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अलवर शहर के कंपनी बाग में आशा सहयोगिनी एकता मंच का धरना-प्रदर्शन सोमवार को लगातार 22वें दिन भी जारी रहा। जिलेभर से पहुंची आशा सहयोगिनियां अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलनकारी आशा सहयोगिनियों ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा और अलवर सांसद व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, इन ज्ञापनों के बावजूद अब तक न तो किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब मिला है, जिससे आशा सहयोगिनियों में भारी नाराजगी और निराशा व्याप्त है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रख रही हैं, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। आशा सहयोगिनियां ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जनजागरूकता सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, फिर भी उन्हें अपेक्षित मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल रहा है। लगातार 22 दिनों से धरने पर बैठने और भीषण गर्मी के कारण कई आशा सहयोगिनियों की तबीयत भी बिगड़ गई है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उनका कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगी और अंतिम निर्णय तक संघर्ष जारी रखेंगी। धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। आंदोलनकारी महिलाओं ने सरकार से अपनी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने, वार्ता के माध्यम से सकारात्मक पहल करने और लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने दोहराया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक कंपनी बाग में उनका धरना और संघर्ष लगातार जारी रहेगा। धरने में राजवती, अनीता, पुष्प मीणा, दीपा जाट, शीला देवी, रेखा, ममता रानी, नीलम सैनी, परमलता, राजू मीणा, रीमा, संतोष, शीला सैनी, सुनीता, श्यामवती, प्रभा, संजोग देवी, सीता, नन्की, मुनेशा, गीता, कमलेश, बीना, सुमन, देवी, बंकी, बबीता, ममता, बीजा, कविता, सुन्दरी, बदली, उषा, सीमा, अनीता, फूला, किरण, पिंकी, सवितादेवी और नीतू सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां उपस्थित रहीं।

6 hrs ago
user_जितेन्द्र कुमार यादव
जितेन्द्र कुमार यादव
अलवर, अलवर, राजस्थान•
6 hrs ago

अलवर शहर के कंपनी बाग में आशा सहयोगिनी एकता मंच का धरना-प्रदर्शन सोमवार को लगातार 22वें दिन भी जारी रहा। जिलेभर से पहुंची आशा सहयोगिनियां अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलनकारी आशा सहयोगिनियों ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा और अलवर सांसद व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नाम भी

शामिल हैं। हालांकि, इन ज्ञापनों के बावजूद अब तक न तो किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब मिला है, जिससे आशा सहयोगिनियों में भारी नाराजगी और निराशा व्याप्त है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रख रही हैं, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। आशा सहयोगिनियां ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जनजागरूकता सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, फिर भी उन्हें अपेक्षित मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल

रहा है। लगातार 22 दिनों से धरने पर बैठने और भीषण गर्मी के कारण कई आशा सहयोगिनियों की तबीयत भी बिगड़ गई है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उनका कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगी और अंतिम निर्णय तक संघर्ष जारी रखेंगी। धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। आंदोलनकारी महिलाओं ने सरकार से अपनी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने, वार्ता के माध्यम से सकारात्मक पहल करने

और लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने दोहराया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक कंपनी बाग में उनका धरना और संघर्ष लगातार जारी रहेगा। धरने में राजवती, अनीता, पुष्प मीणा, दीपा जाट, शीला देवी, रेखा, ममता रानी, नीलम सैनी, परमलता, राजू मीणा, रीमा, संतोष, शीला सैनी, सुनीता, श्यामवती, प्रभा, संजोग देवी, सीता, नन्की, मुनेशा, गीता, कमलेश, बीना, सुमन, देवी, बंकी, बबीता, ममता, बीजा, कविता, सुन्दरी, बदली, उषा, सीमा, अनीता, फूला, किरण, पिंकी, सवितादेवी और नीतू सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां उपस्थित रहीं।

