तारडीह में एमडीएम चावल उठाव में बड़ा खेल! गोदाम से निकला अनाज स्कूल पहुँचने से पहले ही ‘गायब’ 12 दिनों में लगभग 17 खेपों में तारडीह के विभिन्न विद्यालयों में 804 क्विंटल चावल उठाव, अधिकांश स्कूलों के एचएम का तौलकर नहीं देने का आरोप कठरा पूर्वी मध्य विद्यालय के लिए 6 मार्च को निकला 14 क्विंटल चावल तीन दिन तक रहा लापता,9 मार्च को आनन-फानन में स्कूल भेजकर ली गई बिना तिथि की रिसीविंग दरभंगा/तारडीह। जिले के तारडीह प्रखंड में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना के तहत चावल के उठाव और वितरण में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर स्थानीय रिपोर्टरों ने जब इस मामले की पड़ताल शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अब इन तथ्यों पर विभाग किस प्रकार की कार्रवाई करता है, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन इस पूरे मामले की तह तक जाने और इस कथित गोरखधंधे से जुड़े अनाज माफियाओं के नाम उजागर करने की पड़ताल लगातार जारी है। स्थानीय रिपोर्टरों के अनुसार तारडीह गोदाम से मात्र लगभग 12 दिनों के भीतर लगभग 17 खेपों में विभिन्न वाहनों के माध्यम से तारडीह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के लिए कुल 804 क्विंटल चावल का उठाव किया गया। इनमें से 32 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (एचएम) से जानकारी ली गई, लेकिन किसी भी एचएम ने यह नहीं बताया कि उन्हें चावल तौलकर दिया गया है। अधिकांश एचएम का कहना था कि चावल सिर्फ बोरी (पैकेट) गिनकर ही दिया जाता है। पड़ताल के दौरान 8 एचएम ने बताया कि एक बोरी में 42 से 43 किलोग्राम से अधिक चावल नहीं रहता है। 12 एचएम के अनुसार बोरी में 45 से 46 किलोग्राम तक चावल रहता है, जबकि 8 एचएम ने कहा कि एक बोरी में 47 से 48 किलोग्राम चावल ही मिलता है। वहीं 4 एचएम ने बताया कि वे खुद बोरी खोजकर लेते हैं, लेकिन उसमें भी वजन कुछ कम ही रहता है।पड़ताल में अधिकांश एचएम ने विभाग पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए अपने आपको चुप रहने में ही भलाई समझते हैं। पड़ताल के दौरान सबसे हैरतअंगेज मामला मध्य विद्यालय कटरा पूर्वी का सामने आया। विद्यालय के एचएम अशोक कुमार महतो को 6 मार्च को संवेदक विजय ठाकुर के कथित प्रतिनिधि अंजनी कुमार झा के द्वारा फोन पर बताया गया कि उनके विद्यालय के लिए एमडीएम चावल उठाव किया गया है और वाहन चावल लेकर आ रहा है। इस पर एचएम ने फोन पर ही स्पष्ट कर दिया कि विद्यालय में पहले से चावल का पर्याप्त स्टॉक है और रखने की भी जगह नहीं है,चूहों से परेशान हैं। इसलिए फिलहाल चावल की आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में उन्होंने बीआरपी को भी जानकारी दे दी, कि अभी विद्यालय में पर्याप्त भंडार है इसलिए चावल नहीं चाहिए। इसके बावजूद मध्य विद्यालय कटरा पूर्वी के नाम से उसी दिन 6 मार्च को 11 बजकर 5 मिनट पर 14 क्विंटल चावल उठाव दर्ज है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी यह चावल गोदाम में वापस नहीं लौटाया गया। जब मामले की पड़ताल शुरू हुई तो 6 मार्च को निकला चावल तीन दिन बाद आनन-फानन में 9 मार्च दिन सोमवार को विद्यालय भेजा गया और एचएम की अनुपस्थिति में ही प्रभारी एचएम से बिना तिथि का रिसीविंग ले लिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि 6 मार्च को चावल से लदी गाड़ी स्कूल के पास पहुंची थी, लेकिन कुछ देर रुकने के बाद बिना चावल उतारे ही वापस चली गई। संबंधित विद्यालय के एचएम के अनुसार 6 मार्च को मना करने के बावजूद तीन दिन बाद उनकी अनुपस्थिति में चावल स्कूल पर उतारा गया और उस दिन के प्रभारी से बिना तिथि डाले रिसीविंग ले ली गई। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर तीन दिन तक चावल कहां था।अगर विद्यालय चावल लेने से मना कर दिया तो फिर वापस गोदाम में क्यों नहीं रखा गया। सूत्र बताते हैं कि मीडिया द्वारा इस मामले पर पड़ताल की भनक लगने के बाद ही चावल को स्कूल भेजा गया।जो कई सवाल खड़े कर रहा है। मामले में एक और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में अनाज की इस तरह की अनियमितता के बावजूद अनाज माफियाओं के खिलाफ भौतिक सत्यापन की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार 19 फरवरी से 7 मार्च के बीच कुल 804 क्विंटल चावल तारडीह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के नाम पर गोदाम से उठाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर तय आवंटन के अनुसार अधिकांश विद्यालयों में चावल नहीं पहुंचने का आरोप है। यदि समय रहते विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बड़ी अनियमितता सामने आ सकती है। रिकॉर्ड के अनुसार 19 फरवरी को सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 55 क्विंटल तथा 10 बजकर 57 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 54 क्विंटल चावल उठाव किया गया। 20 फरवरी को 10 बजकर 45 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 53 क्विंटल तथा 11 बजकर 2 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 52 क्विंटल चावल उठाव दर्ज है। 21 फरवरी को 10 बजकर 26 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 54 क्विंटल, 23 फरवरी को 11 बजकर 10 मिनट पर 7 विद्यालयों के लिए 53 क्विंटल, 24 फरवरी को 10 बजकर 34 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 56 क्विंटल और 26 फरवरी को 11 बजकर 30 मिनट पर 7 विद्यालयों के लिए 51 क्विंटल चावल उठाव का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अलावा 27 फरवरी को 12 बजकर 32 मिनट पर तारडीह के 4 विद्यालयों के लिए 47 क्विंटल चावल उठाव किया गया। वहीं 6 मार्च को दो वाहनों से क्रमशः 11 बजकर 5 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 46 क्विंटल तथा 11 बजकर 27 मिनट पर 3 विद्यालयों के लिए 48 क्विंटल चावल उठाव हुआ। इसी प्रकार 7 मार्च को 11 बजकर 5 मिनट पर 7 विद्यालयों के लिए 53 क्विंटल तथा 11 बजकर 12 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 47 क्विंटल चावल उठाव दर्ज है। कुल मिलाकर तारडीह गोदाम से लगभग 12 दिनों में लगभग 17 बार में तारडीह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में 804 क्विंटल चावल उठाव का विवरण सामने आया है। आरोप है कि जिन संवेदकों को चावल उठाव और वितरण की जिम्मेदारी दी गई है, वे स्वयं काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि किसी अंजनी कुमार झा नामक अन्य व्यक्ति के माध्यम से यह कार्य कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि गोदाम से उठाई गई पूरी मात्रा संबंधित विद्यालयों तक नहीं पहुंचाई गई। विद्यालयों में चावल तो पहुंचा, लेकिन आवंटन के अनुरूप पहुँचाई नहीं गई। सूत्रों का यह भी दावा है कि कागजी अभिलेखों में वितरण पूरी तरह सही दिखाया जाता है, लेकिन यदि विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बड़े पैमाने पर अंतर सामने आ सकता है। मामले की जानकारी मिलने पर बीआरपी राम प्रमोद रॉय को तथ्यों से अवगत कराते हुए विद्यालयों के भौतिक सत्यापन की मांग की गई, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई या जवाब नहीं मिला अब तो वे फोन उठाना भी बंद कर दिये।