जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जियो टैग पर मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर! आखिर किसके इशारे पर कई दिनों से सरकारी धन का खेल चल रहा है? वाह रे सिस्टम! वाह रे मनरेगा की निगरानी! कागजों में 75 मजदूर रोज फावड़ा चला रहे हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही मजदूर ऐसे गायब कि जैसे कभी थे ही नहीं! और तो और, जिस जगह सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों के पसीने से विकास होने का दावा किया जा रहा है, वहां मौके पर नाला पानी से लबालब और खेत में जानवरों के लिए कर्बी खड़ी दिखाई दे रही है। मामला है विकासखंड कदौरा की ग्राम पंचायत बरदौली का, जहां संतराम के खेत से स्वामीदीन के खेत तक नाला खुदाई कार्य मनरेगा के तहत बताया जा रहा है। कार्य का वर्क कोड 3138009010... और मस्टर रोल संख्या 1291 बताई गई है। आरोप है कि 9 सितंबर से लगातार करीब 75 मजदूरों की NMMS हाजिरी दर्ज की जा रही है। सवाल यह है कि आखिर ये 75 मजदूर हैं कहां? 13 सितंबर को मौके पर पहुंचे तो एक भी मजदूर दिखाई नहीं दिया। नाला पानी से भरा हुआ है। मौके पर मजदूरों की जगह दिखाई दे रही है तो सिर्फ जानवरों के लिए खड़ी कर्बी! वाह रे जियो टैग! कैमरे में कुछ और, जमीन पर कुछ और! अब जरा मनरेगा की डिजिटल व्यवस्था पर भी सवाल उठाइए। अगर 75 मजदूर प्रतिदिन काम कर रहे हैं तो उनकी जियो टैग फोटो कहां है? फोटो में कितने मजदूर दिखाई दे रहे हैं? क्या फोटो उसी स्थान की है जहां वास्तव में काम होना है? क्या NMMS की हाजिरी लगाने से पहले जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं या मोबाइल से ही सरकारी खजाने का हिसाब-किताब चल रहा है? कैमरा अगर मजदूरों की मौजूदगी नहीं दिखा रहा और मौके पर भी मजदूर नहीं मिल रहे, तो फिर कागजों में 75 मजदूरों का पसीना आखिर किसके भरोसे बह रहा है? गरीबों के नाम पर सरकारी धन का खेल? मनरेगा गरीब परिवारों को रोजगार देने की योजना है। गरीब मजदूरों के हाथ में काम और मजदूरी पहुंचनी चाहिए, लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं और कागजों में मजदूर दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है तो यह गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। सवाल बड़ा है—क्या बिना मौके पर मजदूरों की मौजूदगी के मस्टर रोल सत्यापित हो सकता है? रोजगार सेवक क्या कर रहे थे? ग्राम पंचायत सचिव ने क्या सत्यापन किया? तकनीकी सहायक ने कार्यस्थल देखा या नहीं? कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ने क्या जांच की? BDO कदौरा की निगरानी कहां थी? और जिला स्तर पर CDO जालौन तथा जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा की मॉनिटरिंग व्यवस्था आखिर किस काम की है? अब जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल! अब जरूरत है कि मस्टर रोल संख्या 1291, NMMS की प्रत्येक दिन की हाजिरी, जियो टैग फोटो, मजदूरों के नाम, भुगतान विवरण और मौके पर कराए गए कार्य का तत्काल मिलान कराया जाए। अगर रिकॉर्ड में 75 मजदूर हैं तो जांच के दौरान उन मजदूरों से भी पूछा जाए कि उन्होंने किस दिन, किस समय और किस स्थान पर काम किया। अगर मजदूर वास्तव में काम कर रहे थे तो 13 सितंबर को मौके पर एक भी मजदूर क्यों नहीं मिला? और अगर काम नहीं हो रहा था तो फिर हाजिरी कैसे लगी? वाह रे इंसान! आखिर इतनी हिम्मत आपको कौन दे रहा है? कई दिनों से अगर कागजों पर मजदूर दिखाकर सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा है तो यह सिर्फ फाइलों का मामला नहीं है। यह उस गरीब मजदूर के अधिकार का सवाल है जिसके नाम पर मनरेगा बनाई गई है। याद रखिए—अगर जांच में सरकारी धन की अनियमित निकासी या फर्जी हाजिरी साबित हुई तो जिम्मेदार लोगों से