करवा चौथ का चांद नजर आते ही सुहागिनों के चेहरों पर छाई खुशी, चंद्र दर्शन कर खोला व्रत बीकानेर। पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को चांद के नजर आते ही महिलाओं की प्रतीक्षा समाप्त हुई और उनके चेहरों पर खुशी छा गई। करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया। इसके बाद अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत का पारण किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सोलह शृंगार कर पूजा की थाली सजाई और विधि-विधान से करवा चौथ की पूजा संपन्न की। इस पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। दिनभर व्रत रखने के बाद चांद के दीदार का बेसब्री से इंतजार किया गया। चंद्र दर्शन के बाद महिलाओं ने अपने पति के हाथों जल ग्रहण कर उपवास खोला। करवा चौथ का यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाए गए इस पर्व ने पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और आत्मीयता का संदेश दिया। करवा चौथ का चांद नजर आते ही सुहागिनों के चेहरों पर छाई खुशी, चंद्र दर्शन कर खोला व्रत बीकानेर। पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने करवा चौथ का व्रत पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ रखा। दिनभर निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को चांद के नजर आते ही महिलाओं की प्रतीक्षा समाप्त हुई और उनके चेहरों पर खुशी छा गई। करवा चौथ के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की और चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य दिया। इसके बाद अपने पति की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए व्रत का पारण किया। कई स्थानों पर महिलाओं ने सोलह शृंगार कर पूजा की थाली सजाई और विधि-विधान से करवा चौथ की पूजा संपन्न की। इस पर्व को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। दिनभर व्रत रखने के बाद चांद के दीदार का बेसब्री से इंतजार किया गया। चंद्र दर्शन के बाद महिलाओं ने अपने पति के हाथों जल ग्रहण कर उपवास खोला। करवा चौथ का यह पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक माना जाता है। पूरे उत्साह और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाए गए इस पर्व ने पारिवारिक रिश्तों में प्रेम और आत्मीयता का संदेश दिया।
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- HTET 2026 BIG UPDATE 🔥 दिसंबर में परीक्षा! अगले हफ्ते तारीखों का ऐलान | HBSE 10वीं-12वीं अपडेट HBSE परीक्षा फॉर्म में U-DISE कोड अनिवार्य, आवेदन में लापरवाही स्कूल मुखियाओं पर पड़ सकती है भारी हरियाणा के विद्यार्थियों, HTET अभ्यर्थियों और स्कूलों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन शंकर लाल धूपड़ के अनुसार, HTET-2026 का आयोजन इसी साल दिसंबर में किए जाने की बात कही गई है। परीक्षा की तारीखों का ऐलान अगले एक सप्ताह में होने की जानकारी दी गई है।1
- #करवा चौथ पै ल्याया ताऊ ताई खातर दमदार गिफ्ट #इसा गिफ्ट कोए नहीं ल्याया होगा #ACE चेतक DI65 ट्रेक्टर1
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- करवाचौथ पर ‘छलनी के पार की सोच’ लेकर चौराहे पर उतरे सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल पत्नी के अरमानों, सपनों और आत्मनिर्भरता को सम्मान देने की अपील, नई पीढ़ी से सोच बदलने का आह्वान चरखी दादरी। करवाचौथ पर पत्नी अपने पति की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए व्रत रखती है और छलनी से चाँद के साथ पति का चेहरा निहारकर अपना व्रत खोलती है। इसी परंपरा को एक सकारात्मक सामाजिक संदेश से जोड़ते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ‘छलनी के पार की सोच’ लेकर चौराहे पर उतरे। हाथ में जागरूकता की तख्ती लेकर उन्होंने समाज के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल रखा— “जिस पति की लंबी उम्र के लिए पत्नी छलनी उठाती है, क्या वह पति कभी अपनी पत्नी के सपनों और अरमानों की दुनिया में भी झाँकता