मुरैना जिले में किसान सभा ने चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित किए जाने का कड़ा विरोध करते हुए इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की है। हाल ही में सबलगढ़ तहसील के तहत अटार से लेकर निवाड़ी तक पंद्रह से अधिक पंचायतों की चंबल बीहड़ की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित की गई है, जिसकी कुछ स्थानों पर आवंटन और सीमांकन की कार्यवाही अभी भी जारी है। इस कदम से लगभग चालीस ग्राम और हजारों की आबादी प्रभावित होने की आशंका है, जिससे किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि इस आवंटन से देश की एकमात्र स्वच्छ नदी, चंबल नदी, भविष्य में बुरी तरह प्रदूषित हो जाएगी और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचेगा। उनकी प्रमुख मांग है कि उद्योग विभाग को चंबल के बीहड़ों की जमीन का आवंटन तुरंत रद्द किया जाए और इसके बजाय उन्हें खेती के लिए किसानों को पट्टे दिए जाएं। साथ ही, उद्योग विभाग के लिए वैकल्पिक भूमि कहीं और आवंटित करने की मांग भी की गई है। इन मांगों को लेकर सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पर एकत्रित हुए, जहाँ उन्होंने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर भरत कुमार को सौंपा और उनसे आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। इस मौके पर किसानों को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने जोर देकर कहा कि चंबल के बीहड़ों की जमीन कंपनियों को देने के बजाय उसे किसानों को पट्टे देकर खेती के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान इस आवंटन का लगातार विरोध करते रहेंगे। इस सभा को किसान नेता गयाराम सिंह धाकड़, श्री कृष्णा यादव, ओमप्रकाश श्रीवास, भान सिंह जादौन, नरोत्तम नगर, नरेश गोस्वामी, अशोक कुमार, राजेंद्र सिंह, नंदलाल जाटव, संतराम सिंह रावत और हरी सिंह माहौर समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। ज्ञापन देने के बाद किसानों ने आने वाले दिनों में विरोध-प्रदर्शनों को तेज करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत 22 जुलाई को सबलगढ़ में एसडीएम कार्यालय पर जन सत्याग्रह किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर यह आंदोलन भोपाल और दिल्ली तक ले जाने की भी बात कही गई है।
मुरैना जिले में किसान सभा ने चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित किए जाने का कड़ा विरोध करते हुए इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की है। हाल ही में सबलगढ़ तहसील के तहत अटार से लेकर निवाड़ी तक पंद्रह से अधिक पंचायतों की चंबल बीहड़ की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित की गई है, जिसकी कुछ स्थानों पर आवंटन और सीमांकन की कार्यवाही अभी भी जारी है। इस कदम से लगभग चालीस ग्राम और हजारों की आबादी प्रभावित होने की आशंका है, जिससे किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि इस आवंटन से देश की एकमात्र स्वच्छ नदी, चंबल नदी, भविष्य में बुरी तरह प्रदूषित हो जाएगी और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचेगा। उनकी प्रमुख मांग है कि उद्योग विभाग को चंबल के बीहड़ों की जमीन का आवंटन तुरंत रद्द किया जाए और इसके बजाय उन्हें खेती के लिए किसानों को पट्टे दिए जाएं। साथ ही, उद्योग विभाग के लिए वैकल्पिक भूमि कहीं और आवंटित करने की मांग भी की गई है। इन मांगों को लेकर सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पर एकत्रित हुए, जहाँ उन्होंने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर भरत कुमार को सौंपा और उनसे आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। इस मौके पर किसानों को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने जोर देकर कहा कि चंबल के बीहड़ों की जमीन कंपनियों को देने के बजाय उसे किसानों को पट्टे देकर खेती के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान इस आवंटन का लगातार विरोध करते रहेंगे। इस सभा को किसान नेता गयाराम सिंह धाकड़, श्री कृष्णा यादव, ओमप्रकाश श्रीवास, भान सिंह जादौन, नरोत्तम नगर, नरेश गोस्वामी, अशोक कुमार, राजेंद्र सिंह, नंदलाल जाटव, संतराम सिंह रावत और हरी सिंह माहौर समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। ज्ञापन देने के बाद किसानों ने आने वाले दिनों में विरोध-प्रदर्शनों को तेज करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत 22 जुलाई को सबलगढ़ में एसडीएम कार्यालय पर जन सत्याग्रह किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर यह आंदोलन भोपाल और दिल्ली तक ले जाने की भी बात कही गई है।
