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प्रीति पवार भारत की प्रमुख महिला मुक्केबाज़ (बॉक्सर) हैं, जो 54 किलोग्राम (बैंटमवेट) वर्ग में खेलती हैं। उन्होंने अपनी तेज़ गति, सटीक पंच और शानदार तकनीक के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। व्यक्तिगत जानकारी पूरा नाम: प्रीति पवार जन्म: 23 अक्टूबर 2003 जन्मस्थान: भिवानी, हरियाणा देश: भारत खेल: मुक्केबाज़ी (Boxing) भार वर्ग: 54 किग्रा (Bantamweight) विकिपीडिया +1 परिवार प्रीति का परिवार खेलों से जुड़ा रहा है। उनके पिता हरियाणा पुलिस में कार्यरत रहे और कबड्डी खेलते थे। उनके चाचा विनोद साई पवार राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रहे। उनके परदादा भी पहलवान थे। उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। � शिक्षा प्रीति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बॉक्सिंग का अभ्यास जारी रखा। बाद में उनका पूरा ध्यान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी पर केंद्रित हो गया। � संघर्ष की कहानी शुरुआत में प्रीति बॉक्सिंग नहीं खेलना चाहती थीं। वे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता और चाचा ने उन्हें बॉक्सिंग आज़माने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू की। 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद उन्हें हेपेटाइटिस-A हुआ, जिससे वे कई महीनों तक रिंग से दूर रहीं। फिटनेस दोबारा हासिल करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने वापसी की और लगातार बड़े खिताब जीते। � करियर राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में जगह बनाई। 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सीधे नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बनीं। 2025 और 2026 में कई अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतकर विश्व की शीर्ष मुक्केबाज़ों में अपनी पहचान बनाई। � प्रमुख पदक वर्ष प्रतियोगिता पदक 2022 एशियाई खेल (54 किग्रा) 🥉 कांस्य 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल 🥇 स्वर्ण 2026 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 🥇 स्वर्ण 2026 EUBC गोल्ड ग्रां प्री 🥇 स्वर्ण 2026 राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स), 54 किग्रा 🥇 स्वर्ण 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की ऐतिहासिक जीत ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला 54 किग्रा फाइनल में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत के लिए प्रतियोगिता में बॉक्सिंग का पहला स्वर्ण पदक था। � प्रेरणा प्रीति ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि फिल्म "दंगल" और ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक की सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। �

11 hrs ago
user_Km News 29
Km News 29
Local News Reporter आऊ, जोधपुर, राजस्थान•
11 hrs ago

प्रीति पवार भारत की प्रमुख महिला मुक्केबाज़ (बॉक्सर) हैं, जो 54 किलोग्राम (बैंटमवेट) वर्ग में खेलती हैं। उन्होंने अपनी तेज़ गति, सटीक पंच और शानदार तकनीक के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। व्यक्तिगत जानकारी पूरा नाम: प्रीति पवार जन्म: 23 अक्टूबर 2003 जन्मस्थान: भिवानी, हरियाणा देश: भारत खेल: मुक्केबाज़ी (Boxing) भार वर्ग: 54 किग्रा (Bantamweight) विकिपीडिया +1 परिवार प्रीति का परिवार खेलों से जुड़ा रहा है। उनके पिता हरियाणा पुलिस में कार्यरत रहे और कबड्डी खेलते थे। उनके चाचा विनोद साई पवार राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रहे। उनके परदादा भी पहलवान थे। उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। � शिक्षा प्रीति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बॉक्सिंग का अभ्यास जारी रखा। बाद में उनका पूरा ध्यान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी पर केंद्रित हो गया। � संघर्ष की कहानी शुरुआत में प्रीति बॉक्सिंग नहीं खेलना चाहती थीं। वे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता और चाचा ने उन्हें बॉक्सिंग आज़माने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू की। 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद उन्हें हेपेटाइटिस-A हुआ, जिससे वे कई महीनों तक रिंग से दूर रहीं। फिटनेस दोबारा हासिल करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने वापसी की और लगातार बड़े खिताब जीते। � करियर राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में जगह बनाई। 