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बाड़ी उपखंड पर समस्त युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कदम को पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय और दुर्व्यवहार बताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बाड़ी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान में बृज भाषा का प्रचलन है। उनका कहना था कि यदि मारवाड़ी भाषा को पूरे राजस्थान में थोपा गया, तो यह पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय होगा और बृज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। इसी क्रम में, शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी जिक्र किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का समुचित अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू की जाती है, खासकर जब पूर्वी राजस्थान से लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तो यह विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन आवश्यक है। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों की वास्तविक भाषाई परिस्थिति के अध्ययन के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा गया, तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को हल नहीं कर पाएंगे और सरकारी नौकरी से वंचित रह जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि माननीय उच्च न्यायालय को अपना फैसला बदलना चाहिए और पूर्वी राजस्थान की भाषा हिंदी एवं बृज भाषा ही रहने देनी चाहिए, जिससे भविष्य में न तो विद्यार्थियों को कोई परेशानी आए और न ही बृज भाषा का अस्तित्व खत्म हो। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी बताया कि इन पूर्वी जिलों में भगवान श्री कृष्ण के समय से ही बृज और हिंदी का प्रचलन रहा है, और कई कवियों ने भी बृज भाषा में रचनाएं लिखी हैं। उनके अनुसार, अचानक से इस तरह भाषा का बोझ थोपना गलत है, और यदि पूरे क्षेत्र में मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के रूप में लागू किया गया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह पिछड़ जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, चेतन शर्मा, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीना, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमन्त, कांता शर्मा, पायल सहित सैकड़ों युवा और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

1 hr ago
user_Reporter Rajkumar Sain Dholpur Rajasthan
Reporter Rajkumar Sain Dholpur Rajasthan
Carpenter सेपऊ, धौलपुर, राजस्थान•
1 hr ago

बाड़ी उपखंड पर समस्त युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कदम को पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय और दुर्व्यवहार बताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बाड़ी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान में बृज भाषा का प्रचलन है। उनका कहना था कि यदि मारवाड़ी भाषा को पूरे राजस्थान में थोपा गया, तो यह पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय होगा और बृज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। इसी क्रम में, शेर

गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी जिक्र किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का समुचित अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू की जाती है, खासकर जब पूर्वी राजस्थान से लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तो यह विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन आवश्यक है। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जैसे पूर्वी राजस्थान के

जिलों की वास्तविक भाषाई परिस्थिति के अध्ययन के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा गया, तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को हल नहीं कर पाएंगे और सरकारी नौकरी से वंचित रह जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि माननीय उच्च न्यायालय को अपना फैसला बदलना चाहिए और पूर्वी राजस्थान की भाषा हिंदी एवं बृज भाषा ही रहने देनी चाहिए, जिससे भविष्य में न तो विद्यार्थियों को कोई परेशानी आए और न ही बृज भाषा का अस्तित्व खत्म हो। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी बताया कि इन पूर्वी जिलों में भगवान श्री कृष्ण के समय से ही बृज और हिंदी का प्रचलन रहा है,