- नगर पालिका परिषद सबलगढ़ में चल रहा जनहित सत्याग्रह 40वें दिन भी लगातार जारी है। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन के बावजूद, नगर की मूलभूत समस्याओं में कोई ठोस बदलाव नहीं देखा गया है, जिसके चलते प्रशासन की कार्यप्रणाली पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पार्षद मोहन रामजी लाल पचौरी ने बताया कि शहर में कई स्थानों पर गली निर्माण तो किया गया है, लेकिन उनमें गंदगी और अव्यवस्था अभी भी बनी हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि सफाई व्यवस्था केवल तस्वीरों और कागजी कार्रवाई तक ही सिमट कर रह गई है। इसके अतिरिक्त, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था जैसी बुनियादी सुविधाओं में भी कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है, जिससे आम नागरिकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस आंदोलन में शामिल पार्षद कैलाश चंद भगत और पार्षद रचना अशरफ ने स्पष्ट किया कि अब केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि नगर की व्यवस्थाएं वास्तविक रूप से सुधर सकें। नगर के कई समाजसेवी भी इस आंदोलन को लगातार समर्थन दे रहे हैं और नगर की समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं।1
- मुरैना में किसान सभा ने चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित किए जाने के विरोध में कलेक्ट्रेट पर उग्र प्रदर्शन किया और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर भरत कुमार को सौंपा। किसानों ने तत्काल इस आवंटन को रद्द करने और उद्योगों के लिए अन्यत्र भूमि आवंटित करने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि सबलगढ़ तहसील के अटार से लेकर निवाड़ी तक 15 से अधिक पंचायतों की चंबल के बीहड़ों की जमीन हाल ही में उद्योग विभाग को आवंटित की गई है, जिसकी कुछ स्थानों पर आवंटन और सीमांकन की कार्यवाही जारी है। इससे लगभग 40 ग्राम और हजारों की आबादी प्रभावित हो रही है। किसानों का आरोप है कि यह कदम देश की एकमात्र स्वच्छ नदी, चंबल नदी को भविष्य में बुरी तरह प्रदूषित करेगा और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचाएगा। मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने किसानों के बीच बोलते हुए जोर दिया कि चंबल के बीहड़ों की यह जमीन कंपनियों को नहीं बल्कि किसानों को पट्टे देकर खेती के लिए दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान इस आवंटन का पुरजोर विरोध करते रहेंगे। इस मौके पर किसान नेता गयाराम सिंह धाकड़, श्री कृष्णा यादव, ओमप्रकाश श्रीवास, भान सिंह जादौन, नरोत्तम नगर, नरेश गोस्वामी, अशोक कुमार, राजेंद्र सिंह, नंदलाल जाटव, संतराम सिंह रावत और हरी सिंह माहौर समेत कई अन्य नेताओं ने भी सभा को संबोधित किया। किसानों ने निर्णय लिया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो आगामी दिनों में विरोध कार्रवाइयों को और तेज किया जाएगा। इसी कड़ी में 22 जुलाई को सबलगढ़ में एसडीएम कार्यालय पर जन सत्याग्रह किया जाएगा, और आवश्यकता पड़ने पर भोपाल व दिल्ली में भी आंदोलन किए जाएंगे।1
- मध्य प्रदेश के सबलगढ़ जनपद पंचायत में आयोजित जन कल्याण शिविर के दौरान नगर मंडल के अध्यक्ष बसंत बंसल द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर ध्यान आकर्षित किया गया है। लोगों से इस बात पर गौर करने के लिए कहा जा रहा है कि अध्यक्ष बसंत बंसल ने किस तरह की भाषा का प्रयोग किया।1
- धौलपुर जिले के बाड़ी बसेड़ी स्थित नादनपुर मोड पर एक सड़क हादसे में बाइक और टेंपो की भीषण भिड़न्त हो गई। इस टक्कर के कारण टेंपो पलट गया, जिससे उसमें सवार आधा दर्जन लोग घायल हो गए। हादसे में घायल हुए लोगों में तीन महिलाएं और दो बालिकाएं शामिल हैं, जिन्हें बाड़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इसके अलावा, दो अन्य घायलों का उपचार बसेड़ी में ही चल रहा है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुई दो महिलाओं को आगे के उपचार के लिए धौलपुर रेफर किया गया है। बसेड़ी थाना पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है।2
