रिपोर्ट भागीरथ विश्वकर्मा जिला पन्ना मध्यप्रदेश। हेडलाइन– विस्थापित गांवों की शासकीय संपत्ति पर किसका कब्जा? मझौली के शासकीय स्कूल से गायब चैनल गेट, खिड़की, दरवाजों से वन विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल? एंकर– पन्ना। कहते हैं कि चोरी वहां होती है जहां निगरानी कमजोर हो, लेकिन यदि कड़ी सुरक्षा और प्रतिबंधों के बीच भी सरकारी संपत्ति गायब हो जाए, तो उंगलियां केवल चोर पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर उठती हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित ग्राम मझौली में शासकीय स्कूल भवन से दरवाजे, चैनल गेट और अन्य सामग्री गायब होने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मझौली सहित लगभग आधा दर्जन गांवों का विस्थापन किया गया। ग्रामीणों को मुआवजा देकर आबादी क्षेत्र के मकानों को जमींदोज कर दिया गया, जबकि शासकीय भवनों को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश बिना SDM की अनुमति के प्रतिबंधित है । ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा क्षेत्र वन विभाग की निगरानी में था, तब शासकीय स्कूल भवन से एक चैनल गेट, खिड़कियां और तीन दरवाजे आखिर बाहर कैसे पहुंच गए? विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन से निकाली गई शासकीय सामग्री एक उसी गांव में पदस्थ रह चुके शासकीय शिक्षक के घर पर रखी गई है और उसका उपयोग भी किया जा रहा है। मामले ने सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी मयंक शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित शिक्षक ने उन्हें सूचना दी थी कि सामान सुरक्षित रखा गया है और उसे समय रहते वापस स्कूल भवन में रखवा दिया जाएगा! यहीं से कई सवाल जन्म लेते हैं। यदि सामग्री सरकारी भवन की थी तो उसे निजी घर तक पहुंचाने की अनुमति किसने दी? जब SDM की अनुमति के बिना विस्थापित गांवों के परिक्षेत्र में दखलंदाजी देना मना हैं इसके बावजूद हजारों रुपए की लागत से बने चैनल गेट, 4 दरवाजे, 3 खिड़कियां उखाड़े एवं किसके कहने से वर्षों से पदस्थ शासकीय शिक्षक के घर रखे गए? सरकारी संपत्ति पर डांका या वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का सीधा परिणाम आखिर इतना बड़ा सामान बन विभाग की निगरानी के बीच बाहर कैसे आया? यदि यह वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था तो उसका कोई आदेश या अभिलेख क्यों नहीं है? और यदि यह बिना अनुमति हुआ, तो फिर इसे शासकीय संपत्ति के अनधिकृत उपयोग या चोरी के रूप में दर्ज कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद अब सामान वापस रखने की बात कही जा रही है। उनका आरोप है कि यदि यह सब वैध था तो पहले ही इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि अवैध था, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब सवाल सिर्फ गायब हुए दरवाजों और चैनल गेट का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो एक प्रतिबंधित और वन विभाग की निगरानी वाले क्षेत्र में भी शासकीय संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकी। ग्रामीणों ने पूरे मामलेज़ की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पन्ना से भागीरथ विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट।
रिपोर्ट भागीरथ विश्वकर्मा जिला पन्ना मध्यप्रदेश। हेडलाइन– विस्थापित गांवों की शासकीय संपत्ति पर किसका कब्जा? मझौली के शासकीय स्कूल से गायब चैनल गेट, खिड़की, दरवाजों से वन विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल? एंकर– पन्ना। कहते हैं कि चोरी वहां होती है जहां निगरानी कमजोर हो, लेकिन यदि कड़ी सुरक्षा और प्रतिबंधों के बीच भी सरकारी संपत्ति गायब हो जाए, तो उंगलियां केवल चोर पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर उठती हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित ग्राम मझौली में शासकीय स्कूल भवन से दरवाजे, चैनल गेट और अन्य सामग्री गायब होने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मझौली सहित लगभग आधा दर्जन गांवों का विस्थापन किया गया। ग्रामीणों को मुआवजा देकर आबादी क्षेत्र के मकानों को जमींदोज कर दिया गया, जबकि शासकीय भवनों को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश बिना SDM की अनुमति के प्रतिबंधित है । ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा क्षेत्र वन विभाग की निगरानी में था, तब शासकीय स्कूल भवन से एक चैनल गेट, खिड़कियां और तीन दरवाजे आखिर बाहर कैसे पहुंच गए? विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन से निकाली गई शासकीय सामग्री एक उसी गांव में पदस्थ रह चुके शासकीय शिक्षक के घर पर रखी गई है और उसका उपयोग भी किया जा रहा है। मामले ने सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी मयंक शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित शिक्षक ने उन्हें सूचना दी थी कि सामान सुरक्षित रखा गया है और उसे समय रहते वापस स्कूल भवन में रखवा दिया जाएगा! यहीं से कई सवाल जन्म लेते हैं। यदि सामग्री सरकारी भवन की थी तो उसे निजी घर तक पहुंचाने की अनुमति किसने दी? जब SDM की अनुमति के बिना विस्थापित गांवों के परिक्षेत्र में दखलंदाजी देना मना हैं इसके बावजूद हजारों रुपए की लागत से बने चैनल गेट, 4 दरवाजे, 3 खिड़कियां उखाड़े एवं किसके कहने से वर्षों से पदस्थ शासकीय शिक्षक के घर रखे गए? सरकारी संपत्ति पर डांका या वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का सीधा परिणाम आखिर इतना बड़ा सामान बन विभाग की निगरानी के बीच बाहर कैसे आया? यदि यह वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था तो उसका कोई आदेश या अभिलेख क्यों नहीं है? और यदि यह बिना अनुमति हुआ, तो फिर इसे शासकीय संपत्ति के अनधिकृत उपयोग या चोरी के रूप में दर्ज कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद अब सामान वापस रखने की बात कही जा रही है। उनका आरोप है कि यदि यह सब वैध था तो पहले ही इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि अवैध था, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब सवाल सिर्फ गायब हुए दरवाजों और चैनल गेट का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो एक प्रतिबंधित और वन विभाग की निगरानी वाले क्षेत्र में भी शासकीय संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकी। ग्रामीणों ने पूरे मामलेज़ की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पन्ना से भागीरथ विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट।
- रिपोर्ट भागीरथ विश्वकर्मा जिला पन्ना मध्यप्रदेश। हेडलाइन– विस्थापित गांवों की शासकीय संपत्ति पर किसका कब्जा? मझौली के शासकीय स्कूल से गायब चैनल गेट, खिड़की, दरवाजों से वन विभाग की निगरानी पर उठे गंभीर सवाल? एंकर– पन्ना। कहते हैं कि चोरी वहां होती है जहां निगरानी कमजोर हो, लेकिन यदि कड़ी सुरक्षा और प्रतिबंधों के बीच भी सरकारी संपत्ति गायब हो जाए, तो उंगलियां केवल चोर पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर उठती हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत विस्थापित ग्राम मझौली में शासकीय स्कूल भवन से दरवाजे, चैनल गेट और अन्य सामग्री गायब होने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के तहत मझौली सहित लगभग आधा दर्जन गांवों का विस्थापन किया गया। ग्रामीणों को मुआवजा देकर आबादी क्षेत्र के मकानों को जमींदोज कर दिया गया, जबकि शासकीय भवनों को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया। वर्तमान में पूरे क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश बिना SDM की अनुमति के प्रतिबंधित है । ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पूरा क्षेत्र वन विभाग की निगरानी में था, तब शासकीय स्कूल भवन से एक चैनल गेट, खिड़कियां और तीन दरवाजे आखिर बाहर कैसे पहुंच गए? विस्थापित ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल भवन से निकाली गई शासकीय सामग्री एक उसी गांव में पदस्थ रह चुके शासकीय शिक्षक के घर पर रखी गई है और उसका उपयोग भी किया जा रहा है। मामले ने सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब इस संबंध में वन परिक्षेत्र अधिकारी मयंक शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि संबंधित शिक्षक ने उन्हें सूचना दी थी कि सामान सुरक्षित रखा गया है और उसे समय रहते वापस स्कूल भवन में रखवा दिया जाएगा! यहीं से कई सवाल जन्म लेते हैं। यदि सामग्री सरकारी भवन की थी तो उसे निजी घर तक पहुंचाने की अनुमति किसने दी? जब SDM की अनुमति के बिना विस्थापित गांवों के परिक्षेत्र में दखलंदाजी देना मना हैं इसके बावजूद हजारों रुपए की लागत से बने चैनल गेट, 4 दरवाजे, 3 खिड़कियां उखाड़े एवं किसके कहने से वर्षों से पदस्थ शासकीय शिक्षक के घर रखे गए? सरकारी संपत्ति पर डांका या वन विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत का सीधा परिणाम आखिर इतना बड़ा सामान बन विभाग की निगरानी के बीच बाहर कैसे आया? यदि यह वैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा था तो उसका कोई आदेश या अभिलेख क्यों नहीं है? और यदि यह बिना अनुमति हुआ, तो फिर इसे शासकीय संपत्ति के अनधिकृत उपयोग या चोरी के रूप में दर्ज कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं की गई? ग्रामीणों का कहना है कि मामला सार्वजनिक होने के बाद अब सामान वापस रखने की बात कही जा रही है। उनका आरोप है कि यदि यह सब वैध था तो पहले ही इसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि अवैध था, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अब सवाल सिर्फ गायब हुए दरवाजों और चैनल गेट का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का है जो एक प्रतिबंधित और वन विभाग की निगरानी वाले क्षेत्र में भी शासकीय संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकी। ग्रामीणों ने पूरे मामलेज़ की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदारों के खिलाफ एफआईआर और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पन्ना से भागीरथ विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट।1
- मासूम बच्चे को किडनैप करने वाले हैवान - सावधान रहे सतर्क रहे मासूम बच्चे को किडनैप करने वाले हैवान - सावधान रहे सतर्क रहे1
- 🔱 पन्ना से चौमुखनाथ धाम के लिए निकली कांवड़ यात्रा, देर रात सलेहा के पास पहुंचे शिवभक्त सावन में भक्ति का अनूठा नजारा, कांवड़ में जल लेकर पैदल चल रहे श्रद्धालु पन्ना/सलेहा। सावन माह के पावन अवसर पर भगवान भोलेनाथ के प्रति आस्था और भक्ति का अनूठा नजारा देखने को मिला। पन्ना से श्रद्धालुओं का एक दल कांवड़ यात्रा पर निकलकर सलेहा क्षेत्र के समीप पहुंचा। देर रात यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की मुलाकात पत्रकार अभिषेक मिश्रा से हुई। कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पन्ना से पैदल कांवड़ लेकर चौमुखनाथ महादेव मंदिर में भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए रवाना हुए हैं। श्रद्धालुओं के अनुसार उन्होंने यात्रा पिछली रात पन्ना से प्रारंभ की थी और अब देर रात तक सलेहा के करीब पहुंच चुके हैं। कांवड़ में पवित्र जल लेकर शिवभक्त पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं।🔱 प्राचीन चौमुखनाथ मंदिर में विराजमान हैं चतुर्मुखी शिव पन्ना जिले के नचना क्षेत्र स्थित चौमुखनाथ मंदिर अपनी प्राचीनता और अद्वितीय शिव प्रतिमा के लिए प्रसिद्ध है। जिला प्रशासन के अनुसार यहां का चतुर्मुख मंदिर लगभग 9वीं शताब्दी का माना जाता है और यह उत्तर भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशेष झलक प्रस्तुत करता है। मंदिर में भगवान शिव का दुर्लभ चतुर्मुखी स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यहां का चतुर्मुखी शिवलिंग उत्तर गुप्तकाल से संबंधित है और इसके चारों मुख भगवान शिव के अलग-अलग स्वरूपों को दर्शाते हैं। �सावन के महीने में यहां शिवभक्तों की आस्था और भी गहरी दिखाई देती है। दूर-दूर से श्रद्धालु भगवान चौमुखनाथ के दर्शन एवं जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं। कांवड़ यात्रियों की यह तस्वीर सावन की उस आस्था को दर्शाती है, जिसमें पैदल यात्रा की कठिनाई भी भगवान शिव की भक्ति के सामने छोटी नजर आती है। 🚩 हर-हर महादेव के जयघोष के साथ आगे बढ़ रहे शिवभक्त 🕉️ जय चौमुख नाथ महाराज की! 🔱3
