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दिल्ली के प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के पास रविवार दोपहर एक कार ने ऑटो रिक्शा को टक्कर मार दी, जिससे ऑटो में सवार यात्रियों को चोटें आईं। यह घटना तब हुई जब ऑटो रिक्शा यात्रियों को लेकर जा रहा था और एक कार ने तेजी से यू-टर्न लिया, जिससे वह ऑटो से टकरा गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार, फिलहाल सब ठीक है।

1 hr ago
user_Noor jahan
Noor jahan
Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
1 hr ago

दिल्ली के प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के पास रविवार दोपहर एक कार ने ऑटो रिक्शा को टक्कर मार दी, जिससे ऑटो में सवार यात्रियों को चोटें आईं। यह घटना तब हुई जब ऑटो रिक्शा यात्रियों को लेकर जा रहा था और एक कार ने तेजी से यू-टर्न लिया, जिससे वह ऑटो से टकरा गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार, फिलहाल सब ठीक है।

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  • दिल्ली के प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के पास रविवार दोपहर एक कार ने ऑटो रिक्शा को टक्कर मार दी, जिससे ऑटो में सवार यात्रियों को चोटें आईं। यह घटना तब हुई जब ऑटो रिक्शा यात्रियों को लेकर जा रहा था और एक कार ने तेजी से यू-टर्न लिया, जिससे वह ऑटो से टकरा गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार, फिलहाल सब ठीक है।
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    दिल्ली के प्रीत विहार मेट्रो स्टेशन के पास रविवार दोपहर एक कार ने ऑटो रिक्शा को टक्कर मार दी, जिससे ऑटो में सवार यात्रियों को चोटें आईं। यह घटना तब हुई जब ऑटो रिक्शा यात्रियों को लेकर जा रहा था और एक कार ने तेजी से यू-टर्न लिया, जिससे वह ऑटो से टकरा गई। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है। जानकारी के अनुसार, फिलहाल सब ठीक है।
    user_Noor jahan
    Noor jahan
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    1 hr ago
  • पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, और अब विधायकों की बगावत के बाद पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। टीएमसी के 14 सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिसका प्रभाव न केवल बंगाल बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन 14 टीएमसी सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेता व त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब भी मौजूद थे। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने सोमवार को अपनी राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद टीएमसी के पांच सांसद सुखेंदु शेखर से मिलने पहुंचे, और फिर यह खबर आई कि टीएमसी के 14 सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये 14 सांसद सुखेंदु शेखर की तरह इस्तीफा देंगे या पार्टी को तोड़ने का प्रयास करेंगे? इन बागी सांसदों के सामने पहला और कानूनी रूप से स्पष्ट रास्ता यह है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दें, जैसा कि सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सभापति को किया है। इस्तीफा देने से उन पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने का खतरा नहीं रहेगा, और वे अपनी मर्जी से भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इस्तीफा देने का मतलब यह होगा कि उनकी सांसदी तुरंत चली जाएगी और उन सीटों पर उपचुनाव होंगे। भले ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी के पक्ष में माहौल है, लेकिन उपचुनाव में दोबारा जीत दर्ज करना इन सांसदों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। अगर वे उपचुनाव हारते हैं तो संसद से बाहर हो जाएंगे, लेकिन जीतने पर सत्ता में भागीदार बन सकते हैं। दूसरा विकल्प टीएमसी को तोड़कर एक नया गुट बनाना है। भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी पार्टी को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ आना अनिवार्य है। संसद में टीएमसी के पास वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में पार्टी तोड़ने या नया गुट बनाने के लिए 19 लोकसभा सांसदों की आवश्यकता होगी। 14 लोकसभा सांसदों की यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को छूने के लिए नाकाफी है। इसलिए, इस संख्या बल के साथ 'पार्टी तोड़ना' कानूनी रूप से संभव नहीं दिख रहा है, और यदि ये सांसद बिना पर्याप्त बहुमत के अलग गुट बनाने का दावा करते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं, जिससे उनका मामला फंस सकता है। तीसरा विकल्प यह है कि ये लोकसभा सदस्य सदन के भीतर टीएमसी के आधिकारिक व्हिप (आदेश) का उल्लंघन करें, जैसे किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार के पक्ष में वोट करना। ऐसा करने पर टीएमसी नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष से इनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करेगा। अयोग्य घोषित होने के बाद, इन सांसदों को अगले 6 महीने के भीतर चुनाव लड़कर वापस आना होगा। कई बागी नेता इस विकल्प को चुनते हैं ताकि वे खुद को 'शहीद' के रूप में पेश कर सकें। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन 14 टीएमसी सांसदों के पीछे देश की सत्ताधारी पार्टी का हाथ हो सकता है, जिससे उनकी रणनीति बेहद सोची-समझी होने की संभावना है। बागी गुट के नेता फिलहाल कानूनी जानकारों से सलाह ले रहे हैं ताकि उनकी सदस्यता तुरंत न जाए, और वे संसद सत्र के दौरान अपनी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं। इन 14 बागी सांसदों के लिए आगे की राह कांटों भरी है, क्योंकि बिना दो-तिहाई बहुमत के पार्टी तोड़ना नामुमकिन है, और इस्तीफा देने का मतलब अपने राजनीतिक जीवन को दांव पर लगाना है। अब देखना यह होगा कि ये सांसद 'एकला चलो' की रणनीति अपनाते हैं या फिर किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की छत्रछाया में अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं।
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    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं, और अब विधायकों की बगावत के बाद पार्टी में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। टीएमसी के 14 सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक दिया है, जिसका प्रभाव न केवल बंगाल बल्कि देश की राजनीति पर भी पड़ सकता है। इन 14 टीएमसी सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और बीजेपी नेता व त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब भी मौजूद थे।