और कई कवियों ने भी बृज भाषा में रचनाएं लिखी हैं। उनके अनुसार, अचानक से इस तरह भाषा का बोझ थोपना गलत है, और यदि पूरे क्षेत्र में मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के रूप में लागू किया गया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह पिछड़ जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, चेतन शर्मा, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीना, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमन्त, कांता शर्मा, पायल सहित सैकड़ों युवा और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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  • बाड़ी उपखंड पर समस्त युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कदम को पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय और दुर्व्यवहार बताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बाड़ी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया। छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान में बृज भाषा का प्रचलन है। उनका कहना था कि यदि मारवाड़ी भाषा को पूरे राजस्थान में थोपा गया, तो यह पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय होगा और बृज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। इसी क्रम में, शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी जिक्र किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का समुचित अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू की जाती है, खासकर जब पूर्वी राजस्थान से लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तो यह विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन आवश्यक है। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों की वास्तविक भाषाई परिस्थिति के अध्ययन के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा गया, तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को हल नहीं कर पाएंगे और सरकारी नौकरी से वंचित रह जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि माननीय उच्च न्यायालय को अपना फैसला बदलना चाहिए और पूर्वी राजस्थान की भाषा हिंदी एवं बृज भाषा ही रहने देनी चाहिए, जिससे भविष्य में न तो विद्यार्थियों को कोई परेशानी आए और न ही बृज भाषा का अस्तित्व खत्म हो। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी बताया कि इन पूर्वी जिलों में भगवान श्री कृष्ण के समय से ही बृज और हिंदी का प्रचलन रहा है, और कई कवियों ने भी बृज भाषा में रचनाएं लिखी हैं। उनके अनुसार, अचानक से इस तरह भाषा का बोझ थोपना गलत है, और यदि पूरे क्षेत्र में मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के रूप में लागू किया गया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह पिछड़ जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, चेतन शर्मा, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीना, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमन्त, कांता शर्मा, पायल सहित सैकड़ों युवा और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
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    बाड़ी उपखंड पर समस्त युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए भी पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए इस कदम को पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय और दुर्व्यवहार बताया। इस दौरान उपखंड अधिकारी बाड़ी को एक ज्ञापन भी सौंपा गया।

छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने स्पष्ट किया कि हालांकि वे उच्च न्यायालय का सम्मान करते हैं, लेकिन पूर्वी राजस्थान में बृज भाषा का प्रचलन है। उनका कहना था कि यदि मारवाड़ी भाषा को पूरे राजस्थान में थोपा गया, तो यह पूर्वी राजस्थान के जिलों के साथ अन्याय होगा और बृज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। इसी क्रम में, शेर गुर्जर ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का उल्लेख किया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी जिक्र किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने चेताया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का समुचित अध्ययन किए बिना शिक्षा संबंधी भाषा नीति लागू की जाती है, खासकर जब पूर्वी राजस्थान से लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हों, तो यह विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन आवश्यक है।

समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा जैसे पूर्वी राजस्थान के जिलों की वास्तविक भाषाई परिस्थिति के अध्ययन के लिए जिला अथवा संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा गया, तो पूर्वी राजस्थान के विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षाओं में प्रश्नों को हल नहीं कर पाएंगे और सरकारी नौकरी से वंचित रह जाएंगे। उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि माननीय उच्च न्यायालय को अपना फैसला बदलना चाहिए और पूर्वी राजस्थान की भाषा हिंदी एवं बृज भाषा ही रहने देनी चाहिए, जिससे भविष्य में न तो विद्यार्थियों को कोई परेशानी आए और न ही बृज भाषा का अस्तित्व खत्म हो। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी बताया कि इन पूर्वी जिलों में भगवान श्री कृष्ण के समय से ही बृज और हिंदी का प्रचलन रहा है, और कई कवियों ने भी बृज भाषा में रचनाएं लिखी हैं। उनके अनुसार, अचानक से इस तरह भाषा का बोझ थोपना गलत है, और यदि पूरे क्षेत्र में मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा के रूप में लागू किया गया, तो यह क्षेत्र पूरी तरह पिछड़ जाएगा।

