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ग्राम मीर खेड़ा जेहटा नाली के सम्बन्ध में ग्राम मीर खेड़ा जेहटा में नाली की समस्या अब भी जस की तस खड़ी है, कई बार कहने पर भी काम न होना, जनता की मजबूरी बड़ी है। बातों से नहीं, काम से पहचान बनती है जनप्रतिनिधि की, उम्मीद अब भी बाकी है कि जिम्मेदारी निभेगी सही ढंग से।
Lavkush Yadav
ग्राम मीर खेड़ा जेहटा नाली के सम्बन्ध में ग्राम मीर खेड़ा जेहटा में नाली की समस्या अब भी जस की तस खड़ी है, कई बार कहने पर भी काम न होना, जनता की मजबूरी बड़ी है। बातों से नहीं, काम से पहचान बनती है जनप्रतिनिधि की, उम्मीद अब भी बाकी है कि जिम्मेदारी निभेगी सही ढंग से।
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- बस्ती में इलाज के नाम पर खेल? बड़ा खुलासा! 🔥🚨 👉 SK रोड बस्ती का एक डॉक्टर अब लोगों के निशाने पर! 💥 गंभीर आरोप क्या हैं? ➡️ बच्चों को जबरदस्ती भर्ती किया जा रहा है ➡️ इलाज के नाम पर खुली लूट ➡️ परिजनों से असभ्य व्यवहार ➡️ “पहले पैसा, फिर इलाज” जैसी मानसिकता! 😡 परिजनों का गुस्सा फूटा “बच्चे को डिस्चार्ज करने नहीं देते, जबरदस्ती रोककर पैसा बनाते हैं!” ⚠️ सबसे बड़ा सवाल: क्या बस्ती में अब इलाज भी मजबूरी नहीं, मजबूरी बनाकर कमाई का जरिया बन गया है? 📢 प्रशासन से सीधी मांग: 👉 तुरंत जांच हो 👉 दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो 👉 मरीजों के अधिकारों की रक्षा हो 🔥 अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो चुप मत रहिए! अपनी आवाज उठाइए, क्योंकि आज किसी और के साथ हो रहा है… कल आपके साथ भी हो सकता है!1
- थाना नाका क्षेत्र में Bank of Baroda के पास लगी भीषण आग को बुझाने के दौरान कर्मचारी के आई चोट । मिली जानकारी के अनुसार, आग पर काबू पाने में जुटे फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों के ऊपर अचानक रास्ते/इमारत का बड़ा प्लास्टर का हिस्सा गिर गया। इस हादसे में एक कर्मचारी के कंधे पर गंभीर चोट आई है। फायर विभाग और पुलिस टीम पूरी सतर्कता के साथ काम कर रही है, वहीं प्रशासन ने घटना को गंभीरता से लेते हुए सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं।3
- ब्रेकिंग न्यूज़ | लखनऊ थाना नाका क्षेत्र में स्थित Bank of Baroda के पास आज अचानक भीषण आग लगने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी के अनुसार बैंक के सामने स्थित एक गोदाम और दुकान में आग लगी, जिसने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया। घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और आग पर काबू पाने के लिए लगातार प्रयास जारी है। आसपास के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर हटाया गया है, वहीं पुलिस टीम भी मौके पर मौजूद है और हालात पर नजर बनाए हुए है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक आग लगने का कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। हालांकि, गोदाम में रखे सामान के कारण आग तेजी से फैलने की आशंका जताई जा रही है। राहत की बात यह है कि अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा लोगों से अपील की गई है कि मौके के आसपास भीड़ न लगाएं और सुरक्षा नियमों का पालन करें।3
- शकुंतला मिश्रा विश्वविद्यालय में हंगामा: दिव्यांग छात्रों के अपमान पर भड़का आक्रोश, मोहान रोड जाम लखनऊ: डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब तीन छात्राओं द्वारा दिव्यांग छात्रों का मज़ाक उड़ाने का मामला सामने आया। इस घटना के विरोध में सैकड़ों दिव्यांग छात्र सड़कों पर उतर आए और लखनऊ के व्यस्त मोहान रोड को पूरी तरह जाम कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, विश्वविद्यालय की तीन छात्राओं पर आरोप है कि उन्होंने दिव्यांग छात्रों की चलने की शैली और उनकी शारीरिक अक्षमताओं की नकल उतारते हुए एक वीडियो बनाया या सार्वजनिक रूप से उनका मज़ाक उड़ाया। जैसे ही यह बात अन्य छात्रों तक पहुँची, परिसर में भारी रोष फैल गया। दिव्यांग छात्रों का कहना है कि यह संस्थान उनकी गरिमा और शिक्षा के लिए बनाया गया है, और यहीं पर उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाना असहनीय है। दोषी छात्राओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य द्वार पर एकत्र हुए और मोहान रोड पर धरना शुरू कर दिया।1
