श्रावण अष्टमी मेले के चौथे दिन मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी तक लगा लंबा जाम -हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच चरमराई यातायात व्यवस्था उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता श्री चिंतपूर्णी में चल रहे श्रावण अष्टमी नवरात्र मेले के चौथे दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमडऩे के चलते प्रशासन की यातायात व्यवस्था की मुश्किलें सामने आ गईं। मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी तक कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लगने से यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। वहीं, बड़ी संख्या में पैदल पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भी सडक़ पर जगह कम होने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही चिंतपूर्णी की ओर श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढऩे लगी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मुबारिकपुर से लेकर चिंतपूर्णी तक वाहनों का दबाव बढ़ता चला गया। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए। यातायात को सुचारू रखने के लिए पुलिस जवानों को चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस बल की कमी के कारण सीमित जवानों पर ही यातायात व्यवस्था का अतिरिक्त दबाव दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और वाहनों की लंबी कतारों को देखते हुए एसएचओ चिंतपूर्णी सचित कालिया ने भरवाई चौक पर खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने मौके पर पुलिस कर्मचारियों के साथ मिलकर यातायात को नियंत्रित करवाया और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के प्रयास किए। वहीं, ट्रैफिक इंचार्ज दीपक ने भी सडक़ किनारे बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें रिकवरी वाहन की मदद से हटवाया। सडक़ किनारे खड़े वाहनों के कारण यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए पुलिस टीम लगातार ऐसे वाहनों को हटाने में जुटी रही। इसी तरह एसएचओ मोईन ने अपनी टीम के साथ माई दास सदन के समीप यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए मोर्चा संभाले रखा। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने भीड़ के बीच लगातार व्यवस्था बनाने का प्रयास किया।
श्रावण अष्टमी मेले के चौथे दिन मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी तक लगा लंबा जाम -हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच चरमराई यातायात व्यवस्था उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता श्री चिंतपूर्णी में चल रहे श्रावण अष्टमी नवरात्र मेले के चौथे दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमडऩे के चलते प्रशासन की यातायात व्यवस्था की मुश्किलें सामने आ गईं। मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी तक कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लगने से यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। वहीं, बड़ी संख्या में पैदल पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भी सडक़ पर जगह कम होने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही चिंतपूर्णी की ओर श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढऩे लगी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मुबारिकपुर से लेकर चिंतपूर्णी तक वाहनों का दबाव बढ़ता चला गया। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए। यातायात को सुचारू रखने के लिए पुलिस जवानों को चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस बल की कमी के कारण सीमित जवानों पर ही यातायात व्यवस्था का अतिरिक्त दबाव दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और वाहनों की लंबी कतारों को देखते हुए एसएचओ चिंतपूर्णी सचित कालिया ने भरवाई चौक पर खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने मौके पर पुलिस कर्मचारियों के साथ मिलकर यातायात को नियंत्रित करवाया और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के प्रयास किए। वहीं, ट्रैफिक इंचार्ज दीपक ने भी सडक़ किनारे बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें रिकवरी वाहन की मदद से हटवाया। सडक़ किनारे खड़े वाहनों के कारण यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए पुलिस टीम लगातार ऐसे वाहनों को हटाने में जुटी रही। इसी तरह एसएचओ मोईन ने अपनी टीम के साथ माई दास सदन के समीप यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए मोर्चा संभाले रखा। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने भीड़ के बीच लगातार व्यवस्था बनाने का प्रयास किया।
