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पश्चिम चंपारण में हनुमान जी के नाम पर की जा रही कथित राजनीति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले से जुड़े एक वीडियो के आधार पर लोगों से उनकी राय पूछी गई है और सच्चाई जानने की अपील की गई है। इस विषय पर लोगों से अपनी बात कमेंट में साझा करने के लिए कहा गया है।
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पश्चिम चंपारण में हनुमान जी के नाम पर की जा रही कथित राजनीति को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मामले से जुड़े एक वीडियो के आधार पर लोगों से उनकी राय पूछी गई है और सच्चाई जानने की अपील की गई है। इस विषय पर लोगों से अपनी बात कमेंट में साझा करने के लिए कहा गया है।
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- पश्चिम चंपारण के योगापट्टी निवासियों के लिए अच्छी खबर है। अब शहर में ही सभी साइज के हाई क्वालिटी मोटर भरोसेमंद कीमतों पर उपलब्ध हैं। दुकान का पता योगापट्टी थाना से 100 मीटर पूर्व है और ग्राहकों को एक बार वहां जरूर जाने की सलाह दी गई है।1
- राज्यपाल सचिवालय ने बिहार के स्नातक छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इस निर्णय के तहत, राज्य के सभी स्नातक छात्रों के लिए अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) शिक्षा, कौशल विकास और औद्योगिक प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य कर दिया गया है।1
- पश्चिमी चंपारण जिले के जोगपट्टी प्रखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत दड़वा का सड़क मार्ग दुधियवा गांव से होकर गुजरता है।1
- पूर्वी चंपारण जिले के रक्सौल में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। हरैया थाना पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने इंडो-नेपाल बॉर्डर पर स्थित कस्टम कार्यालय के पास मैत्री पुल से एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है। पकड़ा गया आरोपी बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में रह रहा था और नेपाल जाने की कोशिश में था, तभी जांच के दौरान सुरक्षा कर्मियों को उस पर संदेह हुआ। गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान श्याम हुसैन के रूप में हुई है, जो बांग्लादेश के मुंशीगंज जिले के श्रीनगर थाना अंतर्गत बरोएगांव का निवासी है और उसके पिता का नाम नियामुद्दीन है। हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार ने पुष्टि की है कि आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि श्याम हुसैन भारत में कब दाखिल हुआ, यहां रहने का उसका उद्देश्य क्या था और उसके संपर्क में कौन-कौन लोग थे। इस घटना के बाद सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया गया है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों और अवैध आवाजाही पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।1
- कुशीनगर के पडरौना स्थित बलूचाहा रोड की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है। हल्की बारिश होने के तुरंत बाद सड़क पर करीब दो फीट तक पानी भर गया, जिसके कारण राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जलभराव के चलते पैदल चलने वालों के साथ-साथ दोपहिया वाहन चालकों को भी जोखिम उठाकर सड़क पार करनी पड़ी। स्थानीय लोगों के अनुसार, क्षेत्र की नालियों की समय पर सफाई न होने के कारण बारिश का पानी सड़क पर जमा हो जाता है। हर साल बरसात के मौसम में यही स्थिति दोहराई जाती है, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है। इस लगातार बनी समस्या को लेकर लोगों में नगर पालिका प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी बढ़ती जा रही है। अब क्षेत्रवासियों ने नगर पालिका से मांग की है कि नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित की जाए और जल निकासी के लिए ठोस प्रबंध किए जाएं ताकि भविष्य में उन्हें इस समस्या से राहत मिल सके।1
- बेतिया के समाहरणालय सभागार में समाज कल्याण विभाग के राज्यस्तरीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया गया। इस अवसर पर सम्राट चौधरी ने डीबीटी के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के लिए ₹1,100 की मासिक पेंशन राशि जारी की। इस पहल के तहत पश्चिम चम्पारण जिले के 3,50,372 लाभार्थियों के बैंक खातों में कुल ₹50.01 करोड़ से अधिक की राशि हस्तांतरित की गई। कार्यक्रम में जिला पदाधिकारी तरनजोत सिंह सहित अन्य अधिकारी और बड़ी संख्या में लाभार्थी उपस्थित रहे।1
- कुशीनगर के पडरौना स्थित बलूचाहा रोड की बदहाल स्थिति एक बार फिर सामने आई है, जहाँ हल्की बारिश के कारण सड़क पर करीब दो फीट तक पानी भर गया। जलभराव के चलते राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिसमें दोपहिया वाहन सवारों को जोखिम उठाकर गुजरना पड़ा और पैदल चलने वालों के लिए भी आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की समय पर सफाई न होना इस समस्या की मुख्य वजह है, जिसके कारण हर साल बरसात में यही स्थिति बनी रहती है। अब तक इस समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं, जिससे निवासियों में नगर पालिका प्रशासन के प्रति गहरी नाराजगी है। क्षेत्रवासियों ने अब मांग की है कि नालियों की नियमित सफाई के साथ जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि उन्हें इस वार्षिक जलभराव से राहत मिल सके।4
- पश्चिमी चंपारण में गंडक नदी का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नदी किनारे डाले गए सुरक्षात्मक बोरे धंस रहे हैं, जो कटाव के बढ़ते प्रभाव को दर्शाते हैं। इस संकट के चलते ग्रामीण आक्रोशित हैं और उन्होंने सड़क पर उतरकर अपना विरोध दर्ज कराया है। जल संसाधन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने विभाग के रवैये पर नाराजगी जाहिर की है और पूछा है कि प्रशासन आखिर कब इस गंभीर खतरे का संज्ञान लेगा।1