टीकमगढ़ जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत फुटेर में सरकारी जमीन को माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खोदे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 968 की इस सरकारी जमीन पर पहले क्रिकेट खेल ग्राउंड बना हुआ था, जिसका उपयोग स्थानीय बच्चे और युवा खेलने के लिए करते थे। आरोप है कि कुछ दबंग माफियाओं ने प्रशासन से साठगांठ करके इस शासकीय खेल मैदान पर मुरमा का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया है। लगातार जेसीबी और ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करके यहाँ से मुरमा निकाला जा रहा है, जिससे यह खेल मैदान अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। इस पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने और जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी जानकारी देने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा है और कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारियों की इस अनदेखी को लेकर ग्रामवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि इस अवैध उत्खनन को तुरंत रोका जाए, दोषी दबंगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और बच्चों के खेलने की इस जमीन को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। इस गंभीर मामले पर फिलहाल किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
टीकमगढ़ जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत फुटेर में सरकारी जमीन को माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खोदे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 968 की इस सरकारी जमीन पर पहले क्रिकेट खेल ग्राउंड बना हुआ था, जिसका उपयोग स्थानीय बच्चे और युवा खेलने के लिए करते थे। आरोप है कि कुछ दबंग माफियाओं ने प्रशासन से साठगांठ करके इस शासकीय खेल मैदान पर मुरमा का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया है। लगातार जेसीबी और ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करके यहाँ से मुरमा निकाला जा रहा है, जिससे यह खेल मैदान अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। इस
पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने और जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी जानकारी देने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा है और कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारियों की इस अनदेखी को लेकर ग्रामवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि इस अवैध उत्खनन को तुरंत रोका जाए, दोषी दबंगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और बच्चों के खेलने की इस जमीन को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। इस गंभीर मामले पर फिलहाल किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
- मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला अब पूरे प्रदेश में अपराध का नंबर वन केंद्र बन चुका है। यहां सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की स्थिति बदहाल है और आए दिन नई-नई आपराधिक वारदातें सामने आ रही हैं। इस इलाके में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि यहाँ कभी खुलेआम गोलाबारी की घटनाएं हो रही हैं, तो कभी बेखौफ होकर अपहरण की वारदातों को अंजाम दिया जा रहा है। लगातार हो रही इन गंभीर घटनाओं के कारण छतरपुर में भय का माहौल बना हुआ है।1
- टीकमगढ़ जिले के खरगापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत फुटेर में सरकारी जमीन को माफियाओं द्वारा अवैध रूप से खोदे जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों के अनुसार, खसरा नंबर 968 की इस सरकारी जमीन पर पहले क्रिकेट खेल ग्राउंड बना हुआ था, जिसका उपयोग स्थानीय बच्चे और युवा खेलने के लिए करते थे। आरोप है कि कुछ दबंग माफियाओं ने प्रशासन से साठगांठ करके इस शासकीय खेल मैदान पर मुरमा का अवैध उत्खनन शुरू कर दिया है। लगातार जेसीबी और ट्रैक्टरों का इस्तेमाल करके यहाँ से मुरमा निकाला जा रहा है, जिससे यह खेल मैदान अब पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है। इस पूरे मामले में हैरान करने वाली बात यह है कि ग्रामीणों द्वारा बार-बार शिकायत किए जाने और जिम्मेदार अधिकारियों को पूरी जानकारी देने के बावजूद प्रशासन मौन साधे बैठा है और कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अधिकारियों की इस अनदेखी को लेकर ग्रामवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने पुरजोर मांग की है कि इस अवैध उत्खनन को तुरंत रोका जाए, दोषी दबंगों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो और बच्चों के खेलने की इस जमीन को जल्द से जल्द अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। इस गंभीर मामले पर फिलहाल किसी भी प्रशासनिक अधिकारी का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।2