- सरमथुरा पुलिस ने अवैध चंबल बजरी खनन के खिलाफ सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इसके तहत, पुलिस अवैध बजरी खनन पर कड़ी निगरानी रख रही है और उस पर अंकुश लगाने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।1
- ग्वालियर की बीजेपी जिला मंत्री प्रिया तोमर को उनके जन्मदिवस के अवसर पर भाजपा परिवार और ग्वालियर शहरवासियों की ओर से हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ प्राप्त हुईं। शहर के लोगों ने उन्हें इस खास दिन पर अपनी शुभकामनाएं दीं।1
- मुरैना जिले में किसान सभा ने चंबल के बीहड़ों की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित किए जाने का कड़ा विरोध करते हुए इस फैसले को तत्काल रद्द करने की मांग की है। हाल ही में सबलगढ़ तहसील के तहत अटार से लेकर निवाड़ी तक पंद्रह से अधिक पंचायतों की चंबल बीहड़ की जमीन उद्योग विभाग को आवंटित की गई है, जिसकी कुछ स्थानों पर आवंटन और सीमांकन की कार्यवाही अभी भी जारी है। इस कदम से लगभग चालीस ग्राम और हजारों की आबादी प्रभावित होने की आशंका है, जिससे किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है। किसानों का कहना है कि इस आवंटन से देश की एकमात्र स्वच्छ नदी, चंबल नदी, भविष्य में बुरी तरह प्रदूषित हो जाएगी और पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचेगा। उनकी प्रमुख मांग है कि उद्योग विभाग को चंबल के बीहड़ों की जमीन का आवंटन तुरंत रद्द किया जाए और इसके बजाय उन्हें खेती के लिए किसानों को पट्टे दिए जाएं। साथ ही, उद्योग विभाग के लिए वैकल्पिक भूमि कहीं और आवंटित करने की मांग भी की गई है। इन मांगों को लेकर सैकड़ों किसान कलेक्ट्रेट पर एकत्रित हुए, जहाँ उन्होंने प्रदर्शन करते हुए मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर भरत कुमार को सौंपा और उनसे आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया। इस मौके पर किसानों को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष अशोक तिवारी ने जोर देकर कहा कि चंबल के बीहड़ों की जमीन कंपनियों को देने के बजाय उसे किसानों को पट्टे देकर खेती के लिए आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि किसान इस आवंटन का लगातार विरोध करते रहेंगे। इस सभा को किसान नेता गयाराम सिंह धाकड़, श्री कृष्णा यादव, ओमप्रकाश श्रीवास, भान सिंह जादौन, नरोत्तम नगर, नरेश गोस्वामी, अशोक कुमार, राजेंद्र सिंह, नंदलाल जाटव, संतराम सिंह रावत और हरी सिंह माहौर समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया। ज्ञापन देने के बाद किसानों ने आने वाले दिनों में विरोध-प्रदर्शनों को तेज करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत 22 जुलाई को सबलगढ़ में एसडीएम कार्यालय पर जन सत्याग्रह किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर यह आंदोलन भोपाल और दिल्ली तक ले जाने की भी बात कही गई है।1
- मंगलवार दोपहर बाड़ी-बसेड़ी मार्ग पर हुए एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक किशोरी समेत दो लोगों की मौत हो गई, जबकि एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई। यह हादसा दोपहर करीब 12 बजे नहर कोठी के पास ऋषिका पेट्रोल पंप के सामने हुआ, जहाँ एक तेज रफ्तार टेम्पो और बाइक की आमने-सामने की टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर बसेड़ी थाना पुलिस मौके पर पहुँची और 112 चालक विवेक शर्मा की सहायता से घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बसेड़ी पहुँचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों ने बरौली का पुरा बाड़ी निवासी रामबरन की 10 वर्षीय पुत्री शिवन्या को मृत घोषित कर दिया। वहीं, उपचार के दौरान सलेमपुर, बसेड़ी निवासी फतेह सिंह की 70 वर्षीय पत्नी भगवती देवी उर्फ बत्तो ने भी दम तोड़ दिया। हादसे में घायल एक अन्य महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल रेफर किया गया है। पुलिस ने परिजनों की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। दोनों मृतकों का पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं। मामले की जाँच अभी जारी है।1