उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में 45 करोड़ रुपये की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी शहर की बड़ी उपलब्धि माने जाने वाले इस पुल के एक हिस्से से कंक्रीट टूटने की घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सवाल केवल पुल की संरचना को लेकर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी केंद्रित हैं। रेलवे स्टेशन तिकोनिया को लेबर कॉलोनी से जोड़ने वाला यह ओवरब्रिज रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही का मुख्य मार्ग है, जहाँ हाल ही में कंक्रीट का हिस्सा टूटकर गिरने से सड़क पर एक गड्ढा बन गया था। घटना के बाद सेतु निगम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने आशंका जताई है कि किसी भारी वाहन में खराबी आने के बाद पुल पर जैक लगाने से अत्यधिक दबाव पड़ा, जिसके कारण कंक्रीट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। इस बीच, विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें सेतु निगम के अधिकारियों के अनुसार निर्माण और निगरानी से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है और यदि लापरवाही साबित होती है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। समाजवादी पार्टी ने पुल के निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि सदर विधायक मनीष असीजा ने मुख्यमंत्री और सेतु निगम के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी जनता की राय बंटी हुई है; एक पक्ष विधायक की पहल को जनहित में उठाया गया कदम बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे घटना के बाद की औपचारिक कार्रवाई और लीपापोती करार दे रहा है। हालांकि, राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप से परे, आम जनता का सीधा सवाल है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई – क्या यह केवल एक तकनीकी घटना थी, या फिर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में कहीं कोई चूक हुई? फिलहाल पुल की मरम्मत के बाद यातायात फिर से शुरू कर दिया गया है, लेकिन जनता अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, क्योंकि उन्हें सिर्फ एक गड्ढे का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी जवाब चाहिए जिसके आधार पर वे हर दिन इस पुल से गुजरते हैं।
उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में 45 करोड़ रुपये की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी शहर की बड़ी उपलब्धि माने जाने वाले इस पुल के एक हिस्से से कंक्रीट टूटने की घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सवाल केवल पुल की संरचना को लेकर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी केंद्रित हैं। रेलवे स्टेशन तिकोनिया को लेबर कॉलोनी से जोड़ने वाला यह ओवरब्रिज रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही का मुख्य मार्ग है, जहाँ हाल ही में कंक्रीट का हिस्सा टूटकर गिरने से सड़क पर एक गड्ढा बन गया था। घटना के बाद सेतु निगम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने आशंका जताई है कि किसी भारी वाहन में खराबी आने के बाद पुल पर जैक लगाने से अत्यधिक दबाव पड़ा, जिसके कारण कंक्रीट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। इस बीच, विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें सेतु निगम के अधिकारियों के अनुसार निर्माण और निगरानी से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है और यदि लापरवाही साबित होती है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। समाजवादी पार्टी ने पुल के निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि सदर विधायक मनीष असीजा ने मुख्यमंत्री और सेतु निगम के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी जनता की राय बंटी हुई है; एक पक्ष विधायक की पहल को जनहित में उठाया गया कदम बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे घटना के बाद की औपचारिक कार्रवाई और लीपापोती करार दे रहा है। हालांकि, राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप से परे, आम जनता का सीधा सवाल है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई – क्या यह केवल एक तकनीकी घटना थी, या फिर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में कहीं कोई चूक हुई? फिलहाल पुल की मरम्मत के बाद यातायात फिर से शुरू कर दिया गया है, लेकिन जनता अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, क्योंकि उन्हें सिर्फ एक गड्ढे का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी जवाब चाहिए जिसके आधार पर वे हर दिन इस पुल से गुजरते हैं।
