टेंटरा के जवाहरगढ़ प्रथम बीट में वन विभाग के कर्मचारियों, जिनमें एक बीट गार्ड और चौकीदार शामिल हैं, का एक शर्मनाक कारनामा सामने आया है। जिस वन विभाग पर जंगलों की सुरक्षा और अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी है, उसी के कारिंदे अब चंद रुपयों की खातिर माफिया के मददगार बन गए हैं। एक तेजी से वायरल हो रहे वीडियो ने वन विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि ये कर्मचारी अवैध उत्खनन स्थल से जब्त किए गए औजारों का सौदा कर रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि वन अमले ने पत्थर के अवैध उत्खनन में उपयोग होने वाले भारी उपकरण जैसे घन, संबल, कुल्हाड़ी, तसला और फावड़े जब्त किए थे। नियमानुसार इन औजारों को जब्त कर राजसात की कार्रवाई होनी चाहिए थी और आरोपियों पर केस दर्ज किया जाना था। हालांकि, वीडियो में बीट गार्ड और चौकीदार अवैध खनन करने वालों के साथ 'लेन-देन' की बात करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके तुरंत बाद ही सभी जब्त औजारों को आरोपियों को वापस सौंप दिया गया। वायरल वीडियो में औजारों की सौदेबाजी के साथ-साथ बीट गार्ड के मोबाइल पर हुई बातचीत का ऑडियो भी साफ सुनाई दे रहा है। ऑडियो में बीट गार्ड से फोन पर बात कर रहा व्यक्ति (जिसे माफिया का गुर्गा बताया गया है) खुलेआम पूछता है, "छत्रा वाली खदान पर खंडा (पत्थर) डला है, ले आऊं क्या? कोई अधिकारी तो नहीं आ रहा है?" इस सवाल के जवाब में बीट गार्ड उसे बेखौफ होकर माल उठाने का इशारा देता है, जो यह प्रमाणित करता है कि उसे कानून का कोई डर नहीं है और वह खुद अधिकारियों की लोकेशन माफिया तक पहुंचाकर अवैध उत्खनन को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद कर रहा है। यह घटना दर्शाती है कि जवाहरगढ़ प्रथम बीट में वनरक्षक ही खनन माफिया का 'पार्टनर' बन चुका है, जिसकी शह पर जंगल 'खाक' हो रहे हैं।
टेंटरा के जवाहरगढ़ प्रथम बीट में वन विभाग के कर्मचारियों, जिनमें एक बीट गार्ड और चौकीदार शामिल हैं, का एक शर्मनाक कारनामा सामने आया है। जिस वन विभाग पर जंगलों की सुरक्षा और अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी है, उसी के कारिंदे अब चंद रुपयों की खातिर माफिया के मददगार बन गए हैं। एक तेजी से वायरल हो रहे वीडियो ने वन विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि ये कर्मचारी अवैध उत्खनन स्थल से जब्त किए गए औजारों का सौदा कर रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि वन अमले ने पत्थर के अवैध उत्खनन में उपयोग होने वाले भारी उपकरण जैसे घन, संबल, कुल्हाड़ी, तसला और फावड़े जब्त किए थे। नियमानुसार इन औजारों को जब्त कर राजसात की कार्रवाई होनी चाहिए थी और आरोपियों पर केस दर्ज किया जाना था। हालांकि, वीडियो में बीट गार्ड और चौकीदार अवैध खनन करने वालों के साथ 'लेन-देन' की बात करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके तुरंत बाद ही सभी जब्त औजारों को आरोपियों को वापस सौंप दिया गया। वायरल वीडियो में औजारों की सौदेबाजी के साथ-साथ बीट गार्ड के मोबाइल पर हुई बातचीत का ऑडियो भी साफ सुनाई दे रहा है। ऑडियो में बीट गार्ड से फोन पर बात कर रहा व्यक्ति (जिसे माफिया का गुर्गा बताया गया है) खुलेआम पूछता है, "छत्रा वाली खदान पर खंडा (पत्थर) डला है, ले आऊं क्या? कोई अधिकारी तो नहीं आ रहा है?" इस सवाल के जवाब में बीट गार्ड उसे बेखौफ होकर माल उठाने का इशारा देता है, जो यह प्रमाणित करता है कि उसे कानून का कोई डर नहीं है और वह खुद अधिकारियों की लोकेशन माफिया तक पहुंचाकर अवैध उत्खनन को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद कर रहा है। यह घटना दर्शाती है कि जवाहरगढ़ प्रथम बीट में वनरक्षक ही खनन माफिया का 'पार्टनर' बन चुका है, जिसकी शह पर जंगल 'खाक' हो रहे हैं।
