चंदौली जिले के चकिया नगर में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) ने बिजली संकट, बढ़ती महंगाई, स्मार्ट मीटर योजना और बिजली के निजीकरण के विरोध में एक जोरदार प्रदर्शन किया। काली जी पोखरा पर एकत्रित होकर हजारों कार्यकर्ताओं और आमजन ने नगर में एक विशाल जुलूस निकाला, जिसके बाद वे विद्युत उपकेंद्र तक लगभग दो किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी चकिया को भी सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि, लगातार कटौती, लो-वोल्टेज और जर्जर विद्युत व्यवस्था के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से बिजली दरों में की गई 10 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल वापस लेने, बढ़ती बिजली कटौती और फाल्ट की समस्या का स्थायी समाधान करने, स्मार्ट मीटर योजना को पूरी तरह समाप्त करने और दक्षिणांचल तथा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही प्रस्तावित बिजली बिल 2025 को वापस लेने, सभी उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने तथा किसानों को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के चुनावी वादे को पूरा करने पर भी जोर दिया गया। माकपा नेताओं ने बिजली विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्तियों और संविदा कर्मियों को स्थायी करने की भी मांग की। उन्होंने गांवों और शहरों में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, जर्जर विद्युत लाइनों तथा फुंके ट्रांसफार्मरों को तुरंत बदलने पर जोर दिया। पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व माकपा नेता लालचंद एडवोकेट ने किया, जिन्होंने कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं जनता का अधिकार हैं और सरकार को जनहित में निर्णय लेने चाहिए। सभा को परमानंद सिंह मौर्य, राजेंद्र यादव, रामनिवास पांडेय, बलराम कुरिल, नंदलाल, बड़ेलाल, चौथी पासवान, महानंद राजभर, लालमणि विश्वकर्मा, जयनाथ, भुगुनाथ विश्वकर्मा सहित कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने स्मार्ट मीटर योजना को लेकर जनता में व्यापक असंतोष जताया और कहा कि पूर्व की व्यवस्था को बहाल किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को कोई अतिरिक्त आर्थिक परेशानी न झेलनी पड़े। प्रदर्शन के अंत में प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा।
चंदौली जिले के चकिया नगर में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (माकपा) ने बिजली संकट, बढ़ती महंगाई, स्मार्ट मीटर योजना और बिजली के निजीकरण के विरोध में एक जोरदार प्रदर्शन किया। काली जी पोखरा पर एकत्रित होकर हजारों कार्यकर्ताओं और आमजन ने नगर में एक विशाल जुलूस निकाला, जिसके बाद वे विद्युत उपकेंद्र तक लगभग दो किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए पहुंचे और धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन उपजिलाधिकारी चकिया को भी सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि, लगातार कटौती, लो-वोल्टेज
और जर्जर विद्युत व्यवस्था के कारण आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से बिजली दरों में की गई 10 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल वापस लेने, बढ़ती बिजली कटौती और फाल्ट की समस्या का स्थायी समाधान करने, स्मार्ट मीटर योजना को पूरी तरह समाप्त करने और दक्षिणांचल तथा पूर्वांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की। इसके साथ ही प्रस्तावित बिजली बिल 2025 को वापस लेने, सभी उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने तथा किसानों को
मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के चुनावी वादे को पूरा करने पर भी जोर दिया गया। माकपा नेताओं ने बिजली विभाग में रिक्त पदों पर नियुक्तियों और संविदा कर्मियों को स्थायी करने की भी मांग की। उन्होंने गांवों और शहरों में 24 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने, जर्जर विद्युत लाइनों तथा फुंके ट्रांसफार्मरों को तुरंत बदलने पर जोर दिया। पूरे कार्यक्रम का नेतृत्व माकपा नेता लालचंद एडवोकेट ने किया, जिन्होंने कहा कि बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं जनता का अधिकार हैं और सरकार को जनहित में निर्णय लेने चाहिए। सभा को
परमानंद सिंह मौर्य, राजेंद्र यादव, रामनिवास पांडेय, बलराम कुरिल, नंदलाल, बड़ेलाल, चौथी पासवान, महानंद राजभर, लालमणि विश्वकर्मा, जयनाथ, भुगुनाथ विश्वकर्मा सहित कई अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने स्मार्ट मीटर योजना को लेकर जनता में व्यापक असंतोष जताया और कहा कि पूर्व की व्यवस्था को बहाल किया जाए ताकि उपभोक्ताओं को कोई अतिरिक्त आर्थिक परेशानी न झेलनी पड़े। प्रदर्शन के अंत में प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और भी व्यापक रूप दिया जाएगा।
- धीना के नदहा-गुरैनी लघु डाल क्षेत्र में गंगा कटान को लेकर किसानों का धरना लगातार छठवें दिन भी जारी रहा। किसानों को समर्थन देने के लिए पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू भी धरना स्थल पर पहुंचे और उनकी समस्याओं को सुना। किसानों ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने दो दिन के भीतर कटानरोधी कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी काम शुरू नहीं हो सका, जिससे उनमें भारी नाराजगी है। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दीनानाथ श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि अधिकारी और सरकार केवल आश्वासन देते हैं, लेकिन अपने वादों को पूरा नहीं करते। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि गंगा कटान से हर वर्ष सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि नदी में समा रही है, फिर भी समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है। किसानों ने यह भी बताया कि गंगा कटान के कारण लघु डाल पंप कैनाल पर भी खतरा मंडरा रहा है। पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू ने मौके से सिंचाई विभाग के बंधी प्रखंड के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र आजाद और लघु डाल खंड के अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार से फोन पर बात कर स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि किसानों की सुध लेने वाला न तो कोई अधिकारी है और न ही सत्ता पक्ष का कोई प्रतिनिधि, जिसके चलते किसान स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। किसानों ने आरोप लगाया कि करोड़ों रुपये की लागत से कराए गए बोल्डर पिचिंग कार्य का बड़ा हिस्सा बाढ़ में बह गया। धरना स्थल पर कटानरोधी कार्यों में हुए खर्च को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। किसानों ने दावा किया कि पिचिंग कार्य पर करीब दो करोड़ रुपये खर्च हुए थे, जबकि बंधी प्रखंड की ओर से भी लगभग तीन करोड़ रुपये कटानरोधी कार्यों पर लगाए गए थे। हालांकि, पूर्व विधायक द्वारा अधिशासी अभियंता बृजेश कुमार से बातचीत के दौरान बताया गया कि संबंधित कार्य लगभग 65 लाख रुपये की लागत से कराया गया था। खर्च की राशि को लेकर सामने आए इन अलग-अलग दावों ने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है। किसानों ने मांग की है कि कटानरोधी कार्यों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, दोषी कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई हो तथा प्रभावित क्षेत्र में तत्काल प्रभाव से कटान रोकने के लिए आवश्यक कार्य शुरू कराया जाए।2
- कैमूर जिले के हाटा बाजार में 'नो एंट्री' नियम लागू होने के बावजूद भी लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।1
- चंदौली किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने घोड़सारी गांव में एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया। इस गोष्ठी की अध्यक्षता राधेश्याम पांडेय ने की, जबकि राम अवध सिंह संगठन मंत्री के रूप में उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में राजकुमार सिंह सहित कई किसान भी शामिल थे।1
- भारत में अब नॉन-डीसीआर पैनल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप इन पर नेट मीटरिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। इस नई व्यवस्था के तहत, नेट मीटरिंग की सुविधा अब केवल डीसीआर पैनल पर ही उपलब्ध होगी।1
- उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में धानापुर सकलडीहा से युवा नेता राजकुमार सनातनी हैं।1
- कैमूर जिले के कुदरा में एक बड़ा हादसा टल गया, जब एक चलती हुई ट्रक का टायर अचानक फट गया। टायर फटने के कारण ट्रक अनियंत्रित हो गई और फ्लाईओवर के किनारे खतरनाक ढंग से लटक गई। इस घटना के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और आसपास के लोग मदद के लिए तेजी से वहां पहुंच गए। बताया गया है कि ट्रक चालक और खलासी इस हादसे में बाल-बाल बच गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की तत्काल मदद से स्थिति को नियंत्रित किया गया। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा की महत्वपूर्ण आवश्यकता और वाहनों की नियमित जांच के महत्व को रेखांकित किया है।1
- किसान विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने घोड़सारी गांव में एक किसान गोष्ठी का आयोजन किया। इस गोष्ठी में राजकुमार सिंह और संगठन मंत्री राम अवध सिंह भी उपस्थित थे।1
- पूर्ण संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा चलाई जा रही 'अन्नपूर्णा मुहिम' के माध्यम से अनेक गरीब और असहाय परिवारों को अद्भुत सहायता प्रदान की जा रही है। यह मुहिम विपदा में फंसे लोगों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसके तहत रोटी, कपड़ा, चिकित्सा, शिक्षा और मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी की जा रही हैं।1
- बिहार के कैमूर जिले में एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया है, जहाँ रामगढ़ थाना क्षेत्र के नरहन गाँव के समीप एक तेज रफ्तार ट्रैक्टर की चपेट में आने से 12 वर्षीय किशोर की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। इस हादसे के बाद मृतक के परिजनों में कोहराम मच गया और पूरे गाँव में शोक की लहर दौड़ गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, नरहन गाँव निवासी संजय कुशवाहा का 12 वर्षीय पुत्र लक्ष्य कुमार अपनी साइकिल से वापस गाँव लौट रहा था। इसी दौरान लिंक सड़क पर एक अनियंत्रित और तेज रफ्तार ट्रैक्टर ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि लक्ष्य की मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों की भारी भीड़ मौके पर जमा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची और आक्रोशित ग्रामीणों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी मोहनियां गोपाल कृष्ण भी घटनास्थल पर पहुँचे, जिन्होंने शोक संतप्त परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके साथ ही, स्थानीय विधायक संतोष कुमार सिंह उर्फ पिंटू यादव ने भी पीड़ित परिवार के घर पहुँचकर इस दुखद घड़ी में उन्हें सांत्वना दी। रामगढ़ थाना अध्यक्ष हरिप्रसाद शर्मा ने फोन पर बताया कि दुर्घटना के लिए ज़िम्मेदार ट्रैक्टर को पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ज़ब्त कर लिया है। पुलिस ने शव को अपने कब्ज़े में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है और मामले की गहनता से जाँच की जा रही है। इस दर्दनाक हादसे के बाद से नरहन गाँव के लोग काफी आक्रोशित हैं और स्थानीय प्रशासन से ग्रामीण सड़कों पर तेज रफ्तार वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाने की माँग कर रहे हैं।4