मो. याकूब अंसारी जिला अध्यक्ष* बुनकर परिवार की ज़िंदगी का सच बहुत सादा लेकिन बेहद कड़वा है। *मो. याकूब अंसारी जिला अध्यक्ष* बुनकर परिवार की ज़िंदगी का सच बहुत सादा लेकिन बेहद कड़वा है। दिन-रात करघे पर मेहनत, उंगलियों में छाले, आँखों में धागों का धुआँ—फिर भी आमदनी इतनी कम कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज सब बोझ बन जाता है। महँगाई बढ़ती जाती है, मगर मज़दूरी सालों से वहीं अटकी रहती है। बिचौलियों का शोषण, कच्चे माल की महँगी कीमतें, बिजली-पानी की दिक्कतें और सरकारी योजनाओं का ज़मीन तक न पहुँचना—यही उनकी रोज़मर्रा की हक़ीक़त है। बुनकर देश की पहचान गढ़ते हैं, कपड़े में संस्कृति बुनते हैं, मगर खुद असुरक्षा में जीते हैं। उनका हुनर जिंदा है, पर ज़िंदगी संघर्ष में फँसी हुई है। सच यही है: बुनकर सिर्फ कपड़ा नहीं बुनते, वो सब्र, सम्मान और उम्मीद भी बुनते हैं—जिसकी क़ीमत उन्हें आज तक 72 रुपए बुनकर पासबुक के नाम पर नेताओं ने सालों तक भर-भरकर वोट बटोरे। बुनकरों को जानबूझकर गुमराह किया गया। अगर उसी समय गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे पास कर दिया गया होता, तो आज बुनकर बदहाली, भुखमरी और अपमान की ज़िंदगी जीने को मजबूर न होते। बुनकरों के साथ किया गया यह सीधा-सीधा धोखा और विश्वासघात है। इस बार बुनकर सभी धोखेबाजों को सबक अच्छे से सिखाएगा #बुनकर_विरोधी_नीति #72रुपए_का_धोखा #बुनकरों_से_विश्वासघात #हथकरघा_घोटाला #बुनकर_न्याय_चाहिए #WeaversJustice #SaveWeavers #बुनकर_एकता #सच_के_साथ #हक_की_लड़ाई
मो. याकूब अंसारी जिला अध्यक्ष* बुनकर परिवार की ज़िंदगी का सच बहुत सादा लेकिन बेहद कड़वा है। *मो. याकूब अंसारी जिला अध्यक्ष* बुनकर परिवार की ज़िंदगी का सच बहुत सादा लेकिन बेहद कड़वा है। दिन-रात करघे पर मेहनत, उंगलियों में छाले, आँखों में धागों का धुआँ—फिर भी आमदनी इतनी कम कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज सब बोझ बन जाता है। महँगाई बढ़ती जाती है, मगर मज़दूरी सालों से वहीं अटकी रहती है। बिचौलियों का शोषण, कच्चे माल की महँगी कीमतें, बिजली-पानी की दिक्कतें और सरकारी योजनाओं का ज़मीन तक न पहुँचना—यही उनकी रोज़मर्रा की हक़ीक़त है। बुनकर देश की पहचान गढ़ते हैं, कपड़े में संस्कृति बुनते हैं, मगर खुद असुरक्षा में जीते हैं। उनका हुनर जिंदा है, पर ज़िंदगी संघर्ष में फँसी हुई है। सच यही है: बुनकर सिर्फ कपड़ा नहीं बुनते, वो सब्र, सम्मान और उम्मीद भी बुनते हैं—जिसकी क़ीमत उन्हें आज तक 72 रुपए बुनकर पासबुक के नाम पर नेताओं ने सालों तक भर-भरकर वोट बटोरे। बुनकरों को जानबूझकर गुमराह किया गया। अगर उसी समय गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे पास कर दिया गया होता, तो आज बुनकर बदहाली, भुखमरी और अपमान की ज़िंदगी जीने को मजबूर न होते। बुनकरों के साथ किया गया यह सीधा-सीधा धोखा और विश्वासघात है। इस बार बुनकर सभी धोखेबाजों को सबक अच्छे से सिखाएगा #बुनकर_विरोधी_नीति #72रुपए_का_धोखा #बुनकरों_से_विश्वासघात #हथकरघा_घोटाला #बुनकर_न्याय_चाहिए #WeaversJustice #SaveWeavers #बुनकर_एकता #सच_के_साथ #हक_की_लड़ाई
- Inna lillahi wa inna elaihi rajeoon🤲🤲🤲 Allah Tala जन्नत नसीब अता फ़रमाया आमीन *Inna lillahi wa inna elaihi rajeoon🤲🤲🤲* ख़ामनेई अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उन्होंने अंत तक अपने देश को नहीं छोड़ा। ना बंकरों में छिपे, ना किसी दूसरे देश से मदद की भीख मांगी, ना अपने लोगों के साथ विश्वासघात किया। सत्ता और संघर्ष के बीच खड़े रहना ही नेतृत्व की असली पहचान होती है। इतिहास गवाह है कुछ लोग पद से नहीं, अपने रुख से याद किए जाते हैं। #khemenai #iranisraelconflict3
- Post by PARUL SIROHI ( M.M.PARBHARI)1
- Post by MURSLEEN1
- जबरदस्ती किसी की शादी करवाना गलत है1
- Post by HR Soler Penal Solution1
- Post by Vijay rathi1
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- *मो. याकूब अंसारी जिला अध्यक्ष* बुनकर परिवार की ज़िंदगी का सच बहुत सादा लेकिन बेहद कड़वा है। दिन-रात करघे पर मेहनत, उंगलियों में छाले, आँखों में धागों का धुआँ—फिर भी आमदनी इतनी कम कि घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और इलाज सब बोझ बन जाता है। महँगाई बढ़ती जाती है, मगर मज़दूरी सालों से वहीं अटकी रहती है। बिचौलियों का शोषण, कच्चे माल की महँगी कीमतें, बिजली-पानी की दिक्कतें और सरकारी योजनाओं का ज़मीन तक न पहुँचना—यही उनकी रोज़मर्रा की हक़ीक़त है। बुनकर देश की पहचान गढ़ते हैं, कपड़े में संस्कृति बुनते हैं, मगर खुद असुरक्षा में जीते हैं। उनका हुनर जिंदा है, पर ज़िंदगी संघर्ष में फँसी हुई है। सच यही है: बुनकर सिर्फ कपड़ा नहीं बुनते, वो सब्र, सम्मान और उम्मीद भी बुनते हैं—जिसकी क़ीमत उन्हें आज तक 72 रुपए बुनकर पासबुक के नाम पर नेताओं ने सालों तक भर-भरकर वोट बटोरे। बुनकरों को जानबूझकर गुमराह किया गया। अगर उसी समय गजट नोटिफिकेशन जारी कर इसे पास कर दिया गया होता, तो आज बुनकर बदहाली, भुखमरी और अपमान की ज़िंदगी जीने को मजबूर न होते। बुनकरों के साथ किया गया यह सीधा-सीधा धोखा और विश्वासघात है। इस बार बुनकर सभी धोखेबाजों को सबक अच्छे से सिखाएगा #बुनकर_विरोधी_नीति #72रुपए_का_धोखा #बुनकरों_से_विश्वासघात #हथकरघा_घोटाला #बुनकर_न्याय_चाहिए #WeaversJustice #SaveWeavers #बुनकर_एकता #सच_के_साथ #हक_की_लड़ाई1