- फ़िरोज़ाबाद के टूंडला क्षेत्र में नकली देशी घी का एक बड़ा खेल सामने आया है। जानकारी के अनुसार, यहाँ रिफाइंड तेल में एसेंस मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा था। खाद्य विभाग ने इस गोरखधंधे का भंडाफोड़ करते हुए मौके पर छापा मारा।1
- फ़िरोज़ाबाद में एक फ़ैक्ट्री, जिसने पिछले तीन साल में लाखों का कारोबार किया था, अब मिट्टी की कमी के कारण संकट का सामना कर रही है।1
- जनपद फिरोजाबाद के थाना शिकोहाबाद क्षेत्र में 19 जून 2026 को डायल-112 के माध्यम से सूचना मिली कि भूड़ा नहर में दो शव तैरते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस सूचना के तुरंत बाद थाना शिकोहाबाद पुलिस मौके पर पहुँची और दोनों शवों को नहर से बाहर निकलवाया। पुलिस ने पाया कि दोनों शवों के हाथ चुन्नी से बंधे हुए थे। पुलिस को इनमें से एक शव की जेब से एक घड़ी, पर्स, मोबाइल फोन और जितेन्द्र कुमार पुत्र उमेशचन्द, निवासी शनैवा, थाना अवागढ़, जनपद एटा के नाम का आधार कार्ड बरामद हुआ है। पुलिस ने दोनों शवों की शिनाख्त कराकर उनके परिजनों को सूचित कर दिया है। क्षेत्राधिकारी शिकोहाबाद द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, शवों को पंचायतनामा की कार्यवाही के बाद पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भिजवाया जा रहा है, और इस पूरे प्रकरण में साक्ष्य संकलन सहित अन्य आवश्यक कानूनी कार्यवाही की जा रही है।1
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक फिरोजाबाद के निर्देशानुसार, जनपद में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत थाना दक्षिण पुलिस को महत्वपूर्ण सफलता मिली है। थाना दक्षिण पुलिस ने दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई करते हुए हरियाणा मार्का की अवैध अंग्रेजी शराब की एक बड़ी खेप बरामद की है। इस कार्रवाई के दौरान दो आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।1
- उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में 45 करोड़ रुपये की लागत से बना रेलवे ओवरब्रिज इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। कभी शहर की बड़ी उपलब्धि माने जाने वाले इस पुल के एक हिस्से से कंक्रीट टूटने की घटना ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ये सवाल केवल पुल की संरचना को लेकर नहीं, बल्कि जनता के भरोसे और करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की गुणवत्ता पर भी केंद्रित हैं। रेलवे स्टेशन तिकोनिया को लेबर कॉलोनी से जोड़ने वाला यह ओवरब्रिज रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही का मुख्य मार्ग है, जहाँ हाल ही में कंक्रीट का हिस्सा टूटकर गिरने से सड़क पर एक गड्ढा बन गया था। घटना के बाद सेतु निगम ने मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में अधिकारियों ने आशंका जताई है कि किसी भारी वाहन में खराबी आने के बाद पुल पर जैक लगाने से अत्यधिक दबाव पड़ा, जिसके कारण कंक्रीट का हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे। इस बीच, विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है, जिसमें सेतु निगम के अधिकारियों के अनुसार निर्माण और निगरानी से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा रही है और यदि लापरवाही साबित होती है तो उन पर कार्रवाई की जाएगी। यह मामला अब राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है। समाजवादी पार्टी ने पुल के निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि सदर विधायक मनीष असीजा ने मुख्यमंत्री और सेतु निगम के अधिकारियों को पत्र लिखकर इस मामले में उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी जनता की राय बंटी हुई है; एक पक्ष विधायक की पहल को जनहित में उठाया गया कदम बता रहा है, तो दूसरा पक्ष इसे घटना के बाद की औपचारिक कार्रवाई और लीपापोती करार दे रहा है। हालांकि, राजनीति और आरोप-प्रत्यारोप से परे, आम जनता का सीधा सवाल है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल में ऐसी स्थिति क्यों पैदा हुई – क्या यह केवल एक तकनीकी घटना थी, या फिर निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण में कहीं कोई चूक हुई? फिलहाल पुल की मरम्मत के बाद यातायात फिर से शुरू कर दिया गया है, लेकिन जनता अब जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, क्योंकि उन्हें सिर्फ एक गड्ढे का नहीं, बल्कि उस भरोसे का भी जवाब चाहिए जिसके आधार पर वे हर दिन इस पुल से गुजरते हैं।1