इस विरोध प्रदर्शन में शेरा गुर्जर, मनोज राजावत, समरथ गुर्जर, छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर, मानवेंद्र बैंसला, देशराज कंसाना, ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बन्टू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित, दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, कप्तान, धीरज, हर्षल, करन, मोहित, चेतन शर्मा, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन, योगेश मीना, हनी, रिजवान खान, अमित कुशवाह, निहारिका, हेमन्त, कांता शर्मा, पायल सहित सैकड़ों युवा और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
    user_Reporter Rajkumar Sain Dholpur Rajasthan
    Reporter Rajkumar Sain Dholpur Rajasthan
    Carpenter सेपऊ, धौलपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
  • सड़क के किनारे कूड़ा डाला हुआ है, जिसकी वजह से प्रतिदिन दुर्घटनाएँ होती हैं।
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    सड़क के किनारे कूड़ा डाला हुआ है, जिसकी वजह से प्रतिदिन दुर्घटनाएँ होती हैं।
    user_Dheeraj
    Dheeraj
    Kheragarh, Agra•
    3 hrs ago
  • धौलपुर जिले की बाड़ी में बिजली चोरों के खिलाफ डिस्कॉम का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में विभाग ने चार मोहल्लों में बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, हरिजन बस्ती में लोगों से बिजली कनेक्शन लेने की अपील भी की गई है, ताकि वे वैध तरीके से बिजली का उपयोग करें। डिस्कॉम ने ग्रामीण क्षेत्रों से चार ट्रांसफार्मर भी हटा दिए हैं। इस कार्रवाई के बीच, एक्सईएन गोविंद सिंह ने अधिकारियों के साथ एक बैठक की और बिजली से संबंधित शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
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    धौलपुर जिले की बाड़ी में बिजली चोरों के खिलाफ डिस्कॉम का अभियान लगातार जारी है। इसी क्रम में विभाग ने चार मोहल्लों में बड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के तहत, हरिजन बस्ती में लोगों से बिजली कनेक्शन लेने की अपील भी की गई है, ताकि वे वैध तरीके से बिजली का उपयोग करें।

डिस्कॉम ने ग्रामीण क्षेत्रों से चार ट्रांसफार्मर भी हटा दिए हैं। इस कार्रवाई के बीच, एक्सईएन गोविंद सिंह ने अधिकारियों के साथ एक बैठक की और बिजली से संबंधित शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है।
    user_रोहित वर्मा
    रोहित वर्मा
    Farmer बारी, धौलपुर, राजस्थान•
    16 min ago
  • धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा। शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया। समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।
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    धौलपुर के बाड़ी उपखंड पर युवा वर्ग और विद्यार्थी वर्ग ने पूरे राजस्थान में मारवाड़ी भाषा को थोपने का कड़ा विरोध किया है। उन्होंने उच्च न्यायालय के आदेश का सम्मान करने की बात कहते हुए भी छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह कदम उठाया। इस दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर ने बताया कि पूर्वी राजस्थान में ब्रज भाषा का प्रचलन है, और यदि मारवाड़ी भाषा को जबरन थोपा जाता है तो यह इस क्षेत्र के जिलों के साथ अन्याय होगा और ब्रज भाषा के अस्तित्व को खत्म करने का प्रयास भी होगा।

शेर गुर्जर ने इस संदर्भ में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29(1) का हवाला दिया, जो नागरिकों को उनकी भाषा, लिपि और संस्कृति के संरक्षण का अधिकार देता है, तथा अनुच्छेद 350A का भी उल्लेख किया, जो मातृभाषा आधारित प्राथमिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा करता है। उन्होंने तर्क दिया कि यदि किसी क्षेत्र की वास्तविक भाषाई परिस्थिति का अध्ययन किए बिना भाषा नीति लागू की जाती है, तो इसका विद्यार्थियों की सीखने की प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम और विद्यालयी अनुकूलन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, विशेषकर पूर्वी राजस्थान के लगभग 20 प्रतिशत छात्र-छात्राओं पर जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इसलिए, स्थानीय भाषाई अध्ययन को आवश्यक बताया गया।

