विभाग का सख्त निर्देश के बावजूद सड़क अतिक्रमणकारियों को लेकर प्रशासन ने कसी कमर ,सात दिनों के अंदर अतिक्रमण मुक्त करने का प्रशासन ने दिया निर्देश ।। मंगलवार के दिन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी डॉक्टर राजीव रंजन कुमार व पुलिस पदाधिकारी भानु प्रकाश सहित पुलिस बल के साथ मझौलिया प्रखंड मुख्यालय से लेकर बाजार चौक से होते हुए मझौलिया चीनी मिल तथा मझौलिया रेलवे गुमटी तक सड़क के अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध प्रशासन अब कमर कस ली है।बार बार समझाने के बावजूद भी अतिक्रमणकारी नहीं हट रहे हैं। सात दिनों के अंदर अतिक्रमण करने वाले नहीं हटते हैं तो उनके विरुद्ध होगी कानूनी कार्रवाई।उक्त बाते प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी ने कही । उन्होंने ने बताया कि मझौलिया बाजार तथा सरिसवा बाजार के सड़क के अतिक्रमण करने वाले अगर सात दिनों के अंदर नहीं हटे तो प्रशासन बुलडोजर से अतिक्रमण मुक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई करेगी ।इस दौरान मझौलिया बाजार में दुकानदारों के बीच अफरा तफरी का माहौल बना रहा।इस मौके राजस्व अमीन सहित पुलिस पदाधिकारी सहित पुलिस बल शामिल रहे।
विभाग का सख्त निर्देश के बावजूद सड़क अतिक्रमणकारियों को लेकर प्रशासन ने कसी कमर ,सात दिनों के अंदर अतिक्रमण मुक्त करने का प्रशासन ने दिया निर्देश ।। मंगलवार के दिन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी डॉक्टर राजीव रंजन कुमार व पुलिस पदाधिकारी भानु प्रकाश
सहित पुलिस बल के साथ मझौलिया प्रखंड मुख्यालय से लेकर बाजार चौक से होते हुए मझौलिया चीनी मिल तथा मझौलिया रेलवे गुमटी तक सड़क के अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध प्रशासन अब कमर कस ली है।बार बार समझाने के बावजूद भी अतिक्रमणकारी नहीं
हट रहे हैं। सात दिनों के अंदर अतिक्रमण करने वाले नहीं हटते हैं तो उनके विरुद्ध होगी कानूनी कार्रवाई।उक्त बाते प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी ने कही । उन्होंने ने बताया कि मझौलिया बाजार तथा सरिसवा बाजार के सड़क के अतिक्रमण करने वाले
अगर सात दिनों के अंदर नहीं हटे तो प्रशासन बुलडोजर से अतिक्रमण मुक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई करेगी ।इस दौरान मझौलिया बाजार में दुकानदारों के बीच अफरा तफरी का माहौल बना रहा।इस मौके राजस्व अमीन सहित पुलिस पदाधिकारी सहित पुलिस बल शामिल रहे।
- बेतिया के सिकटा थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव में एक दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। 18 वर्षीय इंटर की छात्रा रानी कुमारी ने अपने ही घर में दुपट्टे के सहारे फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना सोमवार (20 अप्रैल) की देर संध्या की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, रानी के माता-पिता दिन में खेत पर काम करने गए थे। जब वे शाम करीब 7 बजे घर लौटे तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। कई बार आवाज देने और दरवाजा खटखटाने के बावजूद जब कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली तो परिजनों को अनहोनी की आशंका हुई। इसके बाद वे पीछे के रास्ते से घर में दाखिल हुए, जहां का दृश्य देख उनके होश उड़ गए—रानी कमरे में फंदे से लटकी हुई थी। परिजनों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर जुट गए और तत्काल डायल 112 तथा स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेतिया जीएमसीएच भेज दिया। मंगलवार (21 अप्रैल) को सुबह करीब 10 बजे पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। मृतका की पहचान पारस साह की सबसे छोटी बेटी रानी कुमारी (18 वर्ष) के रूप में हुई है। वह इंटर की छात्रा थी और अपने परिवार में तीन बहनों व दो भाइयों में सबसे छोटी थी। इस घटना से परिवार में मातम पसरा हुआ है। वहीं, ग्रामीणों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रेम प्रसंग से जोड़कर देख रहे हैं, हालांकि पुलिस ने फिलहाल किसी भी कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनती हैं, जहां एक युवा छात्रा को इतना बड़ा कदम उठाना पड़ता है।1