- 6 साल पहले बाप-बेटे की हिरासत में मौत हुई थी, कोविड में दुकान खोली थी - तमिलनाडु के मदुरै कोर्ट ने तूतीकोरिन के सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को मौत की सजा सुनाई है। यह मामला 2020 में पिता-पुत्र की हिरासत में मौत से जुड़ा है।1
- इटावा में स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस में चेन खींचने के मामले में ऑन-ड्यूटी GRP सिपाही को निलंबित कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि सिपाही नशे की हालत में ट्रेन की चेन खींचकर भाग रहा था, जिसे मौके पर पकड़ लिया गया। घटना के बाद यात्रियों में नाराजगी फैल गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी जीआरपी ने तत्काल प्रभाव से सिपाही को सस्पेंड कर दिया।1
- पत्रकारों की हुंकार से हिला भ्रष्ट तंत्र, 20 साल का वनवास खत्म, बेबस विधवा को प्रशासन ने दिलाया जमीन पर कब्जा (ब्यूरो चीफ लुकमान खान) पीलीभीत पीलीभीत। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की ताकत और कलम के सिपाहियों की एकजुटता के आगे आखिरकार पलिया तहसील प्रशासन को घुटने टेकने ही पड़े। पिछले 20 वर्षों से अपनी ही जमीन के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही एक पत्रकार की बेबस मां को सोमवार को वह हक मिल गया, जिसके लिए भ्रष्ट लेखपाल और कानूनगो उसे सालों से टरका रहे थे। पत्रकारों के उग्र तेवर और आर-पार की जंग के ऐलान के बाद प्रशासन ने आनंद-फानन में एक्शन लेते हुए पीड़ित परिवार को जमीन पर कब्जा दिलाया। ग्राम नगला निवासी संजीदा बेगम का मामला प्रशासनिक निर्लज्जता का पराकाष्ठा था। 20 साल से उनकी 30 डिसमिल जमीन पर दबंगों ने ग्राम प्रधान के संरक्षण में अवैध कब्जा कर रखा था। हद तो तब हो गई जब शनिवार को लेखपाल और कानूनगो ने मौके पर जाकर पैमाइश की खानापूर्ति की और पीड़िता से सरेआम कह दिया कि कब्जा खुद कर लीजिए, हमसे नहीं होगा। प्रशासनिक अधिकारियों की इस कायरता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जब पत्रकार एकजुट हुए, तो पूरा सिस्टम हिल गया। सोमवार को पूरनपुर और पलिया क्षेत्र के तमाम पत्रकार पलिया तहसील पहुंचे और उप जिलाधिकारी का घेराव किया। पहले तो प्रशासन ने मामले को 10 तारीख तक टालने की कोशिश की और कोरा आश्वासन दिया। लेकिन पत्रकारों ने जब तहसील परिसर में ही उग्र धरना प्रदर्शन की सीधी चेतावनी दी, तो अधिकारियों के पसीने छूट गए। पत्रकारों की दो टूक थी कि न्याय अभी होगा, या फिर यहीं आंदोलन होगा। पत्रकारों के क्रांतिकारी रुख को देखते हुए उप जिलाधिकारी ने तुरंत कड़ा एक्शन लिया। प्रशासन ने आनन फानन में नायब तहसीलदार, संबंधित लेखपाल और भारी पुलिस फोर्स को मौके पर रवाना किया। जो अधिकारी कल तक पल्ला झाड़ रहे थे, वे पत्रकारों के दबाव में मौके पर खड़े होकर पैमाइश करवाने और कब्जा दिलाने को मजबूर हुए। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में दबंगों के हौसले पस्त किए गए और संजीदा बेगम को उनकी भूमि का वास्तविक हक सौंप दिया गया। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए पूरनपुर से पत्रकार राजकुमार श्रीवास्तव, पत्रकार सबलू खान, लुकमान खां, फैजान खां, लल्ला खां और अफजल खां ने पलिया पहुंचकर मोर्चा संभाला। पलिया क्षेत्र से क्रांतिकारी पत्रकार संगठन के तहसील अध्यक्ष संजय सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज प्रजापति, संजीव झांजी, गुरसेठ पाल सहित दर्जनों पत्रकारों ने इस लड़ाई में अहम भूमिका निभाई।यह जीत उन भूमाफियाओं और भ्रष्ट सरकारी कर्मचारियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो बिना रिश्वत के फाइल आगे नहीं बढ़ाते थे। संजीदा बेगम, जिन्होंने हताश होकर आत्महत्या की चेतावनी दी थी, आज उनकी आंखों में सुकून के आंसू हैं। पत्रकारों की इस एकजुटता ने साफ संदेश दे दिया है कि यदि कलम का सिपाही सड़क पर उतरा, तो भ्रष्टाचार की दीवारें गिरनी तय हैं।1
- कबीरधाम पुलिस का सट्टा कारोबार पर कड़ा प्रहार1