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दिल्ली-एनसीआर में मजदूरों पर हमले के विरोध में बेतिया में पुतला दहन सीटू के बैनर तले प्रदर्शन, न्यूनतम मजदूरी और अधिकारों को लेकर उठी आवाज बेतिया दिल्ली-एनसीआर में मजदूरों पर कथित हमलों के विरोध में भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के बैनर तले बेतिया में जोरदार प्रदर्शन किया गया। मीना बाजार स्थित सीटू कार्यालय से मजदूरों ने मार्च निकालकर सोवा बाबू चौक पर सभा की और प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया। सभा को संबोधित करते हुए बिहार राज्य रिक्शा मजदूर सभा के अध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव ने आरोप लगाया कि केंद्र व राज्यों की सरकारें मजदूरों के जनतांत्रिक अधिकारों को दबा रही हैं। उन्होंने कहा कि नोएडा और गुड़गांव में मजदूर 26 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी और 8 घंटे काम की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन उनकी आवाज दबाई जा रही है। जिला सचिव शंकर कुमार राव ने कहा कि सीटू नेताओं को हाउस अरेस्ट कर आंदोलन को कुचलने की कोशिश हो रही है। वहीं अन्य नेताओं ने मजदूरों को धमकाने की घटनाओं की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मजदूरों की मांगों को जल्द पूरा करने और दमनात्मक कार्रवाई रोकने की मांग की।

4 days ago
user_Makhan Kumar
Makhan Kumar
पत्रकार Bettiah, Pashchim Champaran•
4 days ago

दिल्ली-एनसीआर में मजदूरों पर हमले के विरोध में बेतिया में पुतला दहन सीटू के बैनर तले प्रदर्शन, न्यूनतम मजदूरी और अधिकारों को लेकर उठी आवाज बेतिया दिल्ली-एनसीआर में मजदूरों पर कथित हमलों के विरोध में भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के बैनर तले बेतिया में जोरदार प्रदर्शन किया गया। मीना बाजार स्थित सीटू कार्यालय से मजदूरों ने मार्च निकालकर सोवा बाबू चौक पर सभा की और प्रधानमंत्री का पुतला दहन किया। सभा को संबोधित करते हुए बिहार राज्य रिक्शा मजदूर सभा के अध्यक्ष प्रभुराज नारायण राव ने आरोप लगाया कि केंद्र व राज्यों की सरकारें मजदूरों के जनतांत्रिक अधिकारों को दबा रही हैं। उन्होंने कहा कि नोएडा और गुड़गांव में मजदूर 26 हजार रुपये न्यूनतम मजदूरी और 8 घंटे काम की मांग को लेकर आंदोलनरत हैं, लेकिन उनकी आवाज दबाई जा रही है। जिला सचिव शंकर कुमार राव ने कहा कि सीटू नेताओं को हाउस अरेस्ट कर आंदोलन को कुचलने की कोशिश हो रही है। वहीं अन्य नेताओं ने मजदूरों को धमकाने की घटनाओं की निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने मजदूरों की मांगों को जल्द पूरा करने और दमनात्मक कार्रवाई रोकने की मांग की।

More news from बिहार and nearby areas
  • मंगलवार के दिन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी डॉक्टर राजीव रंजन कुमार व पुलिस पदाधिकारी भानु प्रकाश सहित पुलिस बल के साथ मझौलिया प्रखंड मुख्यालय से लेकर बाजार चौक से होते हुए मझौलिया चीनी मिल तथा मझौलिया रेलवे गुमटी तक सड़क के अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध प्रशासन अब कमर कस ली है।बार बार समझाने के बावजूद भी अतिक्रमणकारी नहीं हट रहे हैं। सात दिनों के अंदर अतिक्रमण करने वाले नहीं हटते हैं तो उनके विरुद्ध होगी कानूनी कार्रवाई।उक्त बाते प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी ने कही । उन्होंने ने बताया कि मझौलिया बाजार तथा सरिसवा बाजार के सड़क के अतिक्रमण करने वाले अगर सात दिनों के अंदर नहीं हटे तो प्रशासन बुलडोजर से अतिक्रमण मुक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई करेगी ।इस दौरान मझौलिया बाजार में दुकानदारों के बीच अफरा तफरी का माहौल बना रहा।इस मौके राजस्व अमीन सहित पुलिस पदाधिकारी सहित पुलिस बल शामिल रहे।
