रविवार को खानपुर उपखंड क्षेत्र के गांवों के आसमान में एक अद्भुत नज़ारा देखा गया, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘सन हेलो’ या 22-डिग्री हेलो कहते हैं। यह रोज़-रोज़ देखने को नहीं मिलता, इसलिए ग्रामीणों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का इसे देखकर हैरान होना स्वाभाविक था। इस घटना के पीछे का असली वैज्ञानिक रहस्य यह है कि यह तब होता है जब आसमान में बहुत ऊंचाई पर पतले 'सिरस' बादल छा जाते हैं। इन बादलों में पानी की बूंदों के बजाय लाखों छोटे-छोटे बर्फ के षट्कोणीय क्रिस्टल होते हैं। जब सूर्य की किरणें इन बर्फ के क्रिस्टलों से होकर गुज़रती हैं, तो वे एक प्रिज्म की तरह काम करते हुए रोशनी को मोड़ देती हैं, जिससे सूर्य के चारों ओर एक सटीक गोलाकार चमकीला घेरा बन जाता है, जिसमें अक्सर इंद्रधनुष की तरह हल्के रंग भी दिखाई देते हैं। हालांकि स्थानीय पुरानी परंपराओं में ऐसी घटनाओं को अक्सर किसी दैवीय संकेत या मौसम के बड़े बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से एक सामान्य प्रकाशिक भ्रम (ऑप्टिकल इल्यूजन) और प्राकृतिक घटना है। इस खूबसूरत नज़ारे का आनंद लेते समय एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि नग्न आंखों से सीधे सूर्य की तरफ लगातार देखने से आंखों की रोशनी को नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए इसे चश्मा लगाकर या मोबाइल कैमरे के ज़रिए देखना सबसे सुरक्षित रहता है।
रविवार को खानपुर उपखंड क्षेत्र के गांवों के आसमान में एक अद्भुत नज़ारा देखा गया, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘सन हेलो’ या 22-डिग्री हेलो कहते हैं। यह रोज़-रोज़ देखने को नहीं मिलता, इसलिए ग्रामीणों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का इसे देखकर हैरान होना स्वाभाविक था। इस घटना के पीछे का असली वैज्ञानिक रहस्य यह है कि यह तब होता है जब आसमान में बहुत ऊंचाई पर पतले 'सिरस' बादल छा जाते हैं। इन बादलों में पानी की बूंदों के बजाय लाखों छोटे-छोटे बर्फ के षट्कोणीय क्रिस्टल होते हैं। जब सूर्य की किरणें इन बर्फ के क्रिस्टलों से होकर गुज़रती हैं, तो वे एक प्रिज्म की तरह काम करते हुए रोशनी को मोड़ देती हैं, जिससे सूर्य के चारों ओर एक सटीक गोलाकार चमकीला घेरा बन जाता है, जिसमें अक्सर इंद्रधनुष की तरह हल्के रंग भी दिखाई देते हैं। हालांकि स्थानीय पुरानी परंपराओं में ऐसी घटनाओं को अक्सर किसी दैवीय संकेत या मौसम के बड़े बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से एक सामान्य प्रकाशिक भ्रम (ऑप्टिकल इल्यूजन) और प्राकृतिक घटना है। इस खूबसूरत नज़ारे का आनंद लेते समय एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि नग्न आंखों से सीधे सूर्य की तरफ लगातार देखने से आंखों की रोशनी को नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए इसे चश्मा लगाकर या मोबाइल कैमरे के ज़रिए देखना सबसे सुरक्षित रहता है।
- रविवार को खानपुर उपखंड क्षेत्र के गांवों के आसमान में एक अद्भुत नज़ारा देखा गया, जिसे विज्ञान की भाषा में ‘सन हेलो’ या 22-डिग्री हेलो कहते हैं। यह रोज़-रोज़ देखने को नहीं मिलता, इसलिए ग्रामीणों और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं का इसे देखकर हैरान होना स्वाभाविक था। इस घटना के पीछे का असली वैज्ञानिक रहस्य यह है कि यह तब होता है जब आसमान में बहुत ऊंचाई पर पतले 'सिरस' बादल छा जाते हैं। इन बादलों में पानी की बूंदों के बजाय लाखों छोटे-छोटे बर्फ के षट्कोणीय क्रिस्टल होते हैं। जब सूर्य की किरणें इन बर्फ के क्रिस्टलों से होकर गुज़रती हैं, तो वे एक प्रिज्म की तरह काम करते हुए रोशनी को मोड़ देती हैं, जिससे सूर्य के चारों ओर एक सटीक गोलाकार चमकीला घेरा बन जाता है, जिसमें अक्सर इंद्रधनुष की तरह हल्के रंग भी दिखाई देते हैं। हालांकि स्थानीय पुरानी परंपराओं में ऐसी घटनाओं को अक्सर किसी दैवीय संकेत या मौसम के बड़े बदलाव से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन यह पूरी तरह से एक सामान्य प्रकाशिक भ्रम (ऑप्टिकल इल्यूजन) और प्राकृतिक घटना है। इस खूबसूरत नज़ारे का आनंद लेते समय एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है कि नग्न आंखों से सीधे सूर्य की तरफ लगातार देखने से आंखों की रोशनी को नुकसान पहुँच सकता है, इसलिए इसे चश्मा लगाकर या मोबाइल कैमरे के ज़रिए देखना सबसे सुरक्षित रहता है।1
