मिल्कीपुर तहसील: 'कागजों' की नहीं, 'गांधी' की चलती है कलम! अजीत मिश्रा (खोजी) मिल्कीपुर (अयोध्या)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और शासन के बीच की कड़ी कहे जाने वाले राजस्व विभाग की साख आज मिल्कीपुर तहसील में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। तहसील का हाल यह है कि यहाँ आम आदमी का वाजिब काम भी बिना 'सुविधा शुल्क' के फाइलों की धूल फांकता रहता है। ताजा मामला एक लेखपाल के कथित वीडियो वायरल होने का है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहाँ नियम-कानून नहीं, बल्कि रिश्वत की रसीदें चलती हैं। वायरल वीडियो: भ्रष्टाचार का "डिजिटल" प्रमाण? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो महज एक लेखपाल की निजी संलिप्तता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की सड़ांध है जो ऊपर से नीचे तक व्याप्त है। वीडियो में जिस तरह से बेखौफ होकर लेनदेन की बातें हो रही हैं, वह दर्शाता है कि भ्रष्टाचारियों के मन से प्रशासन और कानून का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। पुरानी रवायत, नया कलेवर मिल्कीपुर तहसील और एंटी करप्शन टीम का पुराना नाता रहा है। पहले भी कई 'सफेदपोश' कर्मचारी सलाखों के पीछे जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जेल जाने और निलंबन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा है? अगर पुरानी कार्रवाइयों से कोई सबक लिया गया होता, तो आज फिर एक नया वीडियो जनता के बीच चर्चा का विषय न बनता। यहाँ लेखपालों की कार्यशैली देखकर लगता है कि वे जनता के सेवक नहीं, बल्कि किसी रियासत के वसूली एजेंट हैं। सिस्टम की लाचारी या मौन सहमति? जब एक गरीब किसान अपनी जमीन की पैमाइश या वरासत के लिए तहसील के चक्कर काटता है, तो उसे नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन जैसे ही 'रिश्वत' की मेज सजती है, सारे नियम किनारे हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील परिसर में बिचौलियों और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों का ऐसा मकड़जाल है जिसे तोड़ना नामुमकिन सा लगता है। "क्या भ्रष्टाचार ही अब नया प्रोटोकॉल है? यदि वीडियो सार्वजनिक होने के बाद भी केवल 'जांच' का आश्वासन दिया जाएगा, तो यह ईमानदार जनता के साथ भद्दा मजाक होगा।" उपजिलाधिकारी की निष्ठा की अग्निपरीक्षा अब सबकी निगाहें उपजिलाधिकारी (SDM) सुधीर कुमार पर टिकी हैं। क्या वे इस वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कोई ऐसी मिसाल पेश करेंगे जिससे भविष्य में कोई कर्मचारी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचे? या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा? निष्कर्ष: मिल्कीपुर की जनता अब कोरे आश्वासनों से ऊब चुकी है। उसे 'जांच' नहीं, 'कार्रवाई' चाहिए। यदि प्रशासन इस बार भी नाकाम रहा, तो सरकारी कार्यालयों से आम आदमी का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का यही सही समय है, वरना तहसीलें केवल शोषण के केंद्र बनकर रह जाएंगी।
मिल्कीपुर तहसील: 'कागजों' की नहीं, 'गांधी' की चलती है कलम! अजीत मिश्रा (खोजी) मिल्कीपुर (अयोध्या)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और शासन के बीच की कड़ी कहे जाने वाले राजस्व विभाग की साख आज मिल्कीपुर तहसील में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। तहसील का हाल यह है कि यहाँ आम आदमी का वाजिब काम भी बिना 'सुविधा शुल्क' के फाइलों की धूल फांकता रहता है। ताजा मामला एक लेखपाल के कथित वीडियो वायरल होने का है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहाँ नियम-कानून नहीं, बल्कि रिश्वत की रसीदें चलती हैं। वायरल वीडियो: भ्रष्टाचार का "डिजिटल" प्रमाण? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो महज एक लेखपाल की निजी संलिप्तता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की सड़ांध है जो ऊपर से नीचे तक व्याप्त है। वीडियो में जिस तरह से बेखौफ होकर लेनदेन की बातें हो रही हैं, वह दर्शाता है कि भ्रष्टाचारियों के मन से प्रशासन और कानून का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। पुरानी रवायत, नया कलेवर मिल्कीपुर तहसील और एंटी करप्शन टीम का पुराना नाता रहा है। पहले भी कई 'सफेदपोश' कर्मचारी सलाखों के पीछे जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जेल जाने और निलंबन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा है? अगर पुरानी कार्रवाइयों से कोई सबक लिया गया होता, तो आज फिर एक नया वीडियो जनता के बीच चर्चा का विषय न
