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पन्ना जिला अस्पताल से मरीजों के परिजनों के मोबाइल फोन चोरी होने की एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अस्पताल जैसी जगह पर, जहाँ लोग पहले से ही शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से लाचार और परेशान होते हैं, यह घटना तीमारदारों की दिक्कतों को कई गुना बढ़ा देती है। सर्जिकल वार्ड जैसी जगह से हुई इन चोरियों ने परिजनों को दोहरा झटका दिया है, क्योंकि मोबाइल न केवल घर-परिवार से जुड़े रहने का जरिया हैं बल्कि आजकल इलाज और दवाओं के ऑनलाइन भुगतान के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। इन घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक और संवेदनशीलता की कमी को उजागर किया है। इससे संकेत मिलता है कि या तो अस्पताल के सुरक्षा गार्ड सतर्क नहीं हैं या फिर उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। हालांकि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे, जिसके फुटेज के आधार पर कोतवाली पुलिस चोर की तलाश कर रही है, लेकिन सिर्फ कैमरे होना पर्याप्त नहीं है। कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग न होने के कारण सुरक्षाकर्मी संदिग्धों को रंगे हाथों पकड़ने की बजाय, चोरी होने के बाद केवल फुटेज खंगालते रह जाते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अस्पताल प्रशासन को तुरंत अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। संवेदनशील वार्डों और गैलरी में रात के समय गार्ड्स की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए, साथ ही अटेंडेंट पास सिस्टम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि रात के वक्त केवल अधिकृत तीमारदारों (पास धारकों) को ही वार्डों के आसपास रुकने की अनुमति मिले। अस्पताल प्रशासन को लाउडस्पीकर या चेतावनी बोर्ड के माध्यम से मरीजों के परिजनों को अपने कीमती सामान के प्रति सतर्क रहने के लिए लगातार सचेत करना भी आवश्यक है। कोतवाली पुलिस की तत्परता से उम्मीद है कि चोर जल्द ही पकड़ा जाएगा और पीड़ितों को उनके मोबाइल वापस मिल सकेंगे, लेकिन पन्ना जिला अस्पताल प्रशासन को अपनी साख और मरीजों का भरोसा बहाल करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने ही होंगे।

14 hrs ago
user_Media panna atul Raikwar
Media panna atul Raikwar
पन्ना, पन्ना, मध्य प्रदेश•
14 hrs ago

पन्ना जिला अस्पताल से मरीजों के परिजनों के मोबाइल फोन चोरी होने की एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अस्पताल जैसी जगह पर, जहाँ लोग पहले से ही शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से लाचार और परेशान होते हैं, यह घटना तीमारदारों की दिक्कतों को कई गुना बढ़ा देती है। सर्जिकल वार्ड जैसी जगह से हुई इन चोरियों ने परिजनों को दोहरा झटका दिया है, क्योंकि मोबाइल न केवल घर-परिवार से जुड़े रहने का जरिया हैं बल्कि आजकल इलाज और दवाओं के ऑनलाइन भुगतान के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। इन घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक और संवेदनशीलता की कमी को उजागर किया है। इससे संकेत मिलता है कि या तो अस्पताल के सुरक्षा गार्ड सतर्क नहीं हैं या फिर उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। हालांकि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे, जिसके फुटेज के आधार पर कोतवाली पुलिस चोर की तलाश कर रही है, लेकिन सिर्फ कैमरे होना पर्याप्त नहीं है। कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग न होने के कारण सुरक्षाकर्मी संदिग्धों को रंगे हाथों पकड़ने की बजाय, चोरी होने के बाद केवल फुटेज खंगालते रह जाते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अस्पताल प्रशासन को तुरंत अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। संवेदनशील वार्डों और गैलरी में रात के समय गार्ड्स की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए, साथ ही अटेंडेंट पास