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    मंगलवार के दिन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी डॉक्टर राजीव रंजन कुमार व पुलिस पदाधिकारी भानु प्रकाश सहित पुलिस बल के साथ मझौलिया प्रखंड मुख्यालय से लेकर बाजार चौक से होते हुए मझौलिया चीनी मिल तथा मझौलिया रेलवे गुमटी तक सड़क के अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध प्रशासन अब कमर कस ली है।बार बार समझाने के बावजूद भी अतिक्रमणकारी नहीं हट रहे हैं। सात दिनों के अंदर अतिक्रमण करने वाले नहीं हटते हैं तो उनके विरुद्ध होगी कानूनी कार्रवाई।उक्त बाते प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी ने कही । उन्होंने ने बताया कि मझौलिया बाजार तथा सरिसवा बाजार के सड़क के अतिक्रमण करने वाले अगर सात दिनों के अंदर नहीं हटे तो प्रशासन बुलडोजर से अतिक्रमण मुक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई करेगी ।इस दौरान मझौलिया बाजार में दुकानदारों के बीच अफरा तफरी का माहौल बना रहा।इस मौके राजस्व अमीन सहित पुलिस पदाधिकारी सहित पुलिस बल शामिल रहे।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Farmer मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    26 min ago
  • बेतिया के मच्छर गावा चौक से एक बड़ा आरोप सामने आ रहा है, जहां लोगों ने एक्साइज विभाग के अधिकारियों पर जब्त शराब को ही बेचने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा दिखाई जाने वाली कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता है, जबकि जब्त शराब को बाद में बाजार में बेचा जा रहा है। इसको लेकर इलाके में नाराजगी बढ़ती जा रही है। हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
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    बेतिया के मच्छर गावा चौक से एक बड़ा आरोप सामने आ रहा है, जहां लोगों ने एक्साइज विभाग के अधिकारियों पर जब्त शराब को ही बेचने का गंभीर आरोप लगाया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विभाग द्वारा दिखाई जाने वाली कार्रवाई सिर्फ औपचारिकता है, जबकि जब्त शराब को बाद में बाजार में बेचा जा रहा है। इसको लेकर इलाके में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
हालांकि इस पूरे मामले में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह एक बड़ा घोटाला साबित हो सकता है।
    user_A9Bharat News
    A9Bharat News
    Local News Reporter बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    6 hrs ago
  • योगापट्टी प्रखंड के बलुआ भवानीपुर पंचायत के कौवलापुर गांव में सरकारी योजनाओं की हकीकत एक दिव्यांग की बेबसी में साफ नजर आ रही है। यहां के निवासी धर्मेंद्र राम, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, पिछले एक महीने से शौचालय निर्माण की प्रोत्साहन राशि पाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल सका है। धर्मेंद्र राम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए कर्ज लेकर किसी तरह अपना काम पूरा किया। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि समय पर मिल जाएगी, जिससे वे अपना कर्ज चुका सकेंगे। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी जब उनके खाते में पैसा नहीं पहुंचा, तो उनकी परेशानियां और बढ़ गईं। अपनी समस्या को लेकर धर्मेंद्र कई बार प्रखंड कार्यालय पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही और उन्हें बार-बार टाल दिया जाता है। उन्होंने स्वच्छता प्रवेक्षक टुना शर्मा पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हर बार यही कहा जाता है कि पैसा भेज दिया गया है, जबकि उनके बैंक खाते में अब तक कोई राशि नहीं आई है। दूसरी ओर, स्वच्छता प्रवेक्षक टुना शर्मा ने दावा किया है कि राशि लाभुक के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है