वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने मासिक अपराध समीक्षा बैठक में कमिश्नरेट पुलिस को सख्त और सक्रिय पुलिसिंग के कड़े निर्देश दिए हैं। आगामी सावन माह की सुरक्षा व्यवस्था, साइबर अपराध, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर इस बैठक में विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही, प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए विभाग में दो निरीक्षकों और दो उपनिरीक्षकों के तबादले भी किए गए हैं। साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए शुरू किए गए 'Cy-Vazra' अभियान के तहत सभी थाना प्रभारियों को पिछले छह महीनों के साइबर मामलों की समीक्षा करने और कम से कम 10 मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त फर्जी मोबाइल नंबर, म्यूल अकाउंट और साइबर हॉटस्पॉट की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। पुलिस कमिश्नर ने सभी विवेचनाओं का 60 और 90 दिनों की समयसीमा से पहले निस्तारण करने, ई-साक्ष्य और ई-समन प्रणाली का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सभी थाना प्रभारियों को प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नियमित रूप से जनसुनवाई करने का आदेश दिया गया है। अपराध नियंत्रण के तहत चेन स्नैचिंग, लूट, चोरी, नकबजनी, गोकशी, धर्मांतरण और संगठित अपराध से जुड़े आदतन अपराधियों की सूची तैयार कर उनकी लगातार निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूलों और कॉलेजों के खुलने के मद्देनज़र एंटी रोमियो अभियान को तेज करने तथा शिक्षण संस्थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए प्रबंधन को नोटिस जारी करने को कहा गया है। यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए RTC (Reducing Traffic Congestion) योजना के तहत चिन्हित प्रमुख मार्गों से अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई करने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए 'Zero Fatality District' अभियान के अंतर्गत विशेष कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। श्रावण माह की तैयारियों को लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों, कांवड़ मार्गों और गंगा घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। इन संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, अस्थायी पुलिस चौकियां, सहायता केंद्र, पर्याप्त पुलिस बल और त्वरित रिस्पांस व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर ने साफ चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने मासिक अपराध समीक्षा बैठक में कमिश्नरेट पुलिस को सख्त और सक्रिय पुलिसिंग के कड़े निर्देश दिए हैं। आगामी सावन माह की सुरक्षा व्यवस्था, साइबर अपराध, कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर इस बैठक में विस्तृत समीक्षा की गई। इसके साथ ही, प्रशासनिक आवश्यकता को देखते हुए विभाग में दो निरीक्षकों और दो उपनिरीक्षकों के तबादले भी किए गए हैं। साइबर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए शुरू किए गए 'Cy-Vazra' अभियान के तहत सभी थाना प्रभारियों को पिछले छह महीनों के साइबर मामलों की समीक्षा करने और कम से कम 10 मामलों में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त फर्जी मोबाइल नंबर, म्यूल अकाउंट और साइबर हॉटस्पॉट की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने को कहा गया है। पुलिस कमिश्नर ने सभी विवेचनाओं का 60 और 90 दिनों की समयसीमा से पहले निस्तारण करने, ई-साक्ष्य और ई-समन प्रणाली का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। जनता की समस्याओं के समाधान के लिए सभी थाना प्रभारियों को प्रतिदिन सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक नियमित रूप से जनसुनवाई करने का आदेश दिया गया है। अपराध नियंत्रण
