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आसिफाबाद में होटल में चोरी – मालिक परेशान कुमारम भीम आसिफाबाद (तेलंगाना) बुधवार की रात एक राजस्थानी होटल में अज्ञात चोरों ने खिड़की तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। 🔎 घटना विवरण - होटल के पीछे की दीवार से खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। - चोरों ने होटल मालिक नारायण लाल देवासी के अनुसार ₹10,000 नकद लेकर फरार हो गए। - इससे पहले भी इसी होटल में 2–3 बार चोरी की घटनाएँ हो चुकी हैं। 👮 पुलिस व जांच - सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। - बार-बार हो रही चोरी की घटनाओं से होटल मालिक और स्थानीय लोग चिंतित हैं। - क्षेत्र में गश्त और सुरक्षा बढ़ाने की मांग उठ रही है। 😟 जन प्रतिक्रिया - लगातार चोरी की घटनाओं से व्यापारियों में भय का माहौल। - लोग प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं।
Ramesh Solanki
आसिफाबाद में होटल में चोरी – मालिक परेशान कुमारम भीम आसिफाबाद (तेलंगाना) बुधवार की रात एक राजस्थानी होटल में अज्ञात चोरों ने खिड़की तोड़कर चोरी की वारदात को अंजाम दिया। 🔎 घटना विवरण - होटल के पीछे की दीवार से खिड़की तोड़कर अंदर प्रवेश किया गया। - चोरों ने होटल मालिक नारायण लाल देवासी के अनुसार ₹10,000 नकद लेकर फरार हो गए। - इससे पहले भी इसी होटल में 2–3 बार चोरी की घटनाएँ हो चुकी हैं। 👮 पुलिस व जांच - सूचना मिलने पर पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। - बार-बार हो रही चोरी की घटनाओं से होटल मालिक और स्थानीय लोग चिंतित हैं। - क्षेत्र में गश्त और सुरक्षा बढ़ाने की मांग उठ रही है। 😟 जन प्रतिक्रिया - लगातार चोरी की घटनाओं से व्यापारियों में भय का माहौल। - लोग प्रशासन से ठोस कदम उठाने की अपेक्षा कर रहे हैं।
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- जालौर बुधवार को शिवसेना के जिला प्रमुख रूप राज पुरोहित ने की प्रेस वार्ता प्रेस नोट आहोर नगर पालिका की करोड़ों रुपये की भूमि प्रकरण में हाईकोर्ट की बड़ी कार्रवाई 03 नवंबर 2025 के आदेश की क्रियान्विति एवं प्रभाव पर रोक, संबंधित अधिवक्ताओं को नोटिस आहोर। पत्रकार बंधुओं को ज्ञात होगा कि आहोर नगर पालिका की खसरा संख्या 1008, 1009, 977 एवं 1032 से संबंधित भूमि का मामला लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। इस भूमि की कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। इस पूरे मामले में मेरे द्वारा लगातार आहोर नगर पालिका की भूमि को बचाने तथा पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर संघर्ष किया गया। दिनांक 18 अगस्त 2026 को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष इस मामले में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। माननीय न्यायालय के आदेश में दर्ज है कि Learned Senior Counsel ने न्यायालय के समक्ष यह प्रस्तुत किया कि दिनांक 03.11.2025 का पूर्व आदेश fraud और misrepresentation के माध्यम से प्राप्त किया गया तथा जिस compromise के आधार पर पूर्व आदेश पारित हुआ, उसका कोई compromise deed रिकॉर्ड पर प्रस्तुत नहीं किया गया था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि माननीय न्यायालय के समक्ष यह भी दलील रखी गई कि 03.11.2025 को आदेश पारित होने के समय ग्राम पंचायत आहोर के पास संबंधित पक्षकारों के साथ समझौता करने का अधिकार नहीं था, क्योंकि संबंधित क्षेत्र नगर पालिका बोर्ड, आहोर के नियंत्रण में था और नगर पालिका बोर्ड का गठन दिनांक 24.04.2023 के आदेश से हो चुका था। माननीय न्यायालय ने इन प्रस्तुतियों को देखते हुए नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं तथा Stay Application पर भी नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अगली सुनवाई की तारीख तक दिनांक 03.11.2025 को पारित आदेश की implementation और effect पर रोक रहेगी। अर्थात फिलहाल दिनांक 03.11.2025 के आदेश की क्रियान्विति एवं प्रभाव पर हाईकोर्ट की रोक है। यह आहोर की जनता और नगर पालिका की सार्वजनिक भूमि की रक्षा की दिशा में अत्यंत महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। हाईकोर्ट के आदेश से उठे सबसे बड़े सवाल हाईकोर्ट के 18.08.2026 के आदेश के अनुसार न्यायालय के समक्ष यह सवाल उठाया गया कि जब मामला compromise के आधार पर तय किया गया तो compromise deed रिकॉर्ड पर क्यों नहीं थी? दूसरा गंभीर सवाल यह है कि जिस समय 03.11.2025 का आदेश पारित हुआ, उस समय संबंधित भूमि नगर पालिका बोर्ड आहोर के नियंत्रण में थी, तो ग्राम पंचायत आहोर किस अधिकार के आधार पर उस भूमि से संबंधित compromise कर सकती थी? ये दोनों सवाल अब न्यायिक रिकॉर्ड का हिस्सा हैं और इनका जवाब संबंधित जिम्मेदार लोगों को देना होगा। 03 नवंबर 2025 के आदेश से पहले क्या हुआ? मेरा आरोप है कि दिनांक 03 नवंबर 2025 के निर्णय से पहले आहोर नगर पालिका का पक्ष न्यायालय के समक्ष प्रभावी रूप से नहीं रखा गया। तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष सुजाराम प्रजापत सहित संबंधित लोगों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसी प्रकार वागपुरी, राजू जैन, कुमारपाल जैन एवं कीर्तीकुमार जैन सहित प्रकरण से जुड़े सभी संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच भी आवश्यक है। मैं किसी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं कर रहा हूं, लेकिन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होना जनता का अधिकार है। तत्कालीन तहसीलदार डॉ. मोहित आसिया को हटाने पर भी सवाल 03 नवंबर 2025 के आदेश से पहले तत्कालीन तहसीलदार डॉ. मोहित आसिया द्वारा जिला कलेक्टर, जालोर को आहोर नगर पालिका की भूमि के मामले में पैरवी को लेकर चिंता व्यक्त किए जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद उन्हें हटाकर लादूराम पवार को आहोर तहसीलदार के पद पर लगाया गया। इस स्थानांतरण का इस भूमि प्रकरण से कोई संबंध था या नहीं, इसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। इसके बाद 03.11.2025 के आदेश की पालना का हवाला देते हुए संबंधित भूमि के नामांतरण की कार्रवाई की गई। मेरा आरोप है कि इतने बड़े राजहित से जुड़े भूमि प्रकरण में आवश्यक सरकारी प्रक्रिया और अपील/नो-अपील संबंधी राय की अनदेखी करते हुए नामांतरण किया गया। मेरी शिकायत के बाद जिला कलेक्टर, जालोर के निर्देश पर आहोर एसडीएम से जांच भी करवाई गई। इस जांच में तहसीलदार की भूमिका पर आपत्तियां सामने आने की बात कही गई है। इसलिए संबंधित जांच रिपोर्ट और पूरी फाइल सार्वजनिक की जानी चाहिए। भूमि का मूल इतिहास उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार सरहद मौजा आहोर के पुराने खसरा नम्बर 313, 314 एवं 316 से संबंधित भूमि में से वर्ष 1969 में सुमेरमल एवं तेजराज पुत्रगण गुलाबचन्द द्वारा खसरा नम्बर 313 में से 6 बीघा 7.5 बिस्वा तथा खसरा नम्बर 314 में से 2 बीघा 10 बिस्वा भूमि खरीदी गई थी। इसके बाद उक्त भूमि तत्कालीन नगर पालिका आहोर को रजिस्टर्ड बख्शीसनामा के माध्यम से दी गई थी। बाद में नगर पालिका समाप्त होकर ग्राम पंचायत का गठन होने पर भूमि ग्राम पंचायत के नाम दर्ज हुई। वर्ष 2011 में इस भूमि को लेकर जिला न्यायालय जालोर में वाद प्रस्तुत हुआ। इसके बाद जिला न्यायालय के निर्णय के विरुद्ध सिविल प्रथम अपील संख्या 131/2020, ग्राम पंचायत आहोर बनाम भैरपुरी वगैरा राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर में प्रस्तुत हुई। 