- भारत स्काउट एवं गाइड द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रथ यात्रा सेवा शिविर में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले के 7 रोवर और एक लीडर का चयन हुआ है। यह सभी प्रतिभागी ओडिशा के पुरी में आयोजित होने वाली विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ रथ यात्रा के दौरान अपनी सेवाएं प्रदान करेंगे। टीकमगढ़ जिले के लिए यह अत्यंत गौरव का विषय है कि यहां के युवा राष्ट्रीय स्तर के इस महत्वपूर्ण सेवा शिविर में सहभागिता करके मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने जा रहे हैं। 16 जुलाई से प्रारंभ होने वाली इस पावन रथ यात्रा में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र एवं देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस विशाल आयोजन में श्रद्धालुओं की सहायता, मार्गदर्शन, प्राथमिक उपचार, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता एवं जनसेवा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के लिए भारत स्काउट एवं गाइड के स्वयंसेवकों की विशेष भूमिका रहती है। चयनित युवा सेवा, अनुशासन और समर्पण की भावना के साथ श्रद्धालुओं की सहायता करेंगे तथा जिले और प्रदेश का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करेंगे। इस विशेष अवसर पर जिले के स्काउट-गाइड पदाधिकारियों, शिक्षकों, अभिभावकों एवं समाज के गणमान्य नागरिकों ने चयनित प्रतिभागियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की है। सभी ने यह विश्वास व्यक्त किया है कि यह दल अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के माध्यम से टीकमगढ़ जिले की पहचान को और अधिक मजबूत करेगा। युवाओं के लिए यह सेवा शिविर न केवल सेवा का अवसर है, बल्कि राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक समरसता और नेतृत्व क्षमता को विकसित करने का भी एक महत्वपूर्ण मंच साबित होगा।4
- टीकमगढ़ के जतारा में उप पंजीयक कार्यालय एक बार फिर बड़े विवादों में घिर गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य निशांत साहू, रजिस्ट्री लेखकों और मानव अधिकार सुरक्षा संगठन के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर उप पंजीयक शबाना परवीन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्ञापन के जरिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की गई है। रजिस्ट्री लेखक धीरेंद्र चौबे ने आरोप लगाया है कि उप पंजीयक कार्यालय में निर्धारित राशि से दोगुना शुल्क वसूला जा रहा है। उनका दावा है कि जिस रजिस्ट्री का शुल्क करीब दो हजार रुपये बनता है, वहां चार हजार रुपये तक की वसूली की जा रही है। उन्होंने भाजपा नेता निशांत साहू की रजिस्ट्री के लिए भी ₹16,000 की कथित मांग किए जाने की बात कही है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कार्यालय का अधिकांश काम रजिस्ट्री लेखकों के जरिए होता है और बिना लेन-देन के आम नागरिकों का कोई काम नहीं किया जाता। भाजपा नेता निशांत साहू ने कलेक्टर के नाम दिए शिकायत पत्र में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले उनकी जमीन का मूल्य बढ़ाकर बताया गया और फिर रजिस्ट्री के एवज में उनसे ₹16,000 मांगे गए। जब उन्होंने पैसे देने से इनकार कर दिया, तो न केवल उनकी रजिस्ट्री रोकी गई बल्कि उनके साथ अभद्र व्यवहार भी किया गया। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि जिला प्रशासन ने इस मामले में जल्द ही दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की, तो वे जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे।3
- रॉकी भाई राजपूत ने देश, धर्म और अपने देवी-देवताओं की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने का दृढ़ संकल्प व्यक्त करते हुए कहा है कि उनके रहते हुए देश में अराजकता कभी फैल ही नहीं सकती। उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि कोई भी व्यक्ति उनके देश या धर्म के बारे में कोई भी बात करेगा, तो वे उसे जिंदा नहीं छोड़ेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें अपने खुद के प्राण ही क्यों न गंवाने पड़ें। खुद को सिर्फ देश और धर्म के लिए जीने वाला बताते हुए रॉकी भाई राजपूत ने स्पष्ट किया कि उनके लिए सबसे पहले देश आता है और उसके बाद ही परिवार का स्थान है। उन्होंने अपने इस संदेश का समापन 'जय हिंद' और 'इंकलाब जिंदाबाद' के नारों के साथ किया है।1
- मध्य प्रदेश के बल्देवगढ़ में पुलिस द्वारा नशा मुक्ति अभियान चलाया गया है। इस विशेष अभियान के तहत पुलिस ने स्कूली बच्चों को नशे के खिलाफ जागरूक करने का प्रयास किया। इस दौरान बच्चों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक रैली भी निकाली गई।1
- देश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा गया है कि आखिर हमारे देश में गरीब और अमीर के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों है और क्या कानून सबके लिए एक समान नहीं है? यह तीखा आक्रोश बाबा बागेश्वर के भाई शालिगराम और अंकित मिश्रा को जेल ले जाने के दौरान दिए गए वीआईपी ट्रीटमेंट को लेकर सामने आया है। इस पूरे मामले पर खुद एक पुलिसकर्मी ने खुलकर बताया है कि आखिर उन्हें यह वीआईपी ट्रीटमेंट क्यों दिया गया। कानून व्यवस्था के इस दोहरे रवैये को लेकर तीखे सवाल खड़े किए जा रहे हैं।1
- बागेश्वर धाम सरकार (पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री) ने शालिग्राम गर्ग पर लगे आरोपों के मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा है कि शालिग्राम से उनका कोई लेना-देना नहीं है और यदि उन्होंने कोई गलत काम किया है, तो कानून उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करे। पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने मांग की है कि इस मामले से उनका नाम बिल्कुल न जोड़ा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत कृत्य के लिए उन्हें या बागेश्वर धाम को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए और इस पूरे मामले की निष्पक्ष कानूनी जांच होने दी जानी चाहिए।1