- श्रावण अष्टमी मेले के चौथे दिन मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी तक लगा लंबा जाम -हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच चरमराई यातायात व्यवस्था उत्तर भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता श्री चिंतपूर्णी में चल रहे श्रावण अष्टमी नवरात्र मेले के चौथे दिन रविवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमडऩे के चलते प्रशासन की यातायात व्यवस्था की मुश्किलें सामने आ गईं। मुबारिकपुर से चिंतपूर्णी तक कई किलोमीटर लंबी वाहनों की कतारें लगने से यातायात व्यवस्था प्रभावित रही। वहीं, बड़ी संख्या में पैदल पहुंच रहे श्रद्धालुओं को भी सडक़ पर जगह कम होने के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। सुबह से ही चिंतपूर्णी की ओर श्रद्धालुओं और वाहनों की संख्या बढऩे लगी थी। जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, मुबारिकपुर से लेकर चिंतपूर्णी तक वाहनों का दबाव बढ़ता चला गया। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए। यातायात को सुचारू रखने के लिए पुलिस जवानों को चौक-चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। पुलिस बल की कमी के कारण सीमित जवानों पर ही यातायात व्यवस्था का अतिरिक्त दबाव दिखाई दिया। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ और वाहनों की लंबी कतारों को देखते हुए एसएचओ चिंतपूर्णी सचित कालिया ने भरवाई चौक पर खुद मोर्चा संभाला। उन्होंने मौके पर पुलिस कर्मचारियों के साथ मिलकर यातायात को नियंत्रित करवाया और वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने के प्रयास किए। वहीं, ट्रैफिक इंचार्ज दीपक ने भी सडक़ किनारे बेतरतीब ढंग से खड़े वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें रिकवरी वाहन की मदद से हटवाया। सडक़ किनारे खड़े वाहनों के कारण यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए पुलिस टीम लगातार ऐसे वाहनों को हटाने में जुटी रही। इसी तरह एसएचओ मोईन ने अपनी टीम के साथ माई दास सदन के समीप यातायात और श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित करने के लिए मोर्चा संभाले रखा। पुलिस अधिकारियों और जवानों ने भीड़ के बीच लगातार व्यवस्था बनाने का प्रयास किया।1
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- सुजानपुर की दाड़ला भलेठ पंचायत में काट डाले हरे पेड़, पंचायत उप प्रधान ने करवाई शिकायत दर्ज सुजानपुर पंचायत उप प्रधान जगन कटोच में बताया पेड़ कटान का दूसरा मामला उनकी पंचायत के वार्ड नंबर 4 में सामने आया है यहां वार्ड सदस्य संदीप कुमार की गौशाला के पास एक बड़े पेड़ को काट डाला गया उसका एक बड़ा हिस्सा गौशाला पर गिरा और गौशाला धड़ाम हो गई इसको लेकर भी वार्ड सदस्य ने थाना सुजानपुर में शिकायत दर्ज करवाई हैं1
- vestige zoom meeting done 15 Aug celebration vestige Branch Office BERTHIN BILASPUR Himachal Pradesh 9816133991 Vestige Branch Office BERTHIN BILASPUR Himachal Pradesh 98161339914
- निक्कू राम की मौजूदगी से खास बना बड़गांव स्कूल का स्वतंत्रता दिवस समारोह, देशभक्ति के रंग में रंगा पूरा परिसर 🇮🇳 #निक्कूराम #बड़गांव #झंडूता #स्वतंत्रतादिवस #15अगस्त #IndependenceDay #Jhandutta #Bilaspur #HimachalPradesh #देशभक्ति #बड़गांवस्कूल #ViralNews #HimachalNews #LatestNews1
