*कॉलोनी के गेट निर्माण पर न्यायालय की रोक, यथास्थिति बनाए रखने के आदेश* *पंडित फतेहलाल नगर में प्रवेश द्वार निर्माण को लेकर विवाद, भूखंड मालिक की याचिका पर अंतरिम निषेधाज्ञा स्वीकार, 28 नवंबर को होगी अगली सुनवाई* किशनगढ़। पंडित फतेहलाल नगर कॉलोनी के प्रवेश द्वार के निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय पहुंच गया है। कॉलोनी के गेट निर्माण से भूखंड के आवागमन का रास्ता प्रभावित होने की शिकायत पर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, किशनगढ़ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने प्रार्थी की ओर से प्रस्तुत अंतरिम अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन स्वीकार करते हुए अप्रार्थीगण को निर्माणाधीन गेट के संबंध में मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए पाबंद किया है। प्रकरण के अनुसार, दीवानी विविध प्रकरण संख्या 68/2026 (सुरेन्द्र सिंह बनाम नगर परिषद) में 28 अक्टूबर को सुनवाई हुई। जिसमें प्रार्थी सुरेन्द्र सिंह महणोत की ओर से अधिवक्ता अभिषेक सिंह राजपुरोहित तथा अप्रार्थीगण की ओर से नगर परिषद अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित हुए। इस दौरान प्रार्थी की ओर से न्यायालय में बताया गया कि राजस्व ग्राम किशनगढ़ बी.के खसरा संख्या 952 में विकसित पंडित फतेहलाल नगर कॉलोनी स्थित भूखंड संख्या 5, जिसका क्षेत्रफल 250 वर्गगज है, जो उनके स्वामित्व एवं आधिपत्य में है। नगर परिषद किशनगढ़ की ओर से इस भूखंड का पट्टा भी जारी किया गया है। जिसमें प्रार्थी के अनुसार भूखंड के पूर्व में 60 फीट तथा दक्षिण में 30 फीट चौड़ी सड़क है। आरोप लगाया गया कि भूखंड के सामने पूर्व दिशा में अप्रार्थीगण की ओर से पक्के एवं स्थायी गेट का निर्माण करवाया जा रहा है। जिसमें गेट के पिलर भूखंड के नजदीक बनाए जाने से प्रार्थी के आवागमन के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। इसी आधार पर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई। दूसरी ओर, अप्रार्थीगण ने प्रार्थी के आवेदन का विरोध करते हुए न्यायालय में पक्ष रखा कि गेट निर्माण के लिए विधिवत स्वीकृति प्राप्त कर वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। कॉलोनीवासियों की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया जा रहा है और इसके लिए उन्हें पूर्ण अधिकार प्राप्त है। अप्रार्थीगण ने प्रार्थी की अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग को खारिज करने का आग्रह किया। *पट्टे और फोटोग्राफ के अवलोकन के बाद दिया आदेश* दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पत्रावली में उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। जिसमें प्रार्थी की ओर से प्रस्तुत पट्टे के आधार पर न्यायालय के समक्ष प्रथम दृष्टया यह तथ्य आया कि भूखंड संख्या 5, क्षेत्रफल 250 वर्गगज, प्रार्थी के स्वामित्व में है। वहीं, प्रस्तुत फोटोग्राफ से निर्माणाधीन गेट का पिलर प्रथम दृष्टया प्रार्थी के भूखंड के आवागमन को अवरुद्ध करता हुआ प्रतीत हुआ। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने प्रार्थी का प्रथम दृष्टया मामला बनना माना। न्यायालय ने मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अंतरिम अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन स्वीकार कर अप्रार्थीगण को निर्माणाधीन गेट के संबंध में मौके की यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। प्रकरण में अप्रार्थीगण की ओर से जवाब पेश करने के लिए अगली सुनवाई 28 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। अब आगामी सुनवाई में अप्रार्थीगण के जवाब और दोनों पक्षों के तर्कों के बाद मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
