प्रदेश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा लाइनमैन आज भी असुरक्षित माहौल और बदहाल व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं। गाँव से लेकर शहर तक बिजली आपूर्ति बहाल रखने की अहम जिम्मेदारी इन्हीं कर्मियों के कंधों पर होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ जोखिम, अत्यधिक दबाव और उपेक्षा ही मिलती है। ये संविदा लाइनमैन भीषण गर्मी, बारिश, आँधी या रात के अंधेरे जैसी हर विपरीत परिस्थिति में बिजली के फॉल्ट ठीक करने के लिए खंभों पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। कई बार उन्हें करंट लगने से गंभीर हादसों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाते हैं और न ही स्थायी सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते हैं। जानकारी के अनुसार, अधिकांश लाइनमैनों को मात्र 9 से 10 हजार रुपये का मासिक मानदेय मिलता है, और उनकी ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं होता। जब तक क्षेत्र का फॉल्ट ठीक नहीं हो जाता, उन्हें लगातार काम करना पड़ता है, कई बार तो पूरी रात बिजली बहाल करने में बीत जाती है। संविदा कर्मियों का कहना है कि विभागीय संसाधनों की कमी, अधिकारियों का दबाव और जनता की नाराजगी का सबसे अधिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता है, क्योंकि बिजली कटौती होने पर सबसे पहले उन्हें ही लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था काफी हद तक इन संविदा कर्मियों पर निर्भर है; यदि ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम न करें, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इन सबके बावजूद, दुर्घटना होने पर कई मामलों में उन्हें न तो पर्याप्त मुआवजा मिलता है और न ही उनके परिवार को उचित सहायता। क्षेत्र के लोगों और संविदा कर्मियों ने सरकार से यह माँग की है कि उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, एक सम्मानजनक वेतन और स्थायीकरण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। उनका तर्क है कि जो कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान खतरे में डालकर जनता को रोशनी दे रहे हैं, उन्हें भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन फ्रंटलाइन कर्मियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या बिजली व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले इन संविदा लाइनमैनों को वास्तव में वह सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं।
प्रदेश की बिजली व्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले संविदा लाइनमैन आज भी असुरक्षित माहौल और बदहाल व्यवस्था में काम करने को मजबूर हैं। गाँव से लेकर शहर तक बिजली आपूर्ति बहाल रखने की अहम जिम्मेदारी इन्हीं कर्मियों के कंधों पर होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ जोखिम, अत्यधिक दबाव और उपेक्षा ही मिलती है। ये संविदा लाइनमैन भीषण गर्मी, बारिश, आँधी या रात के अंधेरे जैसी हर विपरीत परिस्थिति में बिजली के फॉल्ट ठीक करने के लिए खंभों पर चढ़कर अपनी जान जोखिम में डालते हैं। कई बार उन्हें करंट लगने से गंभीर हादसों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, उन्हें न तो पर्याप्त सुरक्षा उपकरण मुहैया कराए जाते हैं और न ही स्थायी सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते हैं। जानकारी के अनुसार, अधिकांश लाइनमैनों को मात्र 9 से 10 हजार रुपये का
मासिक मानदेय मिलता है, और उनकी ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं होता। जब तक क्षेत्र का फॉल्ट ठीक नहीं हो जाता, उन्हें लगातार काम करना पड़ता है, कई बार तो पूरी रात बिजली बहाल करने में बीत जाती है। संविदा कर्मियों का कहना है कि विभागीय संसाधनों की कमी, अधिकारियों का दबाव और जनता की नाराजगी का सबसे अधिक प्रभाव उन्हीं पर पड़ता है, क्योंकि बिजली कटौती होने पर सबसे पहले उन्हें ही लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि प्रदेश की बिजली व्यवस्था काफी हद तक इन संविदा कर्मियों पर निर्भर है; यदि ये कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालकर काम न करें, तो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इन सबके बावजूद, दुर्घटना होने पर कई मामलों में उन्हें न तो
पर्याप्त मुआवजा मिलता है और न ही उनके परिवार को उचित सहायता। क्षेत्र के लोगों और संविदा कर्मियों ने सरकार से यह माँग की है कि उन्हें आवश्यक सुरक्षा उपकरण, स्वास्थ्य एवं दुर्घटना बीमा, एक सम्मानजनक वेतन और स्थायीकरण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएँ। उनका तर्क है कि जो कर्मचारी प्रतिदिन अपनी जान खतरे में डालकर जनता को रोशनी दे रहे हैं, उन्हें भी सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अधिकार मिलना चाहिए। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते इन फ्रंटलाइन कर्मियों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया, तो इसका सीधा नकारात्मक असर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में, यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या बिजली व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले इन संविदा लाइनमैनों को वास्तव में वह सुरक्षा और सम्मान मिलेगा, जिसके वे हकदार हैं।