- ग्राम कोलिया पंचायत के नौरावली स्थित प्राइमरी स्कूल जाने वाले बच्चों को बारिश के मौसम में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूल के रास्ते में कच्ची-पक्की सड़क न होने के कारण भारी जलभराव हो जाता है, जिससे बच्चों के लिए स्कूल पहुँचना बेहद मुश्किल हो जाता है। यह जलभराव इतना अधिक होता है कि बच्चे अक्सर पानी से होकर स्कूल जाने को मजबूर होते हैं, या फिर बारिश के समय स्कूल आने में असमर्थ रहते हैं। स्थानीय सरपंच को इस समस्या के बारे में अवगत कराया गया है, लेकिन उनके द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, और न ही आरसीसी सड़क का निर्माण किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यहाँ पानी की निकासी के लिए कोई नालियाँ भी नहीं हैं। इसके अलावा, जहाँ कुछ निर्माण कार्य चल रहा है, वहाँ भी जल निकासी का कोई समाधान नहीं है, जिससे समस्या और बढ़ रही है। इस गंभीर स्थिति के चलते, सरकार से जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करने का निवेदन किया गया है। माँग है कि आगामी बारिश से पहले ही आवश्यक कदम उठाए जाएँ ताकि बच्चों को स्कूल आने-जाने में भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।3
- मध्य प्रदेश के मुरैना जिले के सबलगढ़ में पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा धड़ल्ले से मिलावटी पेट्रोल बेचने का मामला सामने आया है, जिस पर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी मौन साधे हुए हैं। हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें एक मोटरसाइकिल सवार ने सबलगढ़ के एक पेट्रोल पंप से पेट्रोल भरवाया था। घर पहुँचने पर उसकी मोटरसाइकिल बंद हो गई, जिसे मैकेनिक को दिखाने पर पता चला कि पेट्रोल में मिलावट थी, जिसकी वजह से गाड़ी बंद हुई। मैकेनिक ने बताया कि यह केमिकल या पानी हो सकता है, हालाँकि बोतल में निकाले गए इस तरल पदार्थ को लेकर अभी यह स्पष्ट नहीं किया जा सका कि वह केमिकल था या पानी, लेकिन मिलावट की बात सही पाई गई। सबलगढ़ में कई पेट्रोल पंप संचालित हैं, जहाँ हर दिन हजारों की संख्या में फोर-व्हीलर और मोटरसाइकिल चालक पेट्रोल भरवाने पहुँचते हैं। ऐसे में यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि इन पेट्रोल पंप संचालकों द्वारा किस हद तक केमिकल या पानी मिलाकर पेट्रोल बेचा जा रहा होगा, जिससे वाहन मालिक ठगी का शिकार हो रहे हैं। पीड़ित मोटरसाइकिल सवार का कहना है कि इस मिलावटी पेट्रोल से उसकी बाइक के इंजन को भारी नुकसान हुआ है, और वह जानना चाहता है कि इस नुकसान की भरपाई पेट्रोल पंप संचालक करेंगे या स्थानीय प्रशासन। उसने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी को अपनी मोटरसाइकिल बंद होने का कारण बताया। पीड़ित का आरोप है कि यदि स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर पेट्रोल पंपों की जाँच होती रहे, तो फोर-व्हीलर एवं टू-व्हीलर चालकों को इस तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। उसे अपनी मोटरसाइकिल को इतनी गर्मी में धक्का देकर मैकेनिक की दुकान तक लाना पड़ा। यह एक बड़ा सवाल है कि पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी कब तक चलती रहेगी और स्थानीय प्रशासन कब तक मूक दर्शक बना रहेगा। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि सबलगढ़ में संचालित पेट्रोल पंपों की जाँच कर दोषी पंपों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई करे, अन्यथा पेट्रोल पंप संचालकों की मनमानी इसी तरीके से चलती रहेगी। अब देखना यह होगा कि इस समाचार के बाद स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई की जाएगी या नहीं।1