मामले के संबंध में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि मामला गंभीर है, मीडिया के द्वारा संज्ञान में दिया गया है, जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के पोषण से जुड़ी इस संवेदनशील योजना में यदि इस प्रकार की अनियमितता हुई है तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े आरोप के बावजूद जांच की पहल क्यों नहीं की जा रही है। अन्य जिला स्तरीय संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है।
तारडीह में एमडीएम चावल उठाव में बड़ा खेल! गोदाम से निकला अनाज स्कूल पहुँचने से पहले ही ‘गायब’ 12 दिनों में लगभग 17 खेपों में तारडीह के विभिन्न विद्यालयों में 804 क्विंटल चावल उठाव, अधिकांश स्कूलों के एचएम का तौलकर नहीं देने का आरोप कठरा पूर्वी मध्य विद्यालय के लिए 6 मार्च को निकला 14 क्विंटल चावल तीन दिन तक रहा लापता,9 मार्च को आनन-फानन में स्कूल भेजकर ली गई बिना तिथि की रिसीविंग दरभंगा/तारडीह। जिले के तारडीह प्रखंड में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना के तहत चावल के उठाव और वितरण में गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है। विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर स्थानीय रिपोर्टरों ने जब इस मामले की पड़ताल शुरू की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। अब इन तथ्यों पर विभाग किस प्रकार की कार्रवाई करता है, यह आने वाला समय बताएगा, लेकिन इस पूरे मामले की तह तक जाने और इस कथित गोरखधंधे से जुड़े अनाज माफियाओं के नाम उजागर करने की पड़ताल लगातार जारी है। स्थानीय रिपोर्टरों के अनुसार तारडीह गोदाम से मात्र लगभग 12 दिनों के भीतर लगभग 17 खेपों में विभिन्न वाहनों के माध्यम से तारडीह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के लिए कुल 804 क्विंटल चावल का उठाव किया गया। इनमें से 32 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों (एचएम) से जानकारी ली गई, लेकिन किसी भी एचएम ने यह नहीं बताया कि उन्हें चावल तौलकर दिया गया है। अधिकांश एचएम का कहना था कि चावल सिर्फ बोरी (पैकेट) गिनकर ही दिया जाता है। पड़ताल के दौरान 8 एचएम ने बताया कि एक बोरी में 42 से 43 किलोग्राम से अधिक चावल नहीं रहता है। 12 एचएम के अनुसार बोरी में 45 से 46 किलोग्राम तक चावल रहता है, जबकि 8 एचएम ने कहा कि एक बोरी में 47 से 48 किलोग्राम चावल ही मिलता है। वहीं 4 एचएम ने बताया कि वे खुद बोरी खोजकर लेते हैं, लेकिन उसमें भी वजन कुछ कम
ही रहता है।पड़ताल में अधिकांश एचएम ने विभाग पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए अपने आपको चुप रहने में ही भलाई समझते हैं। पड़ताल के दौरान सबसे हैरतअंगेज मामला मध्य विद्यालय कटरा पूर्वी का सामने आया। विद्यालय के एचएम अशोक कुमार महतो को 6 मार्च को संवेदक विजय ठाकुर के कथित प्रतिनिधि अंजनी कुमार झा के द्वारा फोन पर बताया गया कि उनके विद्यालय के लिए एमडीएम चावल उठाव किया गया है और वाहन चावल लेकर आ रहा है। इस पर एचएम ने फोन पर ही स्पष्ट कर दिया कि विद्यालय में पहले से चावल का पर्याप्त स्टॉक है और रखने की भी जगह नहीं है,चूहों से परेशान हैं। इसलिए फिलहाल चावल की आवश्यकता नहीं है। इस संबंध में उन्होंने बीआरपी को भी जानकारी दे दी, कि अभी विद्यालय में