रिकवरी भी होनी चाहिए और नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी। वायरल वीडियो ने खोली जमीनी हकीकत? मौके से सामने आए वायरल वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस वायरल वीडियो को सिर्फ वीडियो मानकर छोड़ते हैं या फिर इसे जांच का आधार बनाकर मौके पर पहुंचते हैं। सरकार का पैसा जनता का पैसा है। गरीबों का हक कोई जेब में रखकर नहीं जा सकता। अब सवाल सिर्फ बरदौली का नहीं—सवाल यह है कि क्या कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में भी NMMS हाजिरी और जमीनी हकीकत का मिलान कराया जाएगा? फैसला अब जांच करेगी—कागजों में 75 मजदूर थे या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में? नोट: यह रिपोर्ट मौके से प्राप्त जानकारी, उपलब्ध रिकॉर्ड के दावों तथा वायरल वीडियो/तस्वीरों के आधार पर है। लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। #Jalaun #Kadoura #Bardouli #Manrega #NREGA #NMMS #JalaunNews #BreakingNews #DMJalaun #CDOJalaun #BDOKadoura #POManrega #JalaunVikas #DRDAJalaun #DistrictMagistrate #ChiefDevelopmentOfficer #मनरेगा #कदौरा #बरदौली #जालौन #मनरेगा_घोटाला #वायरल_वीडियो #ग्राउंड_रिपोर्ट #सरकारी_योजना
जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जलभराव में कागजी गोताखोर! कदौरा में मनरेगा का नंगा नाच—कागजों में 75 मजदूर, मौके पर एक भी नहीं! जियो टैग पर मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर! आखिर किसके इशारे पर कई दिनों से सरकारी धन का खेल चल रहा है? वाह रे सिस्टम! वाह रे मनरेगा की निगरानी! कागजों में 75 मजदूर रोज फावड़ा चला रहे हैं, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही मजदूर ऐसे गायब कि जैसे कभी थे ही नहीं! और तो और, जिस जगह सरकारी रिकॉर्ड में मजदूरों के पसीने से विकास होने का दावा किया जा रहा है, वहां मौके पर नाला पानी से लबालब और खेत में जानवरों के लिए कर्बी खड़ी दिखाई दे रही है। मामला है विकासखंड कदौरा की ग्राम पंचायत बरदौली का, जहां संतराम के खेत से स्वामीदीन के खेत तक नाला खुदाई कार्य मनरेगा के तहत बताया जा रहा है। कार्य का वर्क कोड 3138009010... और मस्टर रोल संख्या 1291 बताई गई है। आरोप है कि 9 सितंबर से लगातार करीब 75 मजदूरों की NMMS हाजिरी दर्ज की जा रही है। सवाल यह है कि आखिर ये 75 मजदूर हैं कहां? 13 सितंबर को मौके पर पहुंचे तो एक भी मजदूर दिखाई नहीं दिया। नाला पानी से भरा हुआ है। मौके पर मजदूरों की जगह दिखाई दे रही है तो सिर्फ जानवरों के लिए खड़ी कर्बी! वाह रे जियो टैग! कैमरे में कुछ और, जमीन पर कुछ और! अब जरा मनरेगा की डिजिटल व्यवस्था पर भी सवाल उठाइए। अगर 75 मजदूर प्रतिदिन काम कर रहे हैं तो उनकी जियो टैग फोटो कहां है? फोटो में कितने मजदूर दिखाई दे रहे हैं? क्या फोटो उसी स्थान की है जहां वास्तव में काम होना है? क्या NMMS की हाजिरी लगाने से पहले जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं या मोबाइल से ही सरकारी खजाने का हिसाब-किताब चल रहा है? कैमरा अगर मजदूरों की मौजूदगी नहीं दिखा रहा और मौके पर भी मजदूर नहीं मिल रहे, तो फिर कागजों में 75 मजदूरों का पसीना आखिर किसके भरोसे बह रहा है? गरीबों के नाम पर सरकारी धन का खेल? मनरेगा गरीब परिवारों को रोजगार देने की योजना है। गरीब मजदूरों के हाथ में काम और मजदूरी पहुंचनी चाहिए, लेकिन अगर आरोप सही साबित होते हैं और कागजों में मजदूर दिखाकर भुगतान कराया जा रहा है तो यह गरीबों के हक के साथ खिलवाड़ और सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा। सवाल बड़ा है—क्या बिना मौके पर मजदूरों की मौजूदगी के मस्टर रोल सत्यापित हो सकता है? रोजगार सेवक क्या कर रहे थे? ग्राम पंचायत सचिव ने क्या सत्यापन