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सीधे नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बनीं। 2025 और 2026 में कई अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतकर विश्व की शीर्ष मुक्केबाज़ों में अपनी पहचान बनाई। � प्रमुख पदक वर्ष प्रतियोगिता पदक 2022 एशियाई खेल (54 किग्रा) 🥉 कांस्य 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल 🥇 स्वर्ण 2026 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 🥇 स्वर्ण 2026 EUBC गोल्ड ग्रां प्री 🥇 स्वर्ण 2026 राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स), 54 किग्रा 🥇 स्वर्ण 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की ऐतिहासिक जीत ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला 54 किग्रा फाइनल में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत के लिए प्रतियोगिता में बॉक्सिंग का पहला स्वर्ण पदक था। � प्रेरणा प्रीति ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि फिल्म "दंगल" और ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक की सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। �

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  • प्रीति पवार भारत की प्रमुख महिला मुक्केबाज़ (बॉक्सर) हैं, जो 54 किलोग्राम (बैंटमवेट) वर्ग में खेलती हैं। उन्होंने अपनी तेज़ गति, सटीक पंच और शानदार तकनीक के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की। व्यक्तिगत जानकारी पूरा नाम: प्रीति पवार जन्म: 23 अक्टूबर 2003 जन्मस्थान: भिवानी, हरियाणा देश: भारत खेल: मुक्केबाज़ी (Boxing) भार वर्ग: 54 किग्रा (Bantamweight) विकिपीडिया +1 परिवार प्रीति का परिवार खेलों से जुड़ा रहा है। उनके पिता हरियाणा पुलिस में कार्यरत रहे और कबड्डी खेलते थे। उनके चाचा विनोद साई पवार राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रहे। उनके परदादा भी पहलवान थे। उनकी माता गृहिणी हैं। परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। � शिक्षा प्रीति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बॉक्सिंग का अभ्यास जारी रखा। बाद में उनका पूरा ध्यान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी पर केंद्रित हो गया। � संघर्ष की कहानी शुरुआत में प्रीति बॉक्सिंग नहीं खेलना चाहती थीं। वे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता और चाचा ने उन्हें बॉक्सिंग आज़माने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू की। 2024 पेरिस ओलंपिक के बाद उन्हें हेपेटाइटिस-A हुआ, जिससे वे कई महीनों तक रिंग से दूर रहीं। फिटनेस दोबारा हासिल करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने वापसी की और लगातार बड़े खिताब जीते। � करियर राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में जगह बनाई। 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सीधे नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बनीं। 2025 और 2026 में कई अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतकर विश्व की शीर्ष मुक्केबाज़ों में अपनी पहचान बनाई। � प्रमुख पदक वर्ष प्रतियोगिता पदक 2022 एशियाई खेल (54 किग्रा) 🥉 कांस्य 2025 वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल 🥇 स्वर्ण 2026 एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप 🥇 स्वर्ण 2026 EUBC गोल्ड ग्रां प्री 🥇 स्वर्ण 2026 राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स), 54 किग्रा 🥇 स्वर्ण 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की ऐतिहासिक जीत ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला 54 किग्रा फाइनल में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत के लिए प्रतियोगिता में बॉक्सिंग का पहला स्वर्ण पदक था। � प्रेरणा प्रीति ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि फिल्म "दंगल" और ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक की सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। �
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    प्रीति पवार भारत की प्रमुख महिला मुक्केबाज़ (बॉक्सर) हैं, जो 54 किलोग्राम (बैंटमवेट) वर्ग में खेलती हैं। उन्होंने अपनी तेज़ गति, सटीक पंच और शानदार तकनीक के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है। 2026 राष्ट्रमंडल खेलों (Commonwealth Games) में उन्होंने स्वर्ण पदक जीतकर भारतीय मुक्केबाज़ी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की।
व्यक्तिगत जानकारी
पूरा नाम: प्रीति पवार
जन्म: 23 अक्टूबर 2003
जन्मस्थान: भिवानी, हरियाणा
देश: भारत
खेल: मुक्केबाज़ी (Boxing)
भार वर्ग: 54 किग्रा (Bantamweight) 
विकिपीडिया +1
परिवार
प्रीति का परिवार खेलों से जुड़ा रहा है।
उनके पिता हरियाणा पुलिस में कार्यरत रहे और कबड्डी खेलते थे।
उनके चाचा विनोद साई पवार राष्ट्रीय स्तर के बॉक्सर रहे।
उनके परदादा भी पहलवान थे।
उनकी माता गृहिणी हैं।
परिवार के प्रोत्साहन ने उन्हें खेलों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। �
शिक्षा
प्रीति ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भिवानी में पूरी की। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने बॉक्सिंग का अभ्यास जारी रखा। बाद में उनका पूरा ध्यान अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी पर केंद्रित हो गया। �
संघर्ष की कहानी
शुरुआत में प्रीति बॉक्सिंग नहीं खेलना चाहती थीं। वे पढ़ाई पर ध्यान देना चाहती थीं, लेकिन उनके पिता और चाचा ने उन्हें बॉक्सिंग आज़माने के लिए प्रेरित किया। धीरे-धीरे उनकी रुचि बढ़ी और उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू की।
2024 पेरिस ओलंपिक के बाद उन्हें हेपेटाइटिस-A हुआ, जिससे वे कई महीनों तक रिंग से दूर रहीं। फिटनेस दोबारा हासिल करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन उन्होंने वापसी की और लगातार बड़े खिताब जीते। �
करियर
राष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में जगह बनाई।
2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।
भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर सीधे नियुक्त होने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर बनीं।
2025 और 2026 में कई अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीतकर विश्व की शीर्ष मुक्केबाज़ों में अपनी पहचान बनाई। �
प्रमुख पदक
वर्ष
प्रतियोगिता
पदक
2022
एशियाई खेल (54 किग्रा)
🥉 कांस्य
2025
वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल
🥇 स्वर्ण
2026
एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप
🥇 स्वर्ण
2026
EUBC गोल्ड ग्रां प्री
🥇 स्वर्ण
2026
राष्ट्रमंडल खेल (कॉमनवेल्थ गेम्स), 54 किग्रा
🥇 स्वर्ण
2026 कॉमनवेल्थ गेम्स की ऐतिहासिक जीत
ग्लासगो में आयोजित 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स के महिला 54 किग्रा फाइनल में प्रीति पवार ने कनाडा की स्कारलेट डेलगाडो को 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह भारत के लिए प्रतियोगिता में बॉक्सिंग का पहला स्वर्ण पदक था। �
प्रेरणा
प्रीति ने कई साक्षात्कारों में बताया है कि फिल्म "दंगल" और ओलंपिक पदक विजेता साक्षी मलिक की सफलता ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। �
    user_Km News 29
    Km News 29
    Local News Reporter आऊ, जोधपुर, राजस्थान•
    11 hrs ago
  • कांग्रेस को विकास के चश्मे की आवश्यकता -मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कांग्रेस को राजस्थान का चौमुखी विकास देखने के लिए 'दृष्टि' और 'दृष्टिकोण' दोनों बदलने की आवश्यकता है। हमारी सरकार प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण और समग्र विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।
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    कांग्रेस को विकास के चश्मे की आवश्यकता -मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 
कांग्रेस को राजस्थान का चौमुखी विकास देखने के लिए 'दृष्टि' और 'दृष्टिकोण' दोनों बदलने की आवश्यकता है। हमारी सरकार प्रदेश के हर वर्ग के कल्याण और समग्र विकास के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रही है।
    user_प्रदीप कुमार डागा
    प्रदीप कुमार डागा
    Local News Reporter नागौर, नागौर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • नारायण राम तितरी जोधियासी गांव में आज बहुत बारिश आ रही है आज की खबर लाइक शेयर जरुर करना धन्यवाद?👍👍👎👎🙏🙏🙏 नारायण राम तितरी जोधियासी नागौर राजस्थान 341001 /जोधियासी गांव में आज तक बारिश आ रही है?