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी पर एक बड़ा हमला बोला है, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी के समय की व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि समाजवादी पार्टी के शासनकाल के दौरान लोग बिजली के तारों पर कपड़े सुखाया करते थे, जो उस समय की बिजली व्यवस्था की खराब स्थिति को दर्शाता है। अपने इस हमले में, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून व्यवस्था से लेकर बिजली व्यवस्था तक के मुद्दों पर समाजवादी पार्टी पर निशाना साधा है।1
- अदानी एसीसी सीमेंट ने एक बैठक का आयोजन किया, जिसमें शामिल हुए राजगीरों के चेहरे खुशी से खिल उठे। यह कार्यक्रम आनंद बिल्डिंग मैटेरियल की दुकान पर संपन्न हुआ।1
- गोरखपुर के डीके आशिहारा कराटे ट्रेनिंग सेंटर के खिलाड़ियों ने सिलीगुड़ी में आयोजित समर नेशनल कराटे कैंप में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल जीते हैं, जिससे उन्होंने अपनी संस्था, जनपद और प्रदेश का नाम रोशन किया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि के सम्मान में एक भव्य समारोह का आयोजन किया गया, जहाँ खिलाड़ियों को मेडल और सम्मान देकर उनका उत्साहवर्धन किया गया। इस कार्यक्रम में मानव रक्षक फाउंडेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और विधानसभा 323 के मुख्य अतिथि फौजी दिनेश विश्वकर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने खिलाड़ियों की सफलता की सराहना करते हुए कहा कि आज के बच्चे ही देश का भविष्य हैं और खेल के माध्यम से उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास तथा राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित होती है। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। विशिष्ट अतिथियों में राजा वर्मा, अनिल मौर्य, मनीष शर्मा और ऋषभ दुबे भी शामिल थे, जिन्होंने खिलाड़ियों की कड़ी मेहनत और लगन की प्रशंसा करते हुए इसे अन्य बच्चों के लिए प्रेरणादायक बताया। खिलाड़ियों का यह शानदार नेशनल स्तर का प्रदर्शन डीके आशिहारा कराटे ट्रेनिंग सेंटर के कोच और प्रेसिडेंट धर्मेंद्र कुमार के कुशल नेतृत्व और कठिन प्रशिक्षण का परिणाम था। समारोह के दौरान, जनरल सेक्रेटरी मोहम्मद इरफान (मुन्ना), शितो रि यू कराटे के कोच चंद्र प्रकाश मौर्य, तथा GPWS (NGO) संस्था से डॉ. रजी अहमद सिद्दीकी ने खिलाड़ियों को मेडल पहनाकर सम्मानित किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। सम्मानित किए गए खिलाड़ियों में नेशनल प्लेयर लक्ष्मी, नेशनल प्लेयर अंश शर्मा, दिव्यांशु सिंह, आद्या सिंह, अमीषा साहनी और ब्लैक बेल्ट प्रिया प्रजापति शामिल रहे। कार्यक्रम में मौजूद अभिभावकों और स्थानीय लोगों ने खिलाड़ियों की इस सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि ये बच्चे आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम और भी अधिक रोशन करेंगे। पूरा समारोह तालियों और उत्साह से गूंज उठा, और खिलाड़ियों की इस सफलता ने सभी के चेहरों पर गर्व और खुशी की चमक बिखेर दी।1
- जौनपुर जनपद में ईद-उल-जुहा (बकरीद) त्यौहार को सकुशल संपन्न कराने और शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई तैयारियों के संबंध में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, जौनपुर ने एक बाइट दी है। इस बाइट के माध्यम से जनपद में त्यौहार के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने के प्रयासों की जानकारी साझा की गई है।1
- अंबेडकर नगर जिले के जहांगीरगंज क्षेत्र अंतर्गत रामनगर विकासखंड के करीब स्थित एक राजकीय हाई स्कूल की प्रिंसिपल मैडम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, प्रिंसिपल मैडम स्वयं स्कूल नहीं आती हैं और उन्होंने अपनी जगह एक निजी महिला को काम पर रखा हुआ है। इसके अतिरिक्त, उन पर जबरन धन वसूली करने का भी आरोप है। प्रिंसिपल मैडम के इस चौंकाने वाले कारनामे की शिकायत शासन स्तर पर की गई है, जिसके बाद अब इन आरोपों की जांच शासन के निर्देश पर शुरू हो गई है।1
- यादव का एनकाउंटर हो तब ये Akhilesh के एनकाउंटर बयान पर ओपी राजभर का करार पलटवाr यादव का एनकाउंटर हो तब ये Akhilesh के एनकाउंटर बयान पर ओपी राजभर का करार पलटवाr1
- जौनपुर जिले के शाहगंज में अमर उजाला द्वारा आयोजित की गई पुलिस पाठशाला में छात्राओं ने सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण सीख प्राप्त की।1
- जौनपुर जिले के जलालपुर क्षेत्र स्थित पुरेव बाजार में दोपहर के समय कड़ी धूप और जोरदार गर्मी के कारण पूरी तरह सन्नाटा पसर गया। भीषण गर्मी के चलते बाजार में लोगों की आवाजाही थम गई, जिससे चारों ओर चुप्पी छाई रही।1
- बिल्थरारोड स्थित उभांव थाना क्षेत्र के कुण्डैल ढाला के पास मंगलवार को आपसी कहासुनी को लेकर दो पक्षों में जमकर मारपीट हुई। यह विवाद देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गया, जिसमें दोनों पक्षों के एक-एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। मारपीट के दौरान घायलों के सिर में गंभीर चोटें आईं, जिसके कारण मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोगों की सूचना पर परिजनों ने घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीयर पहुंचाया, जहां उनका उपचार चल रहा है। उभांव थाना क्षेत्र में हुई इस घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।2