मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर मितव्ययता और सादगी का संदेश देते हुए 28 मई को इंदौर से उज्जैन की यात्रा बस से की और अपना काफिला छोड़ दिया। इस यात्रा में उनके साथ मंत्री और सांसद सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। उन्होंने इस अवसर पर जनता से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर चलने का आग्रह किया, और कहा कि वे प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक खर्चों में संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मितव्ययता का संदेश दिया है और इसी कड़ी में वह स्वयं एक लोकल वाहन से इंदौर से उज्जैन जा रहे हैं। उनके साथ मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, जिलाध्यक्ष और सभी वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी यात्रा कर रहे थे। उन्होंने ज़ोर दिया कि वर्तमान वैश्विक संकट में सभी संसाधनों का मितव्ययता से उपयोग करना आवश्यक है। उनकी यह पहल सादगीपूर्ण प्रशासन, ईंधन की बचत और अनावश्यक खर्चों में कमी की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसा संदेश दिया हो। कुछ दिनों पहले सिंगरौली जिले के प्रवास के दौरान भी वे टूरिस्ट बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे और तब भी उनका काफिला साथ नहीं था। उस समय उन्होंने कहा था कि किसी जनप्रतिनिधि की पहचान प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि जनता का प्रेम और उसकी सेवा है।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर मितव्ययता और सादगी का संदेश देते हुए 28 मई को इंदौर से उज्जैन की यात्रा बस से की और अपना काफिला छोड़ दिया। इस यात्रा में उनके साथ मंत्री और सांसद सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। उन्होंने इस अवसर पर जनता से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर चलने का आग्रह किया, और कहा कि वे प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक खर्चों में संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मितव्ययता का संदेश दिया है और इसी कड़ी में वह स्वयं एक लोकल वाहन से इंदौर से उज्जैन जा रहे हैं। उनके साथ मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, जिलाध्यक्ष और सभी वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी यात्रा कर रहे थे। उन्होंने ज़ोर दिया कि वर्तमान वैश्विक संकट में सभी संसाधनों का मितव्ययता से उपयोग करना आवश्यक है। उनकी यह पहल सादगीपूर्ण प्रशासन, ईंधन की बचत और अनावश्यक खर्चों में कमी की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसा संदेश दिया हो। कुछ दिनों पहले सिंगरौली जिले के प्रवास के दौरान भी वे टूरिस्ट बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे और तब भी उनका काफिला साथ नहीं था। उस समय उन्होंने कहा था कि किसी जनप्रतिनिधि की पहचान प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि जनता का प्रेम और उसकी सेवा है।
- सतना जिले में, व्यापारियों ने सड़क पर बैठकर अपनी बात रखी और नारे लगाए। यह कार्रवाई सतना सड़क पर की गई।1
- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बार फिर मितव्ययता और सादगी का संदेश देते हुए 28 मई को इंदौर से उज्जैन की यात्रा बस से की और अपना काफिला छोड़ दिया। इस यात्रा में उनके साथ मंत्री और सांसद सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। उन्होंने इस अवसर पर जनता से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर चलने का आग्रह किया, और कहा कि वे प्रदेश में एक नई कार्य संस्कृति स्थापित कर रहे हैं, जिसमें प्रशासनिक खर्चों में संयम और संसाधनों के संतुलित उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मितव्ययता का संदेश दिया है और इसी कड़ी में वह स्वयं एक लोकल वाहन से इंदौर से उज्जैन जा रहे हैं। उनके साथ मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, जिलाध्यक्ष और सभी वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी यात्रा कर रहे थे। उन्होंने ज़ोर दिया कि वर्तमान वैश्विक संकट में सभी संसाधनों का मितव्ययता से उपयोग करना आवश्यक है। उनकी यह पहल सादगीपूर्ण प्रशासन, ईंधन की बचत और अनावश्यक खर्चों में कमी की दिशा में एक सकारात्मक संदेश है। यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ऐसा संदेश दिया हो। कुछ दिनों पहले सिंगरौली जिले के प्रवास के दौरान भी वे टूरिस्ट बस में बैठकर कार्यक्रम स्थल पहुंचे थे और तब भी उनका काफिला साथ नहीं था। उस समय उन्होंने कहा था कि किसी जनप्रतिनिधि की पहचान प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि जनता का प्रेम और उसकी सेवा है।1