- चोरी की पल्सर बाइक के साथ युवक गिरफ्तार, भेजा गया जेल बेतिया | सत्यम श्रीवास्तव की रिपोर्ट बेतिया पुलिस ने चोरी की पल्सर बाइक के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, राजघाट स्थित पुल के पास घेराबंदी कर पुलिस ने आरोपी को दबोच लिया। एसएचओ अमर कुमार ने बताया कि गिरफ्तार युवक की पहचान फैयाज आलम (24 वर्ष) के रूप में हुई है, जो लालगढ़ गांव निवासी असगर आलम का पुत्र है। उसके पास से बरामद काले रंग की पल्सर बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर BR 22 AT 9016 है। युवक को सुगौली की ओर जाने के दौरान राजघाट पुल पर पकड़ा गया। वहीं, एक अन्य मामले में शराब के नशे में मारपीट करने के आरोपी सागर कुमार साह, निवासी बहुअरवा नवका टोला, को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया। मेडिकल जांच के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस दोनों मामलों में आगे की कार्रवाई कर रही है।1
- मंगलवार के दिन प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी डॉक्टर राजीव रंजन कुमार व पुलिस पदाधिकारी भानु प्रकाश सहित पुलिस बल के साथ मझौलिया प्रखंड मुख्यालय से लेकर बाजार चौक से होते हुए मझौलिया चीनी मिल तथा मझौलिया रेलवे गुमटी तक सड़क के अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध प्रशासन अब कमर कस ली है।बार बार समझाने के बावजूद भी अतिक्रमणकारी नहीं हट रहे हैं। सात दिनों के अंदर अतिक्रमण करने वाले नहीं हटते हैं तो उनके विरुद्ध होगी कानूनी कार्रवाई।उक्त बाते प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी ने कही । उन्होंने ने बताया कि मझौलिया बाजार तथा सरिसवा बाजार के सड़क के अतिक्रमण करने वाले अगर सात दिनों के अंदर नहीं हटे तो प्रशासन बुलडोजर से अतिक्रमण मुक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई करेगी ।इस दौरान मझौलिया बाजार में दुकानदारों के बीच अफरा तफरी का माहौल बना रहा।इस मौके राजस्व अमीन सहित पुलिस पदाधिकारी सहित पुलिस बल शामिल रहे।4
- भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना ज्ञान भारतम में सहयोग करने वाले बेतिया के विशिष्ट नागरिकों को जिला पदाधिकारी माननीय श्री तरण जोत सिंह ने सम्मानित किया। 20.04.2026.1
- सोमवार को हुई नगर पंचायत की सामान्य बैठक रही हंगामेदार। नल-जल,सड़क-नाली,बिजली,सफाई, और घटिया किस्म के करोड़ों की खरीददारी पर हुआ जम कर शोरगुल। पार्षदों ने वार्डों में बराबर विकास नही करने,खरीददारी में मनमानी करने का आरोप लगाया।जिस पर प्रत्येक वार्डों में एक-एक योजनाओं की ही मंजूरी के लिए भेजी गई। पार्षदों ने कार्यपालक पदाधिकारी पर मुख्य पार्षद के पक्ष में काम करने और पार्षदों की अनदेखी का आरोप लगाया।1
- 9th phel dhakadhak english bol rahe hai university me padhne walo ko ajtak english bolte suna hi nahi1
- Post by RAJA KUMAR1
- भारत आज भी एक कृषि-प्रधान देश है। देश की बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर है। लेकिन यह भी एक कड़वा सच है कि जिस कृषि व्यवस्था पर देश की अर्थव्यवस्था टिकी है, उसी से जुड़ा किसान आज सबसे अधिक संकट में है। बढ़ती लागत, अनिश्चित मौसम, बाजार की अस्थिरता और फसलों के उचित मूल्य का अभाव—ये सभी कारक किसानों को हर मोर्चे पर संघर्ष करने को मजबूर कर रहे हैं। पारंपरिक खेती अब उनके लिए सम्मानजनक आय का माध्यम नहीं रह गई है, बल्कि कई बार घाटे का सौदा साबित हो रही है। ऐसे विषम हालात में प्रश्न उठता है कि आखिर किसानों के लिए रास्ता क्या है? क्या वे इसी चक्र