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झारखंड जिला चतरा के सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार ने लावालौंग प्रखंड मुख्यालय से कोलकोले पंचायत के भुसाड़ गांव तक लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर आज झारखंड विधानसभा में प्रश्न उठाया । सरकार ने अपने उत्तर में स्वीकार किया कि उक्त सड़क कच्ची एवं जर्जर अवस्था में है तथा यह मार्ग वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में पड़ता है। विभाग द्वारा बताया गया कि वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त होने के उपरांत विभागीय नीति एवं बजटीय प्रावधान के अनुसार सड़क निर्माण कार्य कराया जाएगा। क्षेत्र की जनता की सुविधा एवं आवागमन की समस्या को देखते हुए इस महत्वपूर्ण सड़क के शीघ्र निर्माण की मांग की गई।
Aakash Kumar paswan
झारखंड जिला चतरा के सिमरिया विधायक उज्जवल कुमार ने लावालौंग प्रखंड मुख्यालय से कोलकोले पंचायत के भुसाड़ गांव तक लगभग 9 किलोमीटर लंबी सड़क की जर्जर स्थिति को लेकर आज झारखंड विधानसभा में प्रश्न उठाया । सरकार ने अपने उत्तर में स्वीकार किया कि उक्त सड़क कच्ची एवं जर्जर अवस्था में है तथा यह मार्ग वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में पड़ता है। विभाग द्वारा बताया गया कि वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त होने के उपरांत विभागीय नीति एवं बजटीय प्रावधान के अनुसार सड़क निर्माण कार्य कराया जाएगा। क्षेत्र की जनता की सुविधा एवं आवागमन की समस्या को देखते हुए इस महत्वपूर्ण सड़क के शीघ्र निर्माण की मांग की गई।
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- Post by Boltajharkhand1
- -- किसान संगठनों और जनसंघर्ष मंचों का संयुक्त आंदोलन, 11 सूत्री मांगों को लेकर बिरसा चौक से विधानसभा तक प्रदर्शन -- पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता के नेतृत्व में हजारीबाग से सैंकड़ों आंदोलनकारी हुए शरीक ___ हजारीबाग। जल, जंगल और जमीन की रक्षा, विस्थापन नीति की घोषणा तथा सरकारी विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार के विरोध में बुधवार को किसान और जन आंदोलनकारी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में विशाल धरना-प्रदर्शन एवं विधानसभा मार्च का आयोजन किया गया। इस आंदोलन में अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजन क्षीर सागर, राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड के.डी. सिंह, झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष एवं झारखंड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सांसद भूवनेश्वर प्रसाद मेहता सहित किसान सभा के विभिन्न पदाधिकारियों के नेतृत्व में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में किसान सभा के महासचिव एवं झारखण्ड आन्दोलनकारी संघर्ष मोर्चा के संस्थापक कॉमरेड पुष्कर महतो, संगठन सचिव अजय सिंह, झारखण्ड स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच के अध्यक्ष बटेश्वर प्रसाद मेहता तथा खतियानी परिवार के केंद्रीय महासचिव मो. हकीम सहित कई सामाजिक और किसान नेताओं ने भाग लिया। झारखंड राज्य किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष सह पूर्व सांसद भुवनेश्वर मेहता के नेतृत्व में हजारीबाग से सैंकड़ों आंदोलनकारी इस आंदोलन में शरीक हुए। यह संयुक्त आंदोलन झारखण्ड राज्य किसान सभा, झारखण्ड राज्य आन्दोलनकारी संघर्ष मोर्चा, झारखण्ड राज्य विस्थापित संघर्ष मोर्चा, झारखण्ड राज्य स्वतंत्रता सेनानी विचार मंच और खतियानी परिवार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया। आंदोलन का उद्देश्य राज्य में किसानों, आन्दोलनकारियों और आम जनता से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को सरकार के समक्ष मजबूती से़ उठाना था। आंदोलनकारियों ने 11 सूत्री मांगों को लेकर सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की। प्रमुख मांगों में जल, जंगल और जमीन की लूट पर रोक लगाने तथा विभिन्न विभागों में व्याप्त भ्रष्टाचार को समाप्त करने की मांग शामिल है। इसके साथ ही अंचलों में दाखिल-खारिज भूमि की विवरणी को ऑनलाइन करने और एल.पी.सी. में हो रही घूसखोरी पर रोक लगाने की मांग भी उठाई गई। आंदोलनकारी संगठनों ने विस्थापन आयोग के गठन, स्पष्ट नियोजन और व्यापक विस्थापन नीति की घोषणा की मांग की। साथ ही भूमि बैंक को समाप्त कर गैर मजरूआ जमीन की रसीद काटने, अधिग्रहण की स्थिति में रैयतों को रैयती की मान्यता देते हुए उचित दर से मुआवजा देने तथा भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 को सख्ती से लागू करने की मांग भी की गई। उन्होंने उपजाऊ कृषि भूमि के अधिग्रहण पर रोक लगाने की भी मांग की। धरना-प्रदर्शन में ग्रामीण विकास विभाग, आर.ई.ओ. तथा पीडब्ल्यूडी के सड़क और भवन निर्माण कार्यों में कथित टेंडर घोटालों की जांच की मांग भी उठाई गई। इसके अतिरिक्त हजारीबाग में वर्षों से निर्मित सिलवार पॉलिटेक्निक कॉलेज को चालू करने, चंदवारा और सुर्यकुण्ड में डिग्री कॉलेजों में प्रोफेसरों की बहाली शुरू करने तथा विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति शीघ्र करने की मांग शामिल है। आंदोलनकारियों ने गोन्दलपुरा, बादम और मोईत्रा सहित उपजाऊ जमीन वाले कोल ब्लॉकों को रद्द करने तथा इन परियोजनाओं के विरोध में दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की। इसके साथ ही झारखण्ड आन्दोलनकारियों पर लगे जेल की बाध्यता समाप्त कर छत्तीसगढ़ और उत्तराखण्ड की तर्ज पर सभी आन्दोलनकारियों को समान रूप से पेंशन देने की मांग भी उठाई। इस दौरान आंदोलनकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के झारखंड से बाहर रहने के कारण झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्णन किशोर, नगर विकास मंत्री सोनु कुमार सुदिव्य और मंत्री योगेंद्र महतो से मिलकर 11 सूत्री मांगों से संबंधित मांग पत्र सौंपा झारखंड सरकार के मंत्रियों ने सभी मांगों पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया। आंदोलनकारी संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो राज्यव्यापी जनआंदोलन को और तेज किया जाएगा। इस ऐतिहासिक आंदोलन में हजारीबाग से पूर्व सांसद के साथ निजाम अंसारी, शमीम अनवर, मोहम्मद इम्तियाज, अनवार उल हक, अखिलेश कुमार, अधिवक्ता शंभू कुमार, खतियानी परिवार जिला अध्यक्ष अशोक राम, कामरेड अनंत कमार आर्या, राजेश कुमार, मिश्रजीत, मेहता आनंद कुमार, प्रदीप कमार, प्रकाश मेहता, अनिल कुमार, भीम मेहता, उमेश मेहता, श्रीकांत मेहता, ईश्वर मेहता, जय नारायण मेहता, बिंदेश्वरी प्रसाद मेहता सहित हजारों आंदोलनकारी नेता शामिल हुए। वहीं पूरे झारखंड राज्य से तकरीबन दस हजार के करीब आंदोलनकारी शरीक हुए।1
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