- भाजपा जिला अध्यक्ष कृष्ण लाल चंदेल ने कहा जिस तरह से कांग्रेस पार्टी ने वंदे मातरम का अपमान किया है वह सहन नहीं होगा जिला बिलासपुर में आज भाजपा पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं ने और भाजपा जिला अध्यक्ष कृष्ण लाल चंदेल की अध्यक्षता में कांग्रेस कार्यालय का घेराव किया उन्होंने कहा कि जिस तरह से कांग्रेस पार्टी द्वारा वंदे मातरम का अपमान किया गया है वह निंदनीय है2
- 🇮🇳 15 अगस्त विशेष — DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में स्कूलों और कॉलेजों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कई नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि पहुंचकर झंडा फहराने के साथ मंच से देशभक्ति के लंबे-लंबे भाषण देंगे। भीड़ देखकर और मंचों पर खड़े होकर देशभक्ति का प्रदर्शन तो होगा, लेकिन अक्सर यह देशभक्ति सिर्फ शब्दों और भाषणों तक ही सीमित रह जाती है। जहां देश भक्ति भाषणों तक सीमित है उसी बीच शहीद शिव सिंह बेला के परिवार को सम्मानित करने पहुंचे SBI अधिकारी रमेश चंद, 10 वर्षों बाद उठे कई बड़े सवाल पंचायत करसौली तहसील पंजैहरा के अंतर्गत गांव गुलरवाला (पजैरा क्षेत्र) के वीर सपूत शहीद शिव सिंह बेला ने वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज, उनकी शहादत के वर्षों बाद, 15 अगस्त के मौके पर नालागढ़ SBI के अधिकारी रमेश चंद अपने कर्मचारियों के साथ शहीद शिव सिंह के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यह पल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था। यह उस मां के लिए बेहद भावुक क्षण था, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे को खो दिया। और यही तस्वीर आज एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है— जब एक SBI अधिकारी शहीद के घर तक पहुंचकर उसकी मां को सम्मान दे सकता है, तो पिछले 10 वर्षों में जिम्मेदार नेता और अधिकारी कितनी बार उनके घर पहुंचे? शहीद शिव सिंह बेला, गांव गुलरावाला, तहसील पजैरा के रहने वाले थे। वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके जाने के बाद परिवार ने न सिर्फ अपने बेटे को खोया, बल्कि जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया। लेकिन शहादत के बाद क्या हुआ? परिवार के अनुसार, शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची थी, उस समय कई नेता और जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हुए थे और बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे। लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ वे वादे केवल भाषणों तक ही सीमित रह गए और उसके बाद किसी ने भी परिवार की वास्तविक समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। दस साल का समय कम नहीं होता। इन वर्षों में शहीद परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया, यह सवाल आज भी खड़ा है। शहीद शिव सिंह की बहन नर्चना देवी वर्तमान में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी की सुविधा अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि गांव में शहीद शिव सिंह की याद में जो गेट बनाया गया है, वह भी परिवार के प्रयासों से ही संभव हो पाया, जबकि सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से होना बाकी है, लेकिन अगर एक शहीद परिवार आज भी अपनी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है। और इसी बीच 15 अगस्त पर SBI अधिकारी रमेश चंद की यह पहल चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने किसी बड़े मंच का इंतजार नहीं किया। न किसी भीड़ का, न किसी राजनीतिक कार्यक्रम का। बल्कि अपने कर्मचारियों के साथ सीधे शहीद शिव सिंह बेला के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यही वह तस्वीर है, जो इस 15 अगस्त पर सबसे ज्यादा मायने रखती है। क्योंकि देशभक्ति सिर्फ भाषणों में नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ स्कूलों में जाकर झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ मंचों पर भीड़ देखकर दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। और जमीन पर देशभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण तब है, जब किसी शहीद के घर जाकर उसके परिवार से पूछा जाए— “आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं?” आज