के तहत चेन स्नैचिंग, लूट, चोरी, नकबजनी, गोकशी, धर्मांतरण और संगठित अपराध से जुड़े आदतन अपराधियों की सूची तैयार कर उनकी लगातार निगरानी करने के निर्देश जारी किए गए हैं। स्कूलों और कॉलेजों के खुलने के मद्देनज़र एंटी रोमियो अभियान को तेज करने तथा शिक्षण संस्थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए प्रबंधन को नोटिस जारी करने को कहा गया है। यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए RTC (Reducing Traffic Congestion) योजना के तहत चिन्हित प्रमुख मार्गों से अतिक्रमण हटाने, अवैध पार्किंग के खिलाफ कार्रवाई करने और सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए 'Zero Fatality District' अभियान के अंतर्गत विशेष कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। श्रावण माह की तैयारियों को लेकर काशी विश्वनाथ मंदिर सहित सभी प्रमुख मंदिरों, कांवड़ मार्गों और गंगा घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। इन संवेदनशील क्षेत्रों में सीसीटीवी, ड्रोन निगरानी, अस्थायी पुलिस चौकियां, सहायता केंद्र, पर्याप्त पुलिस बल और त्वरित रिस्पांस व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर ने साफ चेतावनी दी है कि कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
- वाराणसी के सिगरा स्पोर्ट्स स्टेडियम से खिलाड़ियों के लिए एक बुरी खबर आई है, जहां स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने बैडमिंटन प्रशिक्षण शुल्क में चार सौ फीसदी की भारी बढ़ोतरी कर दी है। अब यहां प्रशिक्षण लेने वाले खिलाड़ियों को हर महीने एक हजार रुपये के बजाय सीधे चार हजार रुपये फीस देनी होगी। स्टेडियम के इंडोर हॉल में करीब तीन महीने के लंबे अंतराल के बाद बैडमिंटन प्रशिक्षण दोबारा शुरू किया गया था, लेकिन इस भारी-भरकम फीस ने खिलाड़ियों और उनके अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। स्मार्ट सिटी के अभियंता सौमित्र के अनुसार, बैडमिंटन प्रशिक्षण का नया मासिक शुल्क चार हजार रुपये ही निर्धारित किया गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को अपना प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर फीस में बीस प्रतिशत की छूट दी जाएगी। इस फैसले के बाद सिगरा स्टेडियम में खिलाड़ियों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। बैडमिंटन खिलाड़ी निखिल ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि इस बढ़ोतरी से कई प्रतिभाशाली बच्चे खेल छोड़ने को मजबूर हो जाएंगे। सरकार एक तरफ जहां खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ इतनी अधिक फीस बढ़ाने से अब सामान्य और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए खेल जारी रखना बेहद मुश्किल हो गया है, जिससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि यह कदम खेल को बढ़ावा देने के लिए है या केवल कमाई का जरिया।1
- उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग ने मेरठ कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान पुलिस वाहन में मौजूद अधिवक्ता रवि गौतम के साथ एसएसपी मेरठ अविनाश पांडेय द्वारा कथित मारपीट और संबंधित पुलिस कार्रवाई के मामले में केस दर्ज कर लिया है। यह कार्रवाई आज़ाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर द्वारा की गई शिकायत पर की गई है, जिसके बाद आयोग ने केस संख्या 14615/24/54/2026 दर्ज किया है। अमिताभ ठाकुर ने अपनी शिकायत में इस घटना से जुड़े वीडियो एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कराने, अधिवक्ता रवि गौतम का स्वतंत्र बयान दर्ज कराने और पूरे मामले की मेरठ पुलिस से स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि पुलिस के प्रभावी नियंत्रण में मौजूद किसी भी व्यक्ति के साथ किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी द्वारा कथित तौर पर मारपीट किया जाना गंभीर मानवाधिकार और पुलिस जवाबदेही का विषय है। उन्होंने आयोग से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर उत्तरदायित्व निर्धारित करने और दोषियों के खिलाफ समुचित कार्रवाई किए जाने की मांग उठाई है।2
- बुलंदशहर के खुर्जा कोतवाली क्षेत्र के बुर्ज उस्मान मुहल्ले में 11 हजार केवी की हाईटेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आए पोते को बचाने के प्रयास में दादा की करंट लगने से मौत हो गई। शुक्रवार को बरसात के कारण स्कूल बंद होने की वजह से 12 वर्षीय अहद अपने घर की छत पर अकेला पतंग उड़ा रहा था। इसी दौरान उसकी पतंग मकान के बाहर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन में अटक गई। अहद ने लोहे के पाइप से पतंग उतारने का प्रयास किया, जिससे पाइप तार से छूते ही तेज धमाका हुआ और वह करंट की चपेट में आ गया। धमाके की आवाज सुनकर नीचे