है?” संजय रामफल ने कहा कि करवाचौथ केवल पति की लंबी उम्र की कामना का पर्व नहीं, बल्कि पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास, समर्पण और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी को समझने का अवसर भी है। जिस पत्नी की खुशहाली के लिए पति उसके साथ जीवन बिताने का संकल्प लेता है, उसके सपनों, इच्छाओं और भावनाओं को समझना भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने विशेष रूप से नई पीढ़ी से अपील की कि बदलते समय के साथ रिश्तों में सोच भी सकारात्मक और व्यापक होनी चाहिए। आज की पत्नी केवल परिवार की जिम्मेदारियाँ निभाने वाली महिला ही नहीं, बल्कि अपने सपने देखने, उच्च शिक्षा प्राप्त करने, अपनी प्रतिभा निखारने, करियर बनाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की आकांक्षा रखने वाली एक स्वतंत्र व्यक्तित्व भी है। पति और परिवार का दायित्व है कि वे उसकी इच्छाओं को समझें, उसकी पढ़ाई में सहयोग करें, उसके हुनर को प्रोत्साहित करें और उसे अपने जीवन के फैसले लेने का उचित अवसर दें। संजय रामफल ने कहा कि पत्नी के अरमानों को समझना, उसकी शिक्षा को महत्व देना और उसे आत्मनिर्भर बनाने में सहयोग करना भी सच्चे प्रेम की पहचान है। यदि पत्नी डॉक्टर, शिक्षक, अधिकारी, कलाकार, उद्यमी या किसी अन्य क्षेत्र में अपनी पहचान बनाना चाहती है, तो उसके सपनों को परिवार की जिम्मेदारियों के साथ संतुलित करने में पति को उसका सहयोगी बनना चाहिए। रिश्ते में एक-दूसरे पर अधिकार जताने से अधिक महत्वपूर्ण एक-दूसरे को आगे बढ़ने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और सम्मानित महिला अपने परिवार के साथ-साथ समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है। नई पीढ़ी को ऐसी सोच अपनानी चाहिए, जिसमें पत्नी की सफलता को परिवार की सफलता समझा जाए और उसके सपनों को बोझ नहीं, बल्कि परिवार की साझा उम्मीद माना जाए। संजय रामफल की इस पहल का संदेश है— करवाचौथ पर पत्नी छलनी से चाँद और अपने पति का चेहरा तो देखती है, लेकिन पति भी एक बार पत्नी की नजर से उसकी दुनिया देखने का प्रयास करे। उसके सपनों को समझे, उसके अरमानों को पंख दे और उसे अपनी अलग पहचान बनाने में सहयोग करे। क्योंकि सच्चा प्रेम केवल लंबी उम्र की कामना नहीं, बल्कि जीवनसाथी को सम्मान, समान अवसर और अपने सपने पूरे करने की आजादी देना भी है। फोटो कैप्शन हाथ में तख्ती पर लिखे हुए मैसेज से जागरूकता की अलग जागते हुए सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल2
- रोहतक में वीडियो कॉल पर चाँद देख खोला महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत: ओल्ड हाउसिंग ब रोहतक में वीडियो कॉल पर चाँद देख खोला महिलाओं ने करवाचौथ का व्रत: ओल्ड हाउसिंग बोर्ड निवासी सतीश भारद्वाज ने पत्नी सुनीता को हमीरपुर, हिमाचल से भाई द्वारा कराये दर्शन1
- यह लड़ाई जनता के दरबार में है, क्योंकि लोकतंत्र जनता का है और वोट का अधिकार देश के हर नागरिक का है। हमारी मांग शुरू से स्पष्ट रही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को स्वयं इस्तीफा देना चाहिए। चुनाव आयोग के भीतर से उठे सवालों के आधार पर उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए था। हमने यह मांग सार्वजनिक मंचों पर उठाई, सड़कों पर उठाई और सुप्रीम कोर्ट तक गए। लेकिन उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। ऐसे में सरकार को स्वयं उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव लाना चाहिए था। लेकिन भाजपा सरकार ऐसा क्यों करेगी, जब सब कुछ उसी के इशारे पर हो रहा हैइसलिए हम देश की जनता के सामने यह रखना चाहते हैं कि महाभियोग का क्या अर्थ है, इसकी आवश्यकता क्यों है और चुनाव आयोग की जवाबदेही सुनिश्चित करना क्यों जरूरी है।1
- *अब देखते हैं विजय शंकर गहलोत उर्फ़ नूरा डॉन के इस सराहनीय प्रयास के लिए कौन कौन इनकी प्रशंसा करता है....* *अब देखते हैं विजय शंकर गहलोत उर्फ़ नूरा डॉन के इस सराहनीय प्रयास के लिए कौन कौन इनकी प्रशंसा करता है....*1