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झारखंड के कोडरमा स्थित कोडरमा स्टेशन पर एक युवक को शराब के साथ पकड़ा गया है। इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कानूनी कार्रवाई करने में जुटा हुआ है।
KUMAR ANKU
झारखंड के कोडरमा स्थित कोडरमा स्टेशन पर एक युवक को शराब के साथ पकड़ा गया है। इस मामले में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) कानूनी कार्रवाई करने में जुटा हुआ है।
More news from झारखंड and nearby areas
- कोडरमा जिले के डोमचांच क्षेत्र में बिजली की निरंतर आपूर्ति न होने से आमजनता की समस्याएं काफी बढ़ गई हैं। स्थानीय लोगों को लगातार बिजली कटौती के कारण भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। इस स्थिति के चलते, जनता ने अब बिजली विभाग से जल्द से जल्द इस समस्या में सुधार करने और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने की पुरजोर मांग की है।1
- चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, सांप के काटने पर जीवन बचाने का एकमात्र प्रभावी तरीका तुरंत अस्पताल पहुंचकर इलाज और एंटीवेनम लेना है। यह स्पष्ट किया गया है कि जीवन बचाने का सबसे भरोसेमंद रास्ता वैज्ञानिक इलाज ही है, न कि किसी प्रकार का अंधविश्वास।1
- मूल पाठ में किसी व्यक्ति या घटना का विशेष उल्लेख किए बिना, केवल "भावपूर्ण अंतिम विदाई" का भाव व्यक्त किया गया है। यह पंक्ति गहन संवेदनाओं के साथ किसी को दी गई अंतिम विदाई का मार्मिक चित्रण करती है।1
- नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड अंतर्गत थाली थाना क्षेत्र की बकसौती पंचायत के महेशपुर गांव स्थित ठाकुरबाड़ी में समस्त ग्रामीणों के सहयोग से मंगलवार को नौ दिवसीय श्री श्री 108 श्री राम चरित्र मानस महायज्ञ का भव्य कलशयात्रा के साथ विधिवत शुभारंभ हो गया। धार्मिक आस्था और वैदिक परंपराओं के अनुरूप निकाली गई इस कलशयात्रा में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक वातावरण का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस कलशयात्रा का नेतृत्व मुखिया प्रतिनिधि अर्जन यादव, सरपंच दिलीप सिंह, समाजसेवी मनु कुमार, तथा महायज्ञ कार्यकर्ता विजय यादव, मोहन यादव, कारू यादव, रविरंजन यादव, महेन्द्र यादव, नरेश यादव, पुणा यादव एवं मिथलेश यादव ने संयुक्त रूप से किया। ठाकुरबाड़ी परिसर से वैदिक मंत्रोच्चार एवं जयघोष के साथ प्रारंभ हुई यह यात्रा बकसौती बाजार का भ्रमण करते हुए अवनैया सकरी नदी पहुंची, जहां विद्वान आचार्यों ने वैदिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद कलशों में पवित्र जल भरा। इसके पश्चात, श्रद्धालु पुनः ठाकुरबाड़ी लौटे, जहाँ यज्ञ मंडप में कलशों को विधिवत स्थापित कर महायज्ञ का शुभारंभ किया गया। कलशयात्रा में महेशपुर सहित आसपास के कई गांवों से सैकड़ों कुंवारी कन्याएं एवं महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश धारण कर श्रद्धापूर्वक शामिल हुईं। पूरे मार्ग में श्रद्धालु लगातार "जय श्री राम", "जय-जय श्री राम" सहित अन्य धार्मिक जयघोष करते हुए आगे बढ़ रहे थे। भक्ति गीतों, शंखध्वनि और वैदिक मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा, जिससे क्षेत्र में आध्यात्मिक उल्लास का माहौल बना रहा। महायज्ञ कार्यकर्ता विजय यादव के अनुसार, कलशयात्रा के साथ नौ दिवसीय इस धार्मिक अनुष्ठान का विधिवत शुभारंभ हो चुका है। इन नौ दिनों के दौरान प्रतिदिन रामचरितमानस पाठ, हवन-पूजन, प्रवचन, भजन-कीर्तन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इस महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य समाज में धर्म, संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आपसी भाईचारे का संदेश प्रसारित करना है। इस अवसर पर क्षेत्र के सैकड़ों महिला-पुरुष श्रद्धालु उपस्थित रहे और महायज्ञ की सफलता एवं जनकल्याण की कामना करते हुए पूजा-अर्चना में भाग लिया, जिससे ग्रामीणों में आयोजन को लेकर विशेष उत्साह और श्रद्धा देखी गई।1
- बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश) के शिकारपुर विधानसभा क्षेत्र स्थित मिलक करीरा गांव का पोखर ग्रामीणों के लिए लगातार जानलेवा खतरा बना हुआ है। संजय वर्मा की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों का आरोप है कि यह दलदली पोखर आए दिन जान-माल के नुकसान का कारण बनता है। कई शिकायतों के बावजूद, अब तक न तो पोखर के चारों ओर सुरक्षा बाउंड्री बनाई गई है और न ही इसके आसपास कोई पक्की सड़क का निर्माण हुआ है। ग्रामीणों ने इस गंभीर समस्या से स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों को कई बार अवगत कराया है, लेकिन किसी भी ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उनका आरोप है कि क्षेत्र के सांसद डॉ. भोला सिंह, शिकारपुर के विधायक अनिल शर्मा और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस समस्या के समाधान के लिए अपेक्षित पहल नहीं की है। उनका कहना है कि केंद्र सरकार गांवों के विकास और सुरक्षित बुनियादी सुविधाओं की बातें करती है, लेकिन उनके गांव की यह समस्या वर्षों से जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों की अंतिम उम्मीद अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है, जिनसे वे इस जानलेवा पोखर का स्थायी समाधान कराने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे पर दिल्ली के स्वतंत्र विचारक और समाजसेवी विजय प्रधान भी गांव पहुंचे और ग्रामीणों की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया। विजय प्रधान ने कहा है कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक वे ग्रामीणों के समर्थन में अपनी आवाज उठाते रहेंगे। गांव के समाजसेवी मनोज त्यागी भी इस अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं, वहीं दिल्ली से मानव जन शिकायत समिति के अध्यक्ष श्री रमा शंकर साह के नेतृत्व में समिति की पूरी टीम भी इस समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत है। अब यह देखना बाकी है कि वर्षों से चली आ रही इस गंभीर जनसमस्या पर शासन और प्रशासन कब संज्ञान लेते हैं और मिलक करीरा गांव के लोगों को इस जानलेवा पोखर से स्थायी राहत कब मिल पाती है।1
- हजारीबाग में 30 जून 2026 को सिद्धू कान्हू मुर्मू चौक पर आदिवासी समाज द्वारा हूल दिवस बड़े धूमधाम, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित हुए और सभी ने माल्यार्पण कर महान क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सिद्धू-कान्हू के संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकार की मशाल को आज भी प्रज्वलित बताया। दरअसल, 30 जून 1855 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जब वीर क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू मुर्मू ने अंग्रेजी हुकूमत, जमींदारी शोषण और अन्याय के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका था। यह जल-जंगल-जमीन, स्वाभिमान, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज की एक ऐतिहासिक हुंकार थी। सिद्धू-कान्हू, भाई चांद-भैरव और बहनें फूलो-झानो के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और स्वाभिमान की अमिट मिसाल कायम की। यह क्रांति 1857 के सिपाही विद्रोह से दो साल पहले 30 जून 1855 को झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव में शुरू हुई थी। उस दिन लगभग 400 गांवों से 50,000 से अधिक आदिवासी इकट्ठा हुए थे, जहां सिद्धू-कान्हू ने अंग्रेजों के खिलाफ 'हूल' (विद्रोह) का बिगुल फूंका था। इस आंदोलन का प्रसिद्ध नारा "करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो" इतिहास में अमर है। अंग्रेजों और उनके चाटुकार जमींदारों द्वारा आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर कब्जे, अत्यधिक लगान, कर्ज के जाल और पुलिस-कचहरी द्वारा शासकों का साथ देने के कारण यह विद्रोह बेहद हिंसक और व्यापक था। इस लड़ाई में पारंपरिक हथियारों से लैस लगभग 20,000 आदिवासियों ने अपनी मातृभूमि के लिए शहादत दी, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को आदिवासियों की शक्ति का एहसास हुआ और उन्हें पीछे हटना पड़ा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता (चाईबासा) किस्टो कुमार बेसरा ने कहा कि महापुरुषों के संघर्ष से सीख लेकर समाज को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज उनके दिखाए मार्ग पर चलकर शिक्षा, अधिकार और एकता के लिए काम नहीं करेगा, तब तक श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी, और यह क्रांति अन्याय के खिलाफ खड़े होने तथा अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की सीख देती है। आदिवासी सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने कहा कि हूल दिवस आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है, तथा संगठन, संस्कृति और संघर्ष ही समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया। आदिवासी समाज के संयोजक रमेश कुमार हेम्ब्रोम ने बताया कि महापुरुषों का सपना अभी पूरी तरह साकार नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से महापुरुषों के वंशजों को गोद लेने और एस.पी.टी. एवं सी.एन.टी एक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग की। पवन तिग्गा ने कहा कि सिद्धू-कान्हू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक है, और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष तथा एकजुटता, जागरूकता बेहद जरूरी है। इस मौके पर आदिवासी सरना समिति के सचिव सुनिल लकड़ा, सुशील ओड़िया, महालाल हंसदा, मुखिया संझली मुर्मू, पूर्व मुखिया महादेव सोरेन, रवि लिंडा, पाहन बंधन टोप्पो, बंधन एक्का, निरज कुमार बेसरा, शिवजी टुडू, पप्पू एक्का, प्रदीप बेदिया, ललीता सोरेन, प्रतिमा सोरेन, मुखिया दयामनी टोप्पो, संजय टोप्पो, प्रमिला मुर्मू, अम्बिका टोप्पो, प्रदीप मुर्मू, सुधीर बासके, जगन कच्छप, आनन्द बासके, रघु हंसदा, कैलाश किस्कू, सुनील सोरेन, रिना सोरेन, बगुन सोरेन, मनी टोप्पो, सोहन किस्कू, प्रदीप कुमार मांझी, सोनी टोप्पो, अनामिका तिर्की, रीना तिर्की, रीना सोरेन, पप्पू एक्का, वीरेंद्र महली, बसंत सोरेन सहित आदिवासी समाज के हजारों महिला-पुरुष उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, गर्व और एकता से ओतप्रोत रहा, जिसने एक बार फिर संदेश दिया कि सिद्धू-कान्हू और अन्य वीर शहीदों का संघर्ष आज भी समाज को अपने अधिकारों, अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होने को प्रेरित करता है।1
- कोडरमा के डोमचांच क्षेत्र को एक आधुनिक पैथोलॉजी सुविधा की सौगात प्राप्त हुई है। इस नई व्यवस्था के तहत, अब आमलोगों को अपनी विभिन्न जांचों की रिपोर्ट एक ही दिन में मिल जाया करेगी। इस पहल से स्थानीय निवासियों को काफी राहत मिलने की उम्मीद है।1
- पूरे देश में व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इन सवालों को 'भारत' द्वारा लगातार पूछा जा रहा है, जो मौजूदा प्रणाली के कामकाज पर व्यापक चिंता व्यक्त करता है।1
- चंदवारा के चौराही गांव में इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहाँ एक महिला के साथ घर में घुसकर कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया है। पीड़िता ने आरोप लगाया है कि सोमवार देर रात करीब 12 बजे गांव के ही ऐनुल मियां, जो अकबर मियां के बेटे हैं, ने उसके घर में घुसकर जबरन यह वारदात की। घटना के समय महिला घर में अकेली थी, जिसका फायदा उठाकर आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर मौके से फरार हो गया। पीड़िता ने मंगलवार सुबह 8 बजे इस घटना की जानकारी चंदवारा थाना पुलिस को दी। सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी, लेकिन तब तक आरोपी ऐनुल मियां फरार हो चुका था। पुलिस का कहना है कि पीड़िता के आवेदन के आधार पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है और आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। इसके साथ ही, पीड़िता का चिकित्सीय परीक्षण और अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। यह शर्मनाक घटना पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है, और स्थानीय लोगों ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी के साथ-साथ मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है।4