- गुनौर से जगन्नाथ धाम तक साइकिल यात्रा का भव्य आगाज बालाजी सरकार मंदिर से नगर वासियों ने दी उत्साह पूर्वक विदाई *गुनौर से जगन्नाथ धाम तक साइकिल यात्रा का भव्य आगाज: बालाजी सरकार, प्रमोद और विनोद कोरी को नगर वासियों ने दी उत्साह पूर्वक विदाई*।। एंकर -: आस्था, संकल्प और अनूठी धार्मिक भावना का अद्भुत संगम सोमवार को गुन्नौर की पावन धरा पर देखने को मिला। क्षेत्र के श्रद्धालु बालाजी सरकार श्री चित्रकूट मैहर के अनन्य भक्त प्रमोद कोरी और विनोद कोरी ने पवित्र धार्मिक स्थल जगन्नाथ पुरी तक की विशाल साइकिल यात्रा का शुभारंभ किया। इस कठिन और भक्तिमयी यात्रा का मुख्य उद्देश्य धार्मिक सद्भाव, लोक कल्याण और जगन्नाथ धाम में आस्था का ध्वज फहराना है। यात्रा के शुभारंभ अवसर पर गुन्नौर की नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना मलखान सिंह, उपाध्यक्ष चंदन सपेरा, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अरुण कुमार गौतम, कुलदीप राजा, धर्मराज कश्यप सेवा दल ब्लॉक अध्यक्ष संतोष लोधी, नगर अध्यक्ष रामस्वरूप पटेल एवं उमेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने मुख्य मार्ग पर यात्रियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। फूलों की वर्षा और तिलक से हुआ भव्य अभिनंदन साइकिल यात्रियों के साहस और अटल भक्ति की सराहना करते हुए उपस्थित जनों ने उन्हें रोली-अक्षत का तिलक लगाया और पुष्पहार पहनाकर यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस दौरान 'जय श्री राम', 'जय बालाजी महाराज' और 'जय जगन्नाथ स्वामी' के जयकारों से पूरा गुन्नौर नगर गुंजायमान हो उठा। क्षेत्रीय जनप्रतियों ने दी मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं बालक दास महंत मुंह मीठा कर के रवाना किया जिसमें नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना मलखान सिंह, कॉग्रेस अध्यक्ष अरुण कुमार गौतम ने कहा कि इस प्रकार की कठिन साइकिल यात्राएं केवल शारीरिक बल से नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा और आत्मबल से पूरी होती हैं। गुन्नौर नगर के युवाओं का यह धार्मिक संकल्प पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उपस्थित सभी नेताओं और नागरिकों ने संयुक्त रूप से भगवान जगन्नाथ और बालाजी महाराज से यात्रियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा और निर्विघ्न यात्रा की प्रार्थना की। यह यात्रा विभिन्न धार्मिक स्थलों से होते हुए पवित्र जगन्नाथ पुरी धाम पहुंचेगी, जहाँ भगवान जगन्नाथ के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के साथ इस संकल्प यात्रा का विश्राम होगा। नगर वासियों ने ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच साइकिल यात्रियों को गंतव्य की ओर रवाना किया।3
- गुनौर से जगन्नाथ धाम तक साइकिल यात्रा का श्रीगणेश बालाजी सरकार मंदिर से प्रमोद-विनोद कोरी ने शुरू की संकल्प यात्रा, पुष्पवर्षा और जयघोष से गूंजा गुनौर गुनौर से जगन्नाथ धाम तक साइकिल यात्रा का श्रीगणेश बालाजी सरकार मंदिर से प्रमोद-विनोद कोरी ने शुरू की संकल्प यात्रा, पुष्पवर्षा और जयघोष से गूंजा गुनौर गुनौर । आस्था, श्रद्धा और संकल्प की मिसाल पेश करते हुए गुन्नौर के युवा प्रमोद कोरी एवं विनोद कोरी ने सोमवार को बालाजी सरकार मंदिर से जगन्नाथ पुरी धाम तक साइकिल यात्रा का शुभारंभ किया। चित्रकूट धाम एवं मैहर धाम के अनन्य भक्त दोनों यात्रियों का उद्देश्य धार्मिक सद्भाव, लोक कल्याण और भगवान जगन्नाथ के प्रति अपनी आस्था प्रकट करना है। यात्रा के शुभारंभ अवसर पर नगर परिषद अध्यक्ष श्रीमती अर्चना मलखान सिंह, उपाध्यक्ष चंदन सपेरा, पत्रकार सुशील विश्वकर्मा, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अरुण कुमार गौतम, कुलदीप राजा, धर्मराज कश्यप, सेवा दल ब्लॉक अध्यक्ष संतोष लोधी, नगर अध्यक्ष रामस्वरूप पटेल एवं उमेश गुप्ता सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और नगरवासी उपस्थित रहे। पुष्पवर्षा और तिलक से हुआ भव्य स्वागत साइकिल यात्रियों के रवाना होने के दौरान नगरवासियों ने उनका तिलक लगाकर एवं पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया। जगह-जगह फूलों की वर्षा की गई। 