- मैहर जिले के रामपुर बघेलान विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मौहारी कटरा के निवासी शैलेश रजक का भारतीय सेना में अग्निवीर जीडी पद पर चयन हुआ है, जिससे उन्होंने अपने पूरे क्षेत्र का मान बढ़ाया है। गरीबी को अपनी मेहनत से मात देकर शैलेश ने यह उपलब्धि हासिल की है। बेला बस स्टैंड पहुंचने पर ग्रामीणों ने भारत माता की जय के नारों, फूल-मालाओं और नारेबाजी के साथ उनका भव्य स्वागत किया। शैलेश के साथ उनके साथी आशीष साहू का भी चयन हुआ है, जिससे मौहारी कटरा और आसपास के सभी गांवों में खुशी की लहर दौड़ गई है। शैलेश और आशीष, दोनों एक ही गांव और एक ही स्कूल में साथ पढ़े हैं। शैलेश के पिता आज भी बकरी पालन कर परिवार का गुजारा करते हैं, जबकि आशीष एक किसान परिवार से आते हैं। दोनों युवकों ने बचपन से ही देश सेवा का जज्बा पाला और दिन-रात कड़ी मेहनत करते हुए शारीरिक अभ्यास तथा तकनीकी विषयों की तैयारी की। इस अवसर पर शैलेश ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए कहा कि, “भारतीय सेना की वर्दी पहनकर देश की सीमा की रक्षा करना मेरा सबसे बड़ा सपना था, जो आज पूरा हो रहा है। मैं देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हूँ।” जैसे ही उनके चयन की सूचना मिली, जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, सभापति राम प्रसाद साहू पत्रकार, युवा समाजसेवी संदीप वर्मा, ध्रुव सिंह, सौरभ वर्मा, रज्जन यादव, अरुण सेन, राज वर्मा, गोलू खटीक, उपेंद्र वर्मा, शिवम गुप्ता और आकाश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उनके घर बधाई देने पहुंचे। ग्रामीणों ने शैलेश को शाल, श्रीफल और पुष्प भेंट कर सम्मानित किया। उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है, और पूरे गांव में जश्न का माहौल है, जहां ग्रामीण मिठाई बांटकर दोनों युवकों के उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।4
- मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी के निर्देश के बाद, जिला पंचायत सीईओ शैलेंद्र सिंह ने रानी दुर्गावती छात्रावास मैहर की अधीक्षिका पुष्पलता सिंह और जिला आदिम जाति कल्याण अधिकारी कमलेश शुक्ला को नोटिस जारी किया है।1
- मायानगरी मुंबई में अब विंध्य क्षेत्र की प्रतिभा का डंका बजने वाला है, क्योंकि शहडोल की पावन माटी में जन्मे 23 वर्षीय युवा कनिष्क दुबे (कनिष्क विजय) हिंदी फिल्म "रजनी की बारात" में बतौर मुख्य नायक बॉलीवुड में पर्दापण करने जा रहे हैं। यह फिल्म 29 मई को रिलीज होगी। एक छोटे शहर से बड़े पर्दे तक पहुँचने की कनिष्क की इस शानदार उपलब्धि ने न केवल शहडोल, बल्कि पूरे विंध्य अंचल का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। मुंबई की अथाह भीड़ और फिल्म इंडस्ट्री की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच अपनी जगह बनाना बिल्कुल भी आसान नहीं था, लेकिन कनिष्क ने अपने कड़े संघर्ष, धैर्य और समर्पण से यह साबित कर दिया कि प्रतिभा और सपनों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। कनिष्क शहडोल के प्रतिष्ठित मेडिकल व्यवसायी और 'एसआर डायग्नोस्टिक्स एंड एमआरआई सेंटर' व 'श्री राम हॉस्पिटल' के संचालक श्री विजय दुबे जी के सुपुत्र हैं। उनकी शैक्षणिक और कला की यात्रा भी बेहद शानदार रही है, जिसमें प्रारंभिक शिक्षा कॉन्वेंट स्कूल, शहडोल से हुई। इसके बाद उन्होंने भोपाल से हायर सेकेंडरी में 93% अंकों के साथ उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सिनेमा की पढ़ाई उन्होंने एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन (AAFT), दिल्ली से आर्ट्स एंड सिनेमा में स्नातक की डिग्री हासिल कर की, और अभिनय का प्रशिक्षण दिग्गज अभिनेता अनुपम खेर की एक्टिंग अकादमी से फिल्म मेकिंग व अभिनय की बारीकियां सीखकर प्राप्त किया। कनिष्क का बॉलीवुड में बतौर लीड हीरो आना पूरे विंध्य क्षेत्र के युवाओं के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो यह संदेश देता है कि छोटे शहरों के युवा भी आसमान छू सकते हैं। अब पूरे विंध्य को अपने इस होनहार सितारे की फिल्म के रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार है।1
- रामपुर बाघेलान के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरती में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गई, जिसने एक गरीब किसान के आशियाने और उसकी मेहनत की कमाई को देखते ही देखते जलाकर राख कर दिया। गर्मियों के इस मौसम में लगातार बढ़ती आगजनी की घटनाओं की चपेट में इस बार बरती गाँव आया है। इस भयावह घटना में किसान का घर और मोटर पम्प जलकर पूरी तरह खाक हो गया। आग की लपटें इतनी भयानक थीं कि पूरे इलाके में केवल धुआं ही धुआं नजर आ रहा था।1