- रविवार को पनवाड़-दहीखेड़ा क्षेत्र में प्रकृति का एक दुर्लभ और अकल्पनीय नज़ारा देखने को मिला, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया। दोपहर के समय अचानक आसमान में सूर्य के चारों ओर एक विशाल और चमकीला गोलाकार घेरा दिखाई दिया। ग्रामीणों ने कौतूहलवश इस अद्भुत खगोलीय घटना को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया है, और अब इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं।1
- अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के क्रम में छिपाबड़ौद स्थित स्टेडियम में धनुरासन का अभ्यास किया गया।1
- राजस्थान के शाहाबाद उपखण्ड क्षेत्र में रविवार सुबह आसमान में सूर्य के चारों ओर एक चमकीला गोलाकार घेरा दिखाई दिया, जो लोगों के लिए कौतूहल का विषय बन गया। जैसे ही लोगों की नज़र इस अद्भुत प्रभामंडल घेरे पर पड़ी, वे इसे देखने के लिए अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। कई लोगों ने इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया। सूर्य के चारों ओर दिखने वाला यह अद्भुत वलय एक वायुमंडलीय प्रकाशीय घटना है जिसे सूर्य प्रभामंडल (सन हेलो) या तकनीकी रूप से, 22-डिग्री प्रभामंडल के नाम से जाना जाता है। इसके बनने का मुख्य कारण बर्फ के क्रिस्टल होते हैं। यह तब होता है जब सूर्य का प्रकाश उच्च ऊंचाई वाले सिरस या सिरोस्ट्रैटस बादलों में निलंबित लाखों छोटे, षट्कोणीय बर्फ के क्रिस्टलों से अपवर्तित (मुड़ता) है। अपनी विशिष्ट आकृति के कारण, ये क्रिस्टल प्रकाश को एक सटीक कोण पर मोड़ते हैं, जिससे सूर्य से लगभग 22 डिग्री की त्रिज्या वाला एक वृत्ताकार वलय बनता है। यह अक्सर सफेद दिखाई देता है, लेकिन इसमें हल्के इंद्रधनुषी रंग भी दिख सकते हैं, जिसमें भीतरी किनारे पर लाल और बाहरी किनारे पर नीला रंग होता है। ऐतिहासिक रूप से, सूर्य के चारों ओर बनने वाले प्रभामंडल को अक्सर बारिश या तूफान के आने का संकेत माना जाता रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि प्रभामंडल बनाने वाले ऊंचे सिरस बादल अक्सर गर्म हवा के झोंके से पहले आते हैं। एक पुरानी कहावत, "सूरज/चांद के गिर्द घेरा, जल्द आए मेह बरसेरा" भी इसी धारणा पर आधारित है। इसके पीछे तर्क यह है कि हेलो बनाने वाले सिरस बादल अक्सर किसी तूफानी सिस्टम के आगे-आगे चलते हैं, जिससे हेलो दिखने के 24-48 घंटे में बारिश की संभावना बढ़ जाती है, हालांकि यह 100% गारंटी नहीं है।4
- अचानक सूरज पर एक ग्रहण जैसा गोलाकार आकार दिखाई दिया, जिसने सूरज की किरणों को बाहर निकलने से रोक दिया. इस अनोखी घटना को देखकर हर कोई हैरान रह गया और इलाके में हड़कंप मच गया. लोगों के मन में यह सवाल उठने लगा है कि क्या यह कोई ग्रहण है, या किसी बड़ी आपदा, संकट अथवा प्रलय का संकेत है. गांव वालों का कहना है कि यह विनाश का सूचक है, जो आने वाले संकट या काल का संकेत दे रहा है.2
- शनिवार शाम सूमर स्थित श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में आयोजित एक विशेष बैठक में सर्वसम्मति से श्री पंचमुखी हनुमान गौ सेवा समिति की नई कार्यकारिणी का गठन किया गया। इस दौरान अमित दाधीच को अध्यक्ष, रतन लाल प्रजापति को संरक्षक, रामेशवर नागर दयाल नागर को सचिव, सुरेश सामरिया को कोषाध्यक्ष, तथा महेंद्र नागर, हेमराज कटारिया, देवकरण गोठवाल और महावीर पुगलिया को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई। समिति ने आगामी माह में संगठन का विस्तार करते हुए युवा मंडल की एक नई टीम जोड़ने का भी निर्णय लिया है। इस बैठक में सभी पदाधिकारियों और सदस्यों ने बीमार व लावारिस गायों के समय पर इलाज, उनके लिए स्वच्छ पानी और हरे चारे की व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपने विचार साझा किए। साथ ही, क्षेत्र में गायों की तस्करी रोकने के लिए ठोस कदम उठाने पर भी चर्चा हुई। समिति ने यह भी तय किया है कि आने वाले दिनों में लावारिस गायों के लिए पानी की टंकियां रखवाई जाएंगी और रात के सड़क हादसों से उन्हें बचाने के लिए उनके गले में रेडियम बेल्ट बांधने का अभियान चलाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा दिलाने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी जारी है, जिसके तहत जून माह में जिला स्तर पर धरना-प्रदर्शन भी आयोजित किया जाएगा।1
- बारां में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए यातायात प्रभारी उप-निरीक्षक चंद्रप्रकाश को ₹7,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। यातायात प्रभारी चंद्रप्रकाश पर आरोप है कि वह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से मासिक बंदी के रूप में यह रिश्वत राशि वसूल रहा था। इस कार्रवाई को एसीबी के एएसपी कालूराम वर्मा ने अंजाम दिया, और यह पूरी कार्रवाई एसीबी डीआईजी ओमप्रकाश मीणा के पर्यवेक्षण में संपन्न हुई।4