समरथ गुर्जर और मनोज राजावत ने राजस्थान के पूर्वी जिलों जैसे धौलपुर, भरतपुर, डीग, करौली, सवाई माधोपुर, अलवर और दौसा की वास्तविक भाषाई स्थिति का अध्ययन करने के लिए जिला या संभाग स्तरीय विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग की। मानवेंद्र बैंसला और देशराज कंसाना ने भी कहा कि इन पूर्वी जिलों में ब्रज और हिंदी का प्रचलन पहले से ही है, ऐसे में अचानक से इस प्रकार का भाषा का बोझ थोपना अनुचित है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान ऋषभ शर्मा, अजय कंसाना, चेतन शर्मा, बंटू प्रजापति, अमन गुर्जर, आदित्य, विपिन, ललित दर्शन गुर्जर, प्रदीप, हंसराम, तन्वेश, तनवी, यश, शिवा, विक्रम, रिहान, शिवानी, अदिति, आर्यन, लोकेश, संदीप, मोहित, राहुल गुर्जर, बबलू, हिमांक, प्रियांशी, भयांश जाट, सचिन योगेश मीना, हेमंत, पायल सहित सैकड़ों युवा मौजूद रहे। इस संबंध में बाड़ी के उपखंड अधिकारी को ज्ञापन भी सौंपा गया।
    user_ANURAG BAGHEL
    ANURAG BAGHEL
    Local News Reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    26 min ago
  • धौलपुर में साइबर अपराध पुलिस थाना ने एक ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के बैंक खाते से निकाले गए 60 हजार 848 रुपये की पूरी राशि मात्र 24 घंटे के भीतर वापस दिलवा दी। सरमथुरा निवासी प्रेम सिंह के व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करते ही बिना किसी ओटीपी के उनके खाते से कुल 60,848 रुपये निकाल लिए गए। ठगी का पता चलते ही पीड़ित प्रेम सिंह ने एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के तुरंत बाद, साइबर अपराध पुलिस थाना धौलपुर में तैनात कांस्टेबल अमित शर्मा ने संबंधित बैंकों और वॉलेट कंपनियों के नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा। इस त्वरित समन्वय और कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ठगी की गई संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस कर दी गई। साइबर थाना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मोबाइल ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
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    धौलपुर में साइबर अपराध पुलिस थाना ने एक ठगी के मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पीड़ित के बैंक खाते से निकाले गए 60 हजार 848 रुपये की पूरी राशि मात्र 24 घंटे के भीतर वापस दिलवा दी। सरमथुरा निवासी प्रेम सिंह के व्हाट्सएप पर एक एपीके फाइल भेजी गई थी, जिसे इंस्टॉल करते ही बिना किसी ओटीपी के उनके खाते से कुल 60,848 रुपये निकाल लिए गए।

ठगी का पता चलते ही पीड़ित प्रेम सिंह ने एक घंटे के भीतर राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलने के तुरंत बाद, साइबर अपराध पुलिस थाना धौलपुर में तैनात कांस्टेबल अमित शर्मा ने संबंधित बैंकों और वॉलेट कंपनियों के नोडल अधिकारियों से संपर्क साधा। इस त्वरित समन्वय और कार्रवाई के परिणामस्वरूप, ठगी की गई संपूर्ण राशि 24 घंटे के भीतर पीड़ित के बैंक खाते में सफलतापूर्वक वापस कर दी गई।

साइबर थाना पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या संदिग्ध मोबाइल ऐप को डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि साइबर ठगी का शिकार होने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन नंबर पर या अपने नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।
    user_Afaq ahmed
    Afaq ahmed
    Court reporter धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • धौलपुर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग मुक्त परिसर और भय मुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एक रैली निकाली, जिसके माध्यम से सभी उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने एंटी-रैगिंग संबंधी पोस्टर भी तैयार किए। कार्यक्रम में एंटी-रैगिंग के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाला एक नाटक भी मंचित किया गया। यह आयोजन प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार दुबे की अध्यक्षता में, और सहायक आचार्य एनाटॉमी डॉ. संतोष कुमार एवं सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी डॉ. आशीष सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग न करने की हिदायत दी गई। अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई सीनियर छात्र-छात्रा किसी जूनियर छात्र-छात्रा के साथ रैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत नेशनल एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नंबर 18001805522 पर की जा सकती है। इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गुप्ता, डॉ. हेमलता गुप्ता, अनिल गोयल, ध्रुव सिंह सिकरवार, मुकेश यादव और प्रेमराज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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    धौलपुर के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में रैगिंग मुक्त परिसर और भय मुक्त शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एक रैली निकाली, जिसके माध्यम से सभी उपस्थित विद्यार्थियों को एंटी-रैगिंग के प्रति जागरूक किया गया। छात्र-छात्राओं ने एंटी-रैगिंग संबंधी पोस्टर भी तैयार किए।