- टेंटरा के जवाहरगढ़ प्रथम बीट में वन विभाग के कर्मचारियों, जिनमें एक बीट गार्ड और चौकीदार शामिल हैं, का एक शर्मनाक कारनामा सामने आया है। जिस वन विभाग पर जंगलों की सुरक्षा और अवैध उत्खनन रोकने की जिम्मेदारी है, उसी के कारिंदे अब चंद रुपयों की खातिर माफिया के मददगार बन गए हैं। एक तेजी से वायरल हो रहे वीडियो ने वन विभाग के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं, जिसमें साफ दिख रहा है कि ये कर्मचारी अवैध उत्खनन स्थल से जब्त किए गए औजारों का सौदा कर रहे हैं। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि वन अमले ने पत्थर के अवैध उत्खनन में उपयोग होने वाले भारी उपकरण जैसे घन, संबल, कुल्हाड़ी, तसला और फावड़े जब्त किए थे। नियमानुसार इन औजारों को जब्त कर राजसात की कार्रवाई होनी चाहिए थी और आरोपियों पर केस दर्ज किया जाना था। हालांकि, वीडियो में बीट गार्ड और चौकीदार अवैध खनन करने वालों के साथ 'लेन-देन' की बात करते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके तुरंत बाद ही सभी जब्त औजारों को आरोपियों को वापस सौंप दिया गया। वायरल वीडियो में औजारों की सौदेबाजी के साथ-साथ बीट गार्ड के मोबाइल पर हुई बातचीत का ऑडियो भी साफ सुनाई दे रहा है। ऑडियो में बीट गार्ड से फोन पर बात कर रहा व्यक्ति (जिसे माफिया का गुर्गा बताया गया है) खुलेआम पूछता है, "छत्रा वाली खदान पर खंडा (पत्थर) डला है, ले आऊं क्या? कोई अधिकारी तो नहीं आ रहा है?" इस सवाल के जवाब में बीट गार्ड उसे बेखौफ होकर माल उठाने का इशारा देता है, जो यह प्रमाणित करता है कि उसे कानून का कोई डर नहीं है और वह खुद अधिकारियों की लोकेशन माफिया तक पहुंचाकर अवैध उत्खनन को निर्बाध रूप से जारी रखने में मदद कर रहा है। यह घटना दर्शाती है कि जवाहरगढ़ प्रथम बीट में वनरक्षक ही खनन माफिया का 'पार्टनर' बन चुका है, जिसकी शह पर जंगल 'खाक' हो रहे हैं।1
- धौलपुर बाड़ी में आज भगवान परशुराम जी की शोभायात्रा निकाली जाएगी।1
- शिवपुरी के कोलारस क्षेत्र में स्थित ग्राम आनंदपुर में डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच, प्रशासन ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए प्रतिमा को सम्मानपूर्वक हटाकर अपने संरक्षण में ले लिया। इस दौरान उस शासकीय भूमि को भी कब्जा मुक्त करा दिया गया, जहाँ यह प्रतिमा रखी गई थी। प्रशासन के अनुसार, यह प्रतिमा 19 मई की रात और फिर 18 जून की रात को विवादित स्थान पर स्थापित की गई थी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए, इस पूरी कार्रवाई के दौरान घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात रहा, जिसके बाद प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुँचकर कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए इस कार्रवाई को अंजाम दिया।1
- मध्य प्रदेश के श्योपुर में स्थित बल्लू टी स्टॉल फेमस ने राजस्थान के जटवाड़ी से आए एक यात्री की मदद की, जिसकी मोटरसाइकिल रात करीब 8:30 बजे सफर के दौरान अचानक पंचर हो गई थी। इस घटना के कारण यात्री को रास्ते में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा था। बल्लू टी स्टॉल ने इस कठिन समय में जरूरतमंद की सहायता कर मानव सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया। बल्लू टी स्टॉल फेमस, श्योपुर (मध्य प्रदेश) हमेशा यात्रियों, राहगीरों और जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए तत्पर रहता है, रात हो या दिन, सेवा और सहयोग की भावना ही उनकी पहचान है। प्रतिष्ठान का मानना है कि इंसानियत का रिश्ता सबसे बड़ा होता है और मुसाफिर की मदद करना समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी और मानवता का सच्चा उदाहरण है। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि श्योपुर मध्य प्रदेश राजस्थान की सीमा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में यात्री आवागमन करते हैं। बल्लू टी स्टॉल सभी से निवेदन करता है कि यात्रा के दौरान अपने वाहन की नियमित जांच अवश्य करें और सुरक्षित सफर करें, क्योंकि उनका मूल मंत्र 'सेवा ही हमारा धर्म है'।1
- मध्य प्रदेश के विजयपुर तहसील के ग्राम सहसराम में स्वर्गीय जसोदा पति भोगीराम जाटव के निधन के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर चक्का जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के श्मशान घाट पर कुछ दबंगों ने अवैध रूप से कब्जा कर लिया है, जिसके कारण अब अंतिम संस्कार के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में कई बार तहसीलदार विजयपुर को लिखित आवेदन दिए हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से अब तक इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। प्रशासन की इस कथित अनदेखी से नाराज होकर ग्रामीणों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और अपनी समस्या के तत्काल समाधान की मांग की। घटना की जानकारी मिलते ही गसवानी थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे और उन्होंने प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों को समझा-बुझाकर शांत किया।2
- झारखंड के पलामू जिले से 1400 किलोमीटर का सफर तय कर परिजन राजस्थान के धौलपुर स्थित अपना घर आश्रम बाड़ी पहुँचे, जहाँ 22 साल पहले परिवार से बिछड़े शंभूराम का अपनी पत्नी कलन्ती से भावुक मिलन हुआ। पति को पहचानते ही कलन्ती की आँखों से खुशी के आँसू छलक उठे। अपना घर आश्रम के अध्यक्ष सुनील गर्ग कंपनी परिवार ने बताया कि 8 जनवरी 2026 को अपना घर के विशेष रेस्क्यू अभियान के तहत शंभूराम को ग्वालियर रोड, मुरैना से असहाय, लावारिस और मानसिक रूप से अस्वस्थ स्थिति में रेस्क्यू किया गया था। आश्रम के एवं काउंसलिंग प्रभारी राजकुमार गर्ग ने जानकारी दी कि चिकित्सकों के इलाज, सेवा और उपचार के बाद उनके स्वास्थ्य में धीरे-धीरे सुधार हुआ। निरंतर छह माह की काउंसलिंग के बाद, शंभूराम ने अपना पता बिहार का जिला पलामू बताया। हालाँकि, गहन खोजबीन में पता चला कि पलामू जिला झारखंड में है। झारखंड के पलामू जिले के जिला पुलिस कंट्रोल रूम के माध्यम से उनके थाना हुसैनबाद के थाना प्रभारी ने परिवारजनों से संपर्क कर उन्हें सूचना दी कि शंभूराम राजस्थान के अपना घर आश्रम बाड़ी, जिला धौलपुर में हैं। इसके बाद आज उनकी पत्नी कलन्ती, दामाद वीरेंद्र कुमार और भतीजे जीतू कुमार उन्हें लेने के लिए झारखंड के पलामू जिले से पहुँचे। कलन्ती ने बताया कि शंभूराम लगभग 22 वर्ष पहले मानसिक स्थिति खराब होने के कारण बिना बताए घर से निकल गए थे और बहुत प्रयासों के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जब वह घर से निकले थे, तब उनके बेटे और बेटी की उम्र केवल तीन और चार वर्ष थी, और पिता के अभाव में बच्चों का पालन-पोषण बड़ी कठिनाइयों से किया गया। कलन्ती ने ईश्वर की असीम कृपा और अपना घर के अथक प्रयासों को इस चमत्कार के लिए सराहा और कहा कि उन्हें विश्वास नहीं हो रहा कि शंभूराम इतने दिनों तक कैसे जीवित रहे। परिवार ने आज बरसों बाद बेटे-बेटी को बिछड़ा पिता, पत्नी को पति और विवाहित बेटी की बेटी को नाना मिलने पर बेहद खुशी जाहिर करते हुए अपना घर आश्रम की व्यवस्थाओं और सेवा कार्यों की सराहना की, और इसे वास्तव में मानवता की मिसाल बताया।1