हरनावदा। डग-भवानी मंडी मेगा हाईवे पर बिजली विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जो किसी भी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है। कस्बे के पास से गुजर रही 11KV हाईटेंशन लाइन के तार सड़क पर इतनी नीचे तक झूल रहे हैं कि वहां से गुजरने वाले ऊंचे वाहनों के उनसे टकराने का खतरा हर पल बना रहता है। शिफ्टिंग के नाम पर खानापूर्ति? हैरानी की बात यह है कि विभाग ने इस लाइन को शिफ्ट तो किया, लेकिन तकनीकी खामी कहें या कर्मचारियों की ढिलाई, तार अब भी सड़क की सतह के बेहद करीब हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह शिफ्टिंग महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है, जिससे सुरक्षा की समस्या जस की तस बनी हुई है। खेतों में 'मौत' के साये में काम कर रहे किसान खतरा सिर्फ हाईवे तक सीमित नहीं है। पास के खेतों में भी बिजली के तार काफी नीचे लटक रहे हैं। किसानों ने बताया कि: ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालते समय तारों के छू जाने का डर रहता है। खेत की जुताई करते समय जान जोखिम में डालनी पड़ती है। ऊंचे कृषि यंत्रों का उपयोग करना अब नामुमकिन सा हो गया है। प्रशासनिक अनदेखी: 'शिविर' में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने 'ग्रामीण उत्थान शिविर' में इस समस्या को लेकर लिखित प्रार्थना पत्र दिया था। महीनों बीत जाने के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। विभाग की इस चुप्पी से ग्रामीणों में भारी रोष है। चेतावनी: हादसे की जिम्मेदारी होगी विभाग की ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन झूलते तारों को ऊंचा नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। किसी भी अप्रिय घटना या जनहानि की पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग के लापरवाह अधिकारियों की होगी। संवाददाता सौदान सिंह की रिपोर्ट
हरनावदा। डग-भवानी मंडी मेगा हाईवे पर बिजली विभाग की एक ऐसी लापरवाही सामने आई है जो किसी भी दिन बड़े हादसे का सबब बन सकती है। कस्बे के पास से गुजर रही 11KV हाईटेंशन लाइन के तार सड़क पर इतनी नीचे तक झूल रहे हैं कि वहां से गुजरने वाले ऊंचे वाहनों के उनसे टकराने का खतरा हर पल बना रहता है। शिफ्टिंग के नाम पर खानापूर्ति? हैरानी की बात यह है कि विभाग ने इस लाइन को शिफ्ट तो किया, लेकिन तकनीकी खामी कहें या कर्मचारियों की ढिलाई, तार अब भी सड़क की सतह के बेहद करीब हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह शिफ्टिंग महज एक औपचारिकता बनकर रह गई है, जिससे सुरक्षा की समस्या जस की तस बनी हुई है। खेतों में 'मौत' के साये में काम कर रहे किसान खतरा सिर्फ हाईवे तक सीमित नहीं है। पास के खेतों में भी बिजली के तार काफी नीचे लटक रहे हैं। किसानों ने बताया कि: ट्रैक्टर-ट्रॉली निकालते समय तारों के छू जाने का डर रहता है। खेत की जुताई करते समय जान जोखिम में डालनी पड़ती है। ऊंचे कृषि यंत्रों का उपयोग करना अब नामुमकिन सा हो गया है। प्रशासनिक अनदेखी: 'शिविर' में शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं पीड़ित किसानों का कहना है कि उन्होंने 'ग्रामीण उत्थान शिविर' में इस समस्या को लेकर लिखित प्रार्थना पत्र दिया था। महीनों बीत जाने के बाद भी बिजली विभाग के अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। विभाग की इस चुप्पी से ग्रामीणों में भारी रोष है। चेतावनी: हादसे की जिम्मेदारी होगी विभाग की ग्रामीणों ने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन झूलते तारों को ऊंचा नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन को मजबूर होंगे। किसी भी अप्रिय घटना या जनहानि की पूरी जिम्मेदारी विद्युत विभाग के लापरवाह अधिकारियों की होगी। संवाददाता सौदान सिंह की रिपोर्ट
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