यह घटनाक्रम तब सामने आया जब राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने सोमवार को अपनी राज्यसभा सदस्यता और टीएमसी से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद टीएमसी के पांच सांसद सुखेंदु शेखर से मिलने पहुंचे, और फिर यह खबर आई कि टीएमसी के 14 सांसद भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ये 14 सांसद सुखेंदु शेखर की तरह इस्तीफा देंगे या पार्टी को तोड़ने का प्रयास करेंगे?

इन बागी सांसदों के सामने पहला और कानूनी रूप से स्पष्ट रास्ता यह है कि वे लोकसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंप दें, जैसा कि सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा सभापति को किया है। इस्तीफा देने से उन पर दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित होने का खतरा नहीं रहेगा, और वे अपनी मर्जी से भाजपा या किसी अन्य दल में शामिल हो सकेंगे। हालांकि, इस्तीफा देने का मतलब यह होगा कि उनकी सांसदी तुरंत चली जाएगी और उन सीटों पर उपचुनाव होंगे। भले ही बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद बीजेपी के पक्ष में माहौल है, लेकिन उपचुनाव में दोबारा जीत दर्ज करना इन सांसदों के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा होगी। अगर वे उपचुनाव हारते हैं तो संसद से बाहर हो जाएंगे, लेकिन जीतने पर सत्ता में भागीदार बन सकते हैं।

दूसरा विकल्प टीएमसी को तोड़कर एक नया गुट बनाना है। भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत किसी भी पार्टी को कानूनी रूप से तोड़ने के लिए दो-तिहाई (2/3) सांसदों का एक साथ आना अनिवार्य है। संसद में टीएमसी के पास वर्तमान में 28 लोकसभा सांसद हैं, ऐसे में पार्टी तोड़ने या नया गुट बनाने के लिए 19 लोकसभा सांसदों की आवश्यकता होगी। 14 लोकसभा सांसदों की यह संख्या दो-तिहाई के आंकड़े को छूने के लिए नाकाफी है। इसलिए, इस संख्या बल के साथ 'पार्टी तोड़ना' कानूनी रूप से संभव नहीं दिख रहा है, और यदि ये सांसद बिना पर्याप्त बहुमत के अलग गुट बनाने का दावा करते हैं, तो लोकसभा अध्यक्ष उन्हें अयोग्य घोषित कर सकते हैं, जिससे उनका मामला फंस सकता है।

तीसरा विकल्प यह है कि ये लोकसभा सदस्य सदन के भीतर टीएमसी के आधिकारिक व्हिप (आदेश) का उल्लंघन करें, जैसे किसी महत्वपूर्ण विधेयक पर सरकार के पक्ष में वोट करना। ऐसा करने पर टीएमसी नेतृत्व लोकसभा अध्यक्ष से इनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश करेगा। अयोग्य घोषित होने के बाद, इन सांसदों को अगले 6 महीने के भीतर चुनाव लड़कर वापस आना होगा। कई बागी नेता इस विकल्प को चुनते हैं ताकि वे खुद को 'शहीद' के रूप में पेश कर सकें। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि इन 14 टीएमसी सांसदों के पीछे देश की सत्ताधारी पार्टी का हाथ हो सकता है, जिससे उनकी रणनीति बेहद सोची-समझी होने की संभावना है। बागी गुट के नेता फिलहाल कानूनी जानकारों से सलाह ले रहे हैं ताकि उनकी सदस्यता तुरंत न जाए, और वे संसद सत्र के दौरान अपनी रणनीति का खुलासा कर सकते हैं।