सिस्टम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि रात के वक्त केवल अधिकृत तीमारदारों (पास धारकों) को ही वार्डों के आसपास रुकने की अनुमति मिले। अस्पताल प्रशासन को लाउडस्पीकर या चेतावनी बोर्ड के माध्यम से मरीजों के परिजनों को अपने कीमती सामान के प्रति सतर्क रहने के लिए लगातार सचेत करना भी आवश्यक है। कोतवाली पुलिस की तत्परता से उम्मीद है कि चोर जल्द ही पकड़ा जाएगा और पीड़ितों को उनके मोबाइल वापस मिल सकेंगे, लेकिन पन्ना जिला अस्पताल प्रशासन को अपनी साख और मरीजों का भरोसा बहाल करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने ही होंगे।

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  • मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पन्ना जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुंवरपुर में 'जल जीवन मिशन' के कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सरकार की 'नल से जल' योजना का उद्देश्य आदिवासियों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार की मनमानी और विभागीय लापरवाही इस सपने को विफल कर रही है। आरोप है कि ग्राम कुंवरपुर में बिछाई जा रही पाइपलाइन तकनीकी मानकों के विपरीत है। निर्धारित नियमों के अनुसार, पाइपलाइन को जमीन के भीतर कम से कम 36 इंच या उससे अधिक गहराई में डालना अनिवार्य है ताकि वह भविष्य में आवागमन और दबाव से सुरक्षित रह सके। हालांकि, मौके पर कार्य कर रहा ठेकेदार मात्र 8 से 18 इंच की गहराई में पाइप बिछा रहा है, जिससे भविष्य में वाहनों और लोगों के आवागमन के कारण पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। इससे करोड़ों रुपये का सरकारी धन बर्बाद होने के साथ-साथ ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र के निवासियों ने ठेकेदार पर मनमानी करने और बेखौफ होने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि ग्रामीणों का दावा है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रतिनिधि सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे ठेकेदार को छूट मिल रही है। ग्रामीणों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मानकों के अनुरूप गहराई में पाइपलाइन नहीं डाली गई, तो यह योजना जल्द ही दम तोड़ देगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या यह सरकारी योजना सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी।
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    मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की पन्ना जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम कुंवरपुर में 'जल जीवन मिशन' के कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। सरकार की 'नल से जल' योजना का उद्देश्य आदिवासियों के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि ठेकेदार की मनमानी और विभागीय लापरवाही इस सपने को विफल कर रही है।

आरोप है कि ग्राम कुंवरपुर में बिछाई जा रही पाइपलाइन तकनीकी मानकों के विपरीत है। निर्धारित नियमों के अनुसार, पाइपलाइन को जमीन के भीतर कम से कम 36 इंच या उससे अधिक गहराई में डालना अनिवार्य है ताकि वह भविष्य में आवागमन और दबाव से सुरक्षित रह सके। हालांकि, मौके पर कार्य कर रहा ठेकेदार मात्र 8 से 18 इंच की गहराई में पाइप बिछा रहा है, जिससे भविष्य में वाहनों और लोगों के आवागमन के कारण पाइपलाइन के क्षतिग्रस्त होने का खतरा है। इससे करोड़ों रुपये का सरकारी धन बर्बाद होने के साथ-साथ ग्रामीणों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ेगा।

आदिवासी बहुल इस क्षेत्र के निवासियों ने ठेकेदार पर मनमानी करने और बेखौफ होने का आरोप लगाया है। इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, क्योंकि ग्रामीणों का दावा है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रतिनिधि सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदे हुए हैं, जिससे ठेकेदार को छूट मिल रही है। ग्रामीणों ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मानकों के अनुरूप गहराई में पाइपलाइन नहीं डाली गई, तो यह योजना जल्द ही दम तोड़ देगी। अब देखना यह है कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर कोई ठोस कार्रवाई करता है या यह सरकारी योजना सिर्फ कागजों तक ही सिमट कर रह जाएगी।