बैठे 65 वर्षीय दादा इसरार तुरंत छत की ओर भागे। उन्होंने जैसे ही अपने पोते को बचाने के लिए उठाया, वे खुद भी करंट की चपेट में आकर बुरी तरह झुलस गए। परिजन दोनों को तुरंत जटिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने इसरार को मृत घोषित कर दिया। वहीं गंभीर रूप से झुलसे अहद को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। इस हादसे के वक्त अहद के पिता अबरार पॉटरी में मजदूरी करने गए हुए थे। घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस और ऊर्जा निगम के कर्मचारी अस्पताल पहुंचे और मामले की जांच-पड़ताल की। अधीक्षण अभियंता प्रथम हर्षित श्रीवास्तव ने बताया कि किशोर द्वारा लोहे के पाइप से पतंग उतारने के प्रयास के कारण यह हादसा हुआ, जिसमें उसे बचाने गए दादा की जान चली गई। एसडीओ ने इस घटना के संबंध में स्थानीय कोतवाली पुलिस को सूचित किया है और आम जनता से अपील की है कि वे कभी भी हाईटेंशन लाइन से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न करें।1
- वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के उमरहां स्थित जय प्रकाश महाविद्यालय में बीएड प्रशिक्षुओं के पांच दिवसीय स्काउट गाइड प्रशिक्षण शिविर का शनिवार को समापन हो गया। 7 जुलाई से 11 जुलाई तक चले इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान प्रशिक्षुओं ने विभिन्न प्रकार की व्यावहारिक, सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों को सीखा। शिविर के अंतिम दिन प्रशिक्षुओं ने अपनी कुशलता का परिचय देते हुए बिना बर्तनों के भोजन तैयार किया और अपने गुरुजनों को उसका स्वाद चखाया।1
- वाराणसी के सदर स्थित जय प्रकाश महाविद्यालय में आयोजित पांच दिवसीय स्काउट गाइड प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने स्काउटिंग और गाइडिंग से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों और कौशल का अभ्यास किया।1
- वाराणसी के सारनाथ को भारत की सबसे पवित्र बौद्ध भूमि बताया गया है। इस स्थान पर धमेख स्तूप और अशोक स्तंभ मौजूद हैं, जिनसे जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य इस पवित्र भूमि के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं।1
- वाराणसी से अयोध्या जंक्शन जा रही मरुधर एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 14853) के S5 कोच में सफर कर रहे एक परिवार को दबंगई और गंभीर बदसलूकी का सामना करना पड़ा। 10 जून 2026 को हुई इस घटना में, पीड़ित परिवार के पास लोअर बर्थ की सीट संख्या 17 और 20 का कंफर्म टिकट था। लेकिन सीट संख्या 18, 19, 21 और 22 पर पहले से अवैध कब्जा जमाए बैठे कुछ लोगों ने उन्हें अपनी ही सीट पर बैठने से रोक दिया। विरोध करने पर उन लोगों ने पीड़ित परिवार को 'गंवार' बताते हुए अभद्र भाषा का प्रयोग किया और टिकट दिखाने के बाद भी लगातार बदतमीजी की। अगल-बगल के यात्रियों के समझाने पर पीड़ित परिवार को बैठने की जगह तो मिल गई, लेकिन आरोपियों ने उनका बैग सीट के नीचे रखने से मना कर दिया और उसे गोद में लेकर बैठने को कहा, जबकि उनका अपना सामान पूरी सीट पर भरा हुआ था। हद तो तब हो गई जब सीट नंबर 20 पर बैठी एक 69 वर्षीय बुजुर्ग महिला को इन लोगों ने बार-बार धक्का दिया और उन्हें चलती ट्रेन से बाहर फेंकने की धमकी तक दे डाली। पीड़ित के अनुसार, इन 4 सीटों पर कुल 6 लोग दादागिरी करते हुए यात्रा कर रहे थे, जिनमें से दो लोग नशे की हालत में लग रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम के कारण पीड़ित परिवार को भारी शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी। पीड़ित ने इस संबंध में रेलवे में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन रेलवे पुलिस ने उनसे तब संपर्क किया जब आरोपी ट्रेन से उतर चुके थे और पुलिस ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि अब वे कुछ नहीं कर सकते। वाराणसी से अयोध्या तक पूरी यात्रा के दौरान ट्रेन में कोई टीटीई या रेलवे स्टाफ नहीं चढ़ा, जिससे ये लोग पकड़े नहीं जा सके। शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से निराश पीड़ित ने मांग की है कि रेलवे के पास बर्थ नंबर 18, 19, 21 और 22 के यात्रियों का जो विवरण है, उसके आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में ये लोग किसी अन्य यात्री के साथ ऐसा दुर्व्यवहार न कर सकें।1