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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का एक और बड़ा आरक्षण घोटाला सामने आया है, जहां कृषि विभाग में निकाली गई 2,759 पदों की बंपर भर्ती में ओबीसी, दलित (एससी) और एसटी समाज के भाई-बहनों का हक मार लिया गया है। नियम और संवैधानिक आरक्षण के मुताबिक, इन वर्गों को कुल 1,380 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ और सिर्फ 792 पद ही दिए गए हैं। इस तरह सीधे-सीधे इन वंचित वर्गों की 588 नौकरियां डकार ली गई हैं और 588 परिवारों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया गया है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है; जब-जब नौकरियों की बात आती है, तब-तब वंचित समाज का हक मार लिया जाता है। इससे पहले भी 69,000 शिक्षक भर्ती में भी आरक्षण को लेकर युवाओं को सड़कों पर लाठियां खानी पड़ी थीं।
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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार का एक और बड़ा आरक्षण घोटाला सामने आया है, जहां कृषि विभाग में निकाली गई 2,759 पदों की बंपर भर्ती में ओबीसी, दलित (एससी) और एसटी समाज के भाई-बहनों का हक मार लिया गया है। नियम और संवैधानिक आरक्षण के मुताबिक, इन वर्गों को कुल 1,380 पद मिलने चाहिए थे, लेकिन उन्हें सिर्फ और सिर्फ 792 पद ही दिए गए हैं। इस तरह सीधे-सीधे इन वंचित वर्गों की 588 नौकरियां डकार ली गई हैं और 588 परिवारों का भविष्य अंधकार में धकेल दिया गया है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है; जब-जब नौकरियों की बात आती है, तब-तब वंचित समाज का हक मार लिया जाता है। इससे पहले भी 69,000 शिक्षक भर्ती में भी आरक्षण को लेकर युवाओं को सड़कों पर लाठियां खानी पड़ी थीं।
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- Post by SONI DEVI1
- उत्तर प्रदेश के बलिया में एक कार्यक्रम के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब सूबे के मंत्री संजय निषाद सरकार की उपलब्धियां गिना रहे थे और तभी अचानक बिजली चली गई। बिजली गुल होते ही मंच और पूरे कार्यक्रम स्थल पर अंधेरा छा गया, जिसके बाद वहां मौजूद कार्यकर्ताओं ने अपने मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर कार्यक्रम को जारी रखने का प्रयास किया। इस विपरीत परिस्थिति में भी मंत्री संजय निषाद बिना रुके मुस्कुराते हुए मोबाइल की रोशनी में ही अपना संबोधन देते दिखाई दिए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर राजनीतिक बहस छिड़ गई है। विपक्ष इस वीडियो को साझा कर सरकार की बिजली व्यवस्था के दावों पर गंभीर सवाल उठा रहा है, जबकि दूसरी तरफ समर्थकों का तर्क है कि बिजली जाना महज एक तकनीकी समस्या हो सकती है और इस एक घटना से पूरी व्यवस्था का आकलन नहीं किया जा सकता। ऐसे में अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि क्या यह घटना सिर्फ एक संयोग थी या फिर सरकार के दावों की पोल खोलती एक हकीकत।1
- उत्तर प्रदेश के मऊ जनपद के कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत मुंशीपुरा ओवरब्रिज के नीचे एक बिजली के खम्बे में करंट आने से तीन बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे के बाद पीड़ित बकरी स्वामी और स्थानीय लोगों ने तुरंत बिजली विभाग को मामले की सूचना दी, लेकिन गंभीर लापरवाही दिखाते हुए विभाग ने सूचना मिलने के करीब डेढ़ घंटे बाद जाकर बिजली की लाइन काटी। बकरी स्वामी इरसाद का साफ कहना है कि यह घटना पूरी तरह से बिजली विभाग की लापरवाही के कारण हुई है। उन्होंने इस खंभे में करंट आने की शिकायत पहले भी कई बार बिजली विभाग से की थी, लेकिन विभाग ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया, जिसका नतीजा इस हादसे के रूप में सामने आया है। इस घटना से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि यह आम जनता के आवागमन का मुख्य रास्ता है, जहां चौबीसों घंटे लोगों की आवाजाही रहती है। लोगों ने गुस्से में सवाल उठाया कि आज तो तीन बेजुबान जानवरों की जान गई है, लेकिन अगर इनकी जगह कोई इंसान होता तो इस मौत का जिम्मेदार कौन होता? गुस्साए लोगों ने दोटूक चेतावनी दी है कि जब तक इस बिजली के पोल को रास्ते से नहीं हटाया जाएगा, तब तक वे मृत जानवरों को भी वहां से नहीं हटने देंगे। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बारिश के मौसम में अक्सर यहां बिजली के खंभों में करंट उतर आता है, लेकिन विभाग इसे नजरअंदाज करता है। लोग पूछ रहे हैं कि क्या बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।3