और देरी की वजह बैंकिंग प्रक्रिया या तकनीकी समस्या हो सकती है। उन्होंने धर्मेंद्र को बैंक जाकर अपने खाते की पूरी जानकारी जांचने की सलाह दी है। यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर जरूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। एक दिव्यांग व्यक्ति को अपने हक के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाना पड़ रहा है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले में त्वरित जांच कर सच्चाई सामने लाए और जल्द से जल्द धर्मेंद्र राम को उनकी प्रोत्साहन राशि दिलाई जाए, ताकि उन्हें इस आर्थिक और मानसिक संकट से राहत मिल सके।
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    योगापट्टी प्रखंड के बलुआ भवानीपुर पंचायत के कौवलापुर गांव में सरकारी योजनाओं की हकीकत एक दिव्यांग की बेबसी में साफ नजर आ रही है। यहां के निवासी धर्मेंद्र राम, जो शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं, पिछले एक महीने से शौचालय निर्माण की प्रोत्साहन राशि पाने के लिए प्रखंड कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें उनका हक नहीं मिल सका है।
धर्मेंद्र राम ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण के लिए कर्ज लेकर किसी तरह अपना काम पूरा किया। उन्हें उम्मीद थी कि सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता राशि समय पर मिल जाएगी, जिससे वे अपना कर्ज चुका सकेंगे। लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी जब उनके खाते में पैसा नहीं पहुंचा, तो उनकी परेशानियां और बढ़ गईं।
अपनी समस्या को लेकर धर्मेंद्र कई बार प्रखंड कार्यालय पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन मिला, समाधान नहीं। उनका आरोप है कि अधिकारियों द्वारा स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही और उन्हें बार-बार टाल दिया जाता है। उन्होंने स्वच्छता प्रवेक्षक टुना शर्मा पर भी लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि हर बार यही कहा जाता है कि पैसा भेज दिया गया है, जबकि उनके बैंक खाते में अब तक कोई राशि नहीं आई है।
दूसरी ओर, स्वच्छता प्रवेक्षक टुना शर्मा ने दावा किया है कि राशि लाभुक के खाते में ट्रांसफर कर दी गई है और देरी की वजह बैंकिंग प्रक्रिया या तकनीकी समस्या हो सकती है। उन्होंने धर्मेंद्र को बैंक जाकर अपने खाते की पूरी जानकारी जांचने की सलाह दी है।
यह मामला न सिर्फ एक व्यक्ति की परेशानी को उजागर करता है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करता है कि आखिर सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर जरूरतमंदों तक क्यों नहीं पहुंच पा रहा है। एक दिव्यांग व्यक्ति को अपने हक के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाना पड़ रहा है, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब जरूरत है कि संबंधित विभाग इस मामले में त्वरित जांच कर सच्चाई सामने लाए और जल्द से जल्द धर्मेंद्र राम को उनकी प्रोत्साहन राशि दिलाई जाए, ताकि उन्हें इस आर्थिक और मानसिक संकट से राहत मिल सके।
    user_S9 Bihar
    S9 Bihar
    News Anchor बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    18 hrs ago
  • भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना ज्ञान भारतम में सहयोग करने वाले बेतिया के विशिष्ट नागरिकों को जिला पदाधिकारी माननीय श्री तरण जोत सिंह ने सम्मानित किया। 20.04.2026.
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    भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना ज्ञान भारतम में सहयोग करने वाले बेतिया के विशिष्ट नागरिकों को जिला पदाधिकारी माननीय श्री तरण जोत सिंह ने सम्मानित किया। 20.04.2026.
    user_Vivek Kumar (Shrivastava).
    Vivek Kumar (Shrivastava).