'जय श्री राम', 'जय बालाजी महाराज' और 'जय जगन्नाथ स्वामी' के जयघोष से गुन्नौर का माहौल भक्तिमय हो गया। महंत बालक दास जी ने मुंह मीठा कराकर दी शुभकामनाएं बालाजी सरकार मंदिर के महंत बालक दास जी ने दोनों साइकिल यात्रियों का मुंह मीठा कराया और मंगलमय यात्रा की शुभकामनाएं देते हुए उन्हें रवाना किया। ढोल-नगाड़ों और जयघोष के बीच नगरवासियों ने यात्रियों का उत्साह बढ़ाया तथा उनके धार्मिक संकल्प की सराहना की। नगर परिषद अध्यक्ष अर्चना मलखान सिंह, पत्रकार सुशील विश्वकर्मा एवं कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष अरुण कुमार गौतम ने कहा कि ऐसी कठिन धार्मिक यात्राएं केवल शारीरिक क्षमता से नहीं, बल्कि अटूट श्रद्धा, संकल्प और आत्मबल से पूरी होती हैं। गुन्नौर के युवाओं का यह धार्मिक संकल्प पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। इस दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने भगवान जगन्नाथ और बालाजी महाराज से दोनों यात्रियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं निर्विघ्न यात्रा की प्रार्थना की। साइकिल यात्रा विभिन्न धार्मिक स्थलों से होते हुए जगन्नाथ पुरी धाम पहुंचेगी, जहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन एवं पूजा-अर्चना के बाद संकल्प यात्रा का समापन होगा। रिपोर्टर — अशोक विश्वकर्मा DNN न्यूज़, गुन्नौर/पन्ना4
- खनिज परिवहन की समस्याओं को लेकर हाईवा ट्रांसपोर्ट यूनियन का ज्ञापन खनिज परिवहन की समस्याओं को लेकर हाईवा ट्रांसपोर्ट यूनियन का ज्ञापन कटनी। खनिज परिवहन से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के निराकरण की मांग को लेकर हाईवा ट्रांसपोर्ट यूनियन, कटनी ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। यूनियन ने टीपी जारी होने के बाद ओवरलोडिंग की कार्रवाई, रेत खदानों के संचालन, क्यूबिक मीटर और GVW की माप में विसंगति, अवैध वसूली और हाईटेक कैमरों के चलते वाहनों को रोककर होने वाली परेशानी सहित कई मुद्दे उठाए। यूनियन ने मांग की है कि खनिज परिवहन से जुड़ी कार्रवाई में टीपी जारी करने वाली और खनिज प्राप्त करने वाली फर्म की जिम्मेदारी भी तय की जाए। साथ ही सीमेंट प्लांट और शासकीय निर्माण कार्यों में खनिज परिवहन के लिए उचित भाड़ा निर्धारण की मांग की गई है। 7 दिन में समाधान नहीं तो अनिश्चितकालीन वाहन खड़े करने की चेतावनी यूनियन ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि सात दिवस में समस्याओं का निराकरण नहीं हुआ, तो खनिज परिवहन में लगे सभी वाहन शांतिपूर्वक अनिश्चितकालीन समय के लिए खड़े किए जा सकते हैं। यूनियन ने इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही है।1
- दो सूत्रीय मांगों को लेकर जिला लिपिकों का भोपाल में प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन दो सूत्रीय मांगों को लेकर जिला लिपिकों का भोपाल में प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन दमोह - दो सूत्रीय मांगों के समर्थन में मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लिपिक कर्मचारियों ने राजधानी भोपाल स्थित वल्लभ भवन मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान माननीय मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया, जिसमें हजारों की संख्या में लिपिक कर्मचारी शामिल हुए। कार्यक्रम का नेतृत्व जिला लिपिक वर्गीय अध्यक्ष श्री राजीव बड़कुल द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि लिपिक वर्ग की प्रमुख मांगों में अनुकंपा नियुक्ति में CPCT की अनिवार्यता समाप्त करना तथा मंत्रालय के लिपिक कर्मचारियों के समान वेतनमान लागू करना शामिल है। इस प्रदर्शन में दमोह जिले के शिक्षा, वन, लोक निर्माण विभाग (PWD), आईटीआई एवं स्वास्थ्य विभाग के अनेक लिपिकों ने भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया। बड़ी संख्या में कर्मचारियों की उपस्थिति ने शासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। कार्यक्रम के अंत में जिला लिपिक संघ के अध्यक्ष ने अपने अवकाश लेकर आंदोलन में शामिल हुए सभी लिपिक कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि मांगों के निराकरण तक संघर्ष जारी रहेगा।1
- रिपोर्ट — भागीरथ विश्वकर्मा जिला — पन्ना, मध्यप्रदेश । हेडलाइन— सांदीपनी विद्यालय के बच्चों ने समझी डायल-112 की कार्यप्रणाली, पुलिस कंट्रोल रूम का किया भ्रमण ! एंकर— पन्ना में “जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद कार्यक्रम” के तहत पन्ना पुलिस अधीक्षक श्री मति निवेदिता नायडू, अतिरिक पुलिस अधीक्षक श्री मति बंदना सिंह चौहान एवं SDOP एस.पी सिंह बघेल के मार्गदर्शन पर कोतवाली थाना प्रभारी रोहित मिश्रा द्वारा सांदीपनी शासकीय मॉडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के छात्र-छात्राओं को पुलिस की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सेवाओं की जानकारी दी गई। इस दौरान बच्चों को थाना कोतवाली, पुलिस कंट्रोल रूम और रेडियो शाखा का भ्रमण कराया गया। विद्यार्थियों ने खास तौर पर डायल-112 आपातकालीन सेवा की कार्यप्रणाली को समझा और अधिकारियों से कई सवाल भी किए। पन्ना में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान सांदीपनी विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली को करीब से जाना। थाना कोतवाली में थाना प्रभारी निरीक्षक रोहित मिश्रा ने विद्यार्थियों को पुलिस की जिम्मेदारियों और थाने की सामान्य कार्यप्रणाली के बारे में जानकारी दी। इसके बाद छात्रों को पुलिस कंट्रोल रूम ले जाया गया, जहां कंट्रोल रूम प्रभारी हरवचन कुड़ापे और सहायक जीतेन्द्र कुमार अवस्थी ने बच्चों को कंट्रोल रूम की कार्यप्रणाली समझाई। इस दौरान विद्यार्थियों को डायल-112 आपातकालीन सेवा के बारे में विस्तार से बताया गया। बच्चों को समझाया गया कि आपात स्थिति में डायल-112 के माध्यम से पुलिस सहायता के लिए सूचना दी जा सकती है। सूचना मिलने के बाद कंट्रोल रूम से संबंधित पुलिस टीम को आवश्यक जानकारी पहुंचाई जाती है, ताकि मौके पर सहायता उपलब्ध कराई जा सके। छात्रों ने डायल-112 से जुड़ी प्रक्रिया को समझने के साथ अधिकारियों से सवाल भी किए। विद्यार्थियों को पुलिस की रेडियो और संचार व्यवस्था के बारे में भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि पुलिस विभाग में सूचनाओं को एक-दूसरे तक तेजी से पहुंचाने में रेडियो संचार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके अलावा बच्चों को साइबर अपराधों से बचने के लिए भी जागरूक किया गया। उन्हें ऑनलाइन ठगी, फर्जी लिंक और ओटीपी जैसी चीजों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दी गई। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों में काफी उत्साह दिखाई दिया। बच्चों ने पुलिस अधिकारियों से संवाद करते हुए पुलिस की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सेवाओं से जुड़े कई सवाल पूछे। इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करने और पुलिस व्यवस्था को करीब से समझाने का रहा। जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद कार्यक्रम के माध्यम से सांदीपनी विद्यालय के विद्यार्थियों को पुलिस व्यवस्था का प्रत्यक्ष अनुभव मिला। बच्चों ने थाना कोतवाली, कंट्रोल रूम और रेडियो शाखा का भ्रमण कर पुलिस की कार्यप्रणाली को समझा और डायल-112 आपातकालीन सेवा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की। पन्ना मध्यप्रदेश से भागीरथ विश्वकर्मा की खास रिपोर्ट।1