बनता। यहाँ लेखपालों की कार्यशैली देखकर लगता है कि वे जनता के सेवक नहीं, बल्कि किसी रियासत के वसूली एजेंट हैं। सिस्टम की लाचारी या मौन सहमति? जब एक गरीब किसान अपनी जमीन की पैमाइश या वरासत के लिए तहसील के चक्कर काटता है, तो उसे नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन जैसे ही 'रिश्वत' की मेज सजती है, सारे नियम किनारे हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील परिसर में बिचौलियों और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों का ऐसा मकड़जाल है जिसे तोड़ना नामुमकिन सा लगता है। "क्या भ्रष्टाचार ही अब नया प्रोटोकॉल है? यदि वीडियो सार्वजनिक होने के बाद भी केवल 'जांच' का आश्वासन दिया जाएगा, तो यह ईमानदार जनता के साथ भद्दा मजाक होगा।" उपजिलाधिकारी की निष्ठा की अग्निपरीक्षा अब सबकी निगाहें उपजिलाधिकारी (SDM) सुधीर कुमार पर टिकी हैं। क्या वे इस वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कोई ऐसी मिसाल पेश करेंगे जिससे भविष्य में कोई कर्मचारी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचे? या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा? निष्कर्ष: मिल्कीपुर की जनता अब कोरे आश्वासनों से ऊब चुकी है। उसे 'जांच' नहीं, 'कार्रवाई' चाहिए। यदि प्रशासन इस बार भी नाकाम रहा, तो सरकारी कार्यालयों से आम आदमी का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का यही सही समय है, वरना तहसीलें केवल शोषण के केंद्र बनकर रह जाएंगी।
- अजीत मिश्रा (खोजी) मिल्कीपुर (अयोध्या)। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ और शासन के बीच की कड़ी कहे जाने वाले राजस्व विभाग की साख आज मिल्कीपुर तहसील में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। तहसील का हाल यह है कि यहाँ आम आदमी का वाजिब काम भी बिना 'सुविधा शुल्क' के फाइलों की धूल फांकता रहता है। ताजा मामला एक लेखपाल के कथित वीडियो वायरल होने का है, जिसने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि यहाँ नियम-कानून नहीं, बल्कि रिश्वत की रसीदें चलती हैं। वायरल वीडियो: भ्रष्टाचार का "डिजिटल" प्रमाण? सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो महज एक लेखपाल की निजी संलिप्तता का मामला नहीं है, बल्कि यह उस तंत्र की सड़ांध है जो ऊपर से नीचे तक व्याप्त है। वीडियो में जिस तरह से बेखौफ होकर लेनदेन की बातें हो रही हैं, वह दर्शाता है कि भ्रष्टाचारियों के मन से प्रशासन और कानून का भय पूरी तरह समाप्त हो चुका है। पुरानी रवायत, नया कलेवर मिल्कीपुर तहसील और एंटी करप्शन टीम का पुराना नाता रहा है। पहले भी कई 'सफेदपोश' कर्मचारी सलाखों के पीछे जा चुके हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या जेल जाने और निलंबन की कार्रवाई सिर्फ दिखावा है? अगर पुरानी कार्रवाइयों से कोई सबक लिया गया होता, तो आज फिर एक नया वीडियो जनता के बीच चर्चा का विषय न बनता। यहाँ लेखपालों की कार्यशैली देखकर लगता है कि वे जनता के सेवक नहीं, बल्कि किसी रियासत के वसूली एजेंट हैं। सिस्टम की लाचारी या मौन सहमति? जब एक गरीब किसान अपनी जमीन की पैमाइश या वरासत के लिए तहसील के चक्कर काटता है, तो उसे नियमों का पाठ पढ़ाया जाता है। लेकिन जैसे ही 'रिश्वत' की मेज सजती है, सारे नियम किनारे हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि तहसील परिसर में बिचौलियों और कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों का ऐसा मकड़जाल है जिसे तोड़ना नामुमकिन सा लगता है। "क्या भ्रष्टाचार ही अब नया प्रोटोकॉल है? यदि वीडियो सार्वजनिक होने के बाद भी केवल 'जांच' का आश्वासन दिया जाएगा, तो यह ईमानदार जनता के साथ भद्दा मजाक होगा।" उपजिलाधिकारी की निष्ठा की अग्निपरीक्षा अब सबकी निगाहें उपजिलाधिकारी (SDM) सुधीर कुमार पर टिकी हैं। क्या वे इस वायरल वीडियो को साक्ष्य मानकर कोई ऐसी मिसाल पेश करेंगे जिससे भविष्य में कोई कर्मचारी रिश्वत लेने से पहले सौ बार सोचे? या फिर यह मामला भी पुरानी शिकायतों की तरह फाइलों के नीचे दबा दिया जाएगा? निष्कर्ष: मिल्कीपुर की जनता अब कोरे आश्वासनों से ऊब चुकी है। उसे 'जांच' नहीं, 'कार्रवाई' चाहिए। यदि प्रशासन इस बार भी नाकाम रहा, तो सरकारी कार्यालयों से आम आदमी का भरोसा पूरी तरह उठ जाएगा। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का यही सही समय है, वरना तहसीलें केवल शोषण के केंद्र बनकर रह जाएंगी।2
