पत्रकारों की हुंकार से हिला भ्रष्ट तंत्र, 20 साल का वनवास खत्म, बेबस विधवा को प्रशासन ने दिलाया जमीन पर कब्जा (ब्यूरो चीफ लुकमान खान) पीलीभीत पीलीभीत। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की ताकत और कलम के सिपाहियों की एकजुटता के आगे आखिरकार पलिया तहसील प्रशासन को घुटने टेकने ही पड़े। पिछले 20 वर्षों से अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही एक पत्रकार की बेबस मां को सोमवार को वह हक मिल गया, जिसके लिए भ्रष्ट लेखपाल और कानूनगो उसे सालों से टरका रहे थे। पत्रकारों के उग्र तेवर और आर-पार की जंग के ऐलान के बाद प्रशासन ने आनंद-फानन में एक्शन लेते हुए पीड़ित परिवार को जमीन पर कब्जा दिलाया। ग्राम नगला निवासी संजीदा बेगम का मामला प्रशासनिक निर्लज्जता का पराकाष्ठा था। 20 साल से उनकी 30 डिसमिल जमीन पर दबंगों ने ग्राम प्रधान के संरक्षण में अवैध कब्जा कर रखा था। हद तो तब हो गई जब शनिवार को लेखपाल और कानूनगो ने मौके पर जाकर पैमाइश की खानापूर्ति की और पीड़िता से सरेआम कह दिया कि कब्जा खुद कर लीजिए, हमसे नहीं होगा। प्रशासनिक अधिकारियों की इस कायरता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जब पत्रकार एकजुट हुए, तो पूरा सिस्टम हिल गया। सोमवार को पूरनपुर और पलिया क्षेत्र के तमाम पत्रकार पलिया तहसील पहुंचे और उप जिलाधिकारी का घेराव किया। पहले तो प्रशासन ने मामले को 10 तारीख तक टालने की कोशिश की और कोरा आश्वासन दिया। लेकिन पत्रकारों ने जब तहसील परिसर में ही उग्र धरना प्रदर्शन की सीधी चेतावनी दी, तो अधिकारियों के पसीने छूट गए। पत्रकारों की दो टूक थी कि न्याय अभी होगा, या फिर यहीं आंदोलन होगा। पत्रकारों के क्रांतिकारी रुख को देखते हुए उप जिलाधिकारी ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया। प्रशासन ने आनन फानन में नायब तहसीलदार, संबंधित लेखपाल और भारी पुलिस फोर्स को मौके पर रवाना किया। जो अधिकारी कल तक पल्ला झाड़ रहे थे, वे पत्रकारों के दबाव में मौके पर खड़े होकर पैमाइश करवाने और कब्जा दिलाने को मजबूर हुए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दबंगों के हौसले पस्त किए गए और संजीदा बेगम को उनकी भूमि का वास्तविक हक सौंप दिया गया। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरनपुर से पत्रकार राजकुमार श्रीवास्तव, पत्रकार सबलू खान, लुकमान खां, फैजान खां, लल्ला खां और अफजल खां ने पलिया पहुंचकर मोर्चा संभाला। पलिया क्षेत्र से क्रांतिकारी पत्रकार संगठन के तहसील अध्यक्ष संजय सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज प्रजापति, संजीव झांजी, गुरसेठ पाल सहित दर्जनों पत्रकारों ने इस लड़ाई में अहम भूमिका निभाई।यह जीत उन भूमाफियाओं और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो बिना रिश्वत के फाइल आगे नहीं बढ़ाते थे। संजीदा बेगम, जिन्होंने हताश होकर आत्महत्या की चेतावनी दी थी, आज उनकी आंखों में सुकून के आंसू हैं। पत्रकारों की इस एकजुटता ने साफ संदेश दे दिया है कि यदि कलम का सिपाही सड़क पर उतरा, तो भ्रष्टाचार की दीवारें गिरनी तय हैं।
पत्रकारों की हुंकार से हिला भ्रष्ट तंत्र, 20 साल का वनवास खत्म, बेबस विधवा को प्रशासन ने दिलाया जमीन पर कब्जा (ब्यूरो चीफ लुकमान खान) पीलीभीत पीलीभीत। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की ताकत और कलम के सिपाहियों की एकजुटता के आगे आखिरकार पलिया तहसील प्रशासन को घुटने टेकने ही पड़े। पिछले 20 वर्षों से अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही एक पत्रकार की बेबस मां को सोमवार को वह हक मिल गया, जिसके लिए भ्रष्ट लेखपाल और कानूनगो उसे सालों से टरका रहे थे। पत्रकारों के उग्र तेवर और आर-पार की जंग के ऐलान के बाद प्रशासन ने आनंद-फानन में एक्शन लेते हुए पीड़ित परिवार को जमीन पर कब्जा दिलाया। ग्राम नगला निवासी संजीदा बेगम का मामला प्रशासनिक निर्लज्जता का पराकाष्ठा था। 20 साल से उनकी 30 डिसमिल जमीन पर दबंगों ने ग्राम प्रधान के संरक्षण में अवैध कब्जा कर रखा था। हद तो तब हो गई जब शनिवार को लेखपाल और कानूनगो ने मौके पर जाकर पैमाइश की खानापूर्ति की और पीड़िता से सरेआम कह दिया कि कब्जा खुद कर लीजिए, हमसे नहीं होगा। प्रशासनिक अधिकारियों की इस कायरता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जब पत्रकार एकजुट हुए, तो पूरा सिस्टम हिल गया। सोमवार को पूरनपुर और पलिया क्षेत्र के तमाम पत्रकार पलिया तहसील पहुंचे और उप जिलाधिकारी का घेराव किया। पहले तो प्रशासन ने मामले को 10 तारीख तक टालने की कोशिश की और कोरा आश्वासन दिया। लेकिन पत्रकारों ने जब तहसील परिसर में ही उग्र धरना प्रदर्शन की सीधी चेतावनी दी, तो अधिकारियों के पसीने छूट गए। पत्रकारों की दो टूक थी कि न्याय अभी होगा, या फिर यहीं आंदोलन होगा। पत्रकारों के क्रांतिकारी रुख को देखते हुए उप जिलाधिकारी ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया। प्रशासन ने आनन फानन में नायब तहसीलदार, संबंधित लेखपाल और भारी पुलिस फोर्स को मौके पर रवाना किया। जो अधिकारी कल तक पल्ला झाड़ रहे थे, वे पत्रकारों के दबाव में मौके पर खड़े होकर पैमाइश करवाने और कब्जा दिलाने को मजबूर हुए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दबंगों के हौसले पस्त किए गए और संजीदा बेगम को उनकी भूमि का वास्तविक हक सौंप दिया गया। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरनपुर से पत्रकार राजकुमार श्रीवास्तव, पत्रकार सबलू खान, लुकमान खां, फैजान खां, लल्ला खां और अफजल खां ने पलिया पहुंचकर मोर्चा संभाला। पलिया क्षेत्र से क्रांतिकारी पत्रकार संगठन के तहसील अध्यक्ष संजय सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज प्रजापति, संजीव झांजी, गुरसेठ पाल सहित दर्जनों पत्रकारों ने इस लड़ाई में अहम भूमिका निभाई।यह जीत उन भूमाफियाओं और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो बिना रिश्वत के फाइल आगे नहीं बढ़ाते थे। संजीदा बेगम, जिन्होंने हताश होकर आत्महत्या की चेतावनी दी थी, आज उनकी आंखों में सुकून के आंसू हैं। पत्रकारों की इस एकजुटता ने साफ संदेश दे दिया है कि यदि कलम का सिपाही सड़क पर उतरा, तो भ्रष्टाचार की दीवारें गिरनी तय हैं।
- लखनऊ में एक नाबालिग लड़की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें वह रोते हुए एक व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगाती नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि आरोपी ने बहाने से भरोसा जीतकर गलत हरकत की। घटना सामने आने के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच और कार्रवाई की मांग उठ रही है।1
- लखनऊ: कैबिनेट में 20+ प्रस्ताव पास, अंबेडकर प्रतिमाओं का नवीनीकरण 🔹 Brajesh Pathak ने बताया—कैबिनेट में 20 से अधिक प्रस्ताव मंजूर 🔹 बाबा साहेब B. R. Ambedkar समेत महानायकों की प्रतिमाओं का होगा नवीनीकरण 🔹 14 अप्रैल से अभियान शुरू किया जाएगा 🔹 सरकार ने सांस्कृतिक विरासत संरक्षण पर जोर दिया1
- *लम्भुआ ब्लॉक परिसर के राजकीय बीज भंडार कार्यालय के ठीक सामने लगा हैंडपंप बीमार भीषण गर्मी में पानी के लिए भटक रहे लोग — दो बार रिबोर के बाद भी समस्या बरकरार* लम्भुआ, सुल्तानपुर। लम्भुआ विकासखंड परिसर में लगा हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़ा है, जिससे ब्लॉक परिसर में आने वाले ग्रामीणों, एवं किसानों कर्मचारियों और फरियादियों को भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि संबंधित हैंडपंप को दो बार रिबोर कराए जाने के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं हो सका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विकासखंड परिसर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कार्यों से आते हैं। बढ़ते तापमान और तेज धूप के चलते लोगों को पीने के पानी की आवश्यकता अधिक महसूस हो रही है, लेकिन परिसर में लगा हैंडपंप खराब होने के कारण लोगों को इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जब इस संबंध ब्लॉक में आए फरियादी एवं किसानो ने बताया कि जिम्मेदार अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया है। दो बार रिबोर कराए जाने के बावजूद हैंडपंप का सही न होना कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों ने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि खराब पड़े हैंडपंप को शीघ्र ठीक कराया जाए या वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि इस भीषण गर्मी में लोगों को राहत मिल सके। अब देखना यह है कि *जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर समस्या पर कब तक ध्यान देते हैं और आमजन को राहत मिल पाती है या नहीं।1
- *ब्रेकिंग।* *नगर पंचायत बंथरा* बंथरा के महाराणा प्रताप वार्ड-8 में 200 मीटर सड़क पिछले डेढ़ साल से अधूरी पड़ी है। कई शिकायतों और नाप-जोख के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। नगर पंचायत पर लापरवाही के आरोप लग रहे हैं, जबकि बरसात में लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- Post by Journalist Rais Samachar News India2
- ग्राम मीर खेड़ा जेहटा में नाली की समस्या अब भी जस की तस खड़ी है, कई बार कहने पर भी काम न होना, जनता की मजबूरी बड़ी है। बातों से नहीं, काम से पहचान बनती है जनप्रतिनिधि की, उम्मीद अब भी बाकी है कि जिम्मेदारी निभेगी सही ढंग से।5
- इंदौर में एक स्कूल का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि बच्चों को कम उम्र में ही उनकी आयु के अनुसार अनुपयुक्त जानकारी दी जा रही है। इस मामले को लेकर अभिभावकों और सोशल मीडिया पर लोगों ने चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों को सही उम्र में सही शिक्षा देना जरूरी है, ताकि उनके मानसिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।1