किया? तकनीकी सहायक ने कार्यस्थल देखा या नहीं? कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा ने क्या जांच की? BDO कदौरा की निगरानी कहां थी? और जिला स्तर पर CDO जालौन तथा जिला कार्यक्रम समन्वयक मनरेगा की मॉनिटरिंग व्यवस्था आखिर किस काम की है? अब जांच हुई तो खुल सकता है पूरा खेल! अब जरूरत है कि मस्टर रोल संख्या 1291, NMMS की प्रत्येक दिन की हाजिरी, जियो टैग फोटो, मजदूरों के नाम, भुगतान विवरण और मौके पर कराए गए कार्य का तत्काल मिलान कराया जाए। अगर रिकॉर्ड में 75 मजदूर हैं तो जांच के दौरान उन मजदूरों से भी पूछा जाए कि उन्होंने किस दिन, किस समय और किस स्थान पर काम किया। अगर मजदूर वास्तव में काम कर रहे थे तो 13 सितंबर को मौके पर एक भी मजदूर क्यों नहीं मिला? और अगर काम नहीं हो रहा था तो फिर हाजिरी कैसे लगी? वाह रे इंसान! आखिर इतनी हिम्मत आपको कौन दे रहा है? कई दिनों से अगर कागजों पर मजदूर दिखाकर सरकारी धन निकालने का खेल चल रहा है तो यह सिर्फ फाइलों का मामला नहीं है। यह उस गरीब मजदूर के अधिकार का सवाल है जिसके नाम पर मनरेगा बनाई गई है। याद रखिए—अगर जांच में सरकारी धन की अनियमित निकासी या फर्जी हाजिरी साबित हुई तो जिम्मेदार लोगों से रिकवरी भी होनी चाहिए और नियमानुसार कठोर कार्रवाई भी। वायरल वीडियो ने खोली जमीनी हकीकत? मौके से सामने आए वायरल वीडियो और तस्वीरों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है। वीडियो में मजदूरों की जगह कर्बी और जानवर दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस वायरल वीडियो को सिर्फ वीडियो मानकर छोड़ते हैं या फिर इसे जांच का आधार बनाकर मौके पर पहुंचते हैं। सरकार का पैसा जनता का पैसा है। गरीबों का हक कोई जेब में रखकर नहीं जा सकता। अब सवाल सिर्फ बरदौली का नहीं—सवाल यह है कि क्या कदौरा ब्लॉक की अन्य ग्राम पंचायतों में भी NMMS हाजिरी और जमीनी हकीकत का मिलान कराया जाएगा? फैसला अब जांच करेगी—कागजों में 75 मजदूर थे या सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड में? नोट: यह रिपोर्ट मौके से प्राप्त जानकारी, उपलब्ध रिकॉर्ड के दावों तथा वायरल वीडियो/तस्वीरों के आधार पर है। लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित जिम्मेदारों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा। #Jalaun #Kadoura #Bardouli #Manrega #NREGA #NMMS #JalaunNews #BreakingNews #DMJalaun #CDOJalaun #BDOKadoura #POManrega #JalaunVikas #DRDAJalaun #DistrictMagistrate #ChiefDevelopmentOfficer #मनरेगा #कदौरा #बरदौली #जालौन #मनरेगा_घोटाला #वायरल_वीडियो #ग्राउंड_रिपोर्ट #सरकारी_योजना
- जेल रोड पर ब्लैक बक कैफे की आड़ में कथित हुक्का बार! जेल चौकी से चंद कदमों की दूरी पर नशे का खेल? उरई कोतवाली क्षेत्र के जेल रोड स्थित ईशा बैंक्वेट के बगल में ब्लैक बक कैफे में अवैध रूप से हुक्का परोसे जाने के आरोप सामने आए हैं। वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों के दावों के मुताबिक, कैफे में युवाओं के साथ किशोरों की मौजूदगी भी बताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल—जेल चौकी से चंद कदम दूर कथित हुक्का बार आखिर किसकी नजर से बचकर चल रहा था? क्या स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर कार्रवाई में देरी क्यों हुई? बताया जा रहा है कि उरई में पहले भी कैफे और रेस्टोरेंट की आड़ में हुक्का परोसने के मामलों में कार्रवाई हुई है। इसके बावजूद ऐसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही? यह खबर वायरल वीडियो और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कैफे संचालक और पुलिस का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। आपकी राय क्या है? कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं—जिम्मेदार कौन?1
