वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र स्थित गिरधरपुर ग्राम सभा में मंगलवार दोपहर करीब 12:00 बजे 71 वर्षीय बिंदु देवी ने अपने घर में पंखे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने पति भोलानाथ चौबे के साथ घर में अकेली रहती थीं। पति भोलानाथ चौबे के अनुसार, बिंदु देवी काफी समय से दिमागी रूप से बीमार थीं और उनका इलाज वाराणसी के मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था। मंगलवार को वह कमरे में सोने चली गई थीं और जब पति बाहर जानवरों को चारा खिलाकर वापस लौटे और दरवाजा खटखटाया, तो कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद खिड़की से झांकने पर वह पंखे के सहारे लटकी हुई दिखाई दीं। डायल 112 पर सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद चौबेपुर थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक जांच व पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने बताया कि इस बुजुर्ग दंपति की कोई औलाद नहीं थी।
वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र स्थित गिरधरपुर ग्राम सभा में मंगलवार दोपहर करीब 12:00 बजे 71 वर्षीय बिंदु देवी ने अपने घर में पंखे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने पति भोलानाथ चौबे के साथ घर में अकेली रहती थीं। पति भोलानाथ चौबे के अनुसार, बिंदु देवी काफी समय से दिमागी रूप से बीमार थीं और उनका इलाज वाराणसी के मानसिक चिकित्सालय में चल रहा था। मंगलवार को वह कमरे में सोने चली गई थीं और जब पति बाहर जानवरों को चारा खिलाकर वापस लौटे और दरवाजा खटखटाया, तो कोई हलचल नहीं हुई। इसके बाद खिड़की से झांकने पर वह पंखे के सहारे लटकी हुई दिखाई दीं। डायल 112 पर सूचना मिलने के बाद पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव को फंदे से नीचे उतारा। इसके बाद चौबेपुर थाना प्रभारी अनिल कुमार शर्मा पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और फॉरेंसिक जांच व पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिजनों ने बताया कि इस बुजुर्ग दंपति की कोई औलाद नहीं थी।
- नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा संसद तक पहुंच गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने सदन में इस विषय को उठाते हुए प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ हुई कथित मारपीट और पुलिस कार्रवाई पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं और छात्रों को अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने का अधिकार है। प्रदर्शन के दौरान कई छात्रों के घायल होने की खबरों के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। इस मामले में एक ओर विपक्ष पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहा है, वहीं प्रशासन की ओर से भी स्थिति स्पष्ट किए जाने की उम्मीद है। यह मुद्दा अब केवल छात्रों के प्रदर्शन तक सीमित न रहकर लोकतांत्रिक अधिकारों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है।1
- वाराणसी जिला कचहरी परिसर में बुधवार को अधिवक्ताओं ने दो अलग-अलग मुद्दों को लेकर जोरदार धरना प्रदर्शन किया। पहले धरने में अधिवक्ताओं ने प्रदेश में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों पर कड़ा विरोध जताया। हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए वकीलों ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने, परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और सरकार से छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ न करने की अपील की। वहीं दूसरे प्रदर्शन में अधिवक्ताओं ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुई बेरहमी से लाठीचार्ज की घटना को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की। अधिवक्ताओं का कहना था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर इस तरह की बर्बरता निंदनीय है। उन्होंने केंद्र सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच करीब एक घंटे तक चले धरने के बाद अधिवक्ताओं ने ज्ञापन भी सौंपा।1
- वाराणसी के सदर में युवाओं का साथ देने और उनके समर्थन को लेकर बातचीत की जा रही है। इस दौरान युवाओं का साथ निभाने के विषय पर चर्चा होने की बात सामने आई है।1
- आंखों में आंसू, दिल में मलाल और लाखों दुआओं का बोझ लिए लियोनेल मेसी का वर्ल्ड कप सफ़र यहीं थम गया है। यह सिर्फ एक हार नहीं थी, बल्कि उनके करोड़ों फ़ैंस के दिलों की उम्मीदों के टूटने का पल था। मंज़िल बस एक कदम दूर रह जाने और उस मुस्कान को एक बार फिर विश्व कप के साथ न देख पाने का मलाल हर प्रशंसक को है। हालांकि, मलाल इस बात का बिल्कुल नहीं है कि वे लड़े नहीं, बल्कि इस बात का है कि सपना पूरा होते-होते रह गया। मेसी एक ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने फुटबॉल को सिर्फ़ एक खेल नहीं बल्कि एक अहसास बना दिया और अपने हर पास व हर गोल से करोड़ों लोगों को सपने देखना सिखाया। भले ही इस बार ट्रॉफ़ी उनके हाथों में नहीं आई, लेकिन दुनिया के दिलों पर उनका नाम पहले से कहीं ज़्यादा गहरा हो गया है। कुछ खिलाड़ी रिकॉर्ड बनाते हैं और इतिहास लिखते हैं, लेकिन मेसी अहसास बन जाते हैं। वे मैदान पर हारकर भी करोड़ों दिल जीत गए हैं।1
- वाराणसी के मोहनसराय स्थित मिल्कीचक गाँव में सड़क की बहुत बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। यहाँ सड़क पर लगातार गोबर और पानी बहाया जा रहा है, जिससे पूरा रास्ता खराब हो चुका है। यहाँ के यादव लोग पूरी सड़क को खराब कर रहे हैं। सड़क पर इस तरह गोबर और पानी बहाए जाने के कारण आम जनता को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- ड्रग माफियाओं पर शिकंजा कसे जाने और सख्त कार्रवाई के डर से नदी में कफ सिरप फेंके जाने की आशंका जताई जा रही है।1
- मानसिक रूप से अस्वस्थ 71 वर्षीय महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। इस घटना के सामने आने के बाद चौबेपुर पुलिस मामले की जांच कर रही है।1