सवाल उन सभी नेताओं और जिम्मेदार लोगों से है, जो शहीदों के नाम पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अगर शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के बीच खड़े होना देशभक्ति है, तो क्या दस साल बाद उसी शहीद की मां के घर जाकर उनका हाल पूछना देशभक्ति नहीं? अगर मंच से शहीद को श्रद्धांजलि देना जरूरी है, तो क्या उसके परिवार की समस्याओं को सुनना जरूरी नहीं? अगर 15 अगस्त को तिरंगे को सलाम करना हमारा कर्तव्य है, तो क्या उस तिरंगे की आन-बान-शान के लिए अपना बेटा खो चुकी मां का सम्मान करना हमारा कर्तव्य नहीं? यही असली सवाल है। और इसी वजह से SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद की यह पहल सराहनीय है कि उन्होंने शहीद परिवार के घर जाकर सम्मान किया। क्योंकि वहां कोई बड़ी भीड़ नहीं थी। कोई राजनीतिक मंच नहीं था। कोई रिबन काटने का कार्यक्रम नहीं था। वहां सिर्फ एक शहीद की मां थी और उसके सामने खड़े थे वे लोग, जो उसके बेटे की शहादत को सम्मान देने पहुंचे थे। शहीद शिव सिंह की माता जसबीर कौर के लिए शायद यही सबसे बड़ा सम्मान है कि उनके बेटे को आज भी याद किया जा रहा है। क्योंकि एक मां अपने बेटे को वापस नहीं मांगती। वह सिर्फ इतना चाहती है कि देश उसके बेटे की कुर्बानी को भूले नहीं। और यही संदेश इस 15 अगस्त पर जाना चाहिए— शहीदों को सिर्फ एक दिन याद मत कीजिए। उनके परिवारों को भी याद रखिए। सरकार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से भी यही सवाल है कि शहीद शिव सिंह के परिवार से जुड़े लंबित मामलों पर अब क्या कार्रवाई होगी? उनकी बहन नर्चना देवी के रोजगार से जुड़े सवाल का समाधान कब होगा? परिवार की अन्य समस्याओं पर कौन जिम्मेदारी लेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या शहीद परिवारों का सम्मान सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों तक रहेगा, या साल के 365 दिन उनके साथ खड़ा होने की व्यवस्था भी बनेगी? 15 अगस्त सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं है। यह उन लोगों को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने इस आजादी की कीमत अपने खून से चुकाई। शहीद शिव सिंह बेला को शत-शत नमन। उनकी माता जसबीर कौर और पूरे परिवार को सम्मान। और SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद को इस पहल के लिए साधुवाद, जिन्होंने शहीद परिवार के घर पहुंचकर यह संदेश दिया कि— देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। 🇮🇳 जय हिंद। वंदे मातरम्। DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त विशेष रिपोर्ट 🇮🇳 15 अगस्त विशेष — DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त के मौके पर पूरे देश में स्कूलों और कॉलेजों में तिरंगा फहराया जाएगा। इन कार्यक्रमों में कई नेता, विधायक और जनप्रतिनिधि पहुंचकर झंडा फहराने के साथ मंच से देशभक्ति के लंबे-लंबे भाषण देंगे। भीड़ देखकर और मंचों पर खड़े होकर देशभक्ति का प्रदर्शन तो होगा, लेकिन अक्सर यह देशभक्ति सिर्फ शब्दों और भाषणों तक ही सीमित रह जाती है। जहां देश भक्ति भाषणों तक सीमित है उसी बीच शहीद शिव सिंह बेला के परिवार को सम्मानित करने पहुंचे SBI अधिकारी रमेश चंद, 10 वर्षों बाद उठे कई बड़े सवाल पंचायत करसौली तहसील पंजैहरा के अंतर्गत गांव गुलरवाला (पजैरा क्षेत्र) के वीर सपूत शहीद शिव सिंह बेला ने वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज, उनकी शहादत के वर्षों बाद, 15 अगस्त के मौके पर नालागढ़ SBI के अधिकारी रमेश चंद अपने कर्मचारियों के साथ शहीद शिव सिंह के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यह पल सिर्फ एक सम्मान समारोह नहीं था। यह उस मां के लिए बेहद भावुक क्षण था, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे को खो दिया। और यही तस्वीर आज एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर रही है— जब एक SBI अधिकारी शहीद के घर तक पहुंचकर उसकी मां को सम्मान दे सकता है, तो पिछले 10 वर्षों में जिम्मेदार नेता और अधिकारी कितनी बार उनके घर पहुंचे? शहीद शिव सिंह बेला, गांव गुलरावाला, तहसील