हेडलाइन: सिस्टम की 'डिलीवरी' फेल: सीधी में एंबुलेंस का इंतजार, रास्ते में हुआ जन्म – कुसमी स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर फूटा गुस्सा! विंध्य बलराम समाचार पत्र के लिए रुद्र प्रताप सिंह की रिपोर्ट . मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहाँ सरकारें 'जननी सुरक्षा' के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं कुसमी में एक गरीब परिवार एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाता रहा और अंततः सड़क पर ही बच्चे की गूंज सुनाई दी। क्या कुसमी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है? पूरी रिपोर्ट: जब सिस्टम ने फेर लिया मुँह यह मामला सीधी जिले के कुसमी पंचायत भगवार का है। 13 मार्च की सुबह करीब 8 बजे, जब शिवराज रजक अपनी गर्भवती पत्नी सुमित्रा रजक को प्रसव पीड़ा से तड़पता देख 108 एंबुलेंस को फोन करते हैं। इंतजार की वो 40 मिनट: परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस को अपनी स्थिति बताई, गुहार लगाई कि वे गरीब हैं और अस्पताल पहुँचने का कोई साधन नहीं है। लेकिन मदद नहीं पहुँची। रास्ते में प्रसव: 40 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती सुमित्रा को जब सरकारी मदद नहीं मिली, तो परिजनों ने निजी वाहन किराए पर लिया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था—अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में डिलीवरी हो गई। अस्पताल का सन्नाटा: जैसे-तैसे जब पीड़ित परिवार कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचा, तो वहाँ की बदहाली का दूसरा चेहरा सामने आया। आरोप है कि अस्पताल में न डॉक्टर थे और न ही पर्याप्त स्टाफ। जिम्मेदार कौन? इस घटना ने कुसमी की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है: जब 108 एंबुलेंस को समय पर सूचना दी गई, तो वह 40 मिनट तक क्यों नहीं पहुँची? सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के समय स्टाफ क्यों नदारद रहता है? अगर रास्ते में जच्चा या बच्चा के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेता? "हम गरीब हैं साहब, एंबुलेंस का इंतजार करते रहे पर कोई नहीं आया। रास्ते में ही बच्चा हो गया, अस्पताल आए तो यहाँ भी कोई सुनने वाला नहीं था।" – पीड़ित परिजन कुसमी की यह घटना कोई पहली बार नहीं है। समय पर एंबुलेंस न मिलना और अस्पताल में स्टाफ की कमी यहाँ के आम जन के लिए मुसीबत बन चुकी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इन लापरवाहों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर अगली बार किसी और 'सुमित्रा' को इसी तरह सड़क पर सिस्टम की नाकामी का शिकार होना पड़ेगा।
हेडलाइन: सिस्टम की 'डिलीवरी' फेल: सीधी में एंबुलेंस का इंतजार, रास्ते में हुआ जन्म – कुसमी स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर फूटा गुस्सा! विंध्य बलराम समाचार पत्र के लिए रुद्र प्रताप सिंह की रिपोर्ट . मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहाँ सरकारें 'जननी सुरक्षा' के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं कुसमी में एक गरीब परिवार एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाता रहा और अंततः सड़क पर ही बच्चे की गूंज सुनाई दी। क्या कुसमी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है? पूरी रिपोर्ट: जब सिस्टम ने फेर लिया मुँह यह मामला सीधी जिले के कुसमी पंचायत भगवार का है। 13 मार्च की सुबह करीब 8 बजे, जब शिवराज रजक अपनी गर्भवती पत्नी सुमित्रा रजक को प्रसव पीड़ा से तड़पता देख 108 एंबुलेंस को फोन करते हैं। इंतजार की वो 40 मिनट: परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस को अपनी स्थिति बताई, गुहार लगाई कि वे गरीब हैं और अस्पताल पहुँचने का कोई साधन नहीं है। लेकिन मदद नहीं पहुँची। रास्ते में प्रसव: 40 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती सुमित्रा को जब सरकारी मदद नहीं मिली, तो परिजनों ने निजी वाहन किराए पर लिया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था—अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में