कार्यक्रम में एंटी-रैगिंग के दुष्प्रभावों को दर्शाने वाला एक नाटक भी मंचित किया गया। यह आयोजन प्रधानाचार्य डॉ. दीपक कुमार दुबे की अध्यक्षता में, और सहायक आचार्य एनाटॉमी डॉ. संतोष कुमार एवं सहायक आचार्य माइक्रोबायोलॉजी डॉ. आशीष सारस्वत के निर्देशन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में भविष्य में किसी भी प्रकार की रैगिंग न करने की हिदायत दी गई।

अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई सीनियर छात्र-छात्रा किसी जूनियर छात्र-छात्रा के साथ रैगिंग करता है, तो इसकी शिकायत नेशनल एंटी रैगिंग हेल्प लाइन नंबर 18001805522 पर की जा सकती है। इस जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. माधुरी गुप्ता, डॉ. हेमलता गुप्ता, अनिल गोयल, ध्रुव सिंह सिकरवार, मुकेश यादव और प्रेमराज सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
    user_Mukesh Sootel
    Mukesh Sootel
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • धौलपुर में नौतपा की भीषण गर्मी और आग उगलती दोपहरी के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए एडवोकेट, पत्रकार और आमजन ने मिलकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार निभाया है। मई-जून की तपती गर्मी से पक्षियों के गले सूख रहे हैं और आवारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं, ऐसे में शहर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है। इस पहल के तहत, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आमजन द्वारा शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें रोजाना ताजा पानी भरा जाता है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए लोगों ने अपनी ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी रोजाना पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है। पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस अवसर पर कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रख देना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने बताया कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होता है, तो ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने इस संयुक्त प्रयास को समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आह्वान किया। अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता, पत्रकार और आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा और भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो नौतपा की इस तपिश में पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन रहा है।
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    धौलपुर में नौतपा की भीषण गर्मी और आग उगलती दोपहरी के बीच बेजुबान पशु-पक्षियों की पीड़ा को समझते हुए एडवोकेट, पत्रकार और आमजन ने मिलकर एक महत्वपूर्ण सामाजिक सरोकार निभाया है। मई-जून की तपती गर्मी से पक्षियों के गले सूख रहे हैं और आवारा पशु पानी की तलाश में भटक रहे हैं, ऐसे में शहर के अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय नागरिकों ने एकजुट होकर इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था का बीड़ा उठाया है।

इस पहल के तहत, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और आमजन द्वारा शहर के विभिन्न चौराहों, सार्वजनिक स्थानों, मोहल्लों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों के पेड़ों पर मिट्टी के परिंडे बांधे जा रहे हैं, जिनमें रोजाना ताजा पानी भरा जाता है ताकि चिड़िया, कबूतर और अन्य पक्षी अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं, सड़कों, मंदिरों के पास और सुनसान इलाकों में बेसहारा गाय, कुत्ते, बंदर जैसे जानवरों के लिए लोगों ने अपनी ओर से बड़ी पानी की टंकियां रखवाई हैं। इन टंकियों में भी रोजाना पानी भरा जाता है, जिससे सैकड़ों बेजुबान जानवरों को बड़ी राहत मिल रही है।

पूर्व अभिभाषक संघ अध्यक्ष प्रशांत हुंडावाल ने इस अवसर पर कहा कि न्यायालय में हम इंसानों के अधिकारों की बात करते हैं, लेकिन प्रकृति और उसके जीवों का भी हम पर उतना ही हक है, और नौतपा में एक बर्तन पानी रख देना सबसे बड़ा पुण्य का काम है। उन्होंने अधिवक्ता समुदाय से भी इस सेवा कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। एडवोकेट प्रमोद शर्मा ने बताया कि कानून हमें दया और करुणा सिखाता है, और जब इंसान अपने स्वार्थ में अंधा होता है, तो ये बेजुबान जानवर सबसे पहले पीड़ित होते हैं। उन्होंने इस संयुक्त प्रयास को समाज को नई दिशा देने वाला बताया और हर नागरिक से अपने स्तर पर एक परिंडा लगाने का आह्वान किया।

अधिवक्ताओं, पत्रकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि नौतपा के 9 दिन धरती का तापमान सबसे अधिक होता है, जिससे प्रकृति और जीव-जंतुओं का जीवन संकट में पड़ जाता है। उनका मानना है कि प्रशासन के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह इन बेजुबानों के लिए पानी की व्यवस्था करे। आमजन से भी अपील की गई है कि वे अपने घर की छत, बालकनी, दुकान या मोहल्ले में एक मिट्टी का बर्तन पानी से भरकर रखें, क्योंकि एक छोटा सा प्रयास किसी पक्षी की जान बचा सकता है। स्थानीय युवा, अधिवक्ता, पत्रकार और आमजन प्रतिदिन सुबह-शाम परिंडे और टंकियों की सफाई कर उन्हें फिर से भर रहे हैं, और यह सेवा अभियान गर्मी कम होने तक लगातार जारी रहेगा। रमा पंडित, सचिन पाराशर, सार्थक उपाध्याय, हिमांशु, धीरेंद्र कुशवाह, मीनेश मीना, अनिल मीणा, हेमंत सिंह, अनुराग कटारा, अजीत, रजित शर्मा, रमाकांत शर्मा, अजीत परिहार, हरवीर शर्मा और भानु शर्मा सहित कई लोग इस कार्य में सक्रिय रूप से शामिल हैं, जो नौतपा की इस तपिश में पशु-पक्षियों के लिए जीवनदान और इंसानियत की सबसे बड़ी मिसाल बन रहा है।
    user_Deepu Verma Journalist Dholpur
    Deepu Verma Journalist Dholpur
    धौलपुर, धौलपुर, राजस्थान•
    6 hrs ago
  • राजस्थान के बाड़ी में युवाओं और छात्रों ने मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में स्पष्ट किया गया कि पूर्वी राजस्थान किसी भी स्थिति में मारवाड़ी भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। प्रदर्शनकारियों ने ब्रज भाषा को ही क्षेत्र की पहचान बनाए रखने की पुरजोर मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस विरोध प्रदर्शन को आगे जिला और संभाग मुख्यालयों तक ले जाया जाएगा।
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    राजस्थान के बाड़ी में युवाओं और छात्रों ने मारवाड़ी भाषा को राजस्थानी भाषा बनाए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शनकारी उपखंड अधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए और मुख्यमंत्री के नाम उपखंड अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा।

पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष पुष्पेंद्र गुर्जर के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में स्पष्ट किया गया कि पूर्वी राजस्थान किसी भी स्थिति में मारवाड़ी भाषा को स्वीकार नहीं करेगा। प्रदर्शनकारियों ने ब्रज भाषा को ही क्षेत्र की पहचान बनाए रखने की पुरजोर मांग की है।

इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी है कि इस विरोध प्रदर्शन को आगे जिला और संभाग मुख्यालयों तक ले जाया जाएगा।
    user_रोहित वर्मा
    रोहित वर्मा
    Farmer बारी, धौलपुर, राजस्थान•
    1 hr ago
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