई और छात्रावास को पूर्णतः कब्जा मुक्त करा लिया गया। छात्रावास के कब्जा मुक्त होने से समाज में खुशी की लहर है, वहीं तथाकथित 'कर्णधारों' के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश और दुःख भी है, जिन्होंने वाद दायर कर और अध्यक्ष पर हमला कर समाज को गलत संदेश दिया। यह मुद्दा आज पूरे धाकड़ समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। न्यायालय के फैसले से अब छात्रावास संचालन के लिए सामाजिक गतिविधियों पर प्रतिबंध से आय के स्रोत खत्म हो गए हैं। भविष्य में धाकड़ छात्रावास का उपयोग केवल समाज के पढ़ने वाले बालक-बालिकाओं के लिए ही किया जाएगा, और इसे शादी-विवाह या किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं दिया जाएगा। अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि वर्तमान में छात्रावास के पास कोई सरकारी या निजी आय का संसाधन नहीं है, इसलिए दानदाता आगे आएं, ताकि प्राप्त दान का उपयोग गरीब और मध्यम आय वर्ग के बालक-बालिकाओं की शिक्षा के लिए किया जा सके। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से छात्रावास की मदद की है, और उनसे समाज हित में निडर होकर आगे आने का आग्रह किया, ताकि छात्रावास संचालन को नई दिशा मिल सके। धाकड़ समाज ने स्टेशन रोड छबड़ा स्थित छात्रावास से अवैध कब्जे हटवाने पर अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ को 'समाज का सर्वश्रेष्ठ सिपाही' बताया है।
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    बारां जिले के छबड़ा में स्टेशन रोड स्थित धाकड़ छात्रावास में चल रहा अवैध कब्जों का विवाद माननीय न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार सुलझ गया है। अदालती आदेश और निर्धारित समयावधि का पालन करते हुए, छात्रावास की दुकानों पर काबिज समाज के 10 लोगों ने अपने अवैध कब्जे हटा लिए हैं। इसके साथ ही, धाकड़ समाज सेवा समिति ने न्यायालय के निर्देशानुसार, इन सभी 10 दुकानदारों को उनकी 1-1 लाख रुपये की धरोहर (सहयोग) राशि भी ससम्मान वापस लौटा दी है। इस महत्वपूर्ण कदम के बाद अब छात्रावास के सुचारु संचालन का मार्ग प्रशस्त हो गया है, जिसकी समाज के वरिष्ठ जनों ने अध्यक्ष सहित उनकी कार्यकारिणी के सदस्यों का पुरजोर स्वागत किया है।

दरअसल, यह मामला तब शुरू हुआ था जब धाकड़ छात्रावास के निर्माण के समय समाज के 10 लोगों ने ₹1-1 लाख की धरोहर सहयोग राशि जमा की थी। बाद में, राज्य सरकार की शर्तों के तहत धाकड़ समाज सेवा समिति के अधीन छात्रावास का निर्माण हुआ और आय के स्रोत के रूप में आगे के कमरों को दुकानों का रूप देकर इन्हीं 10 सहयोगकर्ताओं को व्यवसाय के लिए सौंपा गया। हालांकि, जब समाज ने उनसे धरोहर राशि वापस लेकर छात्रावास खाली करने को कहा, तो काबिज लोगों ने दुकानें खाली करने से इनकार कर दिया। राजनीतिक प्रभाव और रसूख के कारण यह कब्जा लंबे समय तक बना रहा, जिससे छात्रावास का संचालन बाधित रहा। इस दौरान कई बैठकों में यह मुद्दा उठा, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला।

शुरुआती कार्यकारी अध्यक्षों के बाद कई अध्यक्षों ने समाज को आय-व्यय का ब्यौरा भी नहीं दिया। राधेश्याम धाकड़ के निधन के बाद रामेश्वर धाकड़ अध्यक्ष बने, लेकिन वे भी कब्जा मुक्त नहीं करा सके। इसके पश्चात्, धर्मा धाकड़ को छात्रावास खाली कराने की शर्त पर कमान सौंपी गई, जिन्होंने कुछ समय बाद इस्तीफा दे दिया। तत्पश्चात, भुवाखेड़ी के पटेल श्री लाल धाकड़ को कार्यकारी अध्यक्ष चुना गया। पदभार संभालते ही श्री लाल धाकड़ ने सख्त कदम उठाते हुए सभी 10 दुकानदारों को नोटिस जारी कर अपनी राशि लेने और दुकानें खाली करने का निर्देश दिया। इस कार्रवाई से बौखलाए काबिज लोगों ने एक सुनियोजित योजना के तहत समाज की बैठक में अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ और उनकी कार्यकारिणी सहित मौजूद समाज के लोगों पर जानलेवा हमला किया और मारपीट की। इस घटना के संबंध में दोनों पक्षों की ओर से छबड़ा थाने में मुकदमे भी दर्ज हैं।

कब्जे की नीयत से खुद को समाज हितैषी बताने वाले कुछ लोगों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। माननीय न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 'दूध का दूध और पानी का पानी' कर दिया। न्यायालय ने राजीनामे के अनुसार काबिज लोगों को 27 मई तक छात्रावास खाली करने के सख्त आदेश जारी किए थे। इसी आदेश के अनुपालन में, 27 मई को कार्यकारी अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ की अध्यक्षता में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जहाँ सभी 10 लोगों से सादा प्राप्ति रसीद पर हस्ताक्षर करवाकर उनकी मूल धरोहर राशि वापस कर दी गई और छात्रावास को पूर्णतः कब्जा मुक्त करा लिया गया।