डिलीवरी हो गई। अस्पताल का सन्नाटा: जैसे-तैसे जब पीड़ित परिवार कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचा, तो वहाँ की बदहाली का दूसरा चेहरा सामने आया। आरोप है कि अस्पताल में न डॉक्टर थे और न ही पर्याप्त स्टाफ। जिम्मेदार कौन? इस घटना ने कुसमी की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है: जब 108 एंबुलेंस को समय पर सूचना दी गई, तो वह 40 मिनट तक क्यों नहीं पहुँची? सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के समय स्टाफ क्यों नदारद रहता है? अगर रास्ते में जच्चा या बच्चा के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेता? "हम गरीब हैं साहब, एंबुलेंस का इंतजार करते रहे पर कोई नहीं आया। रास्ते में ही बच्चा हो गया, अस्पताल आए तो यहाँ भी कोई सुनने वाला नहीं था।" – पीड़ित परिजन कुसमी की यह घटना कोई पहली बार नहीं है। समय पर एंबुलेंस न मिलना और अस्पताल में स्टाफ की कमी यहाँ के आम जन के लिए मुसीबत बन चुकी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इन लापरवाहों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर अगली बार किसी और 'सुमित्रा' को इसी तरह सड़क पर सिस्टम की नाकामी का शिकार होना पड़ेगा।
- मध्य प्रदेश के सीधी जिले से स्वास्थ्य व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहाँ सरकारें 'जननी सुरक्षा' के बड़े-बड़े दावे करती हैं, वहीं कुसमी में एक गरीब परिवार एंबुलेंस के लिए गिड़गिड़ाता रहा और अंततः सड़क पर ही बच्चे की गूंज सुनाई दी। क्या कुसमी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिर्फ सफेद हाथी बनकर रह गया है? पूरी रिपोर्ट: जब सिस्टम ने फेर लिया मुँह यह मामला सीधी जिले के कुसमी पंचायत भगवार का है। 13 मार्च की सुबह करीब 8 बजे, जब शिवराज रजक अपनी गर्भवती पत्नी सुमित्रा रजक को प्रसव पीड़ा से तड़पता देख 108 एंबुलेंस को फोन करते हैं। इंतजार की वो 40 मिनट: परिजनों का कहना है कि उन्होंने एंबुलेंस को अपनी स्थिति बताई, गुहार लगाई कि वे गरीब हैं और अस्पताल पहुँचने का कोई साधन नहीं है। लेकिन मदद नहीं पहुँची। रास्ते में प्रसव: 40 मिनट तक मौत और जिंदगी के बीच जूझती सुमित्रा को जब सरकारी मदद नहीं मिली, तो परिजनों ने निजी वाहन किराए पर लिया। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था—अस्पताल पहुँचने से पहले ही रास्ते में डिलीवरी हो गई। अस्पताल का सन्नाटा: जैसे-तैसे जब पीड़ित परिवार कुसमी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुँचा, तो वहाँ की बदहाली का दूसरा चेहरा सामने आया। आरोप है कि अस्पताल में न डॉक्टर थे और न ही पर्याप्त स्टाफ। जिम्मेदार कौन? इस घटना ने कुसमी की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है: जब 108 एंबुलेंस को समय पर सूचना दी गई, तो वह 40 मिनट तक क्यों नहीं पहुँची? सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ड्यूटी के समय स्टाफ क्यों नदारद रहता है? अगर रास्ते में जच्चा या बच्चा के साथ कोई अनहोनी हो जाती, तो क्या प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेता? "हम गरीब हैं साहब, एंबुलेंस का इंतजार करते रहे पर कोई नहीं आया। रास्ते में ही बच्चा हो गया, अस्पताल आए तो यहाँ भी कोई सुनने वाला नहीं था।" – पीड़ित परिजन कुसमी की यह घटना कोई पहली बार नहीं है। समय पर एंबुलेंस न मिलना और अस्पताल में स्टाफ की कमी यहाँ के आम जन के लिए मुसीबत बन चुकी है। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इन लापरवाहों पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर अगली बार किसी और 'सुमित्रा' को इसी तरह सड़क पर सिस्टम की नाकामी का शिकार होना पड़ेगा।1
- एक दिन पहले पहले ही सीधी कलेक्टर का फ़रमान जारी हुआ और दूसरे दिन उपभोक्ता पहुंचे कलेक्टर बंगले लेकिन प्रशासन का कहना है कि अपवाहो से बचे1
- Post by Ram3
- Majhauli2
- Post by Dinesh Sahu1
- आशीर्वाद अस्पताल को बदनाम करने की साजिश अस्पताल ने प्रबंधन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी राज का किया पर्दाफाश1
- Post by Bablu Namdev1
- Post by Bablu Namdev1