- नीट की तैयारी कर रही छात्रा से मामला, एसपी के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज लखनऊ में रहकर नीट की तैयारी करने वाली छात्रा ने रिश्तेदारी के युवक पर काॅफी में नशीला पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। एसपी डॉ. यशवीर के आदेश पर पुलिस ने कोतवाली क्षेत्र के बेलवा डाड़ी निवासी आरोपी अजमत खांपर दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पीड़िता मऊ जिले के चिरइया कोट थाना क्षेत्र की रहने वाली है। पीड़िता परिवार वालों के साथ बुधवार को एसपी के समक्ष पेश होकर आपबीती बताई थी। कोतवाली पुलिस को तहरीर देकर पीड़िता ने कहा है कि ह लखनऊ में अलीगंज क्षेत्र के इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर एक हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी कर रही थी। इस दौरान पारिवारिक शादी समारोह में उसकी मुलाकात अजमत खां से हुई। पीड़िता का आरोप है कि अजमत ने उसका फोटो और वीडियो बना लिया और न मिलने पर परिवार व रिश्तेदारों को भेजने की धमकी देने लगा। इसके बाद वह अगस्त 24 लखनऊ में विकास नगर में अजमत से मिली इस दौरान उसने काफी में नशीला पदार्थ पिलाकर जबरन शारीरिक संबंध बनाया। आपत्ति जनक वीडियो भी बना लिया। वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर कई बार दुष्कर्म किया।1
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- 😊❤️🙏1
- जय श्री राम 🚩🚩🚩 जय गौ माता 🐄🐄🐄 जय हिंद 🇮🇳🇮🇳🇮🇳 गौ सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है इसलिए अपना कर्तव्य निभा सकते हो तो निभाओ2
- आकाशवाणी, 15 3 2026 ई0, ❤ कपल्स, प्यार करने वालों में लिव ऐन्ड रिलेशन में रहने वालों में ,झगड़ा तो होंगे! होते रहेंगे । 👉🏾 लेकिन याद रखना :- ➡️ गुस्सा करो लेकिन असलील, गंदे शब्दों का प्रयोग मत करो। घाव गुस्से से नहीं, आपकी बातों से लगते हैं। ➡️ नाराज रहो , लेकिन वजह बताओ। कोई भी प्राणी किसी के दिल की बात को नहीं पढ़ सकता ! नहीं जान सकता है। ➡️ बहस हो, "दरवाजे के अंदर हो ", दुनिया को तमाशा मत दिखाओ! ➡️ गलती को देखो, मगर अच्छाइयों को भी याद करो । अच्छाइयों को याद रखो। 👉🏾 रिश्ता किसी एक पल या क्षण में नहीं बनता ❤। ➡️ रूठ जाओ, नाराज रहो, लेकिन! यह मत भूलो कि किसी ने तुम्हारे लिए बहुत कुछ छोड़ा है और बहुत कुछ सहा भी है।1
- “ खलीलाबाद/संत कबीर नगर। नगर में संगीत शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “द म्यूजिक हब” म्यूजिक क्लास का भव्य शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन वरिष्ठ समाजसेवी एवं भाजपा नेता वैभव चतुर्वेदी द्वारा फीता काटकर किया गया। उद्घाटन के बाद उन्होंने संस्थान का अवलोकन किया और इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि संगीत मनुष्य के जीवन को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करता है। इस अवसर पर द म्यूजिक हब के प्रोपराइटर गरिमा पांडे ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य क्षेत्र के बच्चों और युवाओं को संगीत की विभिन्न विधाओं में प्रशिक्षित करना है, यह हमारे गुरु जी का स्वप्न था और उसको साकार करने के लिए वह स्वयं यहां उपस्थित हैं ताकि उनकी प्रतिभा को मंच मिल सके और वे भविष्य में संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।कार्यक्रम में सिंगर अंशुमन निगार, सिंगर अनमोल, म्यूजिकल टीचर एवं कंपोजर जागृति ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और संगीत के महत्व पर प्रकाश डाला। इस मौके पर पूर्व सभासद रुद्रनाथ मिश्रा, विकास पांडे सहित कई गणमान्य लोग और संगीत प्रेमी मौजूद रहे। सभी अतिथियों ने संस्थान की इस पहल की सराहना करते हुए इसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।2
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