इन 14 बागी सांसदों के लिए आगे की राह कांटों भरी है, क्योंकि बिना दो-तिहाई बहुमत के पार्टी तोड़ना नामुमकिन है, और इस्तीफा देने का मतलब अपने राजनीतिक जीवन को दांव पर लगाना है। अब देखना यह होगा कि ये सांसद 'एकला चलो' की रणनीति अपनाते हैं या फिर किसी बड़ी राष्ट्रीय पार्टी की छत्रछाया में अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत करते हैं।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    1 hr ago
  • दिल्ली के सैदुलाजाब में बिल्डिंग गिरने के बाद आज भी मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। ऐतिहातन दिल्ली पुलिस के जवान, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। इस हादसे के मद्देनजर, MCD ने दुर्घटना स्थल के आसपास की कई इमारतों को सील कर दिया है। बताया गया है कि इस सैदुलाजाब बिल्डिंग हादसे के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने कई जिंदगियों को सुरक्षित बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
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    दिल्ली के सैदुलाजाब में बिल्डिंग गिरने के बाद आज भी मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। ऐतिहातन दिल्ली पुलिस के जवान, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की टीमें मौके पर मौजूद हैं। इस हादसे के मद्देनजर, MCD ने दुर्घटना स्थल के आसपास की कई इमारतों को सील कर दिया है। बताया गया है कि इस सैदुलाजाब बिल्डिंग हादसे के दौरान दिल्ली पुलिस के जवानों ने कई जिंदगियों को सुरक्षित बचाने में अहम भूमिका निभाई थी।
    user_Faiz news
    Faiz news
    करावल नगर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम में डॉ स्वामी कृष्णानंद महाराज जी ने एक बड़ा बयान दिया।
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    दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित धर्म संसद कार्यक्रम में डॉ स्वामी कृष्णानंद महाराज जी ने एक बड़ा बयान दिया।
    user_न्यूज़ आइकॉन 24
    न्यूज़ आइकॉन 24
    Press advisory सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • दिल्ली क्राइम ब्रांच की WR2 टीम ने एक आदतन वांछित लुटेरे को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। यह गिरफ्तारी दिल्ली के महावीर एनक्लेव इलाके में की गई, जहाँ टीम ने एक विशेष जाल बिछाया था। डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के अनुसार, क्राइम ब्रांच को आरोपी के संबंध में एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। इसी सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने लुटेरे को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपी पर कई मामले दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।
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    दिल्ली क्राइम ब्रांच की WR2 टीम ने एक आदतन वांछित लुटेरे को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। यह गिरफ्तारी दिल्ली के महावीर एनक्लेव इलाके में की गई, जहाँ टीम ने एक विशेष जाल बिछाया था।