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    नारायण राम तितरी जोधियासी गांव में आज बहुत बारिश आ रही है आज की खबर लाइक शेयर जरुर करना धन्यवाद?👍👍👎👎🙏🙏🙏
नारायण राम तितरी जोधियासी नागौर राजस्थान 341001 /जोधियासी गांव में आज तक बारिश आ रही है?
    user_Narayan ram
    Narayan ram
    Farmer Nagaur, Rajasthan•
    5 hrs ago
  • सिवान आंदोलन के दौरान पुलिस की AK-47 से घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका व परिवार का हाल जाना। बुलेट कुमार गौड़, आकाश और आरिफ जैसे युवाओं की पीड़ा केवल उनकी नहीं, पूरे देश के छात्रों की आवाज़ है। जो सरकार छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और लाठियों से देती है, उसे जवाब देना होगा। कांग्रेस पार्टी हर घायल छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगी। सिवान आंदोलन के दौरान पुलिस की AK-47 से घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका व परिवार का हाल जाना। बुलेट कुमार गौड़, आकाश और आरिफ जैसे युवाओं की पीड़ा केवल उनकी नहीं, पूरे देश के छात्रों की आवाज़ है। जो सरकार छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और लाठियों से देती है, उसे जवाब देना होगा। कांग्रेस पार्टी हर घायल छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगी।
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    सिवान आंदोलन के दौरान पुलिस की AK-47 से घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका व परिवार का हाल जाना। बुलेट कुमार गौड़, आकाश और आरिफ जैसे युवाओं की पीड़ा केवल उनकी नहीं, पूरे देश के छात्रों की आवाज़ है।

जो सरकार छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और लाठियों से देती है, उसे जवाब देना होगा। कांग्रेस पार्टी हर घायल छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगी।
सिवान आंदोलन के दौरान पुलिस की AK-47 से घायल छात्रों से मुलाकात कर उनका व परिवार का हाल जाना। बुलेट कुमार गौड़, आकाश और आरिफ जैसे युवाओं की पीड़ा केवल उनकी नहीं, पूरे देश के छात्रों की आवाज़ है।
जो सरकार छात्रों की आवाज़ का जवाब गोलियों और लाठियों से देती है, उसे जवाब देना होगा। कांग्रेस पार्टी हर घायल छात्र के साथ मजबूती से खड़ी है और न्याय की इस लड़ाई को अंत तक लड़ेगी।
    user_Gordhan ram
    Gordhan ram
    भोपालगढ़, जोधपुर, राजस्थान•
    12 hrs ago
  • उदासर फांटा बना हादसों का हॉटस्पॉट स्थानीय लोगों ने स्पीड रोकने के लिए बैरिकेड लगाने की उठाई मांग बीकानेर। जयपुर रोड स्थित उदासर फांटा लगातार सड़क हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस चौराहे पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों की जान जोखिम में बनी रहती है।रविवार को क्षेत्र के एक निवासी ने वीडियो जारी कर यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन से इस चौराहे पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की। उनका कहना है कि जयपुर रोड पर वाहन काफी तेज गति से गुजरते हैं, जबकि उदासर गांव की ओर आने-जाने वाले लोगों को इसी स्थान से सड़क पार करनी पड़ती है। ऐसे में हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब एक-दो महीने पहले इसी स्थान पर एक फॉर्च्यूनर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद अब तक यहां गति नियंत्रित करने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है। ग्रामीणों ने ओर चौराहे पर लगी दुकानदार व निवासी शमशेर अली कोहरी सहित पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस से मांग की है कि चौराहे पर बैरिकेड, रंबल स्ट्रिप, चेतावनी संकेतक और अन्य आवश्यक यातायात सुरक्षा उपाय लगाए जाएं, ताकि वाहनों की रफ्तार नियंत्रित हो सके और भविष्य में होने वाले बड़े हादसों को रोका जा सके। उन्होंने प्रशासन से इस संवेदनशील चौराहे पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की है।
