युद्ध के वातावरण में अचानक किसी खेत में एक बड़े ड्रोन के, गेहूँ के खेत में गिरने से इटावा ज़िले के सैफई इलाके के नंदपुर गाँव में दहशत और अफ़रातफ़री मच गयी। लोगों ने सोचा कहीं कोई मिसाइल तो नहीं, जो युद्ध क्षेत्र से भटक कर यहाँ आ गिरी है। अगर ये किसी सरकारी परीक्षण-टेस्ट या एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है तो प्रदेश के नागरिकों को पहले से सूचना देकर आगाह करना था। जब ये विश्वास ही नहीं है कि ड्रोन उड़ेगा कि नहीं तो आम लोगों के इलाके में इसे उड़ाने का जोखिम क्यों उठाया गया। कहीं ये खेत की बजाय आस-पास की किसी बस्ती पर गिर जाता तो इस दुर्घटना से किसी भी तरह की जान-माल की हानि हो सकती थी। सरकार इस मामले में जाँच बिठाए और किसान के खेत में हुई आर्थिक हानि और मानसिक आघात का आंकलन-मूल्यांकन करके किसान को यथोचित मुआवज़ा दे। भविष्य में ऐसे सभी टेस्ट-एक्सपेरिमेंट निर्धारित निर्जन क्षेत्रों में ही किये जाएं। भाजपा सरकार में कोई भी परीक्षण सफल क्यों नहीं हो पाता है। सैफई की जनता कह रही है जब भाजपाई ड्रोन नहीं उड़ा पा रहे हैं तो सैफई की उस हवाई-पट्टी से जहाज़ क्या उड़ाएँगे, भाजपा ने जिस रनवे को राजनीतिक विद्वेषवश बिना रखरखाव के उपेक्षित छोड़ दिया है।
युद्ध के वातावरण में अचानक किसी खेत में एक बड़े ड्रोन के, गेहूँ के खेत में गिरने से इटावा ज़िले के सैफई इलाके के नंदपुर गाँव में दहशत और अफ़रातफ़री मच गयी। लोगों ने सोचा कहीं कोई मिसाइल तो नहीं, जो युद्ध क्षेत्र से भटक कर यहाँ आ गिरी है। अगर ये किसी सरकारी परीक्षण-टेस्ट या एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है तो प्रदेश के नागरिकों को पहले से सूचना देकर आगाह करना था। जब ये विश्वास ही नहीं है कि ड्रोन उड़ेगा कि नहीं तो आम लोगों के इलाके में इसे उड़ाने का जोखिम क्यों उठाया गया। कहीं ये खेत की बजाय आस-पास की किसी बस्ती पर गिर जाता तो इस दुर्घटना से किसी भी तरह की जान-माल की हानि हो सकती थी। सरकार इस मामले में जाँच बिठाए और किसान के खेत में हुई आर्थिक हानि और मानसिक आघात का आंकलन-मूल्यांकन करके किसान को यथोचित मुआवज़ा दे। भविष्य में ऐसे सभी टेस्ट-एक्सपेरिमेंट निर्धारित निर्जन क्षेत्रों में ही किये जाएं। भाजपा सरकार में कोई भी परीक्षण सफल क्यों नहीं हो पाता है। सैफई की जनता कह रही है जब भाजपाई ड्रोन नहीं उड़ा पा रहे हैं तो सैफई की उस हवाई-पट्टी से जहाज़ क्या उड़ाएँगे, भाजपा ने जिस रनवे को राजनीतिक विद्वेषवश बिना रखरखाव के उपेक्षित छोड़ दिया है।