*कॉलोनी के गेट निर्माण पर न्यायालय की रोक, यथास्थिति बनाए रखने के आदेश* *पंडित फतेहलाल नगर में प्रवेश द्वार निर्माण को लेकर विवाद, भूखंड मालिक की याचिका पर अंतरिम निषेधाज्ञा स्वीकार, 28 नवंबर को होगी अगली सुनवाई* किशनगढ़। पंडित फतेहलाल नगर कॉलोनी के प्रवेश द्वार के निर्माण को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायालय पहुंच गया है। कॉलोनी के गेट निर्माण से भूखंड के आवागमन का रास्ता प्रभावित होने की शिकायत पर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, किशनगढ़ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। न्यायालय ने प्रार्थी की ओर से प्रस्तुत अंतरिम अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन स्वीकार करते हुए अप्रार्थीगण को निर्माणाधीन गेट के संबंध में मौके पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए पाबंद किया है। प्रकरण के अनुसार, दीवानी विविध प्रकरण संख्या 68/2026 (सुरेन्द्र सिंह बनाम नगर परिषद) में
28 अक्टूबर को सुनवाई हुई। जिसमें प्रार्थी सुरेन्द्र सिंह महणोत की ओर से अधिवक्ता अभिषेक सिंह राजपुरोहित तथा अप्रार्थीगण की ओर से नगर परिषद अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित हुए। इस दौरान प्रार्थी की ओर से न्यायालय में बताया गया कि राजस्व ग्राम किशनगढ़ बी.के खसरा संख्या 952 में विकसित पंडित फतेहलाल नगर कॉलोनी स्थित भूखंड संख्या 5, जिसका क्षेत्रफल 250 वर्गगज है, जो उनके स्वामित्व एवं आधिपत्य में है। नगर परिषद किशनगढ़ की ओर से इस भूखंड का पट्टा भी जारी किया गया है। जिसमें प्रार्थी के अनुसार भूखंड के पूर्व में 60 फीट तथा दक्षिण में 30 फीट चौड़ी सड़क है। आरोप लगाया गया कि भूखंड के सामने पूर्व दिशा में अप्रार्थीगण की ओर से पक्के एवं स्थायी गेट का निर्माण करवाया जा रहा है। जिसमें गेट के
पिलर भूखंड के नजदीक बनाए जाने से प्रार्थी के आवागमन के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। इसी आधार पर निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की गई। दूसरी ओर, अप्रार्थीगण ने प्रार्थी के आवेदन का विरोध करते हुए न्यायालय में पक्ष रखा कि गेट निर्माण के लिए विधिवत स्वीकृति प्राप्त कर वर्क ऑर्डर जारी किया गया है। कॉलोनीवासियों की सुरक्षा के उद्देश्य से प्रवेश द्वार का निर्माण करवाया जा रहा है और इसके लिए उन्हें पूर्ण अधिकार प्राप्त है। अप्रार्थीगण ने प्रार्थी की अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग को खारिज करने का आग्रह किया। *पट्टे और फोटोग्राफ के अवलोकन के बाद दिया आदेश* दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पत्रावली में उपलब्ध दस्तावेजों का अवलोकन किया। जिसमें प्रार्थी की ओर से प्रस्तुत पट्टे के आधार पर न्यायालय
के समक्ष प्रथम दृष्टया यह तथ्य आया कि भूखंड संख्या 5, क्षेत्रफल 250 वर्गगज, प्रार्थी के स्वामित्व में है। वहीं, प्रस्तुत फोटोग्राफ से निर्माणाधीन गेट का पिलर प्रथम दृष्टया प्रार्थी के भूखंड के आवागमन को अवरुद्ध करता हुआ प्रतीत हुआ। इन परिस्थितियों में न्यायालय ने प्रार्थी का प्रथम दृष्टया मामला बनना माना। न्यायालय ने मामले के अंतिम गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना अंतरिम अस्थायी निषेधाज्ञा का आवेदन स्वीकार कर अप्रार्थीगण को निर्माणाधीन गेट के संबंध में मौके की यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। प्रकरण में अप्रार्थीगण की ओर से जवाब पेश करने के लिए अगली सुनवाई 28 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है। अब आगामी सुनवाई में अप्रार्थीगण के जवाब और दोनों पक्षों के तर्कों के बाद मामले में आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
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