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  • अलवर शहर के कंपनी बाग में आशा सहयोगिनी एकता मंच का धरना-प्रदर्शन सोमवार को लगातार 22वें दिन भी जारी रहा। जिलेभर से पहुंची आशा सहयोगिनियां अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। आंदोलनकारी आशा सहयोगिनियों ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा और अलवर सांसद व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, इन ज्ञापनों के बावजूद अब तक न तो किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब मिला है, जिससे आशा सहयोगिनियों में भारी नाराजगी और निराशा व्याप्त है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रख रही हैं, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। आशा सहयोगिनियां ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जनजागरूकता सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, फिर भी उन्हें अपेक्षित मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल रहा है। लगातार 22 दिनों से धरने पर बैठने और भीषण गर्मी के कारण कई आशा सहयोगिनियों की तबीयत भी बिगड़ गई है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उनका कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगी और अंतिम निर्णय तक संघर्ष जारी रखेंगी। धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। आंदोलनकारी महिलाओं ने सरकार से अपनी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने, वार्ता के माध्यम से सकारात्मक पहल करने और लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने दोहराया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक कंपनी बाग में उनका धरना और संघर्ष लगातार जारी रहेगा। धरने में राजवती, अनीता, पुष्प मीणा, दीपा जाट, शीला देवी, रेखा, ममता रानी, नीलम सैनी, परमलता, राजू मीणा, रीमा, संतोष, शीला सैनी, सुनीता, श्यामवती, प्रभा, संजोग देवी, सीता, नन्की, मुनेशा, गीता, कमलेश, बीना, सुमन, देवी, बंकी, बबीता, ममता, बीजा, कविता, सुन्दरी, बदली, उषा, सीमा, अनीता, फूला, किरण, पिंकी, सवितादेवी और नीतू सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां उपस्थित रहीं।
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    अलवर शहर के कंपनी बाग में आशा सहयोगिनी एकता मंच का धरना-प्रदर्शन सोमवार को लगातार 22वें दिन भी जारी रहा। जिलेभर से पहुंची आशा सहयोगिनियां अपनी विभिन्न लंबित मांगों के समाधान की मांग को लेकर एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

आंदोलनकारी आशा सहयोगिनियों ने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन के साथ-साथ कई जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा और अलवर सांसद व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, इन ज्ञापनों के बावजूद अब तक न तो किसी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई की गई है और न ही उनकी मांगों पर कोई स्पष्ट जवाब मिला है, जिससे आशा सहयोगिनियों में भारी नाराजगी और निराशा व्याप्त है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से प्रदेश सरकार के समक्ष अपनी समस्याएं रख रही हैं, लेकिन उनकी आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है। आशा सहयोगिनियां ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, जनजागरूकता सहित विभिन्न सरकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य करती हैं, फिर भी उन्हें अपेक्षित मानदेय, सामाजिक सुरक्षा और सम्मान नहीं मिल रहा है।

लगातार 22 दिनों से धरने पर बैठने और भीषण गर्मी के कारण कई आशा सहयोगिनियों की तबीयत भी बिगड़ गई है। स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के बावजूद उनका कहना है कि वे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटेंगी और अंतिम निर्णय तक संघर्ष जारी रखेंगी। धरना स्थल पर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा और उसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।

आंदोलनकारी महिलाओं ने सरकार से अपनी समस्याओं का शीघ्र समाधान करने, वार्ता के माध्यम से सकारात्मक पहल करने और लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेकर उन्हें राहत प्रदान करने की मांग की है। उन्होंने दोहराया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को स्वीकार नहीं करती, तब तक कंपनी बाग में उनका धरना और संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

