देवरिया कोर्ट में पेश हुए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर, CCTV फुटेज न मिलने पर जेल में आमरण अनशन का दावा देवरिया में एक बार फिर कानून और सत्ता से जुड़ा मामला चर्चा में है। औद्योगिक प्लॉट आवंटन में कथित धोखाधड़ी के आरोपों में जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को आज कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से सीधे कोर्ट में पेश किया गया। *वॉयस ओवर (VO):* देवरिया औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट आवंटन से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की सीजेएम कोर्ट में पेशी हुई। इस दौरान उनके अधिवक्ता अभिषेक शर्मा, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, ने कहा कि इस मामले की जांच वर्ष 1999 से चल रही है, लेकिन अब तक पुलिस को कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि केस से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों को एक साथ कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। साथ ही कोर्ट से यह मांग की गई है कि अब तक इस मामले में हुई पूरी कार्रवाई का विवरण कोर्ट के सामने रखा जाए। “यह मामला 1999 से जांच में है, लेकिन आज तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। हमने कोर्ट से मांग की है कि गिरफ्तारी के समय के CCTV फुटेज सुरक्षित कर कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएं।” *वॉयस ओवर (VO)* पेशी के बाद कोर्ट से बाहर निकलते समय अमिताभ ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड उन्हें उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसी के विरोध में वह बीते दो दिनों से जेल में आमरण अनशन पर बैठे हैं। फिलहाल कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने की बात कही है। अब देखना होगा कि इस मामले में कोर्ट आगे क्या रुख अपनाती है।
देवरिया कोर्ट में पेश हुए पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर, CCTV फुटेज न मिलने पर जेल में आमरण अनशन का दावा देवरिया में एक बार फिर कानून और सत्ता से जुड़ा मामला चर्चा में है। औद्योगिक प्लॉट आवंटन में कथित धोखाधड़ी के आरोपों में जेल में बंद पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर को आज कड़ी सुरक्षा के बीच जेल से सीधे कोर्ट में पेश किया गया। *वॉयस ओवर (VO):* देवरिया औद्योगिक क्षेत्र में प्लॉट आवंटन से जुड़े कथित धोखाधड़ी मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की सीजेएम कोर्ट में पेशी हुई। इस दौरान उनके अधिवक्ता अभिषेक शर्मा, जो सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, ने कहा कि इस मामले की जांच वर्ष 1999 से चल रही है, लेकिन अब तक पुलिस को कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि केस से जुड़े सभी तथ्यों और दस्तावेजों को एक साथ कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है। साथ ही कोर्ट से यह मांग की गई है कि अब तक इस मामले में हुई पूरी कार्रवाई का विवरण कोर्ट के सामने रखा जाए। “यह मामला 1999 से जांच में है, लेकिन आज तक कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। हमने कोर्ट से मांग की है कि गिरफ्तारी के समय के CCTV फुटेज सुरक्षित कर कोर्ट में प्रस्तुत किए जाएं।” *वॉयस ओवर (VO)* पेशी के बाद कोर्ट से बाहर निकलते समय अमिताभ ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि गिरफ्तारी के दौरान उनके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया। उन्होंने कहा कि उस समय के सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड उन्हें उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। इसी के विरोध में वह बीते दो दिनों से जेल में आमरण अनशन पर बैठे हैं। फिलहाल कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित दस्तावेजों पर विचार करने की बात कही है। अब देखना होगा कि इस मामले में कोर्ट आगे क्या रुख अपनाती है।
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