- passengers are seen hanging outside, risking their lives just to reach their destinations. This is not just negligence—it reflects a serious failure in managing the city’s overcrowded suburban rail system. Thousands of commuters depend on Mumbai’s lifeline every day, yet basic safety continues to be compromised. Overcrowding, limited train frequency, and lack of strict enforcement are pushing people into life-threatening situations. Serious questions are now being raised for Railway Minister Ashwini Vaishnaw. When will commuter safety become a priority? Why hasn’t train frequency been increased to meet rising demand? How long will authorities ignore such alarming visuals? Experts warn that without immediate intervention—such as increasing services, improving crowd management, and enforcing safety norms—a major tragedy could occur anytime. Aapki Jung demands urgent action. Lives cannot be treated as expendable.1
- কয়েকদিন ধরে গ্ৰামে আতঙ্ক! চিতাবাঘ ভয়ে দিন গুজরান!গ্ৰাম থেকে উধাও হয়ে যাচ্ছিল গবাদি পশু ! সেই আতঙ্ক যেন কমল আজ ! জান ফিরে এলো ফৌজিজোত গ্ৰামবাসীদের মধ্যে। গত কয়েকদিন ধরে চিতাবাঘ আতঙ্কে দিন গুজরান করছিল! ফাঁসিদেওয়ার ফৌজিজোতের বাসিন্দারা!উধাও হত গবাদিপশু এতেই খাঁচা বসানোর দাবি জানান স্থানীয়রা।গত দুদিন আগে ওই এলাকায় এক ব্যক্তির ব্যক্তিগত চা বাগানে খাঁচা পাতে বনদফতর । এদিন ভোরে ছাগলের টোপে পড়ে খাঁচা বন্দি হয় চিতাবাঘ! সকালে স্থানীয়রা বিষয়টি দেখে বনদফতরকে খবর দিলে ঘোষপুকুর বনদফতর কর্মীরা এসে খাঁচাবন্দি চিতাবাঘটিকে উদ্ধার করে। উদ্ধার চিতাবাঘটি স্বাস্থ্য পরীক্ষার পর গভীর জঙ্গলে ছেড়ে দেওয়া হবে বলে বনদফতর সূত্রে খবর। চিতাবাঘ খাঁচাবন্দি হত্তয়ায় স্বস্তির হাওয়া গ্ৰামে মধ্যে। যদিও আরো চিতাবাঘ রয়েছে বলে অনুমান গ্ৰামবাসীদের।1
- বুথে বুথে গিয়ে বাড়ি বাড়ি প্রচারে জোর দিয়েছেন বিজেপি প্রার্থী4
- Post by Panitanki Times1
- মোফাক্কেরুল ইসলাম মোথাবাড়ি কর্মকাণ্ডের আসল তথ্য ফাঁস ফোনের মাধ্যমে1
- Post by DTD News Bangla1
- Post by Utpal Roy MNG1
- अगर ये किसी सरकारी परीक्षण-टेस्ट या एक्सपेरिमेंट का हिस्सा है तो प्रदेश के नागरिकों को पहले से सूचना देकर आगाह करना था। जब ये विश्वास ही नहीं है कि ड्रोन उड़ेगा कि नहीं तो आम लोगों के इलाके में इसे उड़ाने का जोखिम क्यों उठाया गया। कहीं ये खेत की बजाय आस-पास की किसी बस्ती पर गिर जाता तो इस दुर्घटना से किसी भी तरह की जान-माल की हानि हो सकती थी। सरकार इस मामले में जाँच बिठाए और किसान के खेत में हुई आर्थिक हानि और मानसिक आघात का आंकलन-मूल्यांकन करके किसान को यथोचित मुआवज़ा दे। भविष्य में ऐसे सभी टेस्ट-एक्सपेरिमेंट निर्धारित निर्जन क्षेत्रों में ही किये जाएं। भाजपा सरकार में कोई भी परीक्षण सफल क्यों नहीं हो पाता है। सैफई की जनता कह रही है जब भाजपाई ड्रोन नहीं उड़ा पा रहे हैं तो सैफई की उस हवाई-पट्टी से जहाज़ क्या उड़ाएँगे, भाजपा ने जिस रनवे को राजनीतिक विद्वेषवश बिना रखरखाव के उपेक्षित छोड़ दिया है।1