गुलाबो के शहर के नाम से देशभर में मशहूर मध्य प्रदेश का गुना इन दिनों आवारा सांडों के आतंक से जूझ रहा है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर गलियों तक इन बेजुबान जानवरों को आपस में लड़ते देखा जा सकता है, जिसके चलते पिछले तीन-चार महीनों में कई लोगों को जनहानि हुई है और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसी कड़ी में एक मामला शहर के जाने-माने संस्थान 'पलिया पेटिस' से सामने आया, जहाँ आवारा सांडों ने दुकान में घुसकर सामान तहस-नहस कर दिया और संस्थान के मालिक को भी चोट पहुंचाई। एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक सांड ने मालिक को उठाकर फेंक दिया। कुछ समय पहले एक छोटे बच्चे को भी सांड ने उठाकर फेंका था, जिससे उसके सिर और आँख में चोटें आई थीं। यह स्थिति तब है जब लोगों ने नगर पालिका को कई आवेदन दिए हैं, लेकिन जनसुनवाई में कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यहाँ तक कि श्रीमान कलेक्टर द्वारा चिह्नित किए गए आवेदनों को भी कर्मचारी गंभीरता से नहीं लेते। अब लोगों की यही उम्मीद है कि प्रशासन कब इस गंभीर समस्या पर जागेगा और शहरवासियों को इन आवारा सांडों के आतंक से मुक्ति दिलाएगा।
गुलाबो के शहर के नाम से देशभर में मशहूर मध्य प्रदेश का गुना इन दिनों आवारा सांडों के आतंक से जूझ रहा है। शहर के मुख्य चौराहों से लेकर गलियों तक इन बेजुबान जानवरों को आपस में लड़ते देखा जा सकता है, जिसके चलते पिछले तीन-चार महीनों में कई लोगों को जनहानि हुई है और निजी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसी कड़ी में एक
मामला शहर के जाने-माने संस्थान 'पलिया पेटिस' से सामने आया, जहाँ आवारा सांडों ने दुकान में घुसकर सामान तहस-नहस कर दिया और संस्थान के मालिक को भी चोट पहुंचाई। एक वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक सांड ने मालिक को उठाकर फेंक दिया। कुछ समय पहले एक छोटे बच्चे को भी सांड ने उठाकर फेंका था, जिससे उसके सिर और आँख में
चोटें आई थीं। यह स्थिति तब है जब लोगों ने नगर पालिका को कई आवेदन दिए हैं, लेकिन जनसुनवाई में कोई ध्यान नहीं दिया जाता। यहाँ तक कि श्रीमान कलेक्टर द्वारा चिह्नित किए गए आवेदनों को भी कर्मचारी गंभीरता से नहीं लेते। अब लोगों की यही उम्मीद है कि प्रशासन कब इस गंभीर समस्या पर जागेगा और शहरवासियों को इन आवारा सांडों के आतंक से मुक्ति दिलाएगा।
- गुना में चेतना साहित्य एवं कला परिषद की कार्यकारिणी बैठक वरिष्ठ कवि विष्णु साथी के निवास पर संपन्न हुई, जहाँ नवीन कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह और भविष्य की रूपरेखा तैयार की गई। गुना नगर में यह संस्था बीते पचपन वर्षों से साहित्य, सम्मान और प्रकाशन के क्षेत्र में एकमात्र कार्यरत संस्था है, जिसने पूर्व में कवि, साहित्यकार, शिक्षक और मातृशक्ति का सम्मान किया है तथा दो आंचलिक सम्मेलन आयोजित कर "अभिव्यक्ति एवं सृजन" पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रथम सत्र में शपथ ग्रहण और द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन 14 जून, 2026, रविवार को शाम सात बजे किया जाएगा, जिसके स्थान और मुख्य अतिथि की सूचना शीघ्र जारी की जाएगी। इस बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने की, जिसमें प्रेम सिंह प्रेम (अध्यक्ष), रामवीर शर्मा (वरिष्ठ उपाध्यक्ष), श्रीमती कीर्ति मोरोलिया (सचिव), सुश्री फरीदा बानो गुनाबी (सहसचिव), श्रीमती रेखा खरे (कोषाध्यक्ष), धर्मवीर सिंह (संगठन सचिव), शिवम् श्रीवास्तव (सहसंगठन सचिव), उमाशंकर भार्गव (प्रचार सचिव), अभिनय मोरे (सहप्रचार सचिव), हरीश सोनी (अंकेक्षक) और संजय खरे (कार्यकारिणी सदस्य) सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सभी कार्यकारिणी सदस्यों ने आगामी कार्यक्रम में तन, मन, धन से सहयोग देने का आश्वासन दिया। बैठक के द्वितीय सत्र में एक कवि गोष्ठी का भी सफल आयोजन हुआ, जिसका संचालन प्रेम सिंह प्रेम ने किया। उन्होंने अपनी पंक्तियों के माध्यम से कहा, "फकीर भी दिल खोलकर हंस लेते हैं, खुशियां पैसों की मोहताज नहीं होती।" वरिष्ठ कवि विष्णु साथी ने मुसीबतों का सामना करने पर जोर देते हुए कहा, "हर मुसीबत का करो दिल खोलकर के सामना,अय नौजवानों ज़िन्दगी में बुजदिली अच्छी नहीं।" गीतकार हरीश सोनी ने कहा, "हो पेट भरा तो लगती है ये हुस्न की रंगत चंदा सी,जब भूख में जलती हों आंतें चंदा भी निवाला लगता है।" श्रीमती कीर्ति मोरोलिया ने पानी के ऊपर यूं भाव व्यक्त किए, "पानी बचाना है जीवन बचाना है, पानी है तो कल है हमारा,हर मुश्किल का हल है हमारा।" श्रीमती रेखा खरे ने अपनी शायरी में कहा, "या रब मुझे ख्वाब कुछ ऐसा दिखाई दे,सारी रात ख्वाब में मुझे बस वो दिखाई दे। तुझको जब मेरे प्यार पर यकीं ही नहीं,तू ही बता यार कोई कब तक सफाई दे।" उमाशंकर भार्गव ने कहा, "उनसे न संबंध बनाये कभी जो वतन से करते गद्दारी है, घर वह घूरा लगता है जिसमें नहीं रहती कोई नारी है।" सुश्री फरीदा बानो गुनाबी ने शेर पढ़ते हुए कहा, "सुनो एक तुम्हारी कुर्बत है कि मेरी रुह को अब सकून देती है। मुझको बड़ा वह अजीब सी नजदीकी का अहसास देती है।" संजय खरे सहज ने शेर पढ़ते हुए कहा, "पहले था जितना अब वो उतना खास नहीं है, उससे बिछडके अब दर्द का एहसास नहीं है।थीजब प्यास तो न था हमें कतरा भी नसीब, है जब सामने दरिया तो हमको प्यास नहीं है।" रामवीर शर्मा ने कहा, "दिन में सूरज आग उगलता,रात में तपती धरनी।घर में रह आराम से देखो,नोतपा की करनी।" धर्मवीर सिंह ने कहा, "देखी फूलों की सुंदरता, महका महका प्यार कहां,सूख गए नदियां वो झरने पहले जैसी धार कहां।" इस अवसर पर अभिनय मोरे, शिवम् श्रीवास्तव, राम जीवन भार्गव और प्रमोद भार्गव हमीरपुर भी उपस्थित रहे।3