पर्याप्त भंडार है इसलिए चावल नहीं चाहिए। इसके बावजूद मध्य विद्यालय कटरा पूर्वी के नाम से उसी दिन 6 मार्च को 11 बजकर 5 मिनट पर 14 क्विंटल चावल उठाव दर्ज है। तीन दिन बीत जाने के बाद भी यह चावल गोदाम में वापस नहीं लौटाया गया। जब मामले की पड़ताल शुरू हुई तो 6 मार्च को निकला चावल तीन दिन बाद आनन-फानन में 9 मार्च दिन सोमवार को विद्यालय भेजा गया और एचएम की अनुपस्थिति में ही प्रभारी एचएम से बिना तिथि का रिसीविंग ले लिया गया। विभागीय सूत्रों का कहना है कि 6 मार्च को चावल से लदी गाड़ी स्कूल के पास पहुंची थी, लेकिन कुछ देर रुकने के बाद बिना चावल उतारे ही वापस चली गई। संबंधित विद्यालय के एचएम के अनुसार 6 मार्च को मना करने के बावजूद तीन दिन बाद उनकी अनुपस्थिति में चावल स्कूल पर उतारा गया और उस दिन के प्रभारी से बिना तिथि डाले रिसीविंग ले ली गई। ऐसे में बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि आखिर तीन दिन तक चावल कहां था।अगर विद्यालय चावल लेने से मना कर दिया
तो फिर वापस गोदाम में क्यों नहीं रखा गया। सूत्र बताते हैं कि मीडिया द्वारा इस मामले पर पड़ताल की भनक लगने के बाद ही चावल को स्कूल भेजा गया।जो कई सवाल खड़े कर रहा है। मामले में एक और गंभीर सवाल यह उठ रहा है कि बच्चों के पोषण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना में अनाज की इस तरह की अनियमितता के बावजूद अनाज माफियाओं के खिलाफ भौतिक सत्यापन की कार्रवाई अब तक क्यों नहीं की गई। विभागीय सूत्रों के अनुसार 19 फरवरी से 7 मार्च के बीच कुल 804 क्विंटल चावल तारडीह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के नाम पर गोदाम से उठाया गया, लेकिन जमीनी स्तर पर तय आवंटन के अनुसार अधिकांश विद्यालयों में चावल नहीं पहुंचने का आरोप है। यदि समय रहते विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बड़ी अनियमितता सामने आ सकती है। रिकॉर्ड के अनुसार 19 फरवरी को सुबह 10 बजकर 33 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 55 क्विंटल तथा 10 बजकर 57 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 54 क्विंटल चावल उठाव किया गया। 20 फरवरी को 10 बजकर 45 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 53 क्विंटल तथा 11 बजकर 2 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 52 क्विंटल चावल उठाव दर्ज है। 21 फरवरी को 10 बजकर 26 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 54 क्विंटल, 23 फरवरी को 11 बजकर 10 मिनट पर 7 विद्यालयों के लिए 53 क्विंटल, 24 फरवरी को 10 बजकर 34 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 56 क्विंटल और 26 फरवरी को 11 बजकर 30 मिनट पर 7 विद्यालयों के लिए 51 क्विंटल चावल उठाव का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अलावा 27 फरवरी को 12 बजकर 32 मिनट पर तारडीह के 4 विद्यालयों के लिए 47 क्विंटल चावल उठाव किया गया। वहीं 6 मार्च को दो वाहनों से क्रमशः 11 बजकर 5 मिनट पर 5 विद्यालयों के लिए 46 क्विंटल तथा 11 बजकर 27 मिनट पर 3