    Teacher बेतिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    20 hrs ago
  • सोमवार को हुई नगर पंचायत की सामान्य बैठक रही हंगामेदार। नल-जल,सड़क-नाली,बिजली,सफाई, और घटिया किस्म के करोड़ों की खरीददारी पर हुआ जम कर शोरगुल। पार्षदों ने वार्डों में बराबर विकास नही करने,खरीददारी में मनमानी करने का आरोप लगाया।जिस पर प्रत्येक वार्डों में एक-एक योजनाओं की ही मंजूरी के लिए भेजी गई। पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी पर मुख्य पार्षद के पक्ष में काम करने और पार्षदों की अनदेखी का आरोप लगाया।
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    सोमवार को हुई नगर पंचायत की सामान्य बैठक रही हंगामेदार। नल-जल,सड़क-नाली,बिजली,सफाई, और घटिया किस्म के करोड़ों की खरीददारी पर हुआ जम कर शोरगुल। पार्षदों ने वार्डों में बराबर  विकास नही करने,खरीददारी में मनमानी करने का आरोप लगाया।जिस पर प्रत्येक वार्डों में एक-एक योजनाओं की ही मंजूरी के लिए भेजी गई। पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी पर मुख्य पार्षद के पक्ष में काम करने और पार्षदों की अनदेखी का आरोप लगाया।
    user_Shambhu sharan
    Shambhu sharan
    सुगौली, पूर्वी चंपारण, बिहार•
    20 hrs ago
  • u p merut 53yatriyon se bhare bus 🚌 me lagi aag logon ne kudkar bachai jan
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    u p merut 
53yatriyon se bhare bus 🚌 me lagi aag 
logon ne kudkar bachai jan
    user_Mr Zakir Husain
    Mr Zakir Husain
    गोपालगंज, गोपालगंज, बिहार•
    4 hrs ago
  • में दिनदहाड़े ज्वेलरी शॉप में लूट: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात पटना, बिहार की राजधानी, जहां आमतौर पर त्योहारों और विशेष अवसरों पर बाजारों में रौनक देखने को मिलती है, वहीं अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर अपराधियों ने एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। दिनदहाड़े हुई इस लूट की घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के भारत गैस गोदाम गली स्थित ‘श्री लक्ष्मी अलंकार ज्वेलर्स’ में हुई, जहां करीब पांच अपराधियों ने हथियार के बल पर दुकान में घुसकर लूटपाट की। घटना के दौरान अपराधियों ने न केवल दुकान में मौजूद कीमती आभूषणों को लूटा, बल्कि दुकान के मालिक और कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने दुकान के मालिक को पिस्तौल की बट से मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया और करीब 20 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात लेकर फरार हो गए। घटना का विवरण प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना दोपहर के समय हुई जब बाजार में सामान्य चहल-पहल थी। अक्षय तृतीया के अवसर पर सोने-चांदी की खरीदारी के लिए ग्राहकों की भीड़ रहती है, जिसका फायदा उठाते हुए अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया। पांचों अपराधी अलग-अलग दिशा से दुकान के पास पहुंचे और अचानक अंदर घुस गए। दुकान में घुसते ही उन्होंने हथियार लहराकर वहां मौजूद लोगों को डराना शुरू कर दिया। अपराधियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस लूट को अंजाम दिया, जिससे साफ जाहिर होता है कि उन्होंने पहले से ही दुकान की रेकी की थी। कुछ अपराधियों ने ग्राहकों और कर्मचारियों को एक कोने में खड़ा कर दिया, जबकि अन्य ने काउंटर में रखे गहनों को बैग में भरना शुरू कर दिया। जब दुकान के मालिक ने विरोध करने की कोशिश की, तो एक अपराधी ने उन्हें पिस्तौल की बट से सिर पर वार कर घायल कर दिया। इस हमले से दुकान में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सीसीटीवी में कैद हुई पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह अपराधी बेखौफ होकर दुकान में घुसते हैं और कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये के जेवरात लेकर फरार हो जाते हैं। फुटेज के आधार पर पुलिस ने अपराधियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। सीसीटीवी फुटेज में यह भी देखा गया कि अपराधियों के चेहरे आंशिक रूप से ढके हुए थे, लेकिन उनकी गतिविधियों और हुलिए के आधार पर पुलिस उन्हें पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है। पुलिस की कार्रवाई घटना की सूचना मिलते ही रामकृष्ण नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर दी है और संदिग्धों की तलाश जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया और जांच टीम को आवश्यक निर्देश दिए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही, आसपास के इलाकों में लगे अन्य कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि अपराधियों के भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके। स्थानीय लोगों में दहशत इस घटना के बाद इलाके के लोगों में डर और असुरक्षा की भावना फैल गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर दिनदहाड़े इस तरह की घटनाएं होंगी, तो व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके में पुलिस गश्त पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने मांग की है कि बाजारों में नियमित रूप से पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत किया जाए। त्योहार के दिन वारदात से बढ़ी चिंता अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर हुई इस घटना ने लोगों को और अधिक चिंतित कर दिया है। यह दिन आमतौर पर खरीदारी और खुशियों का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस वारदात ने त्योहार की खुशी को फीका कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधियों ने जानबूझकर इस दिन को चुना, क्योंकि इस दिन ज्वेलरी दुकानों में अधिक भीड़ और स्टॉक रहता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त रखने की आवश्यकता थी। प्रशासन पर उठे सवाल इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। आगे की कार्रवाई और उम्मीदें पुलिस का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और अपराधियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके अलावा, शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। निष्कर्ष पटना में हुई इस दिनदहाड़े लूट की घटना ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब पहले से ज्यादा संगठित और बेखौफ हो गए हैं। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस और प्रशासन मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। यह घटना केवल एक ज्वेलरी शॉप की लूट नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह की घटनाएं आम होती जाएंगी, जिससे आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से उठ सकता है।
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    में दिनदहाड़े ज्वेलरी शॉप में लूट: सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल, सीसीटीवी में कैद हुई वारदात
पटना, बिहार की राजधानी, जहां आमतौर पर त्योहारों और विशेष अवसरों पर बाजारों में रौनक देखने को मिलती है, वहीं अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर अपराधियों ने एक सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। दिनदहाड़े हुई इस लूट की घटना ने न केवल स्थानीय लोगों को दहशत में डाल दिया है, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह घटना रामकृष्ण नगर थाना क्षेत्र के भारत गैस गोदाम गली स्थित ‘श्री लक्ष्मी अलंकार ज्वेलर्स’ में हुई, जहां करीब पांच अपराधियों ने हथियार के बल पर दुकान में घुसकर लूटपाट की। घटना के दौरान अपराधियों ने न केवल दुकान में मौजूद कीमती आभूषणों को लूटा, बल्कि दुकान के मालिक और कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की। बताया जा रहा है कि अपराधियों ने दुकान के मालिक को पिस्तौल की बट से मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया और करीब 20 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात लेकर फरार हो गए।
घटना का विवरण
प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह घटना दोपहर के समय हुई जब बाजार में सामान्य चहल-पहल थी। अक्षय तृतीया के अवसर पर सोने-चांदी की खरीदारी के लिए ग्राहकों की भीड़ रहती है, जिसका फायदा उठाते हुए अपराधियों ने इस वारदात को अंजाम दिया। पांचों अपराधी अलग-अलग दिशा से दुकान के पास पहुंचे और अचानक अंदर घुस गए।
दुकान में घुसते ही उन्होंने हथियार लहराकर वहां मौजूद लोगों को डराना शुरू कर दिया। अपराधियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस लूट को अंजाम दिया, जिससे साफ जाहिर होता है कि उन्होंने पहले से ही दुकान की रेकी की थी। कुछ अपराधियों ने ग्राहकों और कर्मचारियों को एक कोने में खड़ा कर दिया, जबकि अन्य ने काउंटर में रखे गहनों को बैग में भरना शुरू कर दिया।
जब दुकान के मालिक ने विरोध करने की कोशिश की, तो एक अपराधी ने उन्हें पिस्तौल की बट से सिर पर वार कर घायल कर दिया। इस हमले से दुकान में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।
सीसीटीवी में कैद हुई पूरी वारदात
दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हो गई है। फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह अपराधी बेखौफ होकर दुकान में घुसते हैं और कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये के जेवरात लेकर फरार हो जाते हैं। फुटेज के आधार पर पुलिस ने अपराधियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सीसीटीवी फुटेज में यह भी देखा गया कि अपराधियों के चेहरे आंशिक रूप से ढके हुए थे, लेकिन उनकी गतिविधियों और हुलिए के आधार पर पुलिस उन्हें पकड़ने के प्रयास में जुटी हुई है।
पुलिस की कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही रामकृष्ण नगर थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस ने आसपास के इलाकों में नाकेबंदी कर दी है और संदिग्धों की तलाश जारी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी घटनास्थल का दौरा किया और जांच टीम को आवश्यक निर्देश दिए।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जल्द ही अपराधियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। साथ ही, आसपास के इलाकों में लगे अन्य कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है ताकि अपराधियों के भागने के रास्ते का पता लगाया जा सके।
स्थानीय लोगों में दहशत
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में डर और असुरक्षा की भावना फैल गई है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि अगर दिनदहाड़े इस तरह की घटनाएं होंगी, तो व्यापार करना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