- उत्तर प्रदेश के टूंडला स्थित चूल्हावली रोड पर खाद्य विभाग ने एक बड़े अभियान के तहत नकली देसी घी बनाने वाली फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में ₹5.5 लाख मूल्य का 525 किलोग्राम फर्जी घी बरामद किया गया है, जिसके साथ एक आरोपी को भी गिरफ्तार किया गया है। यह गोरखधंधा एक किराए के मकान से चलाया जा रहा था और खाद्य विभाग की इस कार्रवाई से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मुखबिर की सटीक सूचना पर मारे गए छापे में पता चला कि रिफाइंड और केमिकल का इस्तेमाल कर नकली देसी घी तैयार किया जा रहा था, जिसे 35 टीन में भरकर रखा गया था। सहायक आयुक्त खाद्य डॉ. चंदन पांडे के निर्देशन में हुई इस बड़ी कार्रवाई ने देसी घी के नाम पर चल रहे 'जहर के कारोबार' की पोल खोल दी है, जिससे नकली घी माफियाओं पर शिकंजा कस गया है।1
- फतेहाबाद के पूठपुरा के पास फतेहाबाद-फिरोजाबाद मार्ग पर 15 जून को पुलिस पर हुए पथराव और उपद्रव की घटना को लेकर शनिवार को गांव पिन्नापुरा में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में विधायक छोटेलाल वर्मा ने स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस पर हमला करने वाले लोग बाहरी थे और पिन्नापुरा के ग्रामीण इस घटना में शामिल नहीं थे। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधायक वर्मा ने मांग की कि पुलिस केवल उन्हीं लोगों के खिलाफ कार्रवाई करे जो वीडियो फुटेज में पत्थर फेंकते या हाथों में डंडे लिए दिखाई दे रहे हैं, और जाम में खड़े सामान्य लोगों को आरोपी बनाना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि आगे होने वाली गिरफ्तारियों से पहले संबंधित वीडियो और साक्ष्य जनप्रतिनिधियों को भी दिखाए जाएं, ताकि कोई बेगुनाह जेल न जाए। विधायक का तर्क था कि घटना दोपहर करीब तीन बजे हुई थी, जबकि शाम चार बजे के बाद बादलपुर, आगरा और फिरोजाबाद क्षेत्र से आए कुछ बाहरी उपद्रवियों ने पुलिस पर हमला किया। उनका मानना था कि यदि स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका होती तो वे शुरुआत से ही पथराव करते। उन्होंने नामजद लोगों के संबंध में भी निष्पक्ष जांच के बाद ही कार्रवाई की मांग की। बैठक में ग्रामीणों ने बताया कि घटना के बाद से पुलिस कार्रवाई के डर से कई लोग रात में अपने घरों में रुकने से भी घबरा रहे हैं। इस पर एसीपी इमरान खान ने भरोसा दिलाया कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को जेल नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि पुलिस केवल साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई कर रही है और जो लोग बेगुनाह हैं, वे निडर होकर अपने घरों में रहें क्योंकि पुलिस उन्हें किसी प्रकार से परेशान नहीं करेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि घटना में शामिल दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस बैठक में राहुल सिसोदिया, देवेंद्र कुमार वर्मा, एडवोकेट भगवती प्रसाद, अशोक वर्मा, अरविंद वर्मा, राजू ठेकेदार, राममहेश वर्मा, रामदेव प्रधान, प्रेमपाल वर्मा, एदल सिंह, जिला पंचायत सदस्य अनिल गुर्जर, रामबाबू वर्मा, एडवोकेट लखन सिंह, योगेश चौहान, संदीप गुप्ता, मुकेश पचौरी, उमेश गुप्ता, राजेश वर्मा, ऋषि गुप्ता, राजेश कुशवाहा, महेंद्र वर्मा, सोनू वर्मा, मोनू आर्य, बबीता चौहान, पूर्व प्रधान आशा देवी और चक हीरा सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।2
- जनपद फिरोजाबाद के थाना शिकोहाबाद क्षेत्र में 19 जून 2026 को भूड़ा नहर से दो शव बरामद किए गए। डायल-112 के माध्यम से मिली सूचना पर थाना शिकोहाबाद पुलिस तत्काल मौके पर पहुँची और दोनों शवों को नहर से बाहर निकलवाया। जाँच के दौरान यह सामने आया कि दोनों शवों के हाथ चुन्नी से बंधे हुए थे। एक शव की जेब से घड़ी, पर्स, मोबाइल फोन और जितेन्द्र कुमार पुत्र उमेशचन्द निवासी शनैवा, थाना अवागढ़, जनपद एटा के नाम का आधार कार्ड बरामद हुआ है। पुलिस ने दोनों शवों की शिनाख्त कराकर उनके परिजनों को इस संबंध में सूचना दे दी है। क्षेत्राधिकारी शिकोहाबाद ने जानकारी दी कि शवों का पंचायतनामा की कार्यवाही पूरी करने के बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेजा गया है। इस प्रकरण के संबंध में साक्ष्य संकलन और अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाही जारी है।1