    user_Rupesh Jain
    Rupesh Jain
    में दैनिक भास्कर में संवाददाता हु Panna, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
  • पन्ना जिला अस्पताल से मरीजों के परिजनों के मोबाइल फोन चोरी होने की एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अस्पताल जैसी जगह पर, जहाँ लोग पहले से ही शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से लाचार और परेशान होते हैं, यह घटना तीमारदारों की दिक्कतों को कई गुना बढ़ा देती है। सर्जिकल वार्ड जैसी जगह से हुई इन चोरियों ने परिजनों को दोहरा झटका दिया है, क्योंकि मोबाइल न केवल घर-परिवार से जुड़े रहने का जरिया हैं बल्कि आजकल इलाज और दवाओं के ऑनलाइन भुगतान के लिए भी बेहद आवश्यक हैं। इन घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक और संवेदनशीलता की कमी को उजागर किया है। इससे संकेत मिलता है कि या तो अस्पताल के सुरक्षा गार्ड सतर्क नहीं हैं या फिर उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। हालांकि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे, जिसके फुटेज के आधार पर कोतवाली पुलिस चोर की तलाश कर रही है, लेकिन सिर्फ कैमरे होना पर्याप्त नहीं है। कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग न होने के कारण सुरक्षाकर्मी संदिग्धों को रंगे हाथों पकड़ने की बजाय, चोरी होने के बाद केवल फुटेज खंगालते रह जाते हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अस्पताल प्रशासन को तुरंत अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। संवेदनशील वार्डों और गैलरी में रात के समय गार्ड्स की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए, साथ ही अटेंडेंट पास सिस्टम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि रात के वक्त केवल अधिकृत तीमारदारों (पास धारकों) को ही वार्डों के आसपास रुकने की अनुमति मिले। अस्पताल प्रशासन को लाउडस्पीकर या चेतावनी बोर्ड के माध्यम से मरीजों के परिजनों को अपने कीमती सामान के प्रति सतर्क रहने के लिए लगातार सचेत करना भी आवश्यक है। कोतवाली पुलिस की तत्परता से उम्मीद है कि चोर जल्द ही पकड़ा जाएगा और पीड़ितों को उनके मोबाइल वापस मिल सकेंगे, लेकिन पन्ना जिला अस्पताल प्रशासन को अपनी साख और मरीजों का भरोसा बहाल करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने ही होंगे।
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    पन्ना जिला अस्पताल से मरीजों के परिजनों के मोबाइल फोन चोरी होने की एक चिंताजनक खबर सामने आई है। अस्पताल जैसी जगह पर, जहाँ लोग पहले से ही शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से लाचार और परेशान होते हैं, यह घटना तीमारदारों की दिक्कतों को कई गुना बढ़ा देती है। सर्जिकल वार्ड जैसी जगह से हुई इन चोरियों ने परिजनों को दोहरा झटका दिया है, क्योंकि मोबाइल न केवल घर-परिवार से जुड़े रहने का जरिया हैं बल्कि आजकल इलाज और दवाओं के ऑनलाइन भुगतान के लिए भी बेहद आवश्यक हैं।

इन घटनाओं ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक और संवेदनशीलता की कमी को उजागर किया है। इससे संकेत मिलता है कि या तो अस्पताल के सुरक्षा गार्ड सतर्क नहीं हैं या फिर उनकी संख्या पर्याप्त नहीं है। हालांकि अस्पताल में सीसीटीवी कैमरे काम कर रहे थे, जिसके फुटेज के आधार पर कोतवाली पुलिस चोर की तलाश कर रही है, लेकिन सिर्फ कैमरे होना पर्याप्त नहीं है। कैमरों की लाइव मॉनिटरिंग न होने के कारण सुरक्षाकर्मी संदिग्धों को रंगे हाथों पकड़ने की बजाय, चोरी होने के बाद केवल फुटेज खंगालते रह जाते हैं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, अस्पताल प्रशासन को तुरंत अपनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। संवेदनशील वार्डों