छात्रावास के कब्जा मुक्त होने से समाज में खुशी की लहर है, वहीं तथाकथित 'कर्णधारों' के रवैये को लेकर गहरा आक्रोश और दुःख भी है, जिन्होंने वाद दायर कर और अध्यक्ष पर हमला कर समाज को गलत संदेश दिया। यह मुद्दा आज पूरे धाकड़ समाज में चर्चा का विषय बना हुआ है। न्यायालय के फैसले से अब छात्रावास संचालन के लिए सामाजिक गतिविधियों पर प्रतिबंध से आय के स्रोत खत्म हो गए हैं। भविष्य में धाकड़ छात्रावास का उपयोग केवल समाज के पढ़ने वाले बालक-बालिकाओं के लिए ही किया जाएगा, और इसे शादी-विवाह या किसी अन्य प्रयोजन के लिए नहीं दिया जाएगा। अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ ने समाज के लोगों से आह्वान किया है कि वर्तमान में छात्रावास के पास कोई सरकारी या निजी आय का संसाधन नहीं है, इसलिए दानदाता आगे आएं, ताकि प्राप्त दान का उपयोग गरीब और मध्यम आय वर्ग के बालक-बालिकाओं की शिक्षा के लिए किया जा सके। उन्होंने उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से छात्रावास की मदद की है, और उनसे समाज हित में निडर होकर आगे आने का आग्रह किया, ताकि छात्रावास संचालन को नई दिशा मिल सके। धाकड़ समाज ने स्टेशन रोड छबड़ा स्थित छात्रावास से अवैध कब्जे हटवाने पर अध्यक्ष श्री लाल धाकड़ को 'समाज का सर्वश्रेष्ठ सिपाही' बताया है।
    user_Alakh Jyoti Yog Present
    Alakh Jyoti Yog Present
    Yoga instructor Chhabra, Baran•
    14 hrs ago
  • गुरुवार को हरनावदाशाहजी कस्बे के मनोहरथाना मार्ग पर गणेशपुरा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दो बाइक और एक बस की भिड़ंत में पांच लोग घायल हो गए, जबकि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, इस हादसे में गंगोहणी, मनोहरथाना निवासी 25 वर्षीय बाइक सवार अर्जुन पुत्र नाथूलाल की मौके पर ही मौत हो गई। अर्जुन की शादी करीब दो वर्ष पहले गणेशपुरा में हुई थी और वह किसी कार्यक्रम में ससुराल आया था, बाइक से हरनावदाशाहजी से गणेशपुरा की ओर जा रहा था। घायलों में बस चालक राजेश पुत्र घासीलाल भील (40) निवासी कुम्भाखेड़ी, परिचालक नंदकिशोर पुत्र बालचंद राव (42) निवासी गणेशपुरा काकोणी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बाइक सवार छोटूलाल पुत्र मांगीलाल राठौर (65), उनके पुत्र लोकेश राठौर (36) निवासी हरनावदाशाहजी और दूसरी बाइक पर सवार दिनेश पुत्र बंशीलाल लोधा (24) निवासी खेड़ी जागीर भी घायल हुए हैं। घटना स्थल पर दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं, जबकि बस चंदीपुर की ओर जा रही थी और उसमें केवल चालक और परिचालक ही सवार थे। पुलिस ने बताया कि मनोहरथाना रोड पर यह दुर्घटना अचानक हुई, हालांकि हादसे के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। सभी घायलों को तत्काल हरनावदाशाहजी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें झालावाड़ रेफर कर दिया गया। मृतक अर्जुन के शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
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    गुरुवार को हरनावदाशाहजी कस्बे के मनोहरथाना मार्ग पर गणेशपुरा के पास एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। दो बाइक और एक बस की भिड़ंत में पांच लोग घायल हो गए, जबकि एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, इस हादसे में गंगोहणी, मनोहरथाना निवासी 25 वर्षीय बाइक सवार अर्जुन पुत्र नाथूलाल की मौके पर ही मौत हो गई। अर्जुन की शादी करीब दो वर्ष पहले गणेशपुरा में हुई थी और वह किसी कार्यक्रम में ससुराल आया था, बाइक से हरनावदाशाहजी से गणेशपुरा की ओर जा रहा था। घायलों में बस चालक राजेश पुत्र घासीलाल भील (40) निवासी कुम्भाखेड़ी, परिचालक नंदकिशोर पुत्र बालचंद राव (42) निवासी गणेशपुरा काकोणी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, बाइक सवार छोटूलाल पुत्र मांगीलाल राठौर (65), उनके पुत्र लोकेश राठौर (36) निवासी हरनावदाशाहजी और दूसरी बाइक पर सवार दिनेश पुत्र बंशीलाल लोधा (24) निवासी खेड़ी जागीर भी घायल हुए हैं। घटना स्थल पर दोनों बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त मिलीं, जबकि बस चंदीपुर की ओर जा रही थी और उसमें केवल चालक और परिचालक ही सवार थे।

पुलिस ने बताया कि मनोहरथाना रोड पर यह दुर्घटना अचानक हुई, हालांकि हादसे के कारणों का अभी तक स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।

सभी घायलों को तत्काल हरनावदाशाहजी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें झालावाड़ रेफर कर दिया गया। मृतक अर्जुन के शव को मोर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है।
    user_User10561
    User10561
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    4 hrs ago
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