16.5 बीघा भूमि का सवाल दस्तावेजों में उल्लेख है कि वर्ष 1977 में नगर पालिका को लगभग 8-9 बीघा भूमि गिफ्ट की गई थी, जबकि वर्तमान खसरा संख्या 1008, 1009 एवं 977 की भूमि लगभग 2.67 हेक्टेयर अर्थात करीब 16.5 बीघा बताई गई है। इसलिए सवाल यह है कि यदि किसी पक्ष को भूमि वापस मिलने का अधिकार था तो वह वास्तविक रूप से गिफ्ट की गई भूमि तक सीमित क्यों नहीं रहा? लगभग 16.5-17 बीघा भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में हुए परिवर्तन की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच आवश्यक है। आंदोलन के दौरान मेरे साथ हुई कार्रवाई की भी जांच हो जब आहोर की जनता को इस प्रकरण की जानकारी हुई तो मैंने नगर पालिका की भूमि को बचाने के लिए आहोर में धरना-प्रदर्शन शुरू किया। मेरा आरोप है कि आंदोलन को रोकने के लिए मेरे ऊपर दबाव बनाया गया और मुझे शांति भंग के आरोप में आहोर थाने ले जाया गया तथा 24 घंटे से अधिक समय तक हिरासत में रखा गया। इसी दौरान मेरे समर्थन में आए अधिवक्ता अमिताभ जी के साथ कथित मारपीट की घटना हुई। इसके विरोध में जालोर अधिवक्ता संघ द्वारा आहोर थाने के बाहर धरना दिया गया तथा न्यायिक कार्य से संबंधित विरोध भी किया गया। इन घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जनता के दबाव के बाद हाईकोर्ट में रिव्यू/रिकॉल याचिका लगातार जनआंदोलन और जनता के दबाव के बाद राजस्थान सरकार के स्वायत्त शासन विभाग की ओर से माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के समक्ष रिव्यू/रिकॉल याचिका प्रस्तुत की गई। और अब 18 अगस्त 2026 का हाईकोर्ट आदेश सामने है। इस आदेश में न्यायालय ने संबंधित दलीलों पर नोटिस जारी किया है, Stay Application पर भी नोटिस जारी किया है और सबसे महत्वपूर्ण रूप से 03.11.2025 के पूर्व आदेश की implementation एवं effect को अगली सुनवाई तक स्थगित कर दिया है। यह आदेश आहोर की जनता के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन लड़ाई अभी समाप्त नहीं हुई है। अब पूरे मामले की सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया के सामने आएगी। मेरी मांग 1. खसरा संख्या 1008, 1009, 977 एवं 1032 की पूरी भूमि का रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। 2. 03.11.2025 के आदेश से पहले और बाद की पूरी राजस्व प्रक्रिया की जांच हो। 3. नामांतरण करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच हो। 4. तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष एवं संबंधित सभी पक्षकारों की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो। 5. 03.11.2025 के आदेश के आधार बने कथित compromise की मूल प्रति और उसका पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए। 6. यह जांच हो कि 24.04.2023 के बाद ग्राम पंचायत आहोर के पास उक्त भूमि के संबंध में समझौता करने का कोई वैधानिक अधिकार था या नहीं। 7. राजहित प्रभावित होने वाले मामले में अपील/नो-अपील संबंधी सरकारी प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच हो। 8. लगभग 8-9 बीघा की गिफ्ट भूमि और वर्तमान 16.5 बीघा से अधिक भूमि के अंतर की जांच हो। 9. मेरे धरना-प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई तथा अधिवक्ता अमिताभ जी के साथ हुई कथित घटना की निष्पक्ष जांच हो। 10. यदि जांच में किसी व्यक्ति या अधिकारी की भूमिका कानून के विपरीत पाई जाती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए। यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि आहोर की सार्वजनिक संपत्ति को बचाने और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए है। रूपराज पुरोहित शिव सेना UBT, जालोर जिला प्रमुख1
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