और गैलरी में रात के समय गार्ड्स की गश्त बढ़ाई जानी चाहिए, साथ ही अटेंडेंट पास सिस्टम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि रात के वक्त केवल अधिकृत तीमारदारों (पास धारकों) को ही वार्डों के आसपास रुकने की अनुमति मिले। अस्पताल प्रशासन को लाउडस्पीकर या चेतावनी बोर्ड के माध्यम से मरीजों के परिजनों को अपने कीमती सामान के प्रति सतर्क रहने के लिए लगातार सचेत करना भी आवश्यक है। कोतवाली पुलिस की तत्परता से उम्मीद है कि चोर जल्द ही पकड़ा जाएगा और पीड़ितों को उनके मोबाइल वापस मिल सकेंगे, लेकिन पन्ना जिला अस्पताल प्रशासन को अपनी साख और मरीजों का भरोसा बहाल करने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने ही होंगे।
    user_Media panna atul Raikwar
    Media panna atul Raikwar
    पन्ना, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • पन्ना जिले के सिमरिया में, अमानगंज-पुरैना पगरा के पास जेके सीमेंट ने एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई। इस पहल के तहत, ग्रामीणजनों को सड़क सुरक्षा अभियान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
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    पन्ना जिले के सिमरिया में, अमानगंज-पुरैना पगरा के पास जेके सीमेंट ने एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन कर सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाई। इस पहल के तहत, ग्रामीणजनों को सड़क सुरक्षा अभियान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की गई।
    user_Sitaram rai
    Sitaram rai
    Video Creator सिमरिया, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • अजयगढ़ क्षेत्र के विश्रामगंज और आरामगंज की नई आदिवासी बस्तियों में 'धरती आभा कार्यक्रम' के तहत विद्युतीकरण का कार्य पूरा होने के बाद उसका विधिवत लोकार्पण किया गया है। लंबे समय से बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित इन ग्रामीण क्षेत्रों में अब रोशनी पहुंचने से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। इस नई विद्युत व्यवस्था का शुभारंभ पूजा-अर्चना के साथ किया गया। बताया गया है कि यह विद्युतीकरण कार्य पन्ना विधायक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह के प्रयासों से संभव हो सका है। बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के बच्चों की पढ़ाई, उनके घरेलू कार्य और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेना अब पहले से अधिक आसान हो जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है, और इस पहल से क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलेगी। इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। नगर परिषद अध्यक्ष सीरत सरोज गुप्ता सहित अन्य लोगों ने क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर सरकार और संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। 'धरती आभा कार्यक्रम' की इस सौगात के तहत नई आदिवासी बस्ती में पहली बार बिजली पहुंची है, जिससे क्षेत्र में विकास को एक नई रफ्तार मिली है।
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    अजयगढ़ क्षेत्र के विश्रामगंज और आरामगंज की नई आदिवासी बस्तियों में 'धरती आभा कार्यक्रम' के तहत विद्युतीकरण का कार्य पूरा होने के बाद उसका विधिवत लोकार्पण किया गया है। लंबे समय से बिजली जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित इन ग्रामीण क्षेत्रों में अब रोशनी पहुंचने से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है। इस नई विद्युत व्यवस्था का शुभारंभ पूजा-अर्चना के साथ किया गया।