पजैरा के रहने वाले थे। वर्ष 2018 में देश की रक्षा करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके जाने के बाद परिवार ने न सिर्फ अपने बेटे को खोया, बल्कि जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का भी सामना किया। लेकिन शहादत के बाद क्या हुआ? परिवार के अनुसार, शहीद की पार्थिव देह जब गांव पहुंची थी, उस समय कई नेता और जनप्रतिनिधि परिवार के साथ खड़े हुए थे और बड़े-बड़े वादे भी किए गए थे। लेकिन परिवार का कहना है कि समय बीतने के साथ वे वादे केवल भाषणों तक ही सीमित रह गए और उसके बाद किसी ने भी परिवार की वास्तविक समस्याओं की ओर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। दस साल का समय कम नहीं होता। इन वर्षों में शहीद परिवार ने किन परिस्थितियों का सामना किया, यह सवाल आज भी खड़ा है। शहीद शिव सिंह की बहन नर्चना देवी वर्तमान में एक प्राइवेट स्कूल में टीचर के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन परिवार का कहना है कि शहीद परिवार को मिलने वाली सरकारी नौकरी की सुविधा अभी तक पूरी तरह से नहीं मिल पाई है। परिवार की ओर से यह भी कहा गया है कि गांव में शहीद शिव सिंह की याद में जो गेट बनाया गया है, वह भी परिवार के प्रयासों से ही संभव हो पाया, जबकि सरकारी स्तर पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों से होना बाकी है, लेकिन अगर एक शहीद परिवार आज भी अपनी समस्याओं को लेकर सवाल उठा रहा है, तो उन सवालों का जवाब मिलना बेहद जरूरी है। और इसी बीच 15 अगस्त पर SBI अधिकारी रमेश चंद की यह पहल चर्चा का विषय बन गई है। उन्होंने किसी बड़े मंच का इंतजार नहीं किया। न किसी भीड़ का, न किसी राजनीतिक कार्यक्रम का। बल्कि अपने कर्मचारियों के साथ सीधे शहीद शिव सिंह बेला के घर पहुंचे और उनकी माता जसबीर कौर को सम्मानित किया। यही वह तस्वीर है, जो इस 15 अगस्त पर सबसे ज्यादा मायने रखती है। क्योंकि देशभक्ति सिर्फ भाषणों में नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ स्कूलों में जाकर झंडा फहराने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति सिर्फ मंचों पर भीड़ देखकर दिए गए भाषणों तक सीमित नहीं होनी चाहिए। देशभक्ति जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। और जमीन पर देशभक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण तब है, जब किसी शहीद के घर जाकर उसके परिवार से पूछा जाए— “आपको किसी चीज की जरूरत तो नहीं?” आज सवाल उन सभी नेताओं और जिम्मेदार लोगों से है, जो शहीदों के नाम पर मंचों से बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। अगर शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों के बीच खड़े होना देशभक्ति है, तो क्या दस साल बाद उसी शहीद की मां के घर जाकर उनका हाल पूछना देशभक्ति नहीं? 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उनकी बहन नर्चना देवी के रोजगार से जुड़े सवाल का समाधान कब होगा? परिवार की अन्य समस्याओं पर कौन जिम्मेदारी लेगा? और सबसे बड़ा सवाल— क्या शहीद परिवारों का सम्मान सिर्फ राष्ट्रीय पर्वों तक रहेगा, या साल के 365 दिन उनके साथ खड़ा होने की व्यवस्था भी बनेगी? 15 अगस्त सिर्फ आजादी का उत्सव नहीं है। यह उन लोगों को याद करने का दिन भी है, जिन्होंने इस आजादी की कीमत अपने खून से चुकाई। शहीद शिव सिंह बेला को शत-शत नमन। उनकी माता जसबीर कौर और पूरे परिवार को सम्मान। और SBI नालागढ़ के अधिकारी रमेश चंद को इस पहल के लिए साधुवाद, जिन्होंने शहीद परिवार के घर पहुंचकर यह संदेश दिया कि— देशभक्ति सिर्फ बातों में नहीं, जमीन पर भी दिखाई देनी चाहिए। 🇮🇳 जय हिंद। वंदे मातरम्। DK NEWS NALAGARH 15 अगस्त विशेष रिपोर्ट1
- ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय संस्थान सुजानपुर में दिलाई नशा मुक्त भारत नशा मुक्त हिमाचल बनाने की सौगंध सुजानपुर : ब्रह्म कुमारी ईश्वरीय संस्थान सुजानपुर में नशा मुक्त भारत नशा मुक्त हिमाचल बनाने की सौगंध दिलाई हैं। 4 अगस्त से लेकर 20 अगस्त तक सुजानपुर नगर परिषद के समस्त जनता को नशा मुक्ति हिमाचल बनाने की शपथ दिलाई जाएगी। यह कार्यक्रम नेशनल लेवल तक चल रहा है1