नाले में बंधे मिले तीन गो वंश ग्रामीणों में बना चर्चा का विषय। मेजा प्रयागराज ।मेजा थाना क्षेत्र के पकरी सेवार गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब नाले में बंधे गो वंश मिले। ग्रामीणों ने सुबह नाले के पास बधे तीन गोवंशो को संदिग्ध हालत में देखा, जिसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों का कहना है कि गोवंश को लादकर अच्छी खासे दाम में बेचने के लिए उन्हें बाहर भेजा जाता। मुन्ना द्विवेदी ने घटना की सूचना डायल 112 पुलिस को दी , जिसके बाद डायल 112 के सिपाही सुरवीर सिंह मौके पर पहुंचकर तीनों गोवंशों को छुड़वा दिया। जिससे एक बार तीनों गोवंशों को जीवन दान मिल गया यदि ग्रामीणों की नजर इन गोवंशो पर नहीं पडती तो शायद तीन गोवंशो की हत्या हो सकती थी। लोगों का मानना है कि गोवंश कहीं से लाकर यहां नाले में रखा गया था रात में जैसे ही तस्करों को मौका मिलता तो वे गोवंशों को लदवा कर बाहर भेज कर अच्छा मुनाफा कमा लेते। इस घटना से क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
नाले में बंधे मिले तीन गो वंश ग्रामीणों में बना चर्चा का विषय। मेजा प्रयागराज ।मेजा थाना क्षेत्र के पकरी सेवार गांव में उस समय हड़कंप मच गया जब नाले में बंधे गो वंश मिले। ग्रामीणों ने सुबह नाले के पास बधे तीन गोवंशो को संदिग्ध
हालत में देखा, जिसके बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। ग्रामीणों का कहना है कि गोवंश को लादकर अच्छी खासे दाम में बेचने के लिए उन्हें बाहर भेजा जाता। मुन्ना द्विवेदी ने घटना की सूचना डायल 112 पुलिस को दी , जिसके बाद
डायल 112 के सिपाही सुरवीर सिंह मौके पर पहुंचकर तीनों गोवंशों को छुड़वा दिया। जिससे एक बार तीनों गोवंशों को जीवन दान मिल गया यदि ग्रामीणों की नजर इन गोवंशो पर नहीं पडती तो शायद तीन गोवंशो की हत्या हो सकती थी। लोगों का
मानना है कि गोवंश कहीं से लाकर यहां नाले में रखा गया था रात में जैसे ही तस्करों को मौका मिलता तो वे गोवंशों को लदवा कर बाहर भेज कर अच्छा मुनाफा कमा लेते। इस घटना से क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
- नैनी ( प्रयागराज )। रविवार को हनुमान नगर मोहल्ले में श्री सर्वेश्वर महादेव मंदिर का जीर्णोद्धार ,प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव, कलश यात्रा निकाला गया, जिसमें सैकड़ों नर- नारी ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया । यात्रा हनुमान नगर से चलकर नैनी बाजार ,शंकरढाल,सब्जी मंडी होते हुए पुनः मेवालाल बगिया सर्वेश्वर महादेव मंदिर में आकर यात्रा समाप्त हुई । जिसके आयोजक राम तारक चौरसिया ,समाजसेवी योगेश चौरसिया रहे। इस मौके पर क्षेत्रीय पार्षद व व्यापार मंडल नैनी के अध्यक्ष राकेश जायसवाल की अगुवाई में जगह जगह भव्य स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। कलश यात्रा में प्रमुख रूप से पार्षद राकेश जायसवाल, राजेश शर्मा , सोनू मिश्रा, धर्मराज पटेल, कृष्णा अग्रवाल, बैजनाथ गुप्ता, लखन लाल केशरवानी, गुडविल गैरज , रवींद्र त्रिपाठी, बबलू तिवारी, राज कुशवाहा, निरंजन कुशवाहा, सतीश कौशिक समेत क्षेत्र के तमाम व्यापारी शामिल रहे।2
- प्रयागराज: दो दिन पहले सिविल लाइंस मे अधिवक्ता और चाट विक्रेता बीच हुए झगडे के मामले मे इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व अध्यक्ष अशोक सिंह का कहना हैं की,मामला मेरे से जुड़ा नही हैं कुछ अधिवक्ता से मारपीट हुई थी,मै उधर से गुज़र रहा था,तो रुक गया था,मेरा झगड़े से कोई लेना देना नही था!1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- Post by शुरू शुरू पब्लिक न्यूज़1
- Post by Questions News1
- रविवार की सांझ जब केंद्र प्रेक्षागृह की रोशनी जली, तो मंच पर सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि समाज का आईना जीवंत हो उठा। भावनाओं, आस्था और भोलेपन के नाम पर होने वाली ठगी की मार्मिक कथा ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित भरतमुनि नाट्य समारोह के तीसरे दिन सुप्रसिद्ध नाटक ‘बकरी’ का प्रभावशाली मंचन किया गया। डॉ. शिशु कुमार सिंह के कुशल निर्देशन में प्रस्तुत यह नाटक प्रख्यात साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की चर्चित रचना पर आधारित है। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. धनञ्जय चोपड़ा, कोर्स कोऑर्डिनेटर सेंटर ऑफ़ मीडिया स्टडीज, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (प्रशासन) डॉ. आदित्य श्रीवास्तव एवं उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। सर्वेश्वर दयाल सक्सेना के चर्चित नाटक बकरी नाटक के माध्यम से दिखाया गया है कि डकैत प्रवृति के तीन युवक दुर्जन सिंह, कर्मवीर व सत्यवीर अपने पुराने धंधा को छोड़कर ठगी करने की योजना बनाते है। अपनी योजना के अनुसार गांव के दलित की बकरी को दीवान द्वारा चोरी करवा देते है। साथ ही गांव के भोली-भाली जनता से गांधी जी के बकरी के नाम पर दान लेना शुरू कर देते हैं। बकरी नाटक में बकरी जनता के रूप में आधार बनाकर नेताओं की छवि को लोगों के सामने रखा गया। नाटक में दिखाया गया है कि नेता जनता को गुमराह करते हैं और चुनाव में विजय हासिल कर लेते हैं। आम जनता हर बार ठगी जाती है। जनता निरीह नजर आती है। इस बात का प्रमाण नाटक में जनता के संवाद से स्पष्ट है। हालांकि, नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से नकली पहलुओं की पोल खोल देती है, लेकिन सवाल फिर भी अधूरा रह जाता है कि क्या पोल खोलना ही समाधान है। नौटंकी शैली में प्रस्तुत इस नाटक में कजरी, सोहर और निर्गुण जैसे लोकगीतों का सशक्त समावेश दर्शकों को लोक संस्कृति से जोड़ते हुए संदेश को और प्रभावी बनाता है। नाटक के अंत में जनता प्रतीकात्मक विद्रोह के माध्यम से सच्चाई उजागर करती है, लेकिन यह सवाल भी छोड़ जाती है कि क्या केवल सच सामने लाना ही पर्याप्त है, या बदलाव के लिए जागरूकता और सक्रियता भी जरूरी है। अभिनय के रूप में दीवान की भूमिका में हर्ष अग्रवाल, दुर्जन सिंह के रूप में ओमेन्द्र पुरी गोस्वामी तथा कर्मवीर के रूप में हर्षल मेश्राम ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी।1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- एटीएम मे शातिरो नें किया था जुगाड़,संभल कर निकाले पैसा!1
- Post by शुरू शुरू पब्लिक न्यूज़3