में फंसे रहें या खेती के तौर-तरीकों में बदलाव कर नई संभावनाओं की ओर कदम बढ़ाएँ? इसका उत्तर अब खेतों से ही निकलकर सामने आ रहा है। कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर, पश्चिम चम्पारण के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न जैसी फसलें इस बदलाव की मजबूत बुनियाद बनती जा रही हैं। बेतिया जिले के विशुनपुर रघुनाथ क्षेत्र के युवा किसान रवि कुमार इस बदलाव की मिसाल बनकर उभरे हैं। उन्होंने पारंपरिक फसलों के दायरे से बाहर निकलकर बेबी कॉर्न की खेती को अपनाया और कम समय में बेहतर मुनाफा अर्जित किया। यह फसल मात्र 60 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है, जिससे किसान एक वर्ष में कई चक्रों में उत्पादन लेकर अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। बेबी कॉर्न की सबसे बड़ी विशेषता इसकी दोहरी उपयोगिता है: एक ओर इसका भुट्टा बाजार में अच्छी कीमत पर बिकता है, वहीं दूसरी ओर इसका हरा पौधा पशुओं के लिए उच्च गुणवत्ता का चारा बनता है। किसान संजय कुमार बताते हैं कि इसके चारे के उपयोग से मवेशियों की दूध देने की क्षमता बढ़ती है, जिससे अतिरिक्त आय का एक और स्रोत तैयार हो जाता है। अर्थात् एक ही फसल से किसान को दोहरा लाभ मिल रहा है—फसल और पशुपालन, दोनों। ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसका प्रभाव दिखने लगा है। ग्राम बैकुंठवा, प्रखंड नौतन के किसान राघोशरण प्रसाद मानते हैं कि बेबी कॉर्न की खेती ने किसानों की आर्थिक तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। अब किसान कम समय में नकदी फसल लेकर बाजार से सीधे जुड़ पा रहे हैं, जिससे बिचौलियों पर उनकी निर्भरता कम हो रही है। दूसरी ओर, स्वीट कॉर्न भी किसानों के लिए एक उभरता हुआ विकल्प है। बदलती जीवनशैली और खानपान की आदतों के कारण इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। शहरों में उबले और भुने हुए स्वीट कॉर्न की लोकप्रियता ने इसे एक स्थायी बाजार प्रदान किया है। यह फसल 65 से 75 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी बिक्री भी अपेक्षाकृत आसान होती है। सरकार भी इस परिवर्तन को प्रोत्साहित करने में सक्रिय भूमिका निभा रही है। स्वीट कॉर्न की खेती के लिए बीज पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है, ताकि किसान इसे अपनाने के लिए प्रेरित हों। साथ ही, कृषि विज्ञान केंद्र माधोपुर द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन और प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जा रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न की खेती वर्तमान समय में किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प बनकर उभरी है। कम समय में तैयार होने वाली इन फसलों की बाजार में अच्छी मांग है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य मिल रहा है। विभाग की ओर से किसानों को बीज, तकनीक और प्रशिक्षण के माध्यम से हर संभव सहयोग दिया जा रहा है, ताकि वे पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यावसायिक खेती को अपना सकें। स्पष्ट है कि आज खेती केवल परिश्रम का नहीं, बल्कि दूरदर्शिता और रणनीति का भी विषय बन चुकी है। जो किसान बाजार की मांग और समय की आवश्यकता को समझ रहा है, वही आगे बढ़ रहा है। बेबी कॉर्न और स्वीट कॉर्न इस बदलाव के प्रतीक हैं, जहाँ कम लागत, कम समय और अधिक मुनाफा:तीनों एक साथ संभव हो रहे हैं। डॉ. सिंह ने बताया कि अब आवश्यकता इस बात की है कि किसान अपनी सोच को सीमित दायरे से बाहर निकालें और नई फसलों को अपनाने का साहस दिखाएँ, क्योंकि आने वाला समय उसी का है जो खेती को सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक संगठित और लाभकारी व्यवसाय के रूप में देखेगा। इस अवसर पर माधोपुर पैक्स अध्यक्ष श्री शत्रुघ्न सिंह, रवि कुमार, सौरभ कुमार सहित अन्य किसान उपस्थित थे।1