कई व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि इलाके में पुलिस गश्त पर्याप्त नहीं है, जिसके कारण अपराधियों के हौसले बुलंद हैं। उन्होंने मांग की है कि बाजारों में नियमित रूप से पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत किया जाए।
त्योहार के दिन वारदात से बढ़ी चिंता
अक्षय तृतीया जैसे शुभ दिन पर हुई इस घटना ने लोगों को और अधिक चिंतित कर दिया है। यह दिन आमतौर पर खरीदारी और खुशियों का प्रतीक माना जाता है, लेकिन इस वारदात ने त्योहार की खुशी को फीका कर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधियों ने जानबूझकर इस दिन को चुना, क्योंकि इस दिन ज्वेलरी दुकानों में अधिक भीड़ और स्टॉक रहता है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त रखने की आवश्यकता थी।
प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना के बाद प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते उचित सुरक्षा इंतजाम किए गए होते, तो शायद इस घटना को रोका जा सकता था।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर निशाना साधा है और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
आगे की कार्रवाई और उम्मीदें
पुलिस का कहना है कि इस मामले को गंभीरता से लिया गया है और अपराधियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। इसके अलावा, शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
निष्कर्ष
पटना में हुई इस दिनदहाड़े लूट की घटना ने यह साफ कर दिया है कि अपराधी अब पहले से ज्यादा संगठित और बेखौफ हो गए हैं। ऐसे में जरूरी है कि पुलिस और प्रशासन मिलकर ठोस कदम उठाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
यह घटना केवल एक ज्वेलरी शॉप की लूट नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो इस तरह की घटनाएं आम होती जाएंगी, जिससे आम जनता का भरोसा कानून व्यवस्था से उठ सकता है।
    user_Niraj Raj
    Niraj Raj
    बैरिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    9 hrs ago
  • भारत आज भी एक कृषि-प्रधान देश है। देश की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि जिस कृषि व्यवस्था पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी है, उसी से जुड़ा किसान आज सबसे अधिक संकट में है। बढ़ती लागत, अनिश्चित मौसम, बाजार की अस्थिरता और फसलों के उचित मूल्य का अभाव—ये सभी कारक किसानों को हर मोर्चे पर संघर्ष करने को मजबूर कर रहे हैं। पारंपरिक खेती अब उनके लिए सम्मानजनक आय का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि कई बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। ऐसे विषम हालात में प्रश्न उठता है कि आखिर किसानों के लिए रास्ता क्या है? क्या वे इसी चक्र में फंसे रहें या खेती के तौर-तरीकों में बदलाव कर नई संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाएँ? इसका उत्तर अब खेतों से ही निकलकर सामने आ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर, पश्चिम चम्पारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न जैसी फसलें इस बदलाव की मजबूत बुनियाद बनती जा रही हैं। बेतिया जिले के विशुनपुर रघुनाथ क्षेत्र के युवा किसान रवि कुमार इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर बेबी कॉर्न की खेती को अपनाया और कम समय में बेहतर मुनाफा अर्जित किया। यह फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक वर्ष में कई चक्रों में उत्पादन लेकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। बेबी कॉर्न की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दोहरी उपयोगिता है: एक ओर इसका भुट्टा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, वहीं दूसरी ओर इसका हरा पौधा पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता का चारा बनता है। किसान संजय कुमार बताते हैं कि इसके चारे के उपयोग से मवेशियों की दूध देने की क्षमता बढ़ती है, जिससे अतिरिक्त आय का एक और स्रोत तैयार हो जाता है। अर्थात् एक ही फसल से किसान को दोहरा लाभ मिल रहा है—फसल और पशुपालन, दोनों। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। ग्राम बैकुंठवा, प्रखंड नौतन के किसान राघोशरण प्रसाद मानते हैं कि बेबी कॉर्न की खेती ने किसानों की आर्थिक तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब किसान कम समय में नकदी फसल लेकर बाजार से सीधे जुड़ पा रहे हैं, जिससे बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो रही है। दूसरी ओर, स्वीट कॉर्न भी किसानों के लिए एक उभरता हुआ विकल्प है। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। शहरों में उबले और भुने हुए स्वीट कॉर्न की लोकप्रियता ने इसे एक स्थायी बाजार प्रदान किया है। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी बिक्री भी अपेक्षाकृत आसान होती है। सरकार भी इस परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि किसान इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती वर्तमान समय में किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है। कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। विभाग की ओर से किसानों को बीज, तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से हर संभव सहयोग दिया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक खेती को अपना सकें। स्पष्ट है कि आज खेती केवल परिश्रम का नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और रणनीति का भी विषय बन चुकी है। जो किसान बाजार की मांग और समय की आवश्यकता को समझ रहा है, वही आगे बढ़ रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न इस बदलाव के प्रतीक हैं, जहाँ कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफा:तीनों एक साथ संभव हो रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि अब आवश्यकता इस बात की है कि किसान अपनी सोच को सीमित दायरे से बाहर निकालें और नई फसलों को अपनाने का साहस दिखाएँ, क्योंकि आने वाला समय उसी का है जो खेती को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखेगा। इस अवसर पर माधोपुर पैक्स अध्यक्ष श्री शत्रुघ्न सिंह, रवि कुमार, सौरभ कुमार सहित अन्य किसान उपस्थित थे।
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    भारत आज भी एक कृषि-प्रधान देश है। देश की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि जिस कृषि व्यवस्था पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी है, उसी से जुड़ा किसान आज सबसे अधिक संकट में है। बढ़ती लागत, अनिश्चित मौसम, बाजार की अस्थिरता और फसलों के उचित मूल्य का अभाव—ये सभी कारक किसानों को हर मोर्चे पर संघर्ष करने को मजबूर कर रहे हैं। पारंपरिक खेती अब उनके लिए सम्मानजनक आय का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि कई बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। ऐसे विषम हालात में प्रश्न उठता है कि आखिर किसानों के लिए रास्ता क्या है? क्या वे इसी चक्र में फंसे रहें या खेती के तौर-तरीकों में बदलाव कर नई संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाएँ? इसका उत्तर अब खेतों से ही निकलकर सामने आ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर, पश्चिम चम्पारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न जैसी फसलें इस बदलाव की मजबूत बुनियाद बनती जा रही हैं। बेतिया जिले के विशुनपुर रघुनाथ क्षेत्र के युवा किसान रवि कुमार इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर बेबी कॉर्न की खेती को अपनाया और कम समय में बेहतर मुनाफा अर्जित किया। यह फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक वर्ष में कई चक्रों में उत्पादन लेकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। बेबी कॉर्न की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दोहरी उपयोगिता है: एक ओर इसका भुट्टा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, वहीं दूसरी ओर इसका हरा पौधा पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता का चारा बनता है। किसान संजय कुमार बताते हैं कि इसके चारे के उपयोग से मवेशियों की दूध देने की क्षमता बढ़ती है, जिससे अतिरिक्त आय का एक और स्रोत तैयार हो जाता है। अर्थात् एक ही फसल से किसान को दोहरा लाभ मिल रहा है—फसल और पशुपालन, दोनों। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। ग्राम बैकुंठवा, प्रखंड नौतन के किसान राघोशरण प्रसाद मानते हैं कि बेबी कॉर्न की खेती ने किसानों की आर्थिक तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब किसान कम समय में नकदी फसल लेकर बाजार से सीधे जुड़ पा रहे हैं, जिससे बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो रही है। दूसरी ओर, स्वीट कॉर्न भी किसानों के लिए एक उभरता हुआ विकल्प है। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। शहरों में उबले और भुने हुए स्वीट कॉर्न की लोकप्रियता ने इसे एक स्थायी बाजार प्रदान किया है। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी बिक्री भी अपेक्षाकृत आसान होती है। सरकार भी इस परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि किसान इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती वर्तमान समय में किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है। कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। विभाग की ओर से किसानों को बीज, तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से हर संभव सहयोग दिया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक खेती को अपना सकें। स्पष्ट है कि आज खेती केवल परिश्रम का नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और रणनीति का भी विषय बन चुकी है। जो किसान बाजार की मांग और समय की आवश्यकता को समझ रहा है, वही आगे बढ़ रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न इस बदलाव के प्रतीक हैं, जहाँ कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफा:तीनों एक साथ संभव हो रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि अब आवश्यकता इस बात की है कि किसान अपनी सोच को सीमित दायरे से बाहर निकालें और नई फसलों को अपनाने का साहस दिखाएँ, क्योंकि आने वाला समय उसी का है जो खेती को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखेगा। इस अवसर पर माधोपुर पैक्स अध्यक्ष श्री शत्रुघ्न सिंह, रवि कुमार, सौरभ कुमार सहित अन्य किसान उपस्थित थे।
    user_RAVI PANDEY
    RAVI PANDEY
    Farmer मझौलिया, पश्चिम चंपारण, बिहार•
    2 hrs ago
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