बताया गया है कि यह विद्युतीकरण कार्य पन्ना विधायक ब्रजेन्द्र प्रताप सिंह के प्रयासों से संभव हो सका है। बिजली पहुंचने से आदिवासी परिवारों के बच्चों की पढ़ाई, उनके घरेलू कार्य और विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ लेना अब पहले से अधिक आसान हो जाएगा। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है, और इस पहल से क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, ग्रामीण और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। नगर परिषद अध्यक्ष सीरत सरोज गुप्ता सहित अन्य लोगों ने क्षेत्रवासियों को शुभकामनाएं दीं। ग्रामीणों ने अपनी वर्षों पुरानी मांग पूरी होने पर सरकार और संबंधित विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। 'धरती आभा कार्यक्रम' की इस सौगात के तहत नई आदिवासी बस्ती में पहली बार बिजली पहुंची है, जिससे क्षेत्र में विकास को एक नई रफ्तार मिली है।
    user_Raj singh
    Raj singh
    Local News Reporter अजयगढ़, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • पन्ना जिले के देवेंद्रनगर क्षेत्र में आज जोरदार बारिश हुई, जिसका किसान बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस बारिश के होते ही किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। अब किसान आगामी फसलों की बुवाई की तैयारी में पूरी तरह जुट जाएंगे।
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    पन्ना जिले के देवेंद्रनगर क्षेत्र में आज जोरदार बारिश हुई, जिसका किसान बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस बारिश के होते ही किसानों के चेहरे खुशी से खिल उठे हैं। अब किसान आगामी फसलों की बुवाई की तैयारी में पूरी तरह जुट जाएंगे।
    user_Sandeep shukla
    Sandeep shukla
    पत्रकारिता Devendranagar, Panna•
    2 hrs ago
  • चंदला तहसील के ग्राम पंचायत भगौरा में, कुछ अहिरवार परिवार के सदस्यों ने अपनी जमीन पर अवैध कब्ज़े और मारपीट की शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मिठाई लाल अहिरवार, बाबू अहिरवार, इंद्रजीत अहिरवार और रामकिशोर अहिरवार ने उनकी ज़मीन हड़प ली है, जो उनके हिस्से में आ रही है, और उसे देने से मना कर रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मिठाई लाल, इंद्रजीत और बाबू अहिरवार ने उनकी जमीन जोत ली है और उनके पिता के साथ मारपीट की है। इस गंभीर स्थिति के चलते, पीड़ित परिवार ने तहसीलदार से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि वे आकर उनके जमीन के विवाद का निपटारा करवाएं, खासकर 4 जुलाई 2026 (रविवार) और 5 जुलाई 2026 की तारीखों का जिक्र करते हुए।
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    चंदला तहसील के ग्राम पंचायत भगौरा में, कुछ अहिरवार परिवार के सदस्यों ने अपनी जमीन पर अवैध कब्ज़े और मारपीट की शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, मिठाई लाल अहिरवार, बाबू अहिरवार, इंद्रजीत अहिरवार और रामकिशोर अहिरवार ने उनकी ज़मीन हड़प ली है, जो उनके हिस्से में आ रही है, और उसे देने से मना कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि मिठाई लाल, इंद्रजीत और बाबू अहिरवार ने उनकी जमीन जोत ली है और उनके पिता के साथ मारपीट की है। इस गंभीर स्थिति के चलते, पीड़ित परिवार ने तहसीलदार से हाथ जोड़कर निवेदन किया है कि वे आकर उनके जमीन के विवाद का निपटारा करवाएं, खासकर 4 जुलाई 2026 (रविवार) और 5 जुलाई 2026 की तारीखों का जिक्र करते हुए।
    user_Babli Varma
    Babli Varma
    चंदला, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मध्य प्रदेश के दमोह में जिला कांग्रेस कमेटी ओबीसी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसका संचालन मध्य प्रदेश कांग्रेस ओबीसी के समन्वयक राव लखन सिंह के आह्वान पर हुआ। इस बैठक में जिला कांग्रेस कमेटी दमोह ओबीसी के प्रभारी शिव बालक लोधी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि जिला अध्यक्ष मानक पटेल ने इसकी अध्यक्षता की। इस आयोजन में श्री बसंत कुशवाहा, जो पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के पद पर रह चुके हैं, भी शामिल हुए। बैठक के प्रमुख बिंदुओं में नए जिला अध्यक्ष का चयन शामिल था। इसके साथ ही, कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पोलिंग स्तर तक संगठन बनाने पर जोर दिया गया। ओबीसी वर्ग के लोगों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इस दौरान, किसानों के साथ दुर्व्यवहार करने वाली भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प भी लिया गया। यह कार्यक्रम जिला कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारी, प्रदेश कांग्रेस ओबीसी के सभी समन्वयक और ब्लॉक अध्यक्षों सहित सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