- शुक्रवार को राजस्थान के बारां जिले के छीपाबड़ौद में जनप्रतिनिधि अधिकार संघर्ष समिति ने एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन उपखंड अधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और पंचायतराज मंत्री मदन दिलावर के नाम भिजवाया गया। समिति के जिलाध्यक्ष मास्टर प्रेमचंद मीना के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन का मुख्य मुद्दा निर्वाचित जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों और वार्ड पंचों को अधिकार विहीन होने के कारण आ रही समस्याओं पर केंद्रित था। संघर्ष समिति के तहसील अध्यक्ष मांगीलाल मीना और संयोजक रामजानकी केसरी ने बताया कि राजस्थान में 1 लाख से ज़्यादा निर्वाचित जनप्रतिनिधि आज तक अधिकार विहीन हैं। जनता से वोट लेकर जीतने के बाद भी वे वित्तीय अधिकारों के अभाव में अपने क्षेत्र में एक भी काम नहीं करवा पा रहे हैं, जिससे वे खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं। समिति ने राज्य सरकार से मांग की है कि जिला परिषद सदस्यों को प्रति वर्ष 20 लाख रुपये के कार्य करवाने का अधिकार दिया जाए, पंचायत समिति सदस्यों को 5 लाख रुपये और वार्ड पंचों को 1 लाख रुपये के कार्य करवाने का अधिकार मिले। इसके अतिरिक्त, जिला परिषद सदस्यों को प्रति माह 10 हजार रुपये, पंचायत समिति सदस्यों को 5 हजार रुपये और वार्ड पंचों को 3 हजार रुपये का मानदेय देने की मांग की गई है। जनप्रतिनिधियों ने यह भी मांग की कि जिला परिषद सदस्यों को क्षेत्र में जाने के लिए 8 दिन सरकारी गाड़ी और पंचायत समिति सदस्यों को 2 दिन के लिए सरकारी गाड़ी उपलब्ध करवाई जाए। साथ ही, जिला मुख्यालय पर राजकीय आवास और सरकार की ओर से निशुल्क एंड्राइड मोबाइल दिए जाएं। इस अवसर पर जिलाध्यक्ष प्रेमचंद मीना ने संबोधित करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि अपने आप को ठगा सा महसूस करते हैं। उन्होंने बताया कि राजस्थान में 41 जिला परिषदों में करीब 1 हजार सदस्य, 352 पंचायत समितियों में 6236 सदस्य और ग्राम पंचायतों में लगभग 1 लाख वार्ड पंच हैं। कड़ी मेहनत से चुनाव जीतने के बावजूद वित्तीय अधिकार न मिलने से वे जनता के लिए काम नहीं करवा पाते, जिससे पंचायत राज चुनाव 'विषहीन दंत' के समान हो गए हैं। समिति ने सरकार से पंचायतराज चुनाव से पहले वित्तीय अधिकार का प्रस्ताव पारित करने की मांग की है और चेतावनी दी है कि अधिकार नहीं मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। ज्ञापन सौंपते समय प्रेमचंद मीना के साथ संघर्ष समिति के संरक्षक बनवारी मीणा सेतकोलू, महामंत्री राजदीप शर्मा पछाड़, वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्यामसुंदर कुमावत नियाना, उपाध्यक्ष रामकल्याण मेहरा राई, प्रवक्ता गिरिराज मीणा आखाखेड़ी, ओबीसी भाजपा अध्यक्ष रामप्रसाद गुर्जर बरसत, पूर्व सरपंच अर्जुन सोनी, पूर्व उपसरपंच भरतराज मीणा, पूर्व ओबीसी भाजपा अध्यक्ष शिवनारायण नामदेव, पूर्व ओबीसी भाजपा महामंत्री मुकेश ढोढरिया, बद्रीसिंह गुर्जर पीथपुर, सोनू गुर्जर हरनावदा, परमानंद मालव, रामबल मीणा, बापुलाल मीणा, और अनारसिंह मीणा सहित कई अन्य उपस्थित थे।3
- छबड़ा स्थित श्री किसान एग्रो एजेंसी किसानों के लिए खेती से संबंधित सभी प्रकार की दवाइयां, खाद एवं बीज उचित मूल्य पर उपलब्ध करा रही है। यह एजेंसी खेती से जुड़ी हर प्रकार की समस्याओं के समाधान हेतु भी संपर्क का केंद्र है। इन सेवाओं और उत्पादों के लिए प्रो. पवन नागर से 9001683100 पर संपर्क किया जा सकता है।1
- कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की तैयारियों के क्रम में चिपबड़ौद के स्टेडियम में 'समुद्र मंथन प्राणायाम' का अभ्यास किया गया।1
- बारां जिले के छीपाबड़ौद उपखंड क्षेत्र के बड़ावदा गांव में अवैध खनन की शिकायत पर कार्रवाई करने पहुंची वन विभाग की टीम पर हमला किया गया है। इस घटना में दो वन रक्षकों को चोटें आई हैं, जबकि क्षेत्रीय वन अधिकारी के सरकारी वाहन के शीशे भी तोड़ दिए गए। क्षेत्रीय वन अधिकारी हेमेंद्र शाक्यवाल ने बताया कि अवैध खनन की शिकायत पर टीम बड़ावदा गांव पहुंची थी, जहाँ उन्हें पत्थर चिंगारी खनिज सामग्री से भरा एक ट्रैक्टर दिखा। वन कर्मियों ने इसे रोकने का प्रयास किया, लेकिन चालक मौके से फरार हो गया। टीम ने ट्रैक्टर का पीछा किया, जिसके बाद पीपलखेड़ा गांव में ट्रैक्टर रुक गया। तभी एक मोटरसाइकिल सवार वहाँ पहुंचा और वन कर्मियों के साथ मारपीट शुरू कर दी। इसी दौरान ट्रैक्टर चालक फिर से ट्रैक्टर को गांव की ओर ले गया। वन विभाग की टीम ने दोबारा ट्रैक्टर का पीछा कर उसे रोकने की कोशिश की। आरोप है कि इसके बाद 10 से 15 नामजद लोगों ने वन कर्मियों के साथ मारपीट की और विभागीय वाहन के शीशे तोड़ दिए। इस हमले में वन रक्षक प्रवीण शर्मा और संजय मीणा घायल हो गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर वन विभाग के कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला। वन विभाग ने इस मामले में छीपाबड़ौद थाने में रिपोर्ट दर्ज करवा दी है, और पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।4
- शनिवार सुबह 11 बजे मिली जानकारी के आधार पर, कोटा रेंज आईजी और बारां पुलिस अधीक्षक अभिषेक अदान्सु के निर्देशानुसार केलवाड़ा पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत, सात साल से फरार चल रहे एक स्थाई वारंटी, देवेश शिवहरे को गिरफ्तार करने में सफलता मिली है। थानाधिकारी नरेंद्र सिंह और कानिस्टेबल नवदीप मीणा की टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी देवेश शिवहरे पुत्र राजेश शिवहरे (निवासी दांता, केलवाड़ा) को गुना, मध्य प्रदेश से डिटेन किया। पुलिस के अनुसार, आरोपी देवेश शिवहरे कोर्ट केस नंबर 513/2018 धारा 13 आरपीजीओ (सरकार बनाम राहुल) के मामले में लंबे समय से वांछित था। पुलिस टीम की इस त्वरित और अथक कार्रवाई की सराहना की जा रही है।1
- छबड़ा में धाकड़ समाज सेवा समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक शनिवार, 30 मई, 2026 को दोपहर 12 बजे से आयोजित की जाएगी। यह बैठक समाज के धरणीधर छात्रावास, स्टेशन रोड स्थित परिसर में होगी। समिति के वर्तमान अध्यक्ष पटेल श्री लाल धाकड़ ने बताया कि माननीय न्यायालय के निर्णय के अनुसार, छात्रावास में मौजूद दुकानदारों को उनकी सहयोग राशि 27 मई को वापस लौटा दी गई है। यह आगामी बैठक मुख्य रूप से समाज के बालक-बालिकाओं के लिए छात्रावास को मौजूदा व्यवस्था के अनुसार खोलने और समाज के भविष्य के सुझावों पर विचार-विमर्श करने के उद्देश्य से बुलाई गई है। सभी समाज बंधुओं से आवश्यक रूप से समय पर बैठक में भाग लेकर इसे सफल बनाने का अनुरोध किया गया है।4