धरने में राजवती, अनीता, पुष्प मीणा, दीपा जाट, शीला देवी, रेखा, ममता रानी, नीलम सैनी, परमलता, राजू मीणा, रीमा, संतोष, शीला सैनी, सुनीता, श्यामवती, प्रभा, संजोग देवी, सीता, नन्की, मुनेशा, गीता, कमलेश, बीना, सुमन, देवी, बंकी, बबीता, ममता, बीजा, कविता, सुन्दरी, बदली, उषा, सीमा, अनीता, फूला, किरण, पिंकी, सवितादेवी और नीतू सहित बड़ी संख्या में आशा सहयोगिनियां उपस्थित रहीं।
    user_जितेन्द्र कुमार यादव
    जितेन्द्र कुमार यादव
    अलवर, अलवर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • राजस्थान के अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ में स्थित टोडा क्षेत्र में सरपँच के अंतर्गत पानी की व्यवस्था नहीं होने की समस्या सामने आई है। स्थानीय लोगों को पानी की सुविधा के अभाव से जूझना पड़ रहा है।
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    राजस्थान के अलवर जिले के लक्ष्मणगढ़ में स्थित टोडा क्षेत्र में सरपँच के अंतर्गत पानी की व्यवस्था नहीं होने की समस्या सामने आई है। स्थानीय लोगों को पानी की सुविधा के अभाव से जूझना पड़ रहा है।
    user_M
    M
    अलवर, अलवर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • राजस्थान सरकार पर जनता को बेवजह परेशान करने और अपने वादों से मुकरने का आरोप लगाया गया है। लोगों का कहना है कि सरकार सिर्फ यह कहकर वादे करती है कि सड़कों का निर्माण करवाया जाएगा, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है। राज्य में सड़कों की हालत बेहद खराब है; एक सीधी रोड जिसे बने हुए करीब चार या पांच साल हो चुके हैं, उसकी भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है। इस स्थिति को लेकर जनता में गहरी नाराजगी है।
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    राजस्थान सरकार पर जनता को बेवजह परेशान करने और अपने वादों से मुकरने का आरोप लगाया गया है। लोगों का कहना है कि सरकार सिर्फ यह कहकर वादे करती है कि सड़कों का निर्माण करवाया जाएगा, लेकिन धरातल पर अभी तक कोई काम नहीं हुआ है।

राज्य में सड़कों की हालत बेहद खराब है; एक सीधी रोड जिसे बने हुए करीब चार या पांच साल हो चुके हैं, उसकी भी स्थिति वैसी ही बनी हुई है। इस स्थिति को लेकर जनता में गहरी नाराजगी है।
    user_Pawan Kumar
    Pawan Kumar
    अलवर, अलवर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने सोमवार को मुंडावर तहसील में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान लगभग 680 लीटर मिलावटी और बदबूदार दूध को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया, जिससे जन स्वास्थ्य को संभावित खतरे को रोका जा सके। खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि एक मुखबिर की सूचना पर एक सफेद पिकअप वाहन को रोका गया और उसकी जांच की गई। वाहन चालक की पहचान अलवर निवासी मोहित पुत्र सोम सिंह के रूप में हुई। पिकअप में 17 स्टील के कैनों में करीब 680 लीटर मिश्रित दूध भरा हुआ था, जिसे हरियाणा स्थित वीटा डेयरी में सप्लाई के लिए ले जाया जा रहा था। जांच के दौरान पता चला कि यह दूध भुरियावास निवासी विक्रम पुत्र प्रहलाद (37) और लोकेश यादव (27) का था, जो डेयरी कोड धारक हैं। मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से की गई प्राथमिक जांच में दूध में मिलावट की पुष्टि हुई। इसके अतिरिक्त, दूध फटा हुआ, खट्टा और दुर्गंधयुक्त भी पाया गया। इसके बाद, विभाग ने स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे 680 लीटर दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने यह भी बताया कि इस मामले में वीटा डेयरी को एक पत्र भेजकर संबंधित दूध विक्रेताओं के डेयरी कोड बंद करने की अनुशंसा की जाएगी। साथ ही, डेयरी प्रबंधन को भविष्य में इस प्रकार का मिलावटी एवं खराब गुणवत्ता वाला दूध स्वीकार न करने के निर्देश भी दिए जाएंगे। इस कार्रवाई के दौरान महिपाल सिंह और सुभाष यादव सहित विभागीय टीम मौजूद रही।
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    खैरथल-तिजारा जिला कलेक्टर के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अरविंद गेट के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने सोमवार को मुंडावर तहसील में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान लगभग 680 लीटर मिलावटी और बदबूदार दूध को मौके पर ही नष्ट करा दिया गया, जिससे जन स्वास्थ्य को संभावित खतरे को रोका जा सके।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी हेमंत कुमार यादव ने बताया कि एक मुखबिर की सूचना पर एक सफेद पिकअप वाहन को रोका गया और उसकी जांच की गई। वाहन चालक की पहचान अलवर निवासी मोहित पुत्र सोम सिंह के रूप में हुई। पिकअप में 17 स्टील के कैनों में करीब 680 लीटर मिश्रित दूध भरा हुआ था, जिसे हरियाणा स्थित वीटा डेयरी में सप्लाई के लिए ले जाया जा रहा था। जांच के दौरान पता चला कि यह दूध भुरियावास निवासी विक्रम पुत्र प्रहलाद (37) और लोकेश यादव (27) का था, जो डेयरी कोड धारक हैं।

मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से की गई प्राथमिक जांच में दूध में मिलावट की पुष्टि हुई। इसके अतिरिक्त, दूध फटा हुआ, खट्टा और दुर्गंधयुक्त भी पाया गया। इसके बाद, विभाग ने स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरे 680 लीटर दूध को मौके पर ही नष्ट कर दिया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने यह भी बताया कि इस मामले में वीटा डेयरी को एक पत्र भेजकर संबंधित दूध विक्रेताओं के डेयरी कोड बंद करने की अनुशंसा की जाएगी। साथ ही, डेयरी प्रबंधन को भविष्य में इस प्रकार का मिलावटी एवं खराब गुणवत्ता वाला दूध स्वीकार न करने के निर्देश भी दिए जाएंगे। इस कार्रवाई के दौरान महिपाल सिंह और सुभाष यादव सहित विभागीय टीम मौजूद रही।
    user_Pramod Kewlani
    Pramod Kewlani
    Local News Reporter खैरथल, अलवर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मुंडावर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 680 लीटर मिलावटी दूध जब्त किया। विभाग द्वारा इस भारी मात्रा में जब्त किए गए दूध को मौके पर ही नष्ट करवा दिया गया।
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    खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मुंडावर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 680 लीटर मिलावटी दूध जब्त किया। विभाग द्वारा इस भारी मात्रा में जब्त किए गए दूध को मौके पर ही नष्ट करवा दिया गया।
    user_प्रगति न्यूज़
    प्रगति न्यूज़
    Newspaper advertising department Khairthal, Alwar•
    6 hrs ago
  • एक वीडियो के माध्यम से राजस्थान की सड़कों की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जो राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे 'विकास' के बड़े दावों पर सीधा कटाक्ष है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राजस्थान के किसी भी गाँव में चले जाएँ, वहाँ ऐसी ही जर्जर और खराब सड़कें देखने को मिलेंगी, जो सरकारी विकास कार्यों की वास्तविकता पर सवाल उठाती हैं।
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    एक वीडियो के माध्यम से राजस्थान की सड़कों की दयनीय स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की गई है, जो राज्य सरकार द्वारा किए जा रहे 'विकास' के बड़े दावों पर सीधा कटाक्ष है। पोस्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राजस्थान के किसी भी गाँव में चले जाएँ, वहाँ ऐसी ही जर्जर और खराब सड़कें देखने को मिलेंगी, जो सरकारी विकास कार्यों की वास्तविकता पर सवाल उठाती हैं।
    user_Pawan Kumar
    Pawan Kumar
    अलवर, अलवर, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • लाइव वीडियो photo follow में है मिलकपुर सुशील कुमार है लाइव गुण है मिलकपुर सुशील कुमार जी राधे राधेजी जी राम
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    लाइव वीडियो photo follow में है मिलकपुर सुशील कुमार है 
लाइव गुण है मिलकपुर सुशील कुमार जी राधे राधेजी जी राम
    user_Gurnamsingh Gurnamsingh
    Gurnamsingh Gurnamsingh
    Photographer रामगढ़, अलवर, राजस्थान•
    1 hr ago
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