डीसीपी क्राइम ब्रांच हर्ष इंदौरा के अनुसार, क्राइम ब्रांच को आरोपी के संबंध में एक गुप्त सूचना प्राप्त हुई थी। इसी सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए टीम ने लुटेरे को धर दबोचा। गिरफ्तार किए गए आरोपी पर कई मामले दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।
    user_Sanjay Khan
    Sanjay Khan
    शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    4 hrs ago
  • गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र की जनता मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण बेहद परेशान है और इन सुविधाओं के लिए तरस रही है। लोगों द्वारा यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि आखिर इन आवश्यक निर्माण कार्यों को कब पूरा किया जाएगा।
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    गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र की जनता मूलभूत सुविधाओं की कमी के कारण बेहद परेशान है और इन सुविधाओं के लिए तरस रही है। लोगों द्वारा यह सवाल लगातार उठाया जा रहा है कि आखिर इन आवश्यक निर्माण कार्यों को कब पूरा किया जाएगा।
    user_फरमान इदरीसी
    फरमान इदरीसी
    लोनी, गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • grandma Khan this week are coming I'm available I love you more. reggae movie januario
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    grandma Khan this week are coming I'm available I love you more.
reggae movie januario
    user_Akram Khan
    Akram Khan
    सिविल लाइन्स, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहाँ पार्टी के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे थे, और सूत्रों के अनुसार उन्होंने दोपहर 1 बजे के बाद भूपेंद्र यादव के घर जाकर इन सांसदों से मुलाकात की। दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी वहां से निकल गए। इस घटनाक्रम से पहले, आज ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय से भी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों ने मुलाकात की। सुखेंदु शेखर रॉय एक दशक से अधिक समय तक राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्यों में से एक थे। उनसे मिलने वाले सांसदों में बर्दमान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूचबिहार से जगदीश बसुनिया, झारग्राम से कालिपद सोरेन और बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती शामिल थे। इन मुलाकातों से टीएमसी की राजनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि पार्टी में पहले से ही सांसदों के बीच विभाजन की खबरें हैं और ममता बनर्जी की विधायकों पर पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब संसदीय खेमे को भी झटका लगा है। बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुखेंदु से बात नहीं की है, लेकिन वे उनकी अधिकांश बातों से सहमत हैं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर। उन्होंने इसे निराशाजनक बताया कि सुखेंदु जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया गया और भविष्यवाणी की कि, “आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।” यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ममता बनर्जी स्वयं इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं, और अभिषेक बनर्जी भी उनके साथ हैं। आज सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी से मुलाकात भी हुई। टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, और पार्टी में किसी भी संवैधानिक विभाजन को मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 19 सांसदों का एक गुट में आना आवश्यक है। हालांकि, सांसद इस्तीफा देने के लिए स्वतंत्र हैं।
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    तृणमूल कांग्रेस में बड़ी राजनीतिक हलचल सामने आई है, जहाँ पार्टी के 14 बागी सांसदों ने दिल्ली में पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। यह महत्वपूर्ण बैठक बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई, जिसमें बीजेपी नेता और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब भी शामिल थे। पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी आज ही दिल्ली पहुंचे थे, और सूत्रों के अनुसार उन्होंने दोपहर 1 बजे के बाद भूपेंद्र यादव के घर जाकर इन सांसदों से मुलाकात की। दोपहर 2 बजे के बाद शुभेंदु अधिकारी वहां से निकल गए।

इस घटनाक्रम से पहले, आज ही राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने वाले राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय से भी दिल्ली में तृणमूल कांग्रेस के पांच सांसदों ने मुलाकात की। सुखेंदु शेखर रॉय एक दशक से अधिक समय तक राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे पुराने सदस्यों में से एक थे। उनसे मिलने वाले सांसदों में बर्दमान पूर्व से शर्मिला सरकार, हावड़ा से प्रसून बनर्जी, कूचबिहार से जगदीश बसुनिया, झारग्राम से कालिपद सोरेन और बांकुरा से अरूप चक्रवर्ती शामिल थे। इन मुलाकातों से टीएमसी की राजनीति को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं, क्योंकि पार्टी में पहले से ही सांसदों के बीच विभाजन की खबरें हैं और ममता बनर्जी की विधायकों पर पकड़ ढीली पड़ने के बाद अब संसदीय खेमे को भी झटका लगा है।

बंगाल में ममता के खिलाफ बगावत करने वाले बागी विधायक और नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुखेंदु के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से सुखेंदु से बात नहीं की है, लेकिन वे उनकी अधिकांश बातों से सहमत हैं, खासकर संसद के उच्च सदन के कामकाज को लेकर। उन्होंने इसे निराशाजनक बताया कि सुखेंदु जैसे कद के सांसद को पिछली कतार में धकेल दिया गया और भविष्यवाणी की कि, “आज सुखेंदु आवाज़ उठा रहे हैं; कल दूसरे भी ऐसा ही करेंगे।”

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब ममता बनर्जी स्वयं इंडिया ब्लॉक की बैठक में शामिल होने के लिए दिल्ली में हैं, और अभिषेक बनर्जी भी उनके साथ हैं। आज सोनिया गांधी और ममता बनर्जी के बीच गर्मजोशी से मुलाकात भी हुई। टीएमसी के लोकसभा में कुल 28 सांसद हैं, और पार्टी में किसी भी संवैधानिक विभाजन को मान्यता प्राप्त करने के लिए कम से कम 19 सांसदों का एक गुट में आना आवश्यक है। हालांकि, सांसद इस्तीफा देने के लिए स्वतंत्र हैं।
    user_Mohit Badtiya
    Mohit Badtiya
    Civil Lines, Central Delhi•
    2 hrs ago
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