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    मध्य प्रदेश के दमोह में जिला कांग्रेस कमेटी ओबीसी की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसका संचालन मध्य प्रदेश कांग्रेस ओबीसी के समन्वयक राव लखन सिंह के आह्वान पर हुआ। इस बैठक में जिला कांग्रेस कमेटी दमोह ओबीसी के प्रभारी शिव बालक लोधी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि जिला अध्यक्ष मानक पटेल ने इसकी अध्यक्षता की। इस आयोजन में श्री बसंत कुशवाहा, जो पूर्व जिला अध्यक्ष कांग्रेस पिछड़ा वर्ग विभाग के पद पर रह चुके हैं, भी शामिल हुए।

बैठक के प्रमुख बिंदुओं में नए जिला अध्यक्ष का चयन शामिल था। इसके साथ ही, कांग्रेस पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाने के लिए पोलिंग स्तर तक संगठन बनाने पर जोर दिया गया। ओबीसी वर्ग के लोगों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में अधिकार सुनिश्चित करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इस दौरान, किसानों के साथ दुर्व्यवहार करने वाली भाजपा सरकार को उखाड़ फेंकने का संकल्प भी लिया गया।

यह कार्यक्रम जिला कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारी, प्रदेश कांग्रेस ओबीसी के सभी समन्वयक और ब्लॉक अध्यक्षों सहित सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
    user_AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
    AIMA MEDIYA (जन - जन की आवाज) सतना मध्यप्रदेश
    Internet shop नागौद, सतना, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • बारिश के मौसम में अधूरी पड़ी एक पुलिया पन्ना जिले में बच्चों की शिक्षा के लिए बड़ी बाधा और उनके जीवन के लिए एक गंभीर सुरक्षा जोखिम बन गई है। इस समस्या के चलते छोटे बच्चे स्कूल या आंगनबाड़ी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनके पोषण और भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है। इस गंभीर समस्या के त्वरित समाधान के लिए ग्रामीण और अभिभावक एकजुट होकर कदम उठा सकते हैं। उन्हें तत्काल 'बाल सुरक्षा' को आधार बनाकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार की 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करते समय स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि अधूरी पुलिया के कारण स्कूली बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जान को खतरा है। ऐसी शिकायतों को उच्च प्राथमिकता पर लिया जाता है। साथ ही, ग्रामीणों का एक समूह, जिसमें विशेषकर महिलाएं और अभिभावक शामिल हों, हर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर होने वाली कलेक्टर जनसुनवाई में जाएं। वहां अधूरी पुलिया की तस्वीरें दिखाकर तुरंत काम शुरू करने या एक वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता बनाने की मांग की जाए। जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों पर दबाव बनाना भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को यह पता लगाना चाहिए कि पुलिया किस विभाग (जैसे लोक निर्माण विभाग PWD, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा RES, या ग्राम पंचायत) के अंतर्गत आती है, और फिर उन पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाना चाहिए। जनपद पंचायत के CEO या संबंधित विभाग के इंजीनियर को लिखित शिकायत सौंपी जाए। स्थानीय सरपंच और सचिव से भी यह कहा जाए कि जब तक पक्की पुलिया नहीं बन जाती, तब तक बच्चों के निकलने के लिए मिट्टी-मुरम डलवाकर या पाइप डालकर एक अस्थायी सुरक्षित रास्ता तुरंत तैयार करवाया जाए। इसके अतिरिक्त, स्कूल