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    उदासर फांटा बना हादसों का हॉटस्पॉट
स्थानीय लोगों ने स्पीड रोकने के लिए बैरिकेड लगाने की उठाई मांग
बीकानेर। जयपुर रोड स्थित उदासर फांटा लगातार सड़क हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस चौराहे पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं, जिससे राहगीरों और ग्रामीणों की जान जोखिम में बनी रहती है।रविवार को क्षेत्र के एक निवासी ने वीडियो जारी कर यातायात पुलिस और जिला पुलिस प्रशासन से इस चौराहे पर तत्काल सुरक्षा इंतजाम करने की मांग की। उनका कहना है कि जयपुर रोड पर वाहन काफी तेज गति से गुजरते हैं, जबकि उदासर गांव की ओर आने-जाने वाले लोगों को इसी स्थान से सड़क पार करनी पड़ती है। ऐसे में हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि करीब एक-दो महीने पहले इसी स्थान पर एक फॉर्च्यूनर वाहन दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई थी। इसके बावजूद अब तक यहां गति नियंत्रित करने के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई है।
ग्रामीणों ने ओर चौराहे पर लगी दुकानदार व निवासी शमशेर अली कोहरी सहित पुलिस अधीक्षक और यातायात पुलिस से मांग की है कि चौराहे पर बैरिकेड, रंबल स्ट्रिप, चेतावनी संकेतक और अन्य आवश्यक यातायात सुरक्षा उपाय लगाए जाएं, ताकि वाहनों की रफ्तार नियंत्रित हो सके और भविष्य में होने वाले बड़े हादसों को रोका जा सके। उन्होंने प्रशासन से इस संवेदनशील चौराहे पर जल्द कार्रवाई करने की अपील की है।
    user_आईरा समाचार बीकानेर
    आईरा समाचार बीकानेर
    Journalist Bikaner, Rajasthan•
    1 hr ago
  • ऑपरेशन शॉक वेव: सरहद पार नार्को-आर्म्स सिंडिकेट पर पुलिस का बड़ा प्रहार, IG ओमप्रकाश पहुंचे खाजूवाला
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    ऑपरेशन शॉक वेव: सरहद पार नार्को-आर्म्स सिंडिकेट पर पुलिस का बड़ा प्रहार, IG ओमप्रकाश पहुंचे खाजूवाला
    user_SSSO News
    SSSO News
    बीकानेर, बीकानेर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • बीकानेर में पहली बार सबसे बड़ा रक्तदान जो महादान लगे बीकानेर में इतिहास में पहली बार बीकानेर से बाहर की टीम में डॉक्टरों की बुलानी पड़ गई ब्लड इकट्ठा करने के लिए बीकानेर से बाहर से चार टीम आई है डॉक्टर की 1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है 1:00 बजे तक हरिकिशन नला रोड बीकानेर आज दिनांक 2/8/2026 खिदमतगार खादिम सोसायटी और असहाय सावे संस्थान ब्लड बैंक में अपना सहयोग देते हुए राज कुमार जुनैद खान हाजी मलंग बाबा अयूब चाचा इमरान भाई सोहेब भाई के अंदर बाहर सिटी में बुलाने गई पुरानी पड़ गई जो ब्लड को इकट्ठा करती है डॉक्टरों की 1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है अभी करीबन 1:00 बजे बीकानेर में पहली बार सबसे बड़ा रक्तदान जो महादान लगे बीकानेर में इतिहास में पहली बार बीकानेर से बाहर की टीम में डॉक्टरों की बुलानी पड़ गई ब्लड इकट्ठा करने के लिए बीकानेर से बाहर से चार टीम आई है डॉक्टर की 1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है 1:00 बजे तक हरिकिशन नला रोड बीकानेर आज दिनांक 2/8/2026 खिदमतगार खादिम सोसायटी और असहाय सावे संस्थान ब्लड बैंक में अपना सहयोग देते हुए राज कुमार जुनैद खान हाजी मलंग बाबा अयूब चाचा इमरान भाई सोहेब भाई के अंदर बाहर सिटी में बुलाने गई पुरानी पड़ गई जो ब्लड को इकट्ठा करती है डॉक्टरों की 1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है अभी करीबन 1:00 बजे