विद्यालयों के लिए 48 क्विंटल चावल उठाव हुआ। इसी प्रकार 7 मार्च को 11 बजकर 5 मिनट पर 7 विद्यालयों के लिए 53 क्विंटल तथा 11 बजकर 12 मिनट पर 6 विद्यालयों के लिए 47 क्विंटल चावल उठाव दर्ज है। कुल मिलाकर तारडीह गोदाम से लगभग 12 दिनों में लगभग 17 बार में तारडीह प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों में 804 क्विंटल चावल उठाव का विवरण सामने आया है। आरोप है कि जिन संवेदकों को चावल उठाव और वितरण की जिम्मेदारी दी गई है, वे स्वयं काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि किसी अंजनी कुमार झा नामक अन्य व्यक्ति के माध्यम से यह कार्य कराया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि गोदाम से उठाई गई पूरी मात्रा संबंधित विद्यालयों तक नहीं पहुंचाई गई। विद्यालयों में चावल तो पहुंचा, लेकिन आवंटन के अनुरूप पहुँचाई नहीं गई। सूत्रों का यह भी दावा है कि कागजी अभिलेखों में वितरण पूरी तरह सही दिखाया जाता है, लेकिन यदि विद्यालयों का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो बड़े पैमाने पर अंतर सामने आ सकता है। मामले की जानकारी मिलने पर बीआरपी राम प्रमोद रॉय को तथ्यों से अवगत कराते हुए विद्यालयों के भौतिक सत्यापन की मांग की गई, लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई या जवाब नहीं मिला अब तो वे फोन उठाना भी बंद कर दिये।मामले के संबंध में प्रभारी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि मामला गंभीर है, मीडिया के द्वारा संज्ञान में दिया गया है, जांच कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। बच्चों के पोषण से जुड़ी इस संवेदनशील योजना में यदि इस प्रकार की अनियमितता हुई है तो यह अत्यंत गंभीर मामला है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि इतने बड़े आरोप के बावजूद जांच की पहल क्यों नहीं की जा रही है। अन्य जिला स्तरीय संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर पूरे मामले की वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया जा रहा है।
- दरभंगा में जन सुराज पार्टी की बैठक में नव नियुक्त पदाधिकारियों को सम्मानित किया गया और नई ऊर्जा1
- दरभंगा के मब्बी चौक स्थित जीडी गोयंका हेल्थकेयर एकेडमी में बच्चों द्वारा दावत-ए-इफ्तार का आयोजन किया गया, जो अकादमी के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर बच्चों ने सभी समुदाय के लोगों के साथ एक ही दस्तरखान पर बैठकर इफ्तार किया और समाज में भाईचारा, एकता और आपसी सौहार्द का खूबसूरत संदेश दिया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों के साथ इफ्तार किया। बच्चों ने कहा कि हमारा प्रयास है कि समाज में हमेशा भाईचारा बना रहे और हम सभी एक हैं। इस आयोजन के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि अलग-अलग समुदाय के लोग मिलजुल कर एक साथ रह सकते हैं और एक-दूसरे की खुशियों में शामिल हो सकते हैं। वहीं जीडी गोयंका हेल्थकेयर एकेडमी के डायरेक्टर अमन कुमार ने कहा कि यह पूरा आयोजन बच्चों की पहल पर किया गया था, जिसमें शानदार व्यवस्था देखने को मिली। बच्चों के मैनेजमेंट, अनुशासन और सहभागिता ने यह साबित कर दिया कि वे हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा दिखाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक ज्ञान और संस्कार भी बेहद जरूरी हैं। बच्चों ने इस कार्यक्रम के माध्यम से यह साबित कर दिखाया कि वे पढ़ाई के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने का भी काम कर सकते हैं। अकादमी की ओर से यह एक सुंदर और सकारात्मक संदेश समाज के बीच गया है। कम समय में ही यह एकेडमी शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक और बौद्धिक विकास में भी अहम योगदान दे रही है। खासकर पैरामेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में लोगों का विश्वास इस अकादमी पर तेजी से बढ़ रहा है।1
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