के प्रधानाध्यापक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से भी इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारियों (जैसे बीआरसी BRC, डीपीसी DPC या महिला बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर) को भेजने के लिए कहा जाना चाहिए। जब यह बात विभागीय रिकॉर्ड में आएगी कि रास्ते के अवरुद्ध होने के कारण बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है, तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई में तेजी आएगी। जब तक प्रशासन कोई स्थायी कदम नहीं उठाता, तब तक ग्रामीण स्तर पर भी तात्कालिक सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं। गांव के कुछ युवाओं या पंचों को सुबह और दोपहर (बच्चों के स्कूल आने-जाने के समय) अधूरी पुलिया के पास मौजूद रहना चाहिए, ताकि छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर सुरक्षित रूप से नाला या रास्ता पार कराया जा सके।
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    बारिश के मौसम में अधूरी पड़ी एक पुलिया पन्ना जिले में बच्चों की शिक्षा के लिए बड़ी बाधा और उनके जीवन के लिए एक गंभीर सुरक्षा जोखिम बन गई है। इस समस्या के चलते छोटे बच्चे स्कूल या आंगनबाड़ी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिससे उनके पोषण और भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। यह स्थिति वास्तव में चिंताजनक है।

इस गंभीर समस्या के त्वरित समाधान के लिए ग्रामीण और अभिभावक एकजुट होकर कदम उठा सकते हैं। उन्हें तत्काल 'बाल सुरक्षा' को आधार बनाकर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार की 181 सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत करते समय स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि अधूरी पुलिया के कारण स्कूली बच्चों और गर्भवती महिलाओं की जान को खतरा है। ऐसी शिकायतों को उच्च प्राथमिकता पर लिया जाता है। साथ ही, ग्रामीणों का एक समूह, जिसमें विशेषकर महिलाएं और अभिभावक शामिल हों, हर मंगलवार को जिला मुख्यालय पर होने वाली कलेक्टर जनसुनवाई में जाएं। वहां अधूरी पुलिया की तस्वीरें दिखाकर तुरंत काम शुरू करने या एक वैकल्पिक सुरक्षित रास्ता बनाने की मांग की जाए।

जिम्मेदार विभागों और अधिकारियों पर दबाव बनाना भी महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों को यह पता लगाना चाहिए कि पुलिया किस विभाग (जैसे लोक निर्माण विभाग PWD, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा RES, या ग्राम पंचायत) के अंतर्गत आती है, और फिर उन पर कार्रवाई के लिए दबाव बनाना चाहिए। जनपद पंचायत के CEO या संबंधित विभाग के इंजीनियर को लिखित शिकायत सौंपी जाए। स्थानीय सरपंच और सचिव से भी यह कहा जाए कि जब तक पक्की पुलिया नहीं बन जाती, तब तक बच्चों के निकलने के लिए मिट्टी-मुरम डलवाकर या पाइप डालकर एक अस्थायी सुरक्षित रास्ता तुरंत तैयार करवाया जाए। इसके अतिरिक्त, स्कूल के प्रधानाध्यापक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से भी इस संबंध में एक लिखित रिपोर्ट अपने उच्च अधिकारियों (जैसे बीआरसी BRC, डीपीसी DPC या महिला बाल विकास विभाग के सुपरवाइजर) को भेजने के लिए कहा जाना चाहिए। जब यह बात विभागीय रिकॉर्ड में आएगी कि रास्ते के अवरुद्ध होने के कारण बच्चों की उपस्थिति प्रभावित हो रही है, तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई में तेजी आएगी।

जब तक प्रशासन कोई स्थायी कदम नहीं उठाता, तब तक ग्रामीण स्तर पर भी तात्कालिक सुरक्षा उपाय किए जा सकते हैं। गांव के कुछ युवाओं या पंचों को सुबह और दोपहर (बच्चों के स्कूल आने-जाने के समय) अधूरी पुलिया के पास मौजूद रहना चाहिए, ताकि छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर सुरक्षित रूप से नाला या रास्ता पार कराया जा सके।
    user_Media panna atul Raikwar
    Media panna atul Raikwar
    पन्ना, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
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