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    बीकानेर में पहली बार सबसे बड़ा रक्तदान जो महादान लगे
बीकानेर में इतिहास 
  में पहली बार 
बीकानेर से बाहर की टीम में डॉक्टरों की बुलानी पड़ गई 
ब्लड 
 इकट्ठा करने के लिए बीकानेर से बाहर से चार टीम आई है डॉक्टर की 
1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है 1:00 बजे तक

हरिकिशन नला रोड बीकानेर 
आज दिनांक 2/8/2026

खिदमतगार खादिम सोसायटी और  असहाय सावे संस्थान  ब्लड बैंक में अपना सहयोग देते हुए 
राज कुमार जुनैद खान हाजी मलंग बाबा 
अयूब चाचा इमरान भाई सोहेब भाई


 के अंदर बाहर सिटी में बुलाने गई पुरानी पड़ गई जो ब्लड को इकट्ठा करती है डॉक्टरों की 1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है अभी करीबन 1:00 बजे
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बीकानेर में इतिहास 
में पहली बार 
बीकानेर से बाहर की टीम में डॉक्टरों की बुलानी पड़ गई 
ब्लड 
इकट्ठा करने के लिए बीकानेर से बाहर से चार टीम आई है डॉक्टर की 
1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है 1:00 बजे तक
हरिकिशन नला रोड बीकानेर 
आज दिनांक 2/8/2026
खिदमतगार खादिम सोसायटी और  असहाय सावे संस्थान  ब्लड बैंक में अपना सहयोग देते हुए 
राज कुमार जुनैद खान हाजी मलंग बाबा 
अयूब चाचा इमरान भाई सोहेब भाई
के अंदर बाहर सिटी में बुलाने गई पुरानी पड़ गई जो ब्लड को इकट्ठा करती है डॉक्टरों की 1000 से ऊपर ब्लड डोनेशन हो चुका है अभी करीबन 1:00 बजे
    user_Suck it Hussain 02/03/1983 Bikaner khabari
    Suck it Hussain 02/03/1983 Bikaner khabari
    बीकानेर, बीकानेर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • सेवानिवृत्ति पर अनोखी विदाई: विद्यालय की चौखट पर धोक लगाकर गजेंद्र गोदारा ने छोड़ी प्रेरणा भैरूंदा,,नागौर जिले की भैरूंदा पंचायत समिति के सुरपुरा गांव में सम्मान और आत्मीयता का अनूठा नजारा देखने को मिला। 35 वर्षों की निष्कलंक राजकीय सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुए शारीरिक शिक्षा व्याख्याता गजेंद्र गोदारा का विद्यालय से लेकर पैतृक गांव तक भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी ने इस सम्मान समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रिड़ में आयोजित विदाई समारोह में प्रधानाचार्य महेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में गजेंद्र गोदारा का साफा पहनाकर, माल्यार्पण, अभिनंदन पत्र और पुष्पवर्षा के साथ सम्मान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि गोदारा ने 36 वर्षों तक अनुशासन,समर्पणऔरकर्तव्यनिष्ठा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल सेवाकाल को प्रेरणादायी बताते हुए भावभीनी विदाई दी। समारोह का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब विदाई लेकर रवाना होते हुए गजेंद्र गोदारा ने विद्यालय की चौखट पर श्रद्धापूर्वक धोक लगाकर शिक्षा के इस मंदिर को नमन किया। इस दृश्य ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। शिक्षा के प्रति उनकी आस्था और सम्मान का यह भाव लोगों को उस अवसर की याद दिला गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में प्रवेश से पहले उसकी चौखट को नमन किया था। गोदारा ने भी अपने 35 वर्षों के कर्मस्थल को प्रणाम कर भावभीनी विदाई ली। सेवानिवृत्ति के बाद जैसे ही गजेंद्र गोदारा अपने पैतृक गांव सुरपुरा पहुंचे, पूरा गांव उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, बहनों ने तिलक लगाकर स्वागत किया और साफा पहनाने व माल्यार्पण के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिला।आसपास के करीब 50 गांवों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, शुभचिंतकों और हजारों ग्रामीणों ने उनके सम्मान में भाग लेकर समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। अपने गांव की पावन मिट्टी को नमन करते हुए गजेंद्र गोदारा भावुक हो उठे और सभी का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। 36 वर्षों की ईमानदार, समर्पित और निष्कलंक सेवा को मिला यह जनसम्मान केवल एक शिक्षक की विदाई नहीं, बल्कि गुरु, शिक्षा और संस्कारों के प्रति समाज की श्रद्धा का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।
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    सेवानिवृत्ति पर अनोखी विदाई: विद्यालय की चौखट पर धोक लगाकर गजेंद्र गोदारा ने छोड़ी प्रेरणा
भैरूंदा,,नागौर जिले की भैरूंदा पंचायत समिति के सुरपुरा गांव में सम्मान और आत्मीयता का अनूठा नजारा देखने को मिला। 35 वर्षों की निष्कलंक राजकीय सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हुए शारीरिक शिक्षा व्याख्याता गजेंद्र गोदारा का विद्यालय से लेकर पैतृक गांव तक भव्य स्वागत और अभिनंदन किया गया। हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी ने इस सम्मान समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रिड़ में आयोजित विदाई समारोह में प्रधानाचार्य महेश कुमार शर्मा की अध्यक्षता में गजेंद्र गोदारा का साफा पहनाकर, माल्यार्पण, अभिनंदन पत्र और पुष्पवर्षा के साथ सम्मान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि गोदारा ने 36 वर्षों तक अनुशासन,समर्पणऔरकर्तव्यनिष्ठा के साथ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यालय परिवार ने उनके उज्ज्वल सेवाकाल को प्रेरणादायी बताते हुए भावभीनी विदाई दी। समारोह का सबसे भावुक क्षण उस समय आया, जब विदाई लेकर रवाना होते हुए गजेंद्र गोदारा ने विद्यालय की चौखट पर श्रद्धापूर्वक धोक लगाकर शिक्षा के इस मंदिर को नमन किया। इस दृश्य ने उपस्थित सभी लोगों को भावुक कर दिया। शिक्षा के प्रति उनकी आस्था और सम्मान का यह भाव लोगों को उस अवसर की याद दिला गया, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन में प्रवेश से पहले उसकी चौखट को नमन किया था। गोदारा ने भी अपने 35 वर्षों के कर्मस्थल को प्रणाम कर भावभीनी विदाई ली। सेवानिवृत्ति के बाद जैसे ही गजेंद्र गोदारा अपने पैतृक गांव सुरपुरा पहुंचे, पूरा गांव उनके स्वागत के लिए उमड़ पड़ा। महिलाओं ने मंगल गीत गाए, बहनों ने तिलक लगाकर स्वागत किया और साफा पहनाने व माल्यार्पण के लिए लोगों में उत्साह देखने को मिला।आसपास के करीब 50 गांवों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, शुभचिंतकों और हजारों ग्रामीणों ने उनके सम्मान में भाग लेकर समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। अपने गांव की पावन मिट्टी को नमन करते हुए गजेंद्र गोदारा भावुक हो उठे और सभी का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया। 36 वर्षों की ईमानदार, समर्पित और निष्कलंक सेवा को मिला यह जनसम्मान केवल एक शिक्षक की विदाई नहीं, बल्कि गुरु, शिक्षा और संस्कारों के प्रति समाज की श्रद्धा का प्रेरणादायी उदाहरण बन गया।
    user_प्रदीप कुमार डागा
    प्रदीप कुमार डागा
    Local News Reporter नागौर, नागौर, राजस्थान•
    9 hrs ago
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