- सैदनगर के तालाब में दिखा मगरमच्छ, कड़ी मशक्कत के बाद किया गया रेस्क्यू जालौन जिले से इस वक्त की बड़ी खबर सामन आइ हा कोटरा थाना क्षेत्र के सैदनगर गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब गांव के तालाब में एक मगरमच्छ दिखाई दिया। तालाब में मगरमच्छ होने की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों की भीड जमा हो गई। जानकारी के मुताबिक, कोटरा थाना क्षेत्र के सैदनगर गांव स्थित तालाब में ग्रामीणों को मगरमच्छ दिखाई दिया। मगरमच्छ को देखते ही लोगों में दहशत का माहौल बन गया। ग्रामीणों ने इसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों और रेस्क्यू टीम को दी। मौके पर पहुंची टीम ने मगरमच्छ को पकड़ने के लिए रेस्क्यू अभियान शुरू किया। मगरमच्छ को काबू में करना आसान नहीं था और टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। काफी प्रयास के बाद मगरमच्छ को सुरक्षित पकड़ लिया गया। मगरमच्छ के पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। गनीमत रही कि इस दौरान किसी तरह की जनहानि की सूचना सामने नही आई। तालाब मे मगरमच्छ मित भी चर्चा का माहौल है। आसपास के क्षेत्र मे सुरक्षा को लेकर सतर्कता बरतने की बात कही है।3
- असम के उत्तम टैरोन को मिला स्वामी ब्रह्मानंद अवार्ड 2026 त्यागमूर्ति स्वामी ब्रह्मानंद जी के निर्वाण दिवस पर समाधि स्थल भूमि राठ में स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार समिति द्वारा स्वामी ब्रह्मानंद पुरस्कार 2026 का भव्य आयोजन किया गया। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाज सुधारक उत्तम टेरोन, असम को इस सम्मान से नवाजा गया। पुरस्कार विजेता टेरोन को मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार सुधीर विद्यार्थी ने स्वामी ब्रह्मानंद का स्टेच्यू, मेडल, सनद व 10 हजार रुपये सम्मान राशि और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। वी ओ- यह पुरस्कार हर वर्ष 13 सितंबर को शिक्षा और गौसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले भारतीय व गैर भारतीय नागरिकों को प्रदान किया जाता है। इससे पहले यह पुरस्कार सुपर 30 फेम आनंद कुमार, शिक्षाविद अरुण प्रकाश, रणजीत सिंह यादव (खाकी वाले गुरु), खान सर पटना, पद्मश्री फ्रेडरिक इरीना ब्रूनिंग, संत हरवंश सिंह निर्मल भादरिया और डॉ. भरत सारण को मिल चुका है। मुख्य अतिथि सुधीर विद्यार्थी ने कहा कि स्वामी ब्रह्मानंद जी ने बुंदेलखंड में गरीबी, बेकारी व अशिक्षा को दूर करने के लिए शिक्षा का अलख जगाया। उन्होंने कृषि, पर्यावरण और शिक्षा के क्षेत्र में ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया जो पूरे देश में इकलौता है। इस अवसर पर आर्टिस्ट आर्किटेक्ट प्राचुर्य बरूआ, क्रांतिकारी राधामोहन गोकुल के प्रपौत्र प्रकाशचंद अग्रवाल और पुरस्कार विजेता उत्तम टेरोन ने भी अपने विचार रखे। उत्तम टेरोन ने कहा कि स्वामी ब्रह्मानंद जैसी विभूति सदियों में पैदा होती है, हमें उनसे प्रेरणा लेकर हाशिए पर पड़े समाज तक शिक्षा की रोशनी पहुंचानी चाहिए। कार्यक्रम में सांसद अजेंद्र सिंह लोधी, पूर्व सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल, जिला पंचायत अध्यक्ष जयंती संतराम राजपूत, एमएलसी जितेंद्र सिंह सेंगर, विधायक मनीषा अनुरागी, विधायक ब्रजभूषण राजपूत सहित सैकड़ों जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, लक्ष्य परिवार के स्वयंसेवक और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। अंत में पुरस्कार समिति के अध्यक्ष डॉ. मुकेश कुमार राजपूत ने सभी का आभार व्यक्त किया। राम चन्द्र राजपूत की रिपोर्ट*3
- किसान नेता राजवीर सिंह जादौन1
- इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के साथ मारपीट और अवैध रिवाल्वर तानने का मामला। ➡️ इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप पर सेल्समैन के साथ मारपीट और अवैध रिवाल्वर तानने का मामला। ➡️ घटना का सनसनीखेज वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ तेजी से वायरल। ➡️ नोट: हालांकि, वायरल वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि हम नहीं करते हैं। ➡️ पुलिस पूरे मामले की जांच और वीडियो की पड़ताल में जुटी। ➡️ जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ होने और अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की उम्मीद। ✅जालौन के छिरिया पेट्रोल पंप का मामला1
- जालौन ब्लॉक के सीगपुरा गांव की 6 बहने हुई बेसहारा 2023 में पिता विजय सिंह बरार की कैंसर से मौत हो गयी उसके 1 महीने बाद ही माँ राम सिया देवी की भी मौत हो गई और अब 14 सितम्बर 2026 में दादी मुला देवी की भी मौत हो गई इसके बाद अंजलि 13 साल दिव्या 10 साल प्रतिज्ञा 9 साल और तीन छोटी और बहने हैं जो बिल्कुल भी बेसहारा हो गयी हैं बहनों ने प्रशासन से सहयोग की अपील की है. आप लोग भी अगर सहयोग करना चाहते है तो.. सुमित प्रताप सिंह..संस्थापक इंसानियत ग्रुप से संपर्क कर मदद कर सकते है mo. No.+9196950438021
- जालौन जिले से एक और नेत्रहीन असहाय युवक ने सोसल मीडिया के माध्यम से मांगी मदद नमस्कार दोस्तों आज़ हम आपको जालौन जिले के जालौन कोतवाली क्षेत्र से जुड़ी खबर दिखाने जा रहे हैं जहां आज एक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ है इस संबंध में जो जानकारी सामने आई है उसके मुताबिक मडोरी गांव के रहने वाले नेत्रहीन असहाय युवक पंचम सिंह ने मदद मांगी है1
- जालौन चौकी पर कई दिनों से लटका ताला, चौकी प्रभारी का फोन भी नहीं उठा!! पुलिस हिरासत में सौरभ सक्सेना को जालौन से झांसी और ग्वालियर ले जाने की चर्चा, पुलिस की चुप्पी पर उठे सवाल जालौन। कस्बा चौकी में पिछले कई दिनों से ताला लटका होने और चौकी प्रभारी मनीष तिवारी के नजर नहीं आने को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसी बीच कथित रूप से हार्पिक पीने का वीडियो सामने आने के बाद सौरभ सक्सेना निवासी गहेसर, जनपद औरैया का नाम सामने आया है। बताया जा रहा है कि सौरभ सक्सेना समेत कुछ लोगों को पुलिस ने पकड़ा था। चर्चा है कि सौरभ को जालौन से उरई, फिर झांसी और अब ग्वालियर ले जाया गया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि पुलिस की ओर से नहीं की गई है। मामले में पुलिस का कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आने से सवाल खड़े हो रहे हैं। चौकी प्रभारी मनीष तिवारी को लेकर भी पूर्व में विभिन्न आरोपों और शिकायतों की चर्चाएं रही हैं। इनमें महिला के घर का दरवाजा तोड़ने, जुआ आरोपी के साथ कथित अभद्रता और ई-रिक्शा चालक का मोबाइल तोड़ने जैसे आरोप शामिल बताए जा रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, जालौन क्षेत्र में हुई चोरी की कई घटनाओं के खुलासे को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ घटनाओं में सीसीटीवी फुटेज होने की बात कही जा रही है। स्कूटी से रुपये निकालने के एक मामले में कथित तौर पर करीब 45 दिन बाद एफआईआर दर्ज होने की बात भी सामने आई है। अब उठ रहे चार बड़े सवाल 1. सौरभ सक्सेना को पुलिस हिरासत में जालौन से झांसी तक क्यों ले जाया गया? 2. क्या उसके परिजन पुलिस के साथ हैं? 3. पुलिस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान क्यों नहीं दे रही? 4. सौरभ के साथ पकड़े गए अन्य लोगों का क्या हुआ? फिलहाल पूरे मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